Congress Review Committee Punjab बनाने की तैयारी तेज हो गई है। शुक्रवार को चरनजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा आवास पर हुई विशाल बैठक के बाद कांग्रेस हाईकमान में खलबली मच गई है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब की स्थिति की गंभीरता को समझते हुए एक रिव्यू कमेटी बनाने का फैसला किया है। देखा जाए तो यह कमेटी हाल ही में की गई संगठनात्मक नियुक्तियों पर दोबारा विचार करेगी। समझने वाली बात यह है कि आज की बैठक में जो तापमान देखा गया, उससे हाईकमान यह समझ गया है कि बिना बदलाव के काम नहीं चलेगा।
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हाईकमान में सुबह से उथल-पुथल
कांग्रेस हाईकमान में पंजाब के मसले को लेकर सुबह से ही गहन विचार-विमर्श चल रहा है। दरअसल कल से ही इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। वजह यह रही कि डेढ़-दो महीने की इतनी लंबी एक्सरसाइज के बाद भी जो लिस्ट जारी की गई, उसमें ऐसा क्या था कि पार्टी के भीतर इतना बड़ा विद्रोह देखने को मिला?
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हाईकमान भी परेशान है। एक तरफ केसी वेणुगोपाल का दबाव है, दूसरी तरफ पंजाब के नेता बगावत पर उतारू हैं। अब स्थिति यह बन गई है कि कुछ तो करना ही पड़ेगा।”
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चन्नी को 48 घंटे में दिल्ली बुलाया जाएगा
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, चरनजीत सिंह चन्नी को अगले एक-दो दिन में दिल्ली बुलाया जा सकता है। हाईकमान उनसे विस्तार से बात करना चाहता है कि वास्तव में पंजाब में स्थिति क्या है और नेताओं की क्या मांग है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि चन्नी को कल से लगातार हाईकमान से फोन आ रहे हैं। कल शाम ही चन्नी ने करीबियों से कहा था कि वे सिर्फ अपने नजदीकी लोगों को बुला रहे हैं और मौजूदा हालात में आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। लेकिन जो हुआ वह एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन बन गया।
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रिव्यू कमेटी की योजना पर काम शुरू
हाईकमान ने पहले ही रिव्यू कमेटी बनाने की योजना तैयार कर ली है और कल तक इसका ऐलान कर दिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि यह कमेटी केवल औपचारिकता के लिए होगी या वाकई कोई ठोस कदम उठाएगी, यह देखना बाकी है।
एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “कांग्रेस में कमेटियां बनाना एक पुरानी परंपरा है। असली सवाल यह है कि इस बार हाईकमान वाकई में कुछ बदलाव करेगी या फिर सिर्फ समय खरीदने की कोशिश है।”
नई नियुक्तियों में क्या थी खामी?
आज के नेताओं की मांग यह है कि नई नियुक्तियों पर पुनर्विचार किया जाए। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के प्रदेश अध्यक्ष बने रहने पर ज्यादातर नेताओं को आपत्ति है। यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर सिंह ढिल्लों ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा पुनर्गठन के दौरान वर्कर्स की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया है।
त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने मीडिया से कहा, “हाईकमान ने जो लिस्ट जारी की, उससे लोगों में निराशा है। लोगों की आशा के मुताबिक लिस्ट नहीं आई, इसलिए हम चन्नी जी से मिले थे।”
अगर गौर करें तो शिकायतें मुख्य रूप से ये हैं:
कैंपेन कमेटी: इसमें कुछ ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनका जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं है।
मैनेजमेंट कमेटी: पंजाब की भौगोलिक परिस्थितियों को नजरअंदाज किया गया। माजा, मालवा, दोआबा के संतुलन को ध्यान में नहीं रखा गया।
मेनिफेस्टो कमेटी: इसमें अनुभवी नेताओं को नहीं लिया गया, जबकि कुछ नए चेहरों को तरजीह दी गई।
AAP को फायदा देने की साजिश के आरोप
कई कांग्रेस नेताओं ने गंभीर आरोप लगाया है कि जिस तरह की नियुक्तियां की गई हैं, उससे आम आदमी पार्टी (AAP) को फायदा होगा। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “क्या वाकई हम AAP को जीत की थाली में परोसकर दे रहे हैं? कांग्रेस पार्टी के वर्कर्स लगातार इस बात की चर्चा कर रहे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने जल्द ही अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में AAP का रास्ता आसान हो जाएगा। फिलहाल AAP सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष है, लेकिन कांग्रेस की आंतरिक कलह इस असंतोष को भुनाने से रोक रही है।
ग्रुपिज्म: चन्नी ग्रुप बनाम वड़िंग ग्रुप
पंजाब कांग्रेस में अब साफ तौर पर दो गुट नजर आ रहे हैं – चन्नी ग्रुप और वड़िंग ग्रुप। हालांकि पॉलिटिक्स में ग्रुप होना आम बात है, लेकिन यहां समस्या यह है कि दोनों गुटों के बीच कोई तालमेल नहीं है।
आज की बैठक में शामिल प्रमुख नेताओं में राणा गुरजीत सिंह, त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशू, गुरकीरत सिंह कोटली, मोहम्मद सादिक, ओ पी सोनी और गुरप्रीत सिंह कांगड़ शामिल थे।
दिलचस्प बात यह रही कि कुछ बड़े नेताओं ने इस बैठक से दूरी बनाई:
प्रगट सिंgh: तीन बार के विधायक प्रगट सिंह बहुत ही गुंझल्दार राजनीतिज्ञ हैं। वे सेफ प्ले कर रहे हैं और किसी भी गुट में खुलकर शामिल नहीं होना चाहते।
सुखजिंदर रंधावा: वे दिल्ली गए हुए थे क्योंकि उन्होंने अमित शाह से मिलने का समय लिया था। (यह बयान ट्रांसक्रिप्ट में है)
प्रताप सिंह बाजवा: उन्होंने अपनी कुर्सी (विधानसभा में नेता विपक्ष) बचाने में सफलता पाई है, इसलिए वे इस विवाद से दूर रहना चाह रहे हैं।
राजा वड़िंग के करीबी भी पहुंचे चन्नी के पास
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि राजा वड़िंग के अपने करीबी लोग भी आज की बैठक में पहुंचे। सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह का वहां पहुंचना सबसे चौंकाने वाला रहा, क्योंकि वे कभी अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के करीबी रहे हैं।
इससे साफ होता है कि राजा वड़िंग का समर्थन आधार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। एक नेता ने व्यंग्य में कहा, “राजा जी के साथ अब सिर्फ उनके सज्जे-खब्बे (बगल के लोग) ही रह गए हैं। बाकी सब छोड़ गए।”
पॉपुलैरिटी फैक्टर: चन्नी आगे, वड़िंग पीछे
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि लोकप्रियता में चरनजीत सिंgh चन्नी राजा वड़िंग से कहीं आगे हैं। पिछले कई दिनों से यह चर्चा हो रही थी और अब यह बैठक इसका सबूत बन गई है।
एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “चन्नी के पास सिम्पैथी फैक्टर है, लोगों का इमोशनल कनेक्शन है। उनकी सादगी और दलित चेहरा होना पंजाब की जनता को आकर्षित करता है। राजा वड़िंग के पास यह तत्व नहीं है।”
हाईकमान की दुविधा: किसको रखें, किसको हटाएं?
कांग्रेस हाईकमान अब बड़ी दुविधा में है। एक तरफ उन्होंने राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, दूसरी तरफ पार्टी के भीतर उनके खिलाफ इतना बड़ा विरोध है। अब सवाल यह है कि हाईकमान क्या करेगी?
विकल्प मुख्य रूप से तीन हैं:
पूर्ण बदलाव: राजा वड़िंग को हटाकर चन्नी या किसी और को प्रदेश अध्यक्ष बनाना। लेकिन इससे हाईकमान की साख पर सवाल उठेगा।
आंशिक बदलाव: वड़िंग को रखते हुए कुछ अन्य पदों पर बदलाव करना और चन्नी को कोई अहम जिम्मेदारी देना। लेकिन यह फॉर्मूला नाराज नेताओं को संतुष्ट नहीं कर सकता।
समय खरीदना: रिव्यू कमेटी बनाकर मामले को लटकाए रखना। लेकिन इससे विद्रोह और भड़क सकता है।
मनी पावर और मसल पावर के आरोप
कुछ नेताओं ने गोपनीय रूप से यह भी कहा है कि लीडरशिप में बदलाव न होने के पीछे मनी पावर की भूमिका हो सकती है। हालांकि कांग्रेस में अटैचियों वाली राजनीति कोई नई बात नहीं है।
विपक्ष भी लगातार यह कहता रहा है कि कुछ बड़ा दबाव काम कर रहा है – या तो मसल पावर है, मनी पावर है या फिर सेंटर (केंद्र सरकार) का प्रेशर है। हालांकि इन आरोपों की कोई पुष्टि नहीं है।
2027 चुनाव की तैयारी या सत्ता की लड़ाई?
एक बड़ा सवाल यह भी है कि यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर हो रहा है या फिर यह सिर्फ सत्ता की आंतरिक लड़ाई है? नेताओं का कहना है कि उनकी मुख्य चिंता अगली बार पंजाब में कांग्रेस सरकार बनाना है।
त्रिप्त बाजवा ने कहा था, “हमारी खाहिश यह है कि अगली बार पंजाब में कांग्रेस सरकार बने। इसलिए हाईकमान को थोड़ा सबको मिलाकर रीकंसीडर करना चाहिए।”
लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भी बड़ी भूमिका है। कई नेता खुद को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में देख रहे हैं।
ऑब्जर्वर कमेटी की रिपोर्ट में विरोधाभास
पहले अजय माकन की अगवाई में एक ऑब्जर्वर कमेटी बनाई गई थी जो पंजाब के तमाम नेताओं से मिली थी। तीन दिन तक दिल्ली में बैठकें हुईं लेकिन फिर भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला। यह अपने आप में हैरान करने वाली बात है।
एक नेता ने कहा, “पहले एक इंचार्ज लगाया, वो काम नहीं कर सका। फिर ऑब्जर्वर की टीम बनाई, फिर भी नतीजा नहीं निकला। तो सवाल उठता है कि असली दबाव क्या है?”
चन्नी की चुप्पी का राज
आज की मीटिंग से पहले और बाद में चरनजीत सिंgh चन्नी ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। वे मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं और न ही कोई बयान दे रहे हैं। यह रणनीतिक चुप्पी है या कुछ और, यह समझना मुश्किल है।
एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, “चन्नी जानते हैं कि अभी बोलने का समय नहीं है। वे हाईकमान को समय दे रहे हैं कि वह खुद निर्णय ले। अगर एक हफ्ते में कुछ नहीं हुआ तो फिर चन्नी खुलकर सामने आ सकते हैं।”
आने वाले दिन होंगे निर्णायक
अब अगले एक हफ्ते के दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। हाईकमान की रिव्यू कमेटी क्या फैसला लेती है, चन्नी की दिल्ली में क्या बातचीत होती है और राजा वड़िंग क्या कदम उठाते हैं – यह सब देखना बाकी है।
पंजाब कांग्रेस के लिए यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। या तो पार्टी एकजुट होकर 2027 की तैयारी करेगी या फिर आंतरिक कलह में उलझी रहेगी और AAP को फायदा पहुंचाएगी।
कुल मिलाकर, एक बात तो साफ है कि पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव अब अपरिहार्य है। सवाल बस यह है कि वह बदलाव कब और कैसे होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- कांग्रेस हाईकमान रिव्यू कमेटी बनाने की तैयारी में, कल तक ऐलान संभव
- चन्नी को 48 घंटे में दिल्ली बुलाया जा सकता है
- नई नियुक्तियों में कैंपेन, मैनेजमेंट और मेनिफेस्टो कमेटी पर आपत्ति
- AAP को फायदा पहुंचाने की साजिश के गंभीर आरोप
- चन्नी ग्रुप बनाम वड़िंग ग्रुप की साफ विभाजन रेखा
- पॉपुलैरिटी फैक्टर में चन्नी आगे, वड़िंग पीछे
- अगला एक हफ्ता निर्णायक साबित होगा










