Southwest Monsoon 2026 ने आखिरकार पूरे उत्तर भारत में दस्तक दे ही दी। India Meteorological Department (IMD) ने 2 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे जारी अपनी ताजा प्रेस रिलीज में बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात, उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, पूरी दिल्ली, मध्य प्रदेश के अधिकांश भागों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है। देखा जाए तो यह किसानों और आम लोगों के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन साथ ही कई राज्यों में अगले 5 दिन भारी से अत्यधिक भारी बारिश का खतरा भी मंडरा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि Bay of Bengal और ओडिशा–पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में एक Low Pressure Area बन गया है, जिसके चलते अगले 2-3 दिनों में यह और गहरा हो सकता है। इसका सीधा मतलब है कि देश के मध्य हिस्सों में मानसून अगले 5 दिनों तक जोरदार रूप से सक्रिय रहेगा।
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मुंबई समेत कोंकण में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, 24 घंटे में 21 सेमी से ज्यादा
पिछले 24 घंटों में यानी 1 जुलाई सुबह 8:30 बजे से 2 जुलाई सुबह 8:30 बजे के बीच कोंकण क्षेत्र में अत्यधिक भारी बारिश (≥21 सेमी) दर्ज की गई है। मुंबई के जुहू एयरपोर्ट और सांताक्रूज में 21 सेमी और 20 सेमी बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि रायगढ़ जिले के माथेरान में भी 21 सेमी बारिश हुई। यह देखकर हैरानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि मानसून का यह पैटर्न हर साल पश्चिमी तट पर शुरुआती दिनों में देखा जाता है।
इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा में 12-20 सेमी की बेहद भारी बारिश (Very Heavy Rainfall) दर्ज की गई है। समझने वाली बात यह है कि जब मानसून एक साथ कई राज्यों में सक्रिय होता है तो बाढ़ और जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।
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दिल्ली में तापमान गिरा, तेज हवाओं के साथ बारिश जारी
राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 6-7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान में 4-5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान 33-35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21-24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि न्यूनतम तापमान सामान्य से 5 डिग्री से भी ज्यादा नीचे रहा।
2 जुलाई को दिल्ली में आम तौर पर बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा से लेकर 60 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है। अगले 3-4 दिनों तक दिल्ली-NCR में यही मौसम बना रहेगा।
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अगले 5 दिन किन राज्यों में कितनी बारिश?
India Meteorological Department ने अपनी चेतावनी में साफ किया है कि निम्नलिखित क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) की संभावना है:
- दक्षिण गुजरात क्षेत्र और कोंकण: 2-5 जुलाई
- सौराष्ट्र और कच्छ: 2-4 जुलाई
- पश्चिम मध्य प्रदेश: 3-4 जुलाई
- ओडिशा: 3-4 जुलाई
- मध्य महाराष्ट्र: 3-5 जुलाई
इसका मतलब है कि इन इलाकों में 204.4 मिमी से अधिक बारिश हो सकती है, जो कि बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है। स्थानीय बाढ़, सड़कों पर जलभराव, कच्चे मकानों को नुकसान, बिजली और संचार व्यवस्था में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की स्थिति
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 2-3 जुलाई और फिर 5-8 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होने की संभावना है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 2 जुलाई और फिर 5-8 जुलाई के बीच अच्छी बारिश रहेगी।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में 2 जुलाई और 5-7 जुलाई के दौरान, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5-7 जुलाई के बीच बारिश होगी। पूर्वी राजस्थान में 4-8 जुलाई तक बारिश जारी रहेगी।
अगर गौर करें तो पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 9 सेमी, हिमाचल प्रदेश के पौंटा साहिब में 10 सेमी, उत्तराखंड के नरेंद्रनगर में 11 सेमी, पंजाब के लुधियाना और फरीदकोट में 9-9 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मध्य भारत में मानसून का जोर
छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश में 2-8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। विदर्भ में 2-5 जुलाई और फिर 7-8 जुलाई को बारिश रहेगी।
पिछले 24 घंटों में पूर्वी मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी में 17 सेमी, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 15 सेमी और मध्य महाराष्ट्र के पुणे जिले के लोनावला में 12 सेमी बारिश हुई।
पूर्वी भारत में बारिश का रुख
अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 2-8 जुलाई तक व्यापक बारिश रहेगी। झारखंड में 2 जुलाई और 4-8 जुलाई के दौरान बारिश होगी, जबकि बिहार में 5-6 जुलाई को बारिश की संभावना है।
ओडिशा के अंभाभोना में पिछले 24 घंटों में 18 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। 3-4 जुलाई को ओडिशा में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
पश्चिम भारत में भारी बारिश का अलर्ट
गुजरात क्षेत्र और कोंकण-गोवा में 2-8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ में 2-6 जुलाई तक बारिश रहेगी। मराठवाड़ा में 2-3 जुलाई को बारिश होगी।
चिंता का विषय यह है कि गुजरात क्षेत्र और कोंकण में 2-5 जुलाई के दौरान, सौराष्ट्र-कच्छ में 2-4 जुलाई और मध्य महाराष्ट्र में 3-5 जुलाई के बीच कई जगहों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
पिछले 24 घंटों में सौराष्ट्र-कच्छ के अमरेली जिले के सावरकुंडला में 8 सेमी बारिश दर्ज की गई।
दक्षिण भारत में मानसून की स्थिति
तटीय कर्नाटक, केरल-माहे और लक्षद्वीप में 2-8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 2-3 जुलाई और 6-8 जुलाई को बारिश रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश-यानम में 3-4 जुलाई को बारिश होगी, जबकि तेलंगाना में 2 जुलाई को बारिश होगी।
केरल के कासरगोड जिले के कुडुलु में 12 सेमी, मुलियार और मडिक्कई में 10-10 सेमी, तटीय कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के मानकी और करवाड़ में 11-11 सेमी, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के चिक्कमगलूर जिले के कोट्टीगेहार में 11 सेमी और तेलंगाना के कुमारम भीम जिले के सिरपुर में 11 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
तेज हवाओं और गरज-चमक की चेतावनी
पिछले 24 घंटों में कई जगहों पर 40 किमी प्रति घंटा से ज्यादा रफ्तार की तेज हवाएं चलीं। मध्य महाराष्ट्र के धुले जिले के डोंडाइचा में 124 किमी प्रति घंटा, विदर्भ के वर्धा में 107 किमी प्रति घंटा, असम-मेघालय के मानस में 68 किमी प्रति घंटा और तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले के कोविलपट्टी में 59 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं।
यह हैरान करने वाली बात है कि मानसून के साथ इतनी तेज हवाएं आईं कि पेड़ों की शाखाएं टूट गईं, कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली-संचार की लाइनें भी प्रभावित हुईं।
मछुआरों के लिए चेतावनी
India Meteorological Department ने मछुआरों को सलाह दी है कि वे निम्नलिखित क्षेत्रों में 7 जुलाई तक समुद्र में न जाएं:
अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक तट और सटे पूर्व-मध्य व उत्तर-पूर्वी अरब सागर, सोमालिया और ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम और मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्से।
बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र, श्रीलंका तट और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तरी आंध्र प्रदेश तट, उत्तर, मध्य और दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर।
समुद्र की स्थिति खराब रहने और ऊंची लहरों के कारण मछुआरों की जान को खतरा हो सकता है।
किसानों के लिए कृषि सलाह
भारी बारिश के मद्देनजर IMD ने किसानों को निम्नलिखित सलाह दी है:
- गुजरात में धान नर्सरी, गन्ना, भिंडी, सब्जियों और सपोटा बागानों से अतिरिक्त पानी निकालें।
- कोंकण (तटीय महाराष्ट्र) में धान, रागी, सब्जियों की नर्सरी की बुवाई, मूंगफली और कद्दूवर्गीय सब्जियों की बुवाई और आम, नारियल, काजू, सुपारी के नए बागान लगाना स्थगित करें। धान और रागी की नर्सरी और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें।
- मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में धान और रागी की नर्सरी से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।
- ओडिशा में भारी बारिश के दौरान मूंग की बुवाई से बचें। धान, मक्का, बाजरा, दलहनी फसलों और फलों के बागानों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।
- मध्य प्रदेश में पकी हुई मूंग, सब्जियां और फल तोड़ लें और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें।
- बिहार में ग्रीष्मकालीन मूंग की पकी फलियां तोड़ लें और उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें। धान नर्सरी और मक्का के खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें।
- हिमाचल प्रदेश में मक्का, रागी और सब्जियों के खेतों में जलभराव रोकने के लिए उचित जल निकासी चैनल बनाए रखें।
- उत्तराखंड में धान, मक्का, टमाटर, मिर्च, झंगोरा और रागी के खेतों में अतिरिक्त पानी निकालने के लिए उचित खेत जल निकासी सुनिश्चित करें।
- उत्तर प्रदेश में मक्का, मूंग और उड़द की पकी फसल की कटाई और गहाई पूरी करें और उपज को सूखी जगह पर रखें।
- छत्तीसगढ़ में धान और सब्जियों की नर्सरी में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
- विदर्भ में सब्जी नर्सरी और फलों के बागानों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
- केरल में केला, नारियल, इलायची, अदरक, काली मिर्च और सब्जियों से अतिरिक्त पानी निकालें। केले के पौधों को सहारा दें और सब्जी फसलों के पंडालों को मजबूत करें। भारी बारिश के दौरान धान की रोपाई से बचें।
- कर्नाटक में धान की क्यारियों, धान के खेतों, सुपारी और नारियल के खेतों और फलों के बागानों में जल जमाव रोकने के लिए उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
पशुधन और मत्स्य पालन के लिए सलाह
- भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार दें।
- चारा और फ़ीड को खराब होने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखें।
- उच्च तापमान और लू की स्थिति वाले क्षेत्रों में जानवरों को साफ, ठंडा पीने का पानी दें और गर्मी के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए मुर्गी पालन शेड की छतों को घास से ढकें।
- मछलियों को ओवरफ्लो की स्थिति में भागने से रोकने के लिए तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ एक आउटलेट का निर्माण करें ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके।
मानसून की उत्तरी सीमा कहां पहुंची?
2 जुलाई 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा 22°N/60°E, 22°N/65°E, पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, नीमच, टोंक, भिवानी, भटिंडा और 32.5°N/70°E से होकर गुजर रही है।
उम्मीद की किरण यह है कि अगले 2-3 दिनों में मानसून उत्तरी अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, मध्य प्रदेश, हरियाणा-पंजाब के बचे हुए हिस्सों और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ेगा।
लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
IMD ने जनता को निम्नलिखित सुरक्षा सलाह दी है:
- मौसम अपडेट पर करीबी नजर रखें और बिगड़ती परिस्थितियों से सावधान रहें।
- घर के अंदर रहें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
- खिड़कियां और दरवाजे सुरक्षित रूप से बंद रखें।
- सुरक्षित स्थानों में शरण लें और खुले क्षेत्रों से बचें।
- पेड़ों के नीचे शरण न लें।
- बिजली गिरने की गतिविधि के दौरान कंक्रीट के फर्श पर न लेटें या कंक्रीट की दीवारों के खिलाफ न झुकें।
- विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करें।
- तुरंत जल निकायों से बाहर निकल जाएं।
- बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं से दूर रहें।
- ट्रैफिक की भीड़ के लिए अपने रूट की जांच करें।
- किसी भी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें।
- ऐसे क्षेत्रों में जाने से बचें जहां अक्सर जल जमाव की समस्या होती है।
- कमजोर संरचनाओं में रहने से बचें।
क्या कहते हैं मौसम के पैटर्न?
इस बार का मानसून सामान्य से थोड़ा धीमी गति से आगे बढ़ा था, लेकिन अब यह पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। Bay of Bengal में बने Low Pressure Area के कारण अगले कुछ दिन मध्य भारत में बारिश का जोर रहेगा। मौसमी ट्रफ अब उत्तर-पश्चिम राजस्थान से Bay of Bengal में बने Low Pressure क्षेत्र के केंद्र तक फैली हुई है, जो दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़ से होकर गुजरती है।
एक offshore trough दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक समुद्र तल पर बनी हुई है। Western Disturbance मध्य क्षोभमंडल में एक गर्त के रूप में समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर लगभग 62°E देशांतर के साथ 32°N अक्षांश के उत्तर में स्थित है।
एक shear zone निचले और ऊपरी क्षोभमंडलीय स्तरों के बीच लगभग 21°N अक्षांश के साथ चल रहा है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से अगले 5-7 दिन देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश बनी रहेगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- Southwest Monsoon 2026 ने 2 जुलाई को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान के हिस्सों में प्रवेश किया
- Bay of Bengal में Low Pressure Area बना, जो अगले 2-3 दिनों में और गहरा हो सकता है
- गुजरात, कोंकण, ओडिशा और मध्य प्रदेश में 3-5 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश (204 मिमी से ज्यादा) की चेतावनी
- मुंबई समेत कोंकण में पिछले 24 घंटे में 20-21 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई
- दिल्ली में तापमान में 4-7 डिग्री की गिरावट, अगले 3-4 दिन बारिश और तेज हवाओं का अनुमान
- मछुआरों को 7 जुलाई तक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह
- किसानों को भारी बारिश वाले क्षेत्रों में खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और फसलों को सुरक्षित रखने की सलाह
- मध्य महाराष्ट्र के डोंडाइचा में 124 किमी/घंटा और विदर्भ के वर्धा में 107 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं
- अगले 2-3 दिनों में मानसून गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा-पंजाब के बचे हुए हिस्सों और राजस्थान में आगे बढ़ेगा
- जनता को अनावश्यक यात्रा से बचने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह












