VB-G RAM-G 2025 : बिहार में ग्रामीण रोजगार को मजबूत बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। 1 जुलाई से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन यानी VB-G RAM-G 2025 लागू किया जाएगा। इस योजना का मकसद गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और विकास कार्यों को गति देना है।
नई व्यवस्था के तहत हर वित्तीय वर्ष में ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिनों तक रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि इससे ग्रामीण परिवारों को पहले से ज्यादा दिन काम मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
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किन कामों को मिलेगी प्राथमिकता
जिला स्तर पर दी गई जानकारी के मुताबिक इस योजना में उन कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक गांव के लिए उपयोगी साबित हों।
इसमें जल संरक्षण, जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत ढांचों का विकास, आजीविका बढ़ाने वाले काम, जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने वाली परियोजनाएं और रोजगार सृजन से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
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पंचायतों को बनाया जाएगा और सक्षम
योजना का एक अहम मकसद पंचायतों को और मजबूत बनाना भी है। इसके तहत पंचायतों को चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) से जुड़े प्रयासों में योगदान के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
खेती के मौसम का रखा जाएगा ध्यान
समझने वाली बात यह है कि यह योजना पूरे साल लागू रहेगी, लेकिन खेती के जरूरी मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हर साल 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करेगी। इस दौरान योजना के तहत काम नहीं कराए जाएंगे, ताकि बुवाई और कटाई जैसे कृषि कार्य प्रभावित न हों।
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खर्च कौन उठाएगा : केंद्र और राज्य का हिस्सा
अब बात पैसों की। इस योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी।
| हिस्सेदार | खर्च का हिस्सा |
|---|---|
| केंद्र सरकार | 60% |
| राज्य सरकार | 40% |
पारदर्शिता के लिए आधुनिक तकनीक
योजना को पारदर्शी बनाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा। श्रमिकों की हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लागू होगा, जिससे फर्जी हाजिरी और गलत भुगतान पर रोक लगेगी।
इसके साथ ही तकनीक आधारित योजना निर्माण और डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी होगी, ताकि विकास कार्य असली जरूरत के हिसाब से और सही जगह पर हों। हर सप्ताह काम और भुगतान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, साथ ही मजबूत सोशल ऑडिट भी लागू रहेगा।
बेरोजगारी भत्ते का अहम प्रावधान
राहत की बात यह है कि अगर कोई श्रमिक रोजगार की मांग करता है और 15 दिनों के भीतर उसे काम नहीं मिलता, तो संबंधित व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा।
मजदूरी को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र सरकार नई मजदूरी दर तय नहीं करती, तब तक श्रमिकों को मनरेगा के तहत निर्धारित मजदूरी का ही भुगतान किया जाएगा।
आम आदमी पर असर
सीधा फायदा गांव के मजदूर परिवारों को होगा। अब तक जहां साल में 100 दिन काम मिलता था, वहां 125 दिन की गारंटी उम्मीद की किरण है। ज्यादा काम, ज्यादा दिहाड़ी और साप्ताहिक भुगतान : यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को थोड़ी मजबूती दे सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1 जुलाई से बिहार में VB-G RAM-G 2025 योजना लागू।
- हर वित्तीय वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी का लक्ष्य।
- खर्च में केंद्र 60% और राज्य 40% हिस्सा उठाएगा।
- 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अनिवार्य।













