Telegram Ban India: NEET परीक्षा में पेपर लीक मामले के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। टेलीग्राम पर 21 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन इस फैसले ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल दुरोव ने आरोप लगाया है कि इस बैन के पीछे रिलायंस और व्हाट्सएप की लॉबिंग हो सकती है। मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है।
🔍 यह भी पढ़ें- Exam Scam India 2026: NEET से UPSC तक 148 घोटाले, सिर्फ 1 को सजा
NEET परीक्षा और पेपर लीक का मामला
देखा जाए तो यह फैसला अचानक नहीं आया। पिछले कुछ समय से NEET परीक्षा में पेपर लीक को लेकर बड़ा विवाद चल रहा था। सरकार ने माना कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है और NEET का री-एग्जाम कराया जाएगा।
जांच में यह सामने आया कि टेलीग्राम चैनल्स पर पेपर लीक किए जा रहे थे। चीटिंग का पूरा रैकेट टेलीग्राम के माध्यम से चल रहा था। प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही कुछ चैनल्स पर शेयर किए जा रहे थे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार का कहना है कि टेलीग्राम पर जो स्क्रीनशॉट्स शेयर किए जा रहे हैं, वे फेक हैं। लेकिन सरकार यह भी मानती है कि आने वाले NEET परीक्षा में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।
🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा अपडेट: YouTube Chat Feature लॉन्च! अब WhatsApp की जरूरत खत्म?
21 जून तक पूर्ण प्रतिबंध
सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि यह 21 जून तक रहेगा। यानी जब तक NEET का री-एग्जाम नहीं हो जाता, तब तक यह बैन जारी रहेगा।
दिलचस्प बात यह है कि केवल ऐप पर बैन नहीं है, बल्कि टेलीग्राम की एक खास फीचर पर भी रोक लगाई गई है। टेलीग्राम में एक सुविधा है जिससे आप भेजे गए मैसेज को बाद में एडिट कर सकते हैं। इस फीचर पर 30 जून तक प्रतिबंध है।
अगर गौर करें तो सरकार की चिंता यह थी कि कोई व्यक्ति परीक्षा से पहले कोई सामान्य मैसेज भेज दे। परीक्षा के बाद उसी मैसेज को एडिट करके प्रश्न पत्र डाल दे। फिर स्क्रीनशॉट वायरल करके यह दिखाया जाए कि पेपर पहले से लीक था। इससे अफरा-तफरी का माहौल बन सकता है।
🔍 यह भी पढ़ें- Telegram Banned in India: NEET से पहले बड़ा सरकारी फैसला
IT Act की धारा 69A का इस्तेमाल
इस प्रतिबंध का कानूनी आधार क्या है? सरकार ने Information Technology Act 2000 की धारा 69A का इस्तेमाल किया है।
इस धारा के तहत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के मुद्दों पर ऐसे कदम उठा सकती है। पहले भी चाइनीज ऐप्स को बैन करने और ऑनलाइन कंटेंट पर रोक लगाने में इस धारा का उपयोग हुआ है।
समझने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में धारा 69A की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि अत्यधिक मामलों में सरकार इसका उपयोग कर सकती है।
पूरे प्लेटफॉर्म पर बैन क्यों?
एक सवाल यह उठता है कि सरकार ने पूरा प्लेटफॉर्म ही क्यों बैन कर दिया? सामान्यतः सरकार किसी विशेष चैनल या कंटेंट को ब्लॉक करने को कहती है।
लेकिन NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) का कहना था कि उन्होंने पहले भी कई कदम उठाए थे। एक-एक चैनल को ब्लॉक किया जा रहा था, लेकिन तुरंत कोई दूसरा बैकअप चैनल बन जाता था। यह सिलसिला लगातार चल रहा था।
यही कारण है कि सरकार को अंततः यह फैसला लेना पड़ा कि जब तक परीक्षा नहीं हो जाती, टेलीग्राम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
पावेल दुरोव का बड़ा आरोप
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल दुरोव ने एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रिलायंस और व्हाट्सएप इस बैन के पीछे लॉबिंग कर रहे होंगे।
उनका कहना है: “मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर रिलायंस और व्हाट्सएप भारत में टेलीग्राम के खिलाफ लॉबिंग प्रयासों में शामिल हों।”
दिलचस्प बात यह है कि इस आरोप से पूरा मामला बदल गया है। अब यह सिर्फ सरकार बनाम टेलीग्राम नहीं रहा, बल्कि टेलीग्राम बनाम सरकार और बड़ी टेक कंपनियों का मामला बन गया है।
BGP हाईजैकिंग का गंभीर आरोप
पावेल दुरोव ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रिलायंस BGP हाईजैकिंग का इस्तेमाल कर रही है।
BGP का मतलब है Border Gateway Protocol। यह इंटरनेट ट्रैफिक को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का तरीका है।
हाईजैकिंग का मतलब है कि जानबूझकर ट्रैफिक को गलत रास्ते पर भेजा जा रहा है। जैसे आपको पॉइंट A से पॉइंट B जाना है, लेकिन आपको जानबूझकर पॉइंट C और फिर D से होते हुए भेजा जा रहा है।
इससे क्या होता है? टेलीग्राम का ट्रैफिक धीमा हो जाता है, मैसेज नहीं जाते, और यूजर्स को परेशानी होती है। नतीजा यह कि लोग टेलीग्राम छोड़कर व्हाट्सएप जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाते हैं।
क्यों गंभीर है यह आरोप?
यह आरोप इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें कई मुद्दे जुड़ जाते हैं:
- नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन
- प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन
- साइबर सुरक्षा का मामला
- अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं (भारत के बाहर के यूजर्स भी प्रभावित)
हैरान करने वाली बात यह है कि अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह एक बड़ा स्कैंडल हो सकता है। लेकिन अभी तक दुरोव ने कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया है।
रिलायंस को क्यों निशाना बनाया?
रिलायंस केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं है। यह भारत का सबसे बड़ा डिजिटल इकोसिस्टम प्लेयर है। Jio के अलावा डिजिटल सर्विसेज, मीडिया, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI इंफ्रास्ट्रक्चर – सब कुछ रिलायंस के पास है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मैसेजिंग मार्केट है। हर कंपनी यहां अपना शेयर बढ़ाना चाहती है। टेलीग्राम की बढ़ती लोकप्रियता से यूजर एंगेजमेंट और मैसेजिंग मार्केट प्रभावित हो सकता है।
पावेल दुरोव का आरोप है कि प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए सरकार का फायदा उठाया जा रहा है।
टेलीग्राम बनाम व्हाट्सएप: क्या है अंतर?
दोनों के अलग-अलग यूनिक फीचर्स हैं। व्हाट्सएप का यूजर बेस बहुत बड़ा है, UPI पेमेंट है, बिजनेस मैसेजिंग है।
लेकिन टेलीग्राम की अपनी खासियत है: बड़े चैनल्स (बिना किसी लिमिट के), फाइल शेयरिंग, पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग, एजुकेशनल कम्युनिटीज, और एनोनिमस यूजरनेम।
| फीचर | व्हाट्सएप | टेलीग्राम |
|---|---|---|
| यूजर बेस | बहुत बड़ा (भारत में) | 15 करोड़ (भारत में) |
| ग्रुप साइज | 1024 सदस्य | असीमित |
| चैनल्स | नहीं | हां (असीमित सदस्य) |
| फाइल शेयरिंग | 2GB तक | 2GB तक |
| UPI पेमेंट | हां | नहीं |
| एनोनिमिटी | नहीं | हां (यूजरनेम से) |
यही कारण है कि बहुत सारे स्टूडेंट्स, कोचिंग सेंटर्स, ट्रेडर्स और कंटेंट क्रिएटर्स टेलीग्राम का उपयोग करते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती
टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस बैन को चुनौती दी है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और जल्द सुनवाई होगी।
टेलीग्राम के तर्क क्या हो सकते हैं?
पहला: असमान प्रतिबंध। करोड़ों निर्दोष यूजर्स प्रभावित हो रहे हैं जिनका पेपर लीक से कोई लेना-देना नहीं। छोटे समूह को दंडित करने के बजाय पूरे प्लेटफॉर्म को दंडित किया जा रहा है।
दूसरा: वैकल्पिक उपाय। सरकार स्पेसिफिक चैनल्स को ब्लॉक कर सकती थी, टारगेटेड टेकडाउन कर सकती थी। पूरे प्लेटफॉर्म पर बैन जरूरी नहीं था।
तीसरा: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। अनुच्छेद 19 के तहत यह मौलिक अधिकार है।
चौथा: प्रक्रियात्मक चिंता। क्या उचित प्रक्रिया अपनाई गई? क्या उचित नोटिस दिया गया?
150 मिलियन यूजर्स प्रभावित
पावेल दुरोव ने कहा है कि 150 मिलियन (15 करोड़) भारतीयों को दंडित किया जा रहा है। छोटे से समूह की वजह से इतनी बड़ी आबादी टेलीग्राम से वंचित हो रही है।
उनका कहना है कि लीक तो दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर भी शिफ्ट हो जाएंगे। व्हाट्सएप या अन्य जगह धोखेबाज चले जाएंगे। रूट कॉज़ सॉल्व नहीं हुआ। असली समस्या तो परीक्षा सुरक्षा प्रणाली में है।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला किया। उनका कहना है कि जानबूझकर ध्यान भटकाया जा रहा है।
सरकार को पेपर लीक की जड़ में जाना चाहिए था। परीक्षा सुरक्षा प्रणाली मजबूत करनी चाहिए थी। ऐप्स को ब्लॉक करने से समस्या हल नहीं होगी।
यहां सवाल उठता है कि क्या यह राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा?
आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट के सामने बड़े संवैधानिक सवाल हैं:
- क्या परीक्षा की अखंडता के लिए पूरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया जा सकता है?
- क्या परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी “पर्याप्त सार्वजनिक व्यवस्था चिंता” की श्रेणी में आती है?
- क्या सरकार को टारगेटेड प्रतिबंध पर फोकस करना चाहिए था?
कोर्ट को संतुलन बनाना होगा: परीक्षा सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
जो भी फैसला आएगा, वह आने वाले समय में सरकार की डिजिटल कार्रवाइयों को प्रभावित करेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• NEET परीक्षा में पेपर लीक के बाद टेलीग्राम पर 21 जून तक अस्थायी बैन
• मैसेज एडिटिंग फीचर पर 30 जून तक रोक
• पावेल दुरोव ने रिलायंस और व्हाट्सएप पर लॉबिंग का आरोप लगाया
• BGP हाईजैकिंग का गंभीर आरोप
• 15 करोड़ भारतीय यूजर्स प्रभावित
• टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी
• IT Act 2000 की धारा 69A का इस्तेमाल किया गया











