Father’s Day Gift की सबसे अनमोल और दिल छू लेने वाली कहानी मोरता पिंड के जयंत तिआगी के परिवार से आई है। जब 45 वर्षीय जयंत को पता चला कि उनके लीवर और किडनी दोनों फेल हो गए हैं और जिंदा रहने के लिए दोनों अंगों का प्रत्यारोपण (Transplant) जरूरी है, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन उनकी दो बेटियों ने ऐसा फैसला किया जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
बड़ी बेटी रिषिका तिआगी (B.Tech पास, जल्द शादी होने वाली) ने अपना एक किडनी दान करने का फैसला किया। छोटी बेटी खुशी (B.Tech प्रथम वर्ष की छात्रा) ने अपने लीवर का एक हिस्सा देने का साहस दिखाया। और सोमवार को नोएडा के एक निजी अस्पताल में कई घंटों तक चली जटिल सर्जरी सफल रही।
देखा जाए तो, यह Father’s Day Gift नहीं, बल्कि ‘जीवनदान’ है। समझने वाली बात है कि फादर्स डे (15 जून) से ठीक एक हफ्ते पहले यह सर्जरी हुई और आज पिता और दोनों बेटियां स्वस्थ हैं।
यह कहानी हर उस व्यक्ति को छू जाएगी जो अपने माता-पिता से प्यार करता है।
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कैसे पता चला कि लीवर और किडनी दोनों फेल हो गए?
जयंत तिआगी पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें थकान, पेट में दर्द और पेशाब में दिक्कत हो रही थी। शुरुआत में परिवार वालों ने सोचा कि यह सामान्य कमजोरी है।
लेकिन जब हालत बिगड़ने लगी, तो डॉक्टर के पास ले गए। जांच में पता चला कि जयंत को Chronic Kidney Disease और Liver Cirrhosis है। यानी किडनी और लीवर दोनों धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहे हैं।
डॉक्टरों ने साफ कह दिया:
“अगर जल्द से जल्द दोनों अंगों का transplant नहीं हुआ, तो जयंत की जान बचाना मुश्किल होगा।”
यह सुनकर परिवार सन्न रह गया। सबसे बड़ी चुनौती थी: दो अंग एक साथ कहां से मिलेंगे?
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बेटियों का अटूट प्यार: “पापा हैं तो सब कुछ है”
जब परिवार में यह चर्चा हुई कि transplant के लिए donor कौन बनेगा, तो दोनों बेटियों ने बिना सोचे-समझे हां कर दी।
रिषिका ने कहा:
“मैं अपने पापा को किडनी दूंगी। मेरे पास दो हैं, एक से मेरा काम चल जाएगा।”
खुशी बोली:
“मैं अपना लीवर दूंगी। डॉक्टर ने बताया कि लीवर का एक हिस्सा दे सकते हैं, वो फिर से बढ़ जाता है।”
परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों बेटियां बार-बार एक ही बात कहती थीं:
“अगर हमारे पापा हमारे पास हैं, तो हमारे पास सब कुछ है।”
यह सुनकर जयंत की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने बेटियों को मना करने की कोशिश की, लेकिन दोनों ने एक न सुनी।
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सहुरे पक्ष की हिम्मत: “बेटी ने सही फैसला लिया”
रिषिका की शादी तय हो चुकी है और कुछ महीनों में विवाह होने वाला है। जब उसने अपने होने वाले सहुरे पक्ष को यह बात बताई कि वह अपना किडनी दान करना चाहती है, तो एक पल को डर लगा कि कहीं वे मना न कर दें।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि रिषिका के होने वाले ससुराल वालों ने पूरी हिम्मत दिखाई। उन्होंने कहा:
“यह बहुत बड़ा और सही फैसला है। हम रिषिका के साथ हैं। पिता की जान बचाना सबसे बड़ी पूजा है।”
यह सुनकर पूरे परिवार को बल मिला।
जयंत के करीबी दोस्त अमित रंजन ने भावुक होकर कहा:
“आज के दौर में जब लोग माता-पिता को बोझ समझते हैं, वहीं इन बेटियों ने अपने अंग तक दान कर दिए। यह मिसाल है।”
मेडिकल जांच और फिटनेस: सब कुछ सही निकला
Transplant के लिए सबसे जरूरी है कि donor और recipient के blood group और tissue match हों।
डॉक्टरों ने जयंत, रिषिका और खुशी—तीनों की विस्तृत जांच की।
सौभाग्य से:
- रिषिका का blood group और tissue जयंत से perfectly match हुआ (किडनी के लिए)
- खुशी का लीवर भी compatible निकला
इसके बाद counseling की गई। डॉक्टरों ने दोनों बेटियों को समझाया कि:
- किडनी दान करने के बाद भी सामान्य जीवन जी सकती हैं
- लीवर का हिस्सा दान करने के बाद वो फिर से बढ़ जाता है
- लेकिन सर्जरी में risk है
दोनों बेटियों ने हर सवाल सुना और फिर भी अपने फैसले पर कायम रहीं।
सोमवार को हुई जटिल सर्जरी: कई घंटे चला ऑपरेशन
सोमवार की सुबह, तीनों को नोएडा के एक बड़े निजी अस्पताल में admit किया गया।
डॉक्टरों की एक बड़ी टीम ने यह complex surgery की। सबसे पहले रिषिका और खुशी से किडनी और लीवर का हिस्सा निकाला गया। फिर उन्हें जयंत के शरीर में transplant किया गया।
पूरी सर्जरी में करीब 8-10 घंटे लगे।
ऑपरेशन थिएटर के बाहर पूरा परिवार, दोस्त और रिश्तेदार दुआओं में लगे थे।
शाम को जब डॉक्टरों ने बाहर आकर कहा, “सर्जरी सफल रही है। तीनों की हालत स्थिर है”, तो सभी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
अब कैसी है तीनों की हालत?
डॉक्टरों के मुताबिक:
- जयंत तिआगी की हालत स्थिर है। नए अंग अच्छे से काम कर रहे हैं।
- रिषिका और खुशी दोनों भी ठीक हैं। उन्हें ICU में रखा गया है, लेकिन वे स्वस्थ हैं।
अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया:
“यह बेहद rare case है जहां एक ही मरीज को दो अलग-अलग अंग एक साथ transplant किए गए। और दोनों donors उसकी बेटियां हैं। Medical history में ऐसे कम ही केस होंगे।”
उन्होंने कहा कि अगले 2-3 हफ्तों में तीनों को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। लेकिन नियमित जांच और दवाइयां जारी रखनी होंगी।
फादर्स डे से ठीक एक हफ्ते पहले: संयोग या भावना?
यह सर्जरी Father’s Day (15 जून) से ठीक एक हफ्ते पहले हुई।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि भगवान की मर्जी थी।
खुशी ने अस्पताल के बेड से ही कहा:
“हमने पापा को उनका असली Father’s Day Gift दे दिया है—एक नई जिंदगी।”
रिषिका ने कहा:
“पापा ने हमें जिंदगी दी थी। अब हमने उन्हें दोबारा जीने का मौका दिया है।”
यह सुनकर जयंत रो पड़े। उन्होंने कहा:
“मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसी बेटियां मिलीं।”
भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया खून दान
जयंत तिआगी भाजपा संगठन में सेक्टर कन्वीनर के रूप में सेवा दे चुके हैं। जब पार्टी कार्यकर्ताओं को उनकी बीमारी का पता चला, तो बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे।
ऑपरेशन के दौरान blood की जरूरत थी। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने तुरंत blood donation किया।
गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों से करीब 30-40 लोगों ने रक्तदान किया।
एक कार्यकर्ता ने कहा:
“जयंत जी हमारे लिए परिवार जैसे हैं। उनकी मदद करना हमारा कर्तव्य था।”
समाज में चर्चा: बेटियों के जज्बे की तारीफ
गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों में अब सिर्फ इस खबर की ही चर्चा है।
सोशल मीडिया पर भी यह कहानी वायरल हो रही है। लोग रिषिका और खुशी की तारीफ कर रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा:
“यह सच्चा प्यार है। आज की लड़कियां कहीं से कमजोर नहीं हैं।”
एक महिला ने कमेंट किया:
“मेरी आंखों में आंसू आ गए। काश हर बेटी ऐसी हो।”
कुछ लोगों ने तंज भी कसा:
“जो लोग कहते हैं कि बेटियां बोझ हैं, उन्हें यह खबर पढ़नी चाहिए।”
मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय
डॉ. संजय गुप्ता (Liver Transplant Specialist, Delhi) ने कहा:
“Dual organ transplant बेहद जटिल प्रक्रिया है। खासकर जब दोनों organs अलग-अलग donors से आएं। यह सर्जरी की सफलता मेडिकल टीम की कुशलता और परिवार के साहस दोनों को दर्शाती है।”
डॉ. अनीता शर्मा (Nephrologist, Noida) ने बताया:
“Living kidney donation बिल्कुल सुरक्षित है। Donor सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन हां, नियमित चेकअप जरूरी है।”
मुख्य बातें (Key Points)
✔ मोरता गांव के 45 वर्षीय जयंत तिआगी के लीवर और किडनी दोनों फेल हो गए थे।
✔ बड़ी बेटी रिषिका ने किडनी और छोटी बेटी खुशी ने लीवर का हिस्सा दान किया।
✔ सोमवार को नोएडा के अस्पताल में 8-10 घंटे की जटिल सर्जरी सफल रही।
✔ रिषिका के होने वाले ससुराल वालों ने भी उनके फैसले का समर्थन किया।
✔ यह घटना Father’s Day से ठीक एक हफ्ते पहले हुई, जो बेटियों के प्यार की सच्ची मिसाल है।













