BJP Punjab Mission को लेकर बड़ी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी भाजपा की मूल संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मंगलवार को पंजाब चुनाव को लेकर एक मैराथन रणनीति बैठक की और भगवा कैडर से कहा कि वह “उसी विश्वास के साथ आगे बढ़े, जैसे पहले हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बढ़े थे।”
चंडीगढ़ में हुई आठ घंटे की इस बैठक की अगुवाई आरएसएस के संयुक्त जनरल सचिव अरुण कुमार, जो संघ के तीसरे सबसे ऊंचे राष्ट्रीय पदाधिकारी हैं, और भाजपा के जनरल सचिव (संगठन) बीएल संतोष ने की।
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हर वर्ग तक पहुंच बनाने की योजना
इस बैठक में चोटी के संघ नेताओं ने पंजाब में आरएसएस के फ्रंटल संगठनों के प्रधानों के साथ विचार-विमर्श किया। भाजपा नेताओं को भी इसमें बुलाया गया था।
समझने वाली बात यह है कि बैठक में जमीनी स्थिति का जायजा लिया गया। किसानों, महिलाओं, नौजवानों, डेरों, अनुसूचित जातियों, ओबीसी और राज्य के अन्य प्रभावशाली भाईचारों समेत अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने के लिए समर्पित ग्रुप बनाने का फैसला किया गया।
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कौन-कौन से मुद्दे बने अहम
इस दौरान धार्मिक तब्दीलियां, कानून व्यवस्था, नशा, आर्थिक संकट और सरहद पार से दहशतगर्दी के खतरों को चुनावों के मुख्य मुद्दों के रूप में पहचाना गया।
दिलचस्प बात यह है कि आरएसएस ने पंजाब कैडर को अकाल तख्त साहिब के उन आदेशों के जमीनी प्रभाव का मूल्यांकन करने को भी कहा, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ करार दिया गया है।
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कौन-कौन रहा बैठक में मौजूद
बैठक में भाजपा की नुमाइंदगी पंजाब यूनिट के प्रधान केवल सिंह ढिल्लों, कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा, पूर्व सूबा प्रधान सुनील जाखड़, पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, पंजाब भाजपा महिला विंग की प्रधान जय इंदर कौर, पूर्व सूबा मंत्री मनोरंजन कालिया, पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना और सीनियर नेता श्वेत मलिक ने की। भाजपा के जनरल सचिव तरुण चुघ और पंजाब भाजपा के सह-इंचार्ज नरिंदर रैना भी हाजिर थे।
आरएसएस की ओर से भाजपा पंजाब के संगठनात्मक सचिव मंथरी श्रीनिवासुलू और सीनियर संघ पदाधिकारी सौदान सिंह ने भाग लिया।
वोट शेयर का गणित
बैठक में भाजपा की मौजूदा चुनावी स्थिति पर बारीकी से चर्चा हुई। एक नजर इसके वोट शेयर के सफर पर:
| चुनाव | वोट शेयर |
|---|---|
| 2019 लोकसभा | 9.63 फीसदी |
| 2022 विधानसभा | 6.60 फीसदी |
| 2024 लोकसभा | 18.56 फीसदी (करीब 19%) |
बैठक में शामिल एक नेता ने कहा, “सभी ने सहमति जताई कि अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाना जरूरी है और भाजपा लोकसभा चुनावों में मिले 19 फीसदी वोटों से आगे अपना आधार बढ़ाएगी।”
अकाली दल से गठबंधन की वकालत
राहत की बात भाजपा के एक वर्ग के लिए यह रही कि उसने श्रोमणि अकाली दल के साथ चुनावों से पहले गठबंधन की वकालत की। हालांकि इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी को राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा है।
आज की बैठक में शामिल आरएसएस के संगठनों में भारतीय किसान संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय मजदूर संघ, एबीवीपी, सेवा भारती, विद्या भारती और राष्ट्रीय सिख संगत शामिल थे।
आम आदमी पर क्या असर
यहां गौर करने वाली बात यह है कि जैसे-जैसे पार्टियां अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश करेंगी, किसानों, महिलाओं और नौजवानों से जुड़े मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आ सकते हैं। इसका सीधा असर पंजाब की राजनीतिक दिशा पर पड़ेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- RSS ने चंडीगढ़ में आठ घंटे की मैराथन बैठक कर पंजाब रणनीति बनाई।
- हरियाणा और बंगाल जैसी जीत की उम्मीद, हर वर्ग तक पहुंच का फैसला।
- 2024 लोकसभा में भाजपा का वोट शेयर 18.56 फीसदी रहा।
- अमित शाह ने सभी 117 सीटों पर लड़ने की तैयारी को कहा।













