Cough Syrups Prescription Rule: केंद्र सरकार ने खांसी की सिरप की खुली बिक्री पर सख्त रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है। अब कोई भी मेडिकल स्टोर खांसी की सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के ओवर-द-काउंटर नहीं बेच सकेगा। यह नया नियम सोमवार को जारी नोटिफिकेशन के साथ लागू कर दिया गया।
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सरकार का यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया चेतावनियों के बाद आया है। ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक तमिलनाडु की ‘स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स’ की ‘कोल्डरिफ’ सिरप से जुड़े मामले में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत का मुद्दा सामने आया था। यही वह बिंदु है, जिसने दवा बिक्री के पुराने ढांचे पर फिर से सवाल खड़े कर दिए।
| पहले क्या था | अब क्या बदला |
|---|---|
| Schedule K में syrup शामिल था | Schedule K से syrup शब्द हटा दिया गया |
| कई जगह बिना पर्ची बिक्री संभव थी | अब डॉक्टर की पर्ची जरूरी |
| गांवों में छूट के तहत सिरप बिक सकती थी | अब यह छूट खत्म |
| OTC जैसी स्थिति | सख्त निगरानी वाली बिक्री |
सरकार ने नियम में क्या बदलाव किया
केंद्र ने ड्रग्स रूल्स 1945 में बदलाव करते हुए ‘ड्रग्स (पांचवीं संशोधन) नियम, 2026’ को नोटिफाई किया है। इसके तहत ‘शेड्यूल K’ की सूची से ‘syrup’ शब्द हटा दिया गया है। पहले खांसी की सिरप को household remedies की श्रेणी में रखकर निर्माण, वितरण और बिक्री के कई सख्त लाइसेंस नियमों से अतिरिक्त छूट मिली हुई थी।
अब यही छूट खत्म कर दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि शेड्यूल K में अब खांसी के लिए सिर्फ lozenges, pills और tablets जैसी चीजें ही सीमित रह गई हैं। यानी सिरप को अलग और ज्यादा नियंत्रित श्रेणी में ले जाया गया है।
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पुराने नियम में क्या छूट मिलती थी
पुराने नियमों के तहत 1000 से कम आबादी वाले गांवों में, जहां लाइसेंसशुदा मेडिकल स्टोर नहीं होते थे, वहां एस्पिरिन, पैरासिटामोल और खांसी की दवाएं बिना औपचारिक बिक्री लाइसेंस के बेची जा सकती थीं। और बस यहीं से ढील का वह हिस्सा बनता था, जिस पर अब सरकार ने कैंची चला दी है।
समझने वाली बात है: सरकार यह कह रही है कि सिरप जैसी दवाओं को अब सामान्य घरेलू इलाज की तरह नहीं देखा जा सकता। इन्हें नियंत्रित तरीके से बेचना ही बेहतर होगा।
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यह फैसला क्यों अहम है
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि यह बदलाव दिसंबर 2025 में प्रकाशित ड्राफ्ट नियमों पर मिले सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद किया गया। साथ ही ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से सलाह के बाद फैसला लिया गया।
देखा जाए तो इसका मतलब साफ है: सरकार अब खांसी की सिरप की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सीधे और सख्त तरीके से नजर रखना चाहती है। राहत की बात यह है कि इससे दवा सुरक्षा पर ज्यादा जवाबदेही तय होगी। लेकिन दूसरी ओर, बिना पर्ची दवा लेने की पुरानी आदत रखने वालों के लिए यह बदलाव बड़ा महसूस होगा।
आम लोगों पर इसका असर
अब मरीजों को खांसी की सिरप लेने के लिए डॉक्टर की सलाह और पर्ची की जरूरत होगी। यह बदलाव खासकर छोटे कस्बों और गांवों में ज्यादा महसूस किया जा सकता है, जहां लोग अक्सर ऐसी दवाएं सीधे दुकान से ले लेते थे।
अगर गौर करें, तो सरकार सुविधा से ज्यादा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। यही इस फैसले की असली दिशा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अब खांसी की सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं बेची जा सकेगी।
- सरकार ने Schedule K से ‘syrup’ शब्द हटा दिया है।
- नया नियम नोटिफिकेशन के साथ तुरंत प्रभाव से लागू हो गया।
- WHO चेतावनियों और बच्चों की मौत से जुड़े मामले के बाद फैसला अहम माना जा रहा है।












