Current Account Surplus: भारत जैसे देश के लिए यह सुर्खी बड़ी है क्योंकि आमतौर पर हम Current Account Deficit की बात करते हैं, Surplus की नहीं। जैसा कि आप सब जानते हो, भारत ज्यादातर चीजों को आयात करता है चाहे वह तेल हो, सोना हो या इलेक्ट्रॉनिक्स। निर्यात बहुत कम कर पाते हैं। इसी वजह से बहुत दुर्लभ होता है कि भारत का Current Account Surplus हो जाए।
लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-फरवरी-मार्च 2026) में यह हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में Balance of Payment के आंकड़े जारी किए हैं जो एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। देखा जाए तो यह Surprise है, लेकिन पूरी कहानी में कई पेंच हैं जो समझने जरूरी हैं।
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क्या हुआ: $7.1 बिलियन का Surplus
ध्यान रखिएगा, हम यहां बात कर रहे हैं Q4 यानी चौथी तिमाही 2025-26 की। मतलब जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 की। इस तिमाही में हमारा Current Account Surplus आया है $7.1 बिलियन (करीब ₹58,000 करोड़)।
अगर आप इसे पिछली तिमाही से compare करें:
- Q3 (अक्टूबर-दिसंबर 2025): Current Account Deficit $13.2 बिलियन था
- Q4 (जनवरी-मार्च 2026): Current Account Surplus $7.1 बिलियन है
यानी एक बड़ा उलटफेर हुआ है।
लेकिन यहां दिलचस्प बात यह है कि अगर हम पिछले साल की same तिमाही से तुलना करें (जो सही Comparison है):
- Q4 2024-25 (जनवरी-मार्च 2025): Current Account Surplus $3.7 बिलियन था
- Q4 2025-26 (जनवरी-मार्च 2026): Current Account Surplus $7.1 बिलियन है
तो साल-दर-साल आधार पर Surplus बढ़ा है, लेकिन पिछली तिमाही से तुलना करें तो यह एक बड़ी छलांग है Deficit से Surplus की ओर।
Current Account क्या होता है: समझिए आसान भाषा में
समझने वाली बात यह है कि Current Account किसी भी देश की विदेशी लेन-देन का Report Card है। यह भारत और बाकी दुनिया के बीच होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन को दर्शाता है।
Current Account में क्या-क्या शामिल होता है:
| घटक | क्या है |
|---|---|
| Goods Trade | भौतिक वस्तुओं का आयात-निर्यात (तेल, सोना, मशीनरी आदि) |
| Services Trade | सेवाओं का व्यापार (IT, Software, Business Services) |
| Income | विदेशी निवेश से आय, ब्याज, मुनाफा |
| Transfers | प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया पैसा (Remittances) |
Current Account Balance का फॉर्मूला:
Current Account = (Exports + Services + Transfers) - (Imports + Income Payments)
अगर भारत की कमाई (Exports, Services, Remittances) खर्च (Imports) से ज्यादा है तो Surplus होगा। अगर खर्च ज्यादा है तो Deficit।
Balance of Payment: Current Account + Capital Account
यहां ध्यान देने वाली बात है कि Balance of Payment एक बड़ी तस्वीर है जिसमें दो मुख्य हिस्से हैं:
1. Current Account: रोजमर्रा के व्यापार, सेवाएं, Remittances
2. Capital Account: विदेशी निवेश (FDI, FII), लोन, पोर्टफोलियो निवेश
भारत के लिए Capital Account भी Favorable रहता है क्योंकि विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाते हैं। जैसे 1991 के संकट में IMF से लोन लिया था, वह Capital Account में दर्ज होता।
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Surplus के पीछे का असली कारण: Services का कमाल
अब सवाल यह है कि अचानक यह Surplus कैसे आ गया? इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:
1. Services Export में धमाकेदार वृद्धि
भारत का सबसे मजबूत पक्ष Services Export है। Q4 में Net Services Receipts $60.4 बिलियन पहुंच गए। मुख्य योगदान:
- Software Services
- IT Exports (TCS, Infosys, Wipro, HCL)
- Financial Services
- Engineering Services
- Business Process Outsourcing
यहां समझने वाली बात है कि Services का फायदा यह है कि इन्हें Physical रूप से लाने-ले जाने की जरूरत नहीं होती। अगर Crude Oil मंगा रहे हो तो बड़े Oil Tankers चाहिए, shipping routes सुरक्षित होने चाहिए। लेकिन Software Export तो बस Internet से हो जाता है। इसलिए चाहे कहीं युद्ध हो या संकट, Services Export कम प्रभावित होता है।
2. Remittances में जबरदस्त बढ़ोतरी
भारत से बाहर काम करने वाले लोग अपने परिवारों को जो पैसा भेजते हैं, वह Remittances कहलाता है। Q4 में Personal Transfer Receipts $43.5 बिलियन पहुंच गए।
Compare करें:
- Q4 2024-25: $33.9 बिलियन
- Q4 2025-26: $43.5 बिलियन
यानी करीब 28% की वृद्धि।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा Remittance प्राप्तकर्ता देश है। खाड़ी देशों (UAE, Saudi Arabia, Kuwait), अमेरिका, ब्रिटेन से करोड़ों भारतीय पैसा भेजते हैं। यह Remittances:
- Foreign Exchange में मदद करता है
- Rural Consumption बढ़ाता है (गांवों में पैसा आता है)
- परिवारों को Financial Stability देता है
- Current Account को Support करता है
3. Invisible Receipts मजबूत हुए
Invisible Trade का मतलब है वह व्यापार जो भौतिक रूप से दिखाई नहीं देता Services, Remittances, Tourism आदि। Visible Trade (Goods) में भारत कमजोर है, लेकिन Invisible Trade में काफी मजबूत है।
लेकिन Merchandise Trade में अभी भी समस्या बरकरार
यहां कड़वी सच्चाई यह है कि भौतिक वस्तुओं (Goods) के व्यापार में भारत अभी भी बुरी तरह पिछड़ा हुआ है। Q4 में Merchandise Trade Deficit $83.4 बिलियन रहा।
भारत क्या-क्या आयात करता है:
- Crude Oil और LNG (Energy)
- सोना और कीमती धातुएं
- Electronics और Machinery
- Defence Equipment (हालांकि अब Indigenous Defence पर जोर है)
- Coal
और निर्यात में हम उतने मजबूत नहीं हैं। तो Goods के मामले में Trade Deficit गहरा है।
भारत का Unique Economic Model: Services-Powered Economy
अगर गौर करें तो भारत का आर्थिक ढांचा थोड़ा अलग है। ज्यादातर Export-driven Economies Manufacturing पर निर्भर होती हैं। जिन भी देशों का Current Account Surplus होता है, वहां Manufacturing काफी मजबूत होती है चाहे चीन की बात करें, वियतनाम, दक्षिण कोरिया।
लेकिन भारत में:
- Goods Trade: Deficit (आयात ज्यादा, निर्यात कम)
- Services Trade: Surplus (निर्यात ज्यादा)
- Remittances: Strong (प्रवासी भारतीयों का योगदान)
यानी भारत एक Services-Powered External Economy बनता जा रहा है, न कि Manufacturing-powered।
सामान्य आर्थिक विकास की यात्रा:
- पहले Agriculture dominant
- फिर Manufacturing की ओर shift
- फिर Services की ओर
लेकिन भारत ने Agriculture से सीधे Services की ओर छलांग लगा दी। Manufacturing अभी भी कमजोर है Make in India जैसी योजनाओं के बावजूद।
पूरे साल का हिसाब: अभी भी Deficit में
अब यहां सबसे महत्वपूर्ण बात। Q4 तो Surplus रहा, लेकिन पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) का Current Account अभी भी $25 बिलियन Deficit में है।
सोचिए, अगर Q4 में $7.1 बिलियन का Surplus न होता तो यह Deficit $30+ बिलियन होता। तो Q4 के Surplus ने थोड़ी राहत दी है।
क्या यह Deficit चिंताजनक है?
देखिए, $25 बिलियन Deficit सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन भारत की GDP के प्रतिशत के रूप में देखें तो यह सिर्फ 0.6% है।
Current Account Deficit का सुरक्षित स्तर:
| GDP का % | स्थिति |
|---|---|
| 0-1% | Comfortable (आरामदायक) |
| 1-2% | Manageable (प्रबंधनीय) |
| 2-3% | Careful (सावधानी बरतें) |
| 3-4% | Dangerous (खतरनाक) |
| 4%+ | Serious Concern (गंभीर चिंता) |
चूंकि भारत का Current Account Deficit GDP का सिर्फ 0.6% है, तो यह Comfortable Zone में है। कोई तत्काल चिंता की बात नहीं।
Rupee पर क्या होगा असर
जाहिर सी बात है, जितना ज्यादा Surplus होगा, उतने ज्यादा Dollar भारत में आएंगे। इससे Rupee को मजबूती मिलती है।
लेकिन Overall देखें तो पूरे साल Deficit है, तो Rupee पर दबाव बना रहेगा। हालांकि 0.6% का Deficit Manageable है।
आगे के खतरे: सब कुछ गुलाबी नहीं
यहां ध्यान देने वाली बात है कि भविष्य में कई जोखिम बने हुए हैं:
1. Oil Prices का खतरा
Crude Oil अभी भी $100 के आसपास है। आप देख ही रहे हैं कि भारत में लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। Middle East में तनाव कब खत्म होगा, कुछ पता नहीं। रोज खबर आती है कि शांति वार्ता होगी, लेकिन कुछ होता नहीं।
2. Global Demand में कमी
अगर दुनिया भर में मांग कमजोर रही तो हमारा Export प्रभावित होगा। खासकर Services Export।
3. Remittances का जोखिम
Gulf Countries की हालत आप देख रहे हो। Oil Prices में उतार-चढ़ाव, वहां Economic Slowdown। अगर वहां नौकरियां कम हुईं तो Remittances भी घट सकता है।
4. AI का खतरा IT Services पर
अब Artificial Intelligence के आने के बाद TCS, Infosys जैसी कंपनियों की स्थिति क्या होगी? क्या Traditional IT Services की Demand घटेगी? यह भी एक बड़ा सवाल है।
RBI की हालिया Monetary Policy भी Relevant
हाल ही में RBI की Monetary Policy Committee की बैठक हुई थी जिसमें कुछ फैसले लिए गए। उसमें कोशिश की गई कि भारत में Dollar लाने के रास्ते खोले जाएं। देखना होगा कि वह कितना सफल होता है।
क्या Manufacturing को मजबूत करना जरूरी है
बिल्कुल। अगर भारत को Long-term में Sustainable Current Account Surplus चाहिए तो Manufacturing को मजबूत करना होगा। Services तो अच्छा है, लेकिन केवल Services पर निर्भर रहना जोखिम भरा है।
Make in India, PLI Schemes, Atmanirbhar Bharat ये सब उसी दिशा में कदम हैं। लेकिन Results अभी पूरी तरह नहीं दिख रहे।
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मुख्य बातें (Key Points)
- Q4 2025-26 में Current Account Surplus $7.1 बिलियन रहा, जो दुर्लभ है
- पिछली तिमाही Q3 में $13.2 बिलियन का Deficit था, यानी बड़ा उलटफेर हुआ
- Services Export $60.4 बिलियन और Remittances $43.5 बिलियन पहुंचे
- Merchandise Trade Deficit अभी भी $83.4 बिलियन है
- पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में Current Account Deficit $25 बिलियन (GDP का 0.6%) है
- भारत की अर्थव्यवस्था Services-powered है, Manufacturing में कमजोर
- Oil Prices, Global Demand, Remittances में जोखिम बने हुए हैं













