Ujjwala Yojana Subsidy Cut की खबर ने लाखों गरीब परिवारों को झटका दिया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी से जुड़ा नया नियम लागू कर दिया गया है। सरकार ने साल भर में सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या कम कर दी है। अब योजना के तहत लाभार्थियों को पूरे साल में सिर्फ चार सिलेंडरों पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा। देखा जाए तो यह उन परिवारों के लिए चिंता का विषय है जो साल में इससे अधिक गैस का इस्तेमाल करते हैं।
इससे पहले यह सीमा नौ सिलेंडर की थी। यानी जिन परिवारों को पहले साल में नौ बार सब्सिडी का फायदा मिलता था, अब उन्हें केवल चार बार ही यह सहायता मिलेगी। समझने वाली बात यह है कि यह फैसला एक ही झटके में सब्सिडी को आधे से भी कम कर देता है।
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क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि यह फैसला लाभार्थियों की औसत गैस खपत को ध्यान में रखकर लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश उज्ज्वला परिवार पूरे साल में औसतन करीब चार सिलेंडरों का ही उपयोग करते हैं। इसी आधार पर नई व्यवस्था तय की गई है। दिलचस्प बात यह है कि यह आंकड़ा सरकारी सर्वे पर आधारित है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग भी हो सकती है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनजा ने कहा है कि सब्सिडी की सीमा लाभार्थियों की औसत वार्षिक गैस खपत के अनुरूप तय की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत और उपयोग के आधार पर सहायता उपलब्ध कराना चाहती है। इसी सोच के तहत सब्सिडी की नई सीमा निर्धारित की गई है।
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उज्ज्वला योजना का सफर: 12 से 4 तक
Ujjwala Yojana की शुरुआत साल 2016 में मई के महीने में की गई थी। उस समय योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना था। शुरुआत में लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम वाले 12 एलपीजी सिलेंडरों पर सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती थी। बाद में इस संख्या को घटाकर नौ किया गया और अब एक और बदलाव के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या घटाकर चार कर दी गई है।
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यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि लगातार सब्सिडी की सीमा कम की जा रही है:
| साल | सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या | बदलाव |
|---|---|---|
| 2016 (शुरुआत) | 12 सिलेंडर | योजना की शुरुआत |
| बाद में | 9 सिलेंडर | 3 सिलेंडर कम |
| 2026 (वर्तमान) | 4 सिलेंडर | 5 सिलेंडर और कम |
कितनी मिलती है सब्सिडी?
Ujjwala Yojana Subsidy Cut के बावजूद प्रति सिलेंडर सब्सिडी की राशि की बात करें तो साल 2022 के मई के महीने में सरकार ने प्रति सिलेंडर ₹200 की सहायता शुरू की थी। बाद में अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर ₹300 प्रति सिलेंडर कर दिया गया था। अगर गौर करें तो यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है।
हालांकि इसी बीच घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर ₹942 पहुंच गई है। ऐसे में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी मिलने के बाद एक सिलेंडर की प्रभावी कीमत करीब ₹642 पड़ रही है।
सरकार का दावा: फिर भी मिल रही है बड़ी मदद
सरकार का दावा है कि वह अभी भी एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी आर्थिक सहायता दे रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर कुल खर्च लगभग ₹1,600 तक आता है। इसमें लाभार्थियों को करीब ₹1,000 प्रति सिलेंडर तक की सहायता विभिन्न रूपों में मिल रही है।
सरकार के अनुसार 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी पर लगभग ₹42,000 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि सब्सिडी पर सरकारी खजाने पर कितना बोझ पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
सरकारी पक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस बाजार पर दबाव बना हुआ है। इन परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में अभी भी कम हैं।
तेल कंपनियों को नुकसान
तेल विपणन कंपनियों की स्थिति पर भी सरकार ने जानकारी दी है। अधिकारियों के मुताबिक एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। राहत की बात यह है कि सरकार इस नुकसान की भरपाई करती है।
आम परिवारों पर असर
हालांकि Ujjwala Yojana Subsidy Cut के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि अब उज्ज्वला लाभार्थियों को पूरे साल में सिर्फ चार सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी। ऐसे परिवार जो साल में इससे अधिक गैस सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बाकी सिलेंडर बाजार मूल्य पर ही खरीदने होंगे। यानी ₹942 प्रति सिलेंडर की दर से।
अगर कोई परिवार साल में 8 सिलेंडर इस्तेमाल करता है, तो उसे पहले 8×300 = ₹2,400 की सब्सिडी मिलती थी (9 में से 8 पर)। अब उसे केवल 4×300 = ₹1,200 की सब्सिडी मिलेगी। यानी ₹1,200 का नुकसान।
मुख्य बातें (Key Points)
- उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडर 9 से घटाकर 4 किए गए
- औसत खपत के आधार पर लिया गया फैसला
- प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी DBT के माध्यम से मिलती है
- दिल्ली में सिलेंडर की कीमत ₹942, सब्सिडी के बाद ₹642
- 2016 में शुरुआत में 12 सिलेंडर पर मिलती थी सब्सिडी
- 2022 से अब तक ₹42,000 करोड़ खर्च हुए सब्सिडी पर
- 4 से ज्यादा सिलेंडर पर बाजार मूल्य देना होगा













