PSEB Ranking Reform: पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली सूबा सरकार ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की पेपर मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव करते हुए, बोर्ड परीक्षाओं में समान अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अब समान रैंक देने का फैसला किया है।
देखा जाए तो इस फैसले से जन्म तिथि को टाई-ब्रेकर के रूप में इस्तेमाल करने की लंबे समय से प्रचलित परंपरा खत्म हो जाएगी। यह अहम फैसला आज PSEB की बोर्ड मीटिंग के दौरान लिया गया है।
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‘सितारे जमीन पर’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उठाया मुद्दा
इस फैसले का आधार 31 मई, 2026 को करवाए गए सूबा स्तरीय सम्मान समारोह “सितारे जमीन पर” के दौरान कुछ विद्यार्थियों के साथ हुई बातचीत से लिया गया है। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के जिला टॉपर्स को सम्मानित किया।
अगर गौर करें तो इस समय बातचीत के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि शीर्ष रैंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी के समान अंकों वाले विद्यार्थियों को सिर्फ उम्र के आधार पर मेरिट सूची में नीचे रखा जाता है, जिससे उनके रैंक प्रभावित होते हैं।
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CM मान का तत्काल निर्देश
इस मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को इस परंपरा को खत्म करने और समान अंक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए साझा रैंक प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए थे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि स. बैंस ने कहा कि विद्यार्थी केंद्रित शिक्षा की ओर यह एक ऐतिहासिक कदम है। टॉपर विद्यार्थी के समान अंकों वाले विद्यार्थी को उम्र के आधार पर कम रैंक नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री मान की दूरअंदेशी अगुवाई के तहत अब समान अंक का मतलब समान रैंक होगा।
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कंपीटेंसी-आधारित प्रश्न पत्र
स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि रैंकिंग में किए सुधारों के अलावा, शिक्षा बोर्ड ने प्रश्न पत्र डिजाइन में भी बड़े बदलाव करने का फैसला किया है, जिसका उद्देश्य नकल को रोकना और रट्टा लगाने की आदत को खत्म करना है।
समझने वाली बात यह है कि ‘सितारे जमीन पर’ के दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मौजूदा पेपरों में ज्ञान की बजाय रट्टे को ज्यादा महत्व दिया जाता है।
नकल रोकने के लिए नए पेपर पैटर्न
स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “हम विषय विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित कंपीटेंसी-आधारित प्रश्न पत्रों को अपना रहे हैं। विद्यार्थी की समझ, विश्लेषणात्मक योग्यता और तर्क की जांच करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, न कि इस पर कि वह कितनी अच्छी तरह रट्टा लगा सकते हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कहा, “बेहतर प्रश्न पत्रों का उद्देश्य नकल की गुंजाइश को खत्म करना है। जब प्रश्न रट्टे की बजाय सोचने की क्षमता को परखते हैं तो पेपर लीक और नकल की गुंजाइश नहीं रहती।”
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विद्यार्थी केंद्रित नीतियां
शिक्षा मंत्री ने कहा, “विद्यार्थी हमारा भविष्य हैं। हमारे द्वारा लिए गए हर फैसले से उन्हें निष्पक्षता, आत्म-विश्वास और विश्व स्तरीय मानक मिलने चाहिए। मुख्यमंत्री मान की अगुवाई वाली सरकार द्वारा विद्यार्थियों को नीतियों में प्राथमिकता दी गई है।”
अगर गौर करें तो उन्होंने कहा, “पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड अब क्रमबद्ध तरीके से रट्टेबाजी के चिरकाल से प्रचलित रुझान को बंद करेगा और हर परीक्षा को पारदर्शी, निष्पक्ष और विद्यार्थी-अनुकूल बनाएगा।”
बोर्ड चेयरमैन का आश्वासन
बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने भरोसा दिलाया कि विद्यार्थियों से प्राप्त सभी रचनात्मक सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी और अगली बोर्ड परीक्षा से पहले साझा रैंकिंग प्रणाली और नए प्रश्न पत्र पैटर्न के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- समान अंक पर अब समान रैंक मिलेगी
- जन्म तिथि को टाई-ब्रेकर से हटाया गया
- कंपीटेंसी-आधारित प्रश्न पत्र लागू होंगे
- रट्टेबाजी की बजाय सोचने की क्षमता पर जोर
- नकल रोकने के लिए नए पेपर पैटर्न











