Kewal Singh Dhillon Political Career: भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए प्रसिद्ध उद्योगपति और बरनाला के पूर्व विधायक केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। पिछले दो दशकों से पंजाब की राजनीति में सक्रिय और प्रदेश के सबसे अमीर राजनेताओं में शुमार ढिल्लों को भाजपा ने मालवा क्षेत्र में एक मजबूत ‘जट्ट सिख’ चेहरे के रूप में आगे लाया है।
देखा जाए तो यह नियुक्ति महज एक संगठनात्मक बदलाव नहीं है। यह भाजपा की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें पंजाब में पार्टी को मजबूत करने के लिए एक स्थानीय, अनुभवी और किसानों से जुड़े नेता को आगे लाया गया है।
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टल्लेवाल के किसान परिवार से पेप्सिको तक का सफर
बरनाला के पिंड टल्लेवाल के एक किसानी परिवार से उठकर पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनी के साथ सफल व्यापारिक सफर तय करने वाले केवल ढिल्लों की यह नियुक्ति पंजाब भाजपा के भविष्य के समीकरणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समझने वाली बात है कि ढिल्लों सिर्फ राजनेता नहीं हैं, वे एक सफल कारोबारी भी हैं। उन्होंने कृषि आधारित व्यवसाय में अपनी पहचान बनाई और पेप्सिको के साथ अनुबंध कर आलू और अन्य फसलों की खेती में क्रांति लाई।
2007 में तोड़ा 33 साल का अकाली दल का गढ़
साल 2022 में कांग्रेस द्वारा पार्टी से निकाले जाने के बाद भाजपा में शामिल हुए 76 वर्षीय केवल ढिल्लों ने अपनी राजनीतिक लियाकत के दम पर आज प्रदेश अध्यक्ष का शिखर पद हासिल कर लिया है।
केवल सिंह ढिल्लों ने 2006 में अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस पार्टी से शुरू किया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय उन्होंने 2006 में बरनाला को जिला बनवाया और बाद में बरनाला की राजनीति में सक्रिय हो गए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 2007 में उन्हें कांग्रेस ने बतौर कांग्रेसी उम्मीदवार बरनाला विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा और उन्होंने एकदम 33 साल का शिरोमणि अकाली दल का गढ़ तोड़ दिया।
इससे पहले सिर्फ एक बार विधानसभा चुनावों में पंथक धड़ों द्वारा बहिष्कार किए जाने के कारण 1992 में कांग्रेस जीती थी। जबकि इससे पहले यहां पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला, उनकी पत्नी और पूर्व विधायक मलकीत सिंह कीतू जीतते रहे हैं।
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2007 से 2017: लगातार दो बार विधायक
केवल ढिल्लों 2007 से 2017 के दौरान अकाली सरकार के समय दो बार बरनाला से जीते। उन्होंने अपने कार्यकाल में विकास के कई काम किए और बरनाला के लोगों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।
दिलचस्प बात यह है कि अकाली दल की सरकार होने के बावजूद कांग्रेस के ढिल्लों लगातार जीतते रहे। यह उनकी जमीनी मजबूती का प्रमाण है।
2017 और 2019 में मिली हार
उन्होंने 2017 की विधानसभा और 2019 की संगरूर लोक सभा से कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ी लेकिन वे हार गए। यह उनके राजनीतिक करियर का कठिन दौर था।
2017 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी थी लेकिन ढिल्लों व्यक्तिगत रूप से हार गए। इसके बाद 2019 में उन्हें संगरूर से लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला, लेकिन वहां भी सफलता नहीं मिली।
2022 में कांग्रेस से टकराव, पार्टी से निष्कासन
2022 की चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने केवल ढिल्लों को विधानसभा की टिकट नहीं दी। उनकी जगह केंद्रीय रेल मंत्री पवन बांसल के पुत्र मनीष बांसल को कांग्रेसी उम्मीदवार बनाया गया।
यह वह समय था जब भदौड़ से पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी चुनाव लड़ने आए थे। ढिल्लों की टिकट काटे जाने के बाद चन्नी और पवन बांसल उन्हें मनाने घर भी गए लेकिन ढिल्लों टिकट काटे जाने के कारण अपने घर बैठ गए।
अगर गौर करें तो यह उनके आत्मसम्मान का सवाल था। एक ऐसे नेता जिसने बरनाला को जिला बनवाया, जो दो बार विधायक रहे, उन्हें टिकट न देना कांग्रेस की बड़ी भूल थी।
इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का दोष लगाकर कांग्रेस से निकाल दिया।
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71 की उम्र में भी नहीं मानी हार, भाजपा में नई शुरुआत
71 साल की उम्र के बावजूद केवल ढिल्लों ने कांग्रेस पार्टी से निकाले जाने पर हार नहीं मानी और उन्होंने 2022 में भाजपा से नई पारी की शुरुआत की।
कहने का मतलब साफ है कि ढिल्लों एक फाइटर हैं। उम्र सिर्फ एक नंबर है, असली चीज है जुनून और जीतने की चाहत।
संगरूर उपचुनाव 2022 में भाजपा उम्मीदवार
2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार के मौके भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के कारण उन्हें संगरूर लोकसभा से इस्तीफा देना पड़ा और इस सीट पर उपचुनाव हुआ।
इस दौरान केवल ढिल्लों भाजपा के उम्मीदवार बने और चुनाव लड़ी लेकिन असफल रहे। हालांकि, उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
बरनाला उपचुनाव 2024: भाजपा को 17% वोट
इसके बाद 2024 में बरनाला से विधायक और मंत्री मीत हेयर के लोकसभा सदस्य बनने के बाद बरनाला सीट पर उपचुनाव हुआ। 2024 में प्रदेश की चार उपचुनावों में से बरनाला सीट पर भाजपा को सबसे अधिक वोट और 17 फीसदी वोट के साथ वे तीसरे नंबर पर रहे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शिरोमणि अकाली दल इस चुनाव में पांचवें नंबर पर रहा। यहां तक कि भाजपा हलके के दो गांवों में लीड करने में भी कामयाब रही।
यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है क्योंकि बरनाला किसानी आंदोलन का गढ़ रहा है और वहां भाजपा के खिलाफ काफी नाराजगी थी।
बरनाला: किसानी आंदोलन का गढ़
बरनाला पंजाब के सबसे बड़े क्षेत्र मालवा का केंद्र है और किसानी का गढ़ है। किसान संगठन और किसानी संघर्ष सबसे अधिक इस इलाके में सक्रिय है।
यहां किसानी विरोध के दौरान केवल ढिल्लों अच्छी वोट लेने में कामयाब रहे। इसी कारण केवल सिंह ढिल्लों एक जट्ट सिख और किसानी चेहरे के रूप में भाजपा के लिए बतौर पंजाब अध्यक्ष चुने गए लगते हैं।
विकास की राजनीति के पैरोकार
केवल ढिल्लों अपने हर भाषण में विकास के मुद्दे की राजनीति की बात करते हैं। उनके राजनीतिक कैरियर में कोई बड़ा विवाद भी नहीं जुड़ा है।
बरनाला को जिला बनाने से लेकर वहां के विकास में उनका काफी प्रभाव माना जाता रहा है। भले ही वे 4 चुनाव हार गए लेकिन इसके बावजूद वे बरनाला की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
समझने वाली बात है कि लोग उनकी ईमानदारी और विकास के प्रति समर्पण को पहचानते हैं।
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पंजाब के सबसे अमीर नेताओं में शुमार
केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब के अमीर नेताओं में से एक माना जाता है। 2024 की बरनाला उपचुनाव के दौरान चुनाव आयोग को दिए संपत्ति के विवरण के अनुसार वे कुल 57 करोड़ 53 लाख 81 हजार 640 रुपये की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उनके पास:
- करीब 10 लाख रुपये की महंगी घड़ियां
- 3 लाख 82 हजार रुपये के हीरे
- 1 करोड़ 31 लाख 90 हजार 408 रुपये का सोना
उनकी चंडीगढ़, दिल्ली, गुड़गांव में संपत्तियां हैं जिनकी कुल बाजार कीमत 35 करोड़ 77 लाख 98 हजार 969 रुपये बताई गई है।
इसके अलावा उनकी पत्नी भी 1 अरब 54 करोड़ 58 लाख 99 हजार 203 रुपये की संपत्ति की मालिक हैं।
यह दर्शाता है कि ढिल्लों एक सफल व्यवसायी हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से यह संपत्ति बनाई है।
जमीन से जुड़े रहने वाले नेता
अपनी इतनी संपत्ति के बावजूद ढिल्लों जमीन से जुड़े हुए नेता हैं। वे आज भी अपने गांव में रहते हैं और किसानों के बीच जाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे अमीर हैं लेकिन गरीबों और किसानों की समस्याओं को समझते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- केवल सिंह ढिल्लों बरनाला के टल्लेवाल गांव के किसान परिवार से हैं, पेप्सिको के साथ सफल व्यवसाय किया
- 2007 में 33 साल का शिरोमणि अकाली दल का गढ़ तोड़ा, लगातार दो बार विधायक रहे
- 2022 में कांग्रेस ने टिकट नहीं दी, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाला
- 71 की उम्र में भाजपा में शामिल हुए, संगरूर उपचुनाव 2022 में पार्टी उम्मीदवार
- बरनाला उपचुनाव 2024 में भाजपा को 17% वोट, तीसरे नंबर पर, अकाली दल पांचवें पर
- 57 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति के मालिक, पंजाब के सबसे अमीर नेताओं में शुमार
- बरनाला को जिला बनवाने में अहम भूमिका, विकास की राजनीति के पैरोकार
- मालवा क्षेत्र में मजबूत जट्ट सिख चेहरे के रूप में भाजपा अध्यक्ष बनाए गए













