Punjab MC Elections Polling Trend: पंजाब में हुए नगरपालिका चुनावों में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है। नगर पंचायतों ने पोलिंग दर में नगर निगमों की पीठ लगा दी है। दायरे के लिहाज से नगर पंचायतें छोटी हैं, पर उनकी पोलिंग दर का दायरा बड़ा है। दूसरी ओर, नगर निगम कद के लिहाज से तो बड़े हैं पर उनकी पोलिंग फीसदी काफी कम रही।
देखा जाए तो यह पंजाब की राजनीति का एक पुराना ट्रेंड है – ग्रामीण इलाके हमेशा शहरी क्षेत्रों से ज्यादा वोट डालते हैं। लेकिन इस बार का अंतर काफी चौंकाने वाला है।
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नगर पंचायतों ने बनाया रिकॉर्ड
कल पंजाब में 8 नगर निगमों, 75 नगर कौंसलों और 19 नगर पंचायतों के लिए वोट डाले गए। सबसे ज्यादा पोलिंग दर नगर पंचायतों की 76.18 फीसदी रही जबकि नगर निगमों की पोलिंग दर सिर्फ 59.91 फीसदी ही रही।
समझने वाली बात है कि यह अंतर करीब 16 फीसदी का है, जो काफी बड़ा माना जाता है। यह इस बात का संकेत है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग स्थानीय चुनावों को ज्यादा गंभीरता से लेते हैं।
| चुनाव का प्रकार | पोलिंग दर |
|---|---|
| नगर पंचायतें | 76.18% |
| नगर कौंसल | लगभग 70% (औसत) |
| नगर निगम | 59.91% |
पठानकोट निगम में सबसे ज्यादा, मोहाली में सबसे कम
पंजाब राज्य चुनाव आयोग द्वारा आज जारी किए गए विस्तृत विवरण के अनुसार, नगर निगमों में से पठानकोट निगम में सबसे ज्यादा 67.62 फीसदी पोलिंग हुई जबकि सबसे कम मोहाली निगम में 54.62 फीसदी पोलिंग रही।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पठानकोट अपेक्षाकृत छोटा शहर है और वहां ग्रामीण परिवेश का असर अभी भी है, जबकि मोहाली एक आधुनिक शहरी क्षेत्र है जहां लोग स्थानीय चुनावों में कम दिलचस्पी दिखाते हैं।
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नगर निगमों की पोलिंग दर:
| निगम का नाम | पोलिंग दर |
|---|---|
| पठानकोट | 67.62% |
| बरनाला | 63.51% |
| कपूरथला | 61.31% |
| अबोहर | 60.05% |
| बटाला | 58.60% |
| बठिंडा | 58.45% |
| मोगा | 58.34% |
| मोहाली | 54.62% |
बठिंडा और बरनाला की कौंसलों में उच्च मतदान
नगर कौंसलों की बात करें तो पंजाब भर में जिला बठिंडा की कौंसलों में सबसे ज्यादा 78.99 फीसदी वोट पड़े। दूसरे नंबर पर जिला बरनाला की कौंसलों में 77.99 फीसदी पोलिंग रही।
दिलचस्प बात यह है कि मोहाली जिले की कौंसलों की पोलिंग दर सबसे कम 55.95 फीसदी रही। यह फिर से शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच के अंतर को दर्शाता है।
अगर गौर करें तो बठिंडा और बरनाला दोनों ही मालवा क्षेत्र के जिले हैं जहां पारंपरिक रूप से मतदान प्रतिशत ऊंचा रहता है। यहां के लोग राजनीति में सक्रिय भागीदारी करते हैं।
मानसा में रिकॉर्ड 84.60% मतदान
नगर पंचायतों में जिला मानसा पहले नंबर पर रहा जहां 84.60 फीसदी पोलिंग हुई। दूसरे नंबर पर रूपनगर जिले में 83.96 फीसदी पोलिंग रही। सबसे कम जिला अमृतसर में 53.06 फीसदी रही।
यहां समझने वाली बात है कि अमृतसर एक बड़ा शहरी जिला है और यहां की नगर पंचायतें भी अपेक्षाकृत शहरी परिवेश वाली हैं, इसलिए वहां मतदान कम रहा।
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जोगा नगर पंचायत बनी चैंपियन
नगर पंचायत जोगा सबसे आगे रही जहां की पोलिंग दर 85.33 फीसदी रही। जोगा के वार्ड नंबर 4 में पोलिंग दर 91.97 फीसदी रही जबकि वार्ड नंबर 10 में पोलिंग दर 90 फीसदी रही।
कहने का मतलब साफ है कि जोगा के किसी भी वार्ड में 81 फीसदी से कम पोलिंग नहीं हुई। यह एक असाधारण उपलब्धि है जो लोकतांत्रिक भागीदारी का बेहतरीन उदाहरण है।
और भी दिलचस्प बात यह है कि जोगा के वार्ड नंबर 6 और 11 में तो पुरुषों से ज्यादा वोट महिलाओं ने डाले। यह महिला सशक्तीकरण का एक सकारात्मक संकेत है।
शहरी वोटर ने गर्मी में घर से निकलने से किया गुरेज
नगर पंचायतों का क्षेत्र ज्यादा ग्रामीण पृष्ठभूमि वाला होता है जिस कारण इनमें सबसे ज्यादा पोलिंग दर रही। जबकि शहरी वोटरों ने गर्मी में घर से बाहर निकलने से गुरेज किया।
राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि हमेशा ही पोलिंग दर ग्रामीण क्षेत्र में ऊंची रहती है जबकि शहरी वोटर, खासकर उच्च तबका, वोट डालने को प्राथमिकता नहीं देता।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि समूचे पंजाब में कुल पोलिंग दर 64 फीसदी के करीब रही जबकि साल 2021 की चुनावों में यही पोलिंग दर 73.53 फीसदी थी। लेकिन उस वक्त वोट फरवरी महीने में डाले गए थे जबकि इस बार गर्मी के कारण मतदान प्रभावित हुआ।
गर्मी का असर, 2021 से 9% कम मतदान
इस बार की गर्मी ने मतदान पर असर डाला है। 2021 के मुकाबले इस बार करीब 9-10 फीसदी कम मतदान हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चुनाव फरवरी-मार्च में होते तो मतदान प्रतिशत और अच्छा होता।
अगर गौर करें तो खासकर शहरी क्षेत्रों में गर्मी ज्यादा प्रभावित करती है क्योंकि वहां AC की सुविधा होने के कारण लोग घर से बाहर निकलना कम पसंद करते हैं।
ग्रामीण बनाम शहरी: एक विश्लेषण
यह चुनाव परिणाम एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है – क्यों ग्रामीण इलाके शहरी क्षेत्रों से ज्यादा सक्रिय हैं?
पहला कारण यह है कि ग्रामीण इलाकों में स्थानीय चुनाव ज्यादा महत्व रखते हैं क्योंकि वहां के लोग स्थानीय प्रतिनिधियों से सीधे जुड़े होते हैं। दूसरा, शहरों में लोगों की व्यस्तता और उदासीनता ज्यादा है। तीसरा, ग्रामीण समाज में सामुदायिक दबाव भी एक कारक है।
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मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब में 8 नगर निगमों, 75 नगर कौंसलों और 19 नगर पंचायतों के लिए मतदान हुआ
- नगर पंचायतों में सबसे ज्यादा 76.18% पोलिंग, नगर निगमों में सिर्फ 59.91%
- पठानकोट निगम में सबसे ज्यादा 67.62%, मोहाली में सबसे कम 54.62% मतदान
- बठिंडा जिले की कौंसलों में 78.99%, बरनाला में 77.99% पोलिंग
- मानसा जिले की नगर पंचायतों में 84.60%, जोगा में रिकॉर्ड 85.33% वोटिंग
- जोगा के वार्ड 4 में 91.97%, वार्ड 10 में 90% मतदान
- वार्ड 6 और 11 में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले
- 2021 में 73.53% के मुकाबले इस बार 64% मतदान, गर्मी का असर













