Bribery Case: रिश्वत कांड में गिरफ्तार मलोट निवासी विकास गोयल की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। न्यायिक हिरासत में रहते हुए उनकी सेहत में गिरावट आने के बाद उन्हें चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है। देखा जाए तो यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी आरोपी की जांच एजेंसियों की हिरासत में तबीयत खराब हुई हो।
विकास गोयल के साथ उनके बेटे राघव गोयल और ड्राइवर अंकित वढवा भी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। सूत्रों के मुताबिक, विकास गोयल कई शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि उनकी तबीयत खराब होने के सटीक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है।
🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Vigilance Bureau: रिश्वत लेते ASI को रंगे हाथों दबोचा, खुला चौंकाने वाला मामला
अस्पताल से ही पूरी की कोर्ट में पेशी
दिलचस्प बात यह है कि बीते दिन जब CBI कोर्ट में विकास गोयल की पेशी थी, तो उन्होंने अस्पताल से ही वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में हाजिरी लगाई। यह साफ दर्शाता है कि उनकी सेहत इतनी नाजुक हो चुकी है कि वे अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित होने की स्थिति में नहीं हैं।
अगर गौर करें तो पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां हिरासत में लिए गए आरोपियों या जांच के दायरे में आए लोगों की तबीयत अचानक खराब हो गई।
13 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए हुई थी गिरफ्तारी
याद रहे कि CBI ने 11 मई को मलोट के विकास गोयल, उनके बेटे राघव गोयल और ड्राइवर अंकित वढवा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इन तीनों को मलोट के ही एक टैक्स अधिकारी से 13 लाख रुपए की नकदी और एक सैमसंग मोबाइल फोन रिश्वत के रूप में लेते हुए पकड़ा गया था।
जांच में यह बात सामने आई कि मलोट का यह पिता-पुत्र की जोड़ी विजिलेंस ब्यूरो के कथित बिचौलिए के रूप में काम करती थी। ये लोग टैक्स अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों से पैसे वसूल कर उन्हें विजिलेंस की कार्रवाई से बचाने का वादा करते थे।
🔍 यह भी पढ़ें- Vigilance Bureau Punjab ने Patwari को ₹4,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा
भुल्लर ने भी मांगा था जेल में गद्दा
समझने वाली बात यह है कि यह सिलसिला केवल विकास गोयल तक ही सीमित नहीं है। इससे पहले CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर ने भी न्यायिक हिरासत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत की थी।
11 नवंबर 2025 को हरचरण सिंह भुल्लर ने पीठ के दर्द का हवाला देते हुए जेल में गद्दे की मांग की थी। उनका कहना था कि पीठ दर्द के कारण वे फर्श पर सो नहीं सकते और उन्हें विशेष चिकित्सीय सुविधा की जरूरत है।
मोहाली के बिल्डर भी बीमार, कोर्ट ने दिए निर्देश
इसी तरह एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) द्वारा हिरासत में लिए गए मोहाली के बिल्डर अजय सहगल की तबीयत भी ठीक नहीं है। जब ED ने अजय सहगल को मोहाली की अदालत में पेश किया, तो उनके वकील ने अदालत में अर्जी दी कि आरोपी कई बीमारियों से पीड़ित है और उसे नियमित दवाइयों की सख्त जरूरत है।
इस पर मोहाली की अदालत ने ED को निर्देश दिए कि आरोपी का सरकारी डॉक्टर से मुआयना कराया जाए और डॉक्टर की सिफारिश के अनुसार जरूरी चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
💡 यह भी पढ़ें- Rule Change From 1st March 2026: LPG, CNG, WhatsApp, UPI, Train Ticket – जानें क्या सस्ता क्या महंगा
राजनीतिक नेताओं की भी पुरानी आदत
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के पास भी ऐसी कई मिसालें हैं जब किसी राजनीतिक नेता या खास शख्सियत को तलब किया जाता है तो वह कोई न कोई बीमारी होने का हवाला देकर पेशी से बचने की कोशिश करता है।
जब विजिलेंस ने शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार भरतइंदर सिंह चाहल को तलब किया था, तो उन्होंने दिल की बीमारी होने की बात कही थी और बकायदा मेडिकल सर्टिफिकेट भी भेजा था।
पूर्व मंत्रियों के दिलचस्प उदाहरण
इसी प्रकार जब पूर्व माल मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ को विजिलेंस ने तलब करने के बाद संपत्ति के ब्योरे वाला प्रोफॉर्मा भेजा था, तो उन्होंने घुटनों का ऑपरेशन कराए जाने की दलील देकर मोहलत मांगी थी।
पूर्व मंत्री ओ पी सोनी की जब विजिलेंस के पास पेशी हो रही थी, तो उन्होंने खुद को शुगर का मरीज बताया था। वहीं पूर्व मंत्री ब्रह्म महिंद्रा भी विजिलेंस के पास जांच के दौरान कई बीमारियों का हवाला दे चुके हैं।
क्या सच में बीमार हैं या बचाव की तरकीब?
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जांच एजेंसियों के पास जांच शुरू होने के बाद राजनीतिक और खास लोगों की अक्सर तबीयत बिगड़ जाती है। बेशक इन बीमारी के दावों में सच्चाई भी हो सकती है, लेकिन ऐसा impression बन गया है कि लोग यकीन करने को तैयार नहीं होते।
कई बार ऐसा लगता है कि यह जांच से बचने या देरी करने की एक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि कानूनी तौर पर हर आरोपी को चिकित्सीय सुविधा पाने का अधिकार है और अदालतें भी इस मामले में काफी संवेदनशील रुख अपनाती हैं।
💡 यह भी पढ़ें- Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जानें ताजा भाव Gold Price Today Forecast
कानूनी पक्ष और मानवीय अधिकार
कहने का मतलब साफ है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा अपराधी क्यों न हो, उसे बुनियादी चिकित्सीय सुविधाएं मिलनी ही चाहिए। यह मानवीय अधिकारों का हिस्सा है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि इस अधिकार का दुरुपयोग न हो और जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
अब देखना यह होगा कि विकास गोयल की सेहत में कितनी जल्दी सुधार होता है और CBI की जांच आगे किस तरह बढ़ती है। इस मामले में अभी कई और खुलासे होने बाकी हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- रिश्वत कांड में फंसे मलोट के विकास गोयल की तबीयत बिगड़ी, चंडीगढ़ के सेक्टर 32 अस्पताल में भर्ती
- CBI ने 11 मई को विकास गोयल, उनके बेटे राघव और ड्राइवर को 13 लाख रुपए और मोबाइल रिश्वत लेते पकड़ा था
- यह तीनों विजिलेंस के कथित बिचौलिए के रूप में काम करते थे
- हिरासत में तबीयत खराब होने का यह पहला मामला नहीं – DIG भुल्लर, बिल्डर अजय सहगल और कई पूर्व मंत्रियों ने भी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया
- जांच के दौरान आरोपियों का बीमार पड़ना आम pattern बन गया है, हालांकि सभी को चिकित्सीय सुविधा का कानूनी अधिकार है










