Exam Scam India 2026: “अब नहीं देना है कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन।” लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय रतिक मिश्रा के यह आखिरी शब्द थे। तीसरी बार NEET परीक्षा देने वाला यह होनहार छात्र परीक्षा कैंसिल होते ही टूट गया। देखा जाए तो यह आत्महत्या नहीं, बल्कि भारत की भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था द्वारा की गई हत्या है। और रतिक अकेला नहीं है – गोवा, कोटा और देश के कोने-कोने से ऐसी ही दर्दनाक खबरें आ रही हैं।
यह केवल NEET या UPSC की कहानी नहीं है। यह उस पूरे पाखंड का पर्दाफाश है जिसे हम “मेरिट” कहते हैं। 2015 से 2026 के बीच 148 परीक्षा घोटाले हुए हैं। 87 परीक्षाएं रद्द की गईं। करीब 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ। और सबसे चौंकाने वाली बात – इन 148 घोटालों में सजा सिर्फ एक को हुई।
CBI ने 17 मामले दर्ज किए। ED ने 11 मामले दर्ज किए। लेकिन किसी को भी सजा नहीं मिली। अगर गौर करें तो NEET और AIPMT जैसी मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले हो चुके हैं।
कोटा का डेथ मीटर: आंकड़े जो रुला देते हैं
कोटा – देश की कोचिंग राजधानी – आज मौत की राजधानी बन चुकी है। 2023 में 26 छात्रों ने आत्महत्या की। 2024 में यह संख्या घटकर 17 हुई। लेकिन 2025 से अब तक 14 से अधिक छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं।
समझने वाली बात यह है कि ये आत्महत्याएं नहीं हैं। यह एक ऐसी व्यवस्था द्वारा की गई हत्याएं हैं जो मेरिट के नाम पर करोड़ों युवाओं को निराशा के अंधेरे में धकेल देती है। और जब इस अंधेरे में पेपर लीक और भ्रष्टाचार की रोशनी भी छीन ली जाती है, तो बच्चे टूट जाते हैं।
NEET UG 2026: NTA के भीतर से हुआ पेपर लीक
3 मई 2026 को 22 लाख छात्रों ने NEET UG की परीक्षा दी। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि खेल चार दिन पहले ही शुरू हो चुका था। 29 अप्रैल को Telegram पर 500-600 सवालों का एक PDF फाइल घूम रही थी।
जब राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने छापा मारा, तो पता चला कि उस PDF के 120-140 सवाल असली पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे। लेकिन सबसे घिनौना मोड़ तब आया जब CBI ने दिल्ली कोर्ट में अपनी सबमिशन दी।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। CBI ने बताया कि लीक किसी बाहरी हैकर की करतूत नहीं थी। यह रास्ता NTA (National Testing Agency) के भीतर से बनाया गया था। पुणे के एक कॉन्ट्रैक्टर के जरिए शुभम खैरनार नाम के आरोपी तक पेपर पहुंचा और पूरी साजिश का केंद्र था NTA की पेपर सेटिंग कमेटी का खुद का बायोलॉजी लेक्चरर।
जासूस घर के भीतर बैठा था। और NTA 7 मई तक सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहा था – “परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। घबराइए नहीं।”
NEET घोटालों की भयावह टाइमलाइन
| वर्ष | घटना | परिणाम |
|---|---|---|
| 2015 | AIPMT पेपर लीक, ब्लूटूथ डिवाइस से नकल | सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द की |
| 2021 | परीक्षा के 30 मिनट पहले सोशल मीडिया पर पेपर लीक | जांच चली, सजा नहीं हुई |
| 2024 | ग्रेस मार्क्स स्कैंडल | सुप्रीम कोर्ट में हफ्तों तक सुनवाई |
| 2026 | NTA का अपना कर्मचारी गिरफ्तार | 21 जून से Re-NEET का आदेश |
एक छात्र की कल्पना कीजिए। क्लास 9वीं से तैयारी शुरू करता है। कोटा जाता है। किसी बड़े संस्थान में एडमिशन लेता है, जहां 2 साल की महज ट्यूशन फीस ₹1,33,000 से ₹4,20,000 तक होती है। हॉस्टल और खाने का खर्च जोड़ें तो हर परिवार को ₹1.5 से ₹3 लाख प्रति वर्ष खर्च करने पड़ते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि इस व्यवस्था में सफलता की दर भी देखिए – मात्र 4.3%। यानी 23 लाख बच्चों में से सिर्फ 1 लाख सेलेक्ट होते हैं। 22 लाख बच्चों का फेल होना तय था।
व्यवस्था इसे सिलेक्शन नहीं, बल्कि एक क्रूर रिजेक्शन फिल्टर की तरह इस्तेमाल करती है। और जब इस रिजेक्शन फिल्टर में भी ₹30-50 लाख पर पेपर की दलाली घुस जाती है, तो एक ईमानदार बच्चा कहां जाए?
UPSC: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में फर्जीवाड़ा
UPSC (Union Public Service Commission) – देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था जो सिविल सेवा परीक्षा कराती है। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का मुकुट। लेकिन यहां भी भ्रष्टाचार ने अपनी जड़ें जमा ली हैं।
पूजा खेडकर केस (2022):
वर्ष 2022 की परीक्षा में पूजा खेडकर को रैंक 841 मिली। उन्होंने नॉन-क्रीमी लेयर OBC कोटे का लाभ लिया। आय बताई ₹8 लाख से कम। लेकिन सच्चाई यह थी कि उनके पिता ने 2014 के चुनावों में एफिडेविट में ₹40 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी।
इसके अलावा उन्होंने:
- PWD (दिव्यांगता) कोटे के तहत मानसिक बीमारी, लो विजन और लोकोमोटिव इम्पेयरमेंट जैसी अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग फॉर्म भरे
- अटेम्प्ट सीमा 9 है, लेकिन चीजें बदल-बदलकर करीब 12 बार परीक्षा दी
- सितंबर 2024 में भारत सरकार के DOPT ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया
लेकिन 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी। यह कहते हुए कि उन्होंने “कोई गंभीर अपराध नहीं किया है” और वह “कोई ड्रग लॉर्ड या आतंकवादी नहीं हैं।”
सवाल यह है – वह एक सीट जो किसी वास्तविक OBC या दिव्यांग छात्र के हिस्से में आ सकती थी, उसका हक किसने मारा? और उसकी जवाबदेही किसकी है?
22 IAS-IPS अधिकारियों पर फर्जी सर्टिफिकेट का आरोप
RTI एक्टिविस्ट विजय कुमार ने DOPT को 22 ऐसे IAS, IPS और IRS अधिकारियों की सूची सौंपी है जिन्होंने 2015-2023 के बीच फर्जी EWS, SC, ST, OBC और दिव्यांगता सर्टिफिकेट के दम पर UPSC क्रैक किया है।
सिविल सर्विस परीक्षा 2004 से 2020 में 1,009 अभ्यर्थी सफल हुए और उनमें से कम से कम 40 पर शक की सुई है। दस्तावेजों की स्क्रूटनी चल रही है।
आप सोचिए – फर्जी दस्तावेज लगाकर इस देश में आप IAS बन सकते हैं! और यही लोग देश में नीतियां बनाते हैं, जिलों को चलाते हैं।
SSC (Staff Selection Commission): सुपर स्कैम कमीशन
केंद्र सरकार की ग्रुप B और ग्रुप C की नौकरियां देने वाली Staff Selection Commission को छात्र आज “सुपर स्कैम कमीशन” कहते हैं। हर साल 2 करोड़ से अधिक युवा यहां आवेदन करते हैं।
21 फरवरी 2018 को SSC CGL Tier-2 की गणित परीक्षा के दौरान पेपर लीक हो गया। प्रश्न पत्रों के स्क्रीनशॉट Facebook पर लाइव तैर रहे थे।
CBI की जांच में पता चला कि SSC एक प्राइवेट वेंडर (सिफी टेक्नोलॉजीज) से परीक्षा कंडक्ट कराती थी। पूरा मामला आउटसोर्स था और SSC का उसके सर्वर पर कोई नियंत्रण नहीं था। यानी जिसे सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी के कर्मचारियों ने पेपर बाजार में बेच दिया।
जब छात्र मार्च 2018 और जुलाई 2025 में इसके खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने गए, तो व्यवस्था ने उन्हें न्याय नहीं दिया। उनके ऊपर लाठियां बरसाईं। प्रसिद्ध कोचिंग की मैडम और टीचर्स को पुलिस द्वारा सड़कों पर घसीटा गया।
एक वायरल वीडियो में एक शिक्षक ने पुलिस वाले से पूछा – “तुम हमारे सवालों से क्यों डरते हो?” पुलिस वाले ने कहा – “तुम वर्दी पहनो, फिर बात करो।” शिक्षक ने जवाब दिया – “एक बार शिक्षक बनकर देखो, तब समझोगे।”
यह संवाद इस देश के परीक्षा तंत्र की असंवेदनशीलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
राज्य स्तरीय भर्ती घोटाले: UP, बिहार, झारखंड
राज्यों की स्थिति तो और भी बदतर है। UP, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान – कौन से राज्य की बात करें?
उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती (फरवरी 2024):
17-18 फरवरी 2024 को UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया। 60,244 पदों के लिए 48 लाख बच्चों ने परीक्षा दी। पूरा पेपर WhatsApp पर लीक हो गया। STF ने छापेमारी की। बिहार से आए “साल्वर गैंग” पकड़े गए। परीक्षा रद्द कर दी गई। 48 लाख बच्चों को एक बार फिर उसी अनिश्चित अंधेरे में धकेल दिया गया।
संजीव मुखिया: पेपर लीक का बेताज बादशाह
इस पूरे इंटरस्टेट सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है? बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला एक पूर्व टेक्निकल असिस्टेंट – संजीव कुमार सिंह उर्फ संजीव मुखिया।
यह अकेला आदमी एक पूरी समानांतर इंडस्ट्री चलाता है:
- NEET 2024 पेपर लीक का मुख्य आरोपी
- BPSC शिक्षक भर्ती टीईटी-3 का मास्टरमाइंड
- UP कांस्टेबल भर्ती घोटाले में भी शामिल
- CBI के FIR में नाम दर्ज
- बिहार में ₹10 लाख का इनाम घोषित
- पांच राज्यों में सिंडिकेट फैला हुआ
और सबसे चौंकाने वाली बात – आज भी वह खुलेआम फरार है।
राजस्थान, गुजरात, असम में भी पेपर लीक
- राजस्थान: 2015-2023 के बीच 14 बड़े पेपर लीक
- गुजरात: 14 से अधिक घटनाएं
- असम: मार्च 2025 में क्लास 9वीं और 11वीं के बोर्ड पेपर्स लीक
पेपर लीक इको-सिस्टम: जड़ों तक भ्रष्टाचार
अब इस पूरे मैकेनिज्म को समझिए। यह ढहती मीनार को ऊपर से नहीं, बल्कि इसकी जड़ों से देखना होगा।
1. NTA: बिना नींव का महल
2017 में NTA का गठन हुआ। लेकिन सच यह है कि इतने सालों बाद भी NTA के पास:
- कोई स्थाई टेक्निकल-प्रशासनिक कैडर नहीं है
- पूरी संस्था डेप्युटेशन और कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ पर चलती है
- ना अपना प्रिंटिंग प्रेस है, ना अपना सुरक्षित सर्वर
देश के 22 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी संस्था के भरोसे छोड़ा है जिसके पास अपना बुनियादी ढांचा ही नहीं है!
2. प्राइवेट वेंडर का नेक्सस: सोची-समझी साठगांठ
परीक्षाओं का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर निजी कंपनियों को आउटसोर्स कर दिया गया है। दिसंबर 2025 में संसदीय स्थाई समिति की 371वीं रिपोर्ट में खुलासा किया गया:
जिन वेंडर्स को एक राज्य ने पेपर लीक या धांधली के कारण ब्लैकलिस्ट किया था, उन्हीं कंपनियों को दूसरे राज्यों और केंद्र सरकार की परीक्षाओं के लिए गोपनीय टेंडर दे दिए गए।
यह लापरवाही नहीं है। यह सोची-समझी साठगांठ है।
3. कानूनी ढिलाई: स्टेचुटरी बेल का दुरुपयोग
सरकार ने कानून तो बना दिया, लेकिन हमारी कछुआ गति से चलने वाली न्यायिक प्रणाली और चार्जशीट दाखिल करने में जानबूझकर की गई देरी का फायदा उठाकर संजीव मुखिया जैसे बड़े सरगना स्टेचुटरी बेल पाकर बाहर आ जाते हैं और दोबारा नया पेपर लीक करने में जुट जाते हैं।
व्यापम घोटाला: मौत का सिलसिला
मध्य प्रदेश का व्यापम (Vyapam) घोटाला भारत के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक है। इसमें:
- पत्रकार अक्षय सिंह की हत्या हुई (जो एक छात्रा की संदिग्ध मौत को कवरेज करने गए थे)
- नम्रता डाबोर रेलवे ट्रैक पर मृत मिलीं
- 40 से अधिक लोग मरे
लेकिन ढांचा नहीं बदला।
भूमि राजपूत ने NEET के एक रात पहले अपनी जान दे दी। ये कहानियां अलग-अलग हैं। कालखंड अलग है। लेकिन इन सब में एक चीज कॉमन है – एक असंवेदनशील सिस्टम जो इन मौतों के बाद भी नहीं बदला।
समाधान: डॉ. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें
अगर सरकार सच में इस कैंसर को ठीक करना चाहती है, तो उसे डॉ. राधाकृष्णन समिति की अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट की सिफारिशों को तुरंत लागू करना चाहिए:
1. डिजिटल एग्जाम मॉडल:
परीक्षा शुरू होने के ठीक 30 मिनट पहले इंक्रिप्टेड प्रिंट मॉडल। पेपरों को महीनों पहले से प्रिंट करके ट्रकों और लॉकर्स में घुमाना बंद करना होगा। पूरी तरह इंक्रिप्टेड डिजिटल सर्वर पर पेपर हो, जो परीक्षा केंद्र के हाई-स्पीड प्रिंटर्स पर डाउनलोड होकर प्रिंट हो।
2. मल्टीपल शिफ्ट्स:
एक ही दिन में 22 लाख बच्चों की ऑफलाइन परीक्षा कराने की जिद छोड़नी होगी। NEET जैसी परीक्षाओं को भी अलग-अलग शिफ्ट में Computer Based Test के मोड में लाया जाना चाहिए।
3. नेशनल टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर:
निजी स्कूलों और साइबर कैफे को परीक्षा केंद्र बनाना बंद किया जाए। देश के केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों के भीतर AI, Biometric और 5G Geo-Fencing से लैस 1,000 राष्ट्रीय मानक परीक्षा केंद्र बनाए जाएं।
भ्रष्ट परीक्षा तंत्र का दूरगामी प्रभाव
इससे साफ होता है कि यह सिर्फ कुछ लाख छात्रों के भविष्य का सवाल नहीं है। यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रीढ़ का भी सवाल है।
जब एक डॉक्टर ₹30 लाख घूस देकर या पेपर खरीदकर डिग्री लेता है, तो वह अगले 35 साल तक मरीजों की जान से खेलता रहता है।
जब एक IAS अधिकारी फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर नीति निर्माण की कुर्सी पर बैठता है, तो अगले 35 साल तक देश के विभिन्न जिलों में क्या-क्या भ्रष्टाचार करता होगा, आप अंदाजा नहीं लगा सकते।
एक भ्रष्ट परीक्षा तंत्र भविष्य में कितने बड़े भ्रष्टाचार को जन्म देता है, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता।
छात्रों के लिए संदेश: यह तुम्हारी असफलता नहीं
अगर आप एक छात्र हैं और इस वक्त यह खबर पढ़ रहे हैं, तो बहुत ध्यान से समझ लीजिए – यह आपकी असफलता नहीं है। यह पूरे राज्यतंत्र और व्यवस्था की सामूहिक विफलता है।
आप इनसे कहीं बेहतर डिजर्व करते हैं। बहुत बेहतर।
रतिक मिश्रा, भूमि राजपूत, कोटा के वे 14 बच्चे जिन्होंने 2025 में जान गंवाई – ये सब हमारी व्यवस्था की असफलता के शिकार हैं। और जब तक हम इस भ्रष्ट तंत्र को जड़ से नहीं उखाड़ेंगे, ऐसी मौतें होती रहेंगी।
मुख्य बातें (Key Points)
• 2015-2026 के बीच 148 परीक्षा घोटाले हुए, 87 परीक्षाएं रद्द की गईं, 9 करोड़ छात्र प्रभावित हुए
• 148 घोटालों में सिर्फ एक को सजा हुई, CBI ने 17 और ED ने 11 मामले दर्ज किए लेकिन कोई सजा नहीं
• NEET UG 2026 में NTA के भीतर से ही पेपर लीक, शुभम खैरनार और बायोलॉजी लेक्चरर गिरफ्तार
• कोटा में मौतें: 2023 में 26, 2024 में 17, 2025 में 14+ छात्रों ने आत्महत्या की
• पूजा खेडकर (UPSC रैंक 841) ने फर्जी OBC और PWD सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया, 22 और IAS-IPS अधिकारियों पर आरोप
• संजीव मुखिया NEET, BPSC, UP भर्ती घोटालों का मास्टरमाइंड, ₹10 लाख का इनाम, आज भी फरार
• SSC (Staff Selection Commission) में 2018 में सिफी टेक्नोलॉजीज के माध्यम से पेपर लीक
• 48 लाख छात्रों ने UP पुलिस भर्ती दी, WhatsApp पर पेपर लीक, परीक्षा रद्द
• व्यापम घोटाले में 40+ लोगों की मौत, पत्रकार अक्षय सिंह और नम्रता डाबोर की हत्या
• NTA के पास कोई स्थाई कैडर, प्रिंटिंग प्रेस या सुरक्षित सर्वर नहीं, पूरा तंत्र आउटसोर्स










