भगवंत मान सरकार ने आज यूनिफाइड सैंक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (USMS) की शुरुआत करके वित्तीय शासन में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित किया। मैनुअल मंजूरियों की प्रक्रिया को डिजिटाइज करने और इसे राज्य की भुगतान प्रणालियों के साथ निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने इस ई-सैंक्शन मॉड्यूल का औपचारिक उद्घाटन किया।
यह रणनीतिक शुरुआत न केवल पुरानी दस्ती प्रक्रियाओं को सिर से लेकर अंत तक डिजिटल कार्यप्रणाली से बदलती है, बल्कि केंद्रीय दिशा-निर्देशों के भी अनुकूल है, जिससे राज्य के लिए बड़े वित्तीय प्रोत्साहनों के अवसर पैदा होंगे।
देखा जाए तो यह महज एक तकनीकी अपग्रेड नहीं था। यह भ्रष्टाचार और देरी को खत्म करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।
IFMS के साथ Complete Integration – बजट से लेकर Payment तक
यहां म्यूनिसिपल भवन ऑडिटोरियम में ई-सैंक्शन मॉड्यूल की शुरुआत के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “बेहतर वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और सिर से अंत तक डिजिटाइजेशन सुनिश्चित करने के लिए खजाना और लेखा विभाग ने NIC के सहयोग से प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय मंजूरियां ऑनलाइन जारी करने तथा उसके बाद बिल तैयार करने के लिए मंजूरी को ऑटोमैटिक IFMS (Integrated Financial Management System) पर भेजने हेतु एक ई-सैंक्शन मॉड्यूल विकसित किया है।”
समझने वाली बात यह है कि यह सिस्टम पूरी तरह से Integrated Financial Management System के साथ जुड़ा होगा। मतलब एक बार मंजूरी मिलने के बाद वह ऑटोमैटिक रूप से बजट, ट्रेजरी, बिल प्रोसेसिंग और पेमेंट सिस्टम तक पहुंच जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही – हर क्लिक का Audit Trail
ई-सैंक्शन मॉड्यूल के मुख्य लाभों का विवरण देते हुए वित्त मंत्री ने पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, “मंजूरी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को उपयोगकर्ता के विवरण, समय और स्वीकृति श्रृंखला के साथ डिजिटल रूप में रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे एक संपूर्ण ऑडिट ट्रेल बनती है और जवाबदेही में सुधार होता है।”
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने आगे कहा, “यह सिस्टम मंजूरी जारी करने से पहले बजट की उपलब्धता की पुष्टि करता है, जिससे विभागों को अतिरिक्त खर्च से बचने और बजट प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।”
यहां ध्यान देना होगा कि अब कोई भी अधिकारी बजट से ज्यादा खर्च की मंजूरी नहीं दे पाएगा क्योंकि सिस्टम ऑटोमैटिक रोक लगा देगा।
Manual Process पूरी तरह खत्म – Uniformity सभी विभागों में
मंजूरियों के डिजिटाइजेशन के बारे में वित्त मंत्री ने आगे कहा, “ई-सैंक्शन मॉड्यूल को मैनुअल और कागजी कार्यवाही वाली प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रणाली से बदलने के लिए पेश किया गया है, जिससे सरकारी वित्तीय प्रशासन में दक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा।”
“यह मॉड्यूल सभी विभागों में मंजूरी आदेशों के प्रारूप और प्रक्रिया में एकरूपता लाता है, जिससे अनियमितताओं और प्रक्रियागत त्रुटियों में कमी आती है,” उन्होंने कहा।
End-to-End Integration – Clerical Errors खत्म
IFMS के साथ सिर से अंत तक एकीकरण के महत्वपूर्ण पहलू पर मंत्री ने भरोसा दिलाते हुए कहा, “यह मॉड्यूल IFMS के भीतर बजट, खजाना, बिल प्रोसेसिंग और भुगतान प्रणालियों के साथ मंजूरी आदेशों के निर्बाध एकीकरण को सुनिश्चित करता है, जिससे कार्य के दोहराव और मैनुअल हस्तक्षेप में कमी आती है।”
“ऑटोमैटिक सत्यापन, Head of Account, राशि, स्कीम मैपिंग और लाभार्थी विवरणों से संबंधित क्लेरिकल त्रुटियों को कम करता है,” मंत्री ने कहा।
समझने वाली बात यह है कि अब मंजूरी में गलत हेड ऑफ अकाउंट नहीं लिखा जा सकेगा, गलत राशि नहीं भरी जा सकेगी और गलत स्कीम से पैसे नहीं निकाले जा सकेंगे। सब कुछ ऑटोमैटिक चेक होगा।
BFAIR के तहत DLI-3 की अनुपालना – ₹50 करोड़ का प्रोत्साहन
पोर्टल की रणनीतिक शुरुआत के बारे में पृष्ठभूमि बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “इस मॉड्यूल को BFAIR (Budget and Fiscal Analysis for Integrated Reforms) के अंतर्गत DLI-3 की अनुपालना करते हुए विकसित किया गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत सरकार ने पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (SASCI – Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment) 2026-27 हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें विभिन्न घटकों के अंतर्गत कई वित्तीय सुधारों की रूपरेखा दी गई है। इन दिशा-निर्देशों में Directorate of Treasury and Accounts के कार्यालय द्वारा ‘ई-सैंक्शन मॉड्यूल’ को लागू करना शामिल है।”
दिलचस्प बात यह है कि अपने संबोधन के समापन पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस तकनीक के भविष्य के प्रभाव के बारे में अपना दृष्टिकोण साझा किया।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “सफल और पूर्ण रूप से लागू होने पर यह पहल वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियों के डिजिटल निर्माण, स्वीकृति और निगरानी में निर्बाध सिर से अंत तक ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करके राज्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की उम्मीद है और इससे राज्य SASCI दिशा-निर्देशों के तहत ₹50 करोड़ के प्रोत्साहन के लिए भी पात्र बन जाएगा।”
जानें पूरा मामला – पहले कैसे होती थी मंजूरी?
पहले की व्यवस्था में:
- हर मंजूरी मैनुअल रूप से फाइल में लिखी जाती थी
- फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रहती थीं
- कई बार बजट से ज्यादा मंजूरी दे दी जाती थी
- अलग-अलग विभागों में अलग-अलग फॉर्मेट थे
- Audit Trail नहीं था – कौन जिम्मेदार है यह पता नहीं चलता था
- मंजूरी और IFMS में एंट्री अलग-अलग होती थी, जिससे डुप्लीकेशन होता था
नई व्यवस्था में:
- सब कुछ ऑनलाइन होगा
- बजट चेक ऑटोमैटिक होगा
- हर क्लिक का रिकॉर्ड रहेगा
- IFMS से डायरेक्ट इंटीग्रेशन
- समय की बचत, कागज की बचत, भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं
World Bank की टीम ने दी प्रेजेंटेशन
इस उद्घाटन समारोह में विश्व बैंक की टीम द्वारा मॉड्यूल की कार्यप्रणाली पर विशेषज्ञ व्याख्यान तथा NIC टीम द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई।
इससे पता चलता है कि यह मॉड्यूल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाया गया है और विश्व बैंक इसमें तकनीकी सहयोग दे रहा है।
मुख्य बातें
- सिस्टम का नाम: Unified Sanction Management System (USMS)
- उद्घाटन: वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा
- विकासकर्ता: खजाना और लेखा विभाग + NIC
- मुख्य लाभ: मैनुअल प्रक्रिया खत्म, पूर्ण पारदर्शिता
- ऑडिट ट्रेल: हर स्टेप रिकॉर्ड, यूजर डिटेल, समय
- बजट चेक: ऑटोमैटिक, ओवरस्पेंडिंग रुकेगी
- IFMS Integration: बजट से लेकर पेमेंट तक सीमलेस
- यूनिफॉर्मिटी: सभी विभागों में एक फॉर्मेट
- BFAIR अनुपालना: DLI-3 पूरा
- SASCI प्रोत्साहन: ₹50 करोड़ की संभावना
- तकनीकी सहयोग: विश्व बैंक + NIC











