Punjab Canal Relining: पंजाब की नहर प्रणाली भारत की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण सिंचाई प्रणालियों में से एक है। लेकिन पुरानी होने का मतलब है – जर्जर होना, दरारें पड़ना, और खतरा बढ़ना। पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बुधवार को फरीदकोट में Rajasthan Feeder Canal की चल रही रीलाइनिंग परियोजना का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाए।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं है। यह 60 साल बाद हो रहा एक ऐतिहासिक पुनर्निर्माण कार्य है जो हजारों लोगों की जान-माल की सुरक्षा और किसानों की सिंचाई व्यवस्था दोनों को मजबूत करेगा।
बरिंदर गोयल ने बताया कि यह नहर पंजाब के कई गांवों और शहरों के नजदीक से गुजरती है और लगभग 60 वर्ष पुरानी होने के कारण इसकी लाइनिंग काफी जर्जर हो चुकी थी। पिछले समय के दौरान Rajasthan Feeder और Sirhind Feeder के कॉमन बैंक टूटने के कारण आसपास के क्षेत्रों में नुकसान का खतरा बना रहता था।
800 करोड़ की Sirhind Feeder, अब 170 करोड़ की Rajasthan Feeder
और बस यहीं से शुरू होती है एक बड़ी पहल की कहानी। मंत्री ने बताया कि Sirhind Feeder Canal के पुनर्निर्माण का कार्य 800 करोड़ रुपये की लागत से पहले ही पूरा किया जा चुका है। और अब Rajasthan Feeder Canal की रीलाइनिंग पूरी होने के बाद दोनों नहरों के साथ लगते गांवों और शहरों को संभावित जान-माल के नुकसान से बचाया जा सकेगा तथा खेतों को अधिक नहरी पानी उपलब्ध होगा।
समझने वाली बात यह है कि Rajasthan Feeder की 16.62 किलोमीटर लाइनिंग पर लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि इस परियोजना की पृष्ठभूमि में एक लंबा इतिहास है। मंत्री ने बताया कि Rajasthan Feeder Canal की 80 किलोमीटर रीलाइनिंग का कार्य वर्ष 2023 तक सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था। लेकिन नहर बंदी (closure) नहीं मिलने के कारण शेष कार्य पूरा नहीं हो सका था। अब वर्ष 2026 की बंदी के दौरान बाकी बची 16.62 किलोमीटर लाइनिंग का कार्य युद्ध स्तर पर करवाया जा रहा है।
फरीदकोत में ईंटों की लाइनिंग: भूजल रिचार्ज का ख्याल
लेकिन यहां एक बहुत दिलचस्प मोड़ आता है। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि फरीदकोट की सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए फरीदकोट शहर के निकट Rajasthan Feeder की 12.50 किलोमीटर लंबाई में कंक्रीट की बजाय ईंटों की लाइनिंग की जा रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है? ताकि भूजल रिचार्ज को सुनिश्चित किया जा सके।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कंक्रीट की लाइनिंग पानी को पूरी तरह से रोक देती है, जबकि ईंटों की लाइनिंग कुछ पानी को जमीन में रिसने देती है। यह भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करता है।
पंजाब में भूजल की कमी एक बड़ी समस्या है। इसलिए स्थानीय मांग को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया। यह दर्शाता है कि:
• सरकार स्थानीय आवाज सुन रही है
• पर्यावरण और सिंचाई दोनों का संतुलन बनाया जा रहा है
• जन-भागीदारी को महत्व दिया जा रहा है
राजस्थान को उसके हिस्से के अनुसार ही पानी
मंत्री ने एक और महत्वपूर्ण बात कही – रीलाइनिंग कार्य पूरा होने के बाद नहर को उसकी क्षमता के अनुसार चलाया जाएगा और राजस्थान को उसके हिस्से के अनुसार ही पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि:
• पंजाब और राजस्थान के बीच पानी के बंटवारे का एक समझौता है
• जब नहर जर्जर होती है तो पानी का नुकसान होता है
• रीलाइनिंग के बाद पानी की बर्बादी रुकेगी
• पंजाब अपना हिस्सा बचा सकेगा
समझने वाली बात यह है कि यह परियोजना सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा और भूजल संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
6700 करोड़ भूजल बचाने में, नहरी पानी 26% से 78% तक
बरिंदर गोयल ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा दिया – पंजाब सरकार द्वारा भूजल बचाने के लिए 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
और इसका परिणाम? सिंचाई में उपयोग होने वाले नहरी पानी की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 78 प्रतिशत हो गई है।
यह एक विशाल उपलब्धि है। इसका मतलब है:
• पहले 100 में से सिर्फ 26 किसान नहरी पानी से सिंचाई करते थे
• अब 100 में से 78 किसान नहरी पानी से सिंचाई कर रहे हैं
• ट्यूबवेल पर निर्भरता कम हुई
• भूजल का दोहन घटा
मंत्री ने कहा कि इससे किसानों के टेल-एंड के खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है। “टेल-एंड” वे खेत होते हैं जो नहर के सबसे दूर के छोर पर होते हैं और पहले उन तक पानी नहीं पहुंच पाता था।
गोयल ने गर्व से कहा – “आज पंजाब का हर किसान नहरी पानी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहा है।”
फरीदकोट विधायक ने जताया आभार
विधायक फरीदकोट गुरदित्त सिंह सेखों ने फरीदकोट शहर को इतना बड़ा प्रोजेक्ट देने के लिए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल और पंजाब सरकार का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि उनकी मांग पर सरकार ने नहर का बेड कंक्रीट की जगह ईंटों से बनाने का निर्णय लिया, जिसके लिए वे सरकार के आभारी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि विधायक ने कहा कि इन नहरों की रीलाइनिंग से क्षेत्र में “सेम” (शायद “सीम” यानी seepage – रिसाव) की समस्या का स्थायी समाधान होगा।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि जब नहर की दीवारें जर्जर हो जाती हैं तो:
• पानी रिसता है और बर्बाद होता है
• आसपास के इलाकों में जलजमाव होता है
• खेतों में नमक की समस्या बढ़ती है
• इमारतों की नींव कमजोर होती है
मुख्य बातें (Key Points)
• Rajasthan Feeder Canal की 16.62 किमी रीलाइनिंग पर 170 करोड़ रुपये खर्च
• 60 साल बाद हो रहा यह ऐतिहासिक पुनर्निर्माण कार्य
• Sirhind Feeder की रीलाइनिंग पहले ही 800 करोड़ में पूरी हो चुकी
• फरीदकोट शहर के पास 12.50 किमी में कंक्रीट की जगह ईंटों की लाइनिंग (भूजल रिचार्ज के लिए)
• 80 किमी रीलाइनिंग 2023 में पूरी, बाकी 16.62 किमी अब युद्ध स्तर पर
• पंजाब सरकार ने भूजल बचाने में 6,700 करोड़ रुपये खर्च किए
• नहरी पानी की हिस्सेदारी 26% से बढ़कर 78% हुई
• आज हर पंजाब का किसान नहरी पानी से सिंचाई कर रहा
• जान-माल की सुरक्षा और भूजल संरक्षण दोनों लक्ष्य
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