West Bengal SIR Voter Deletion को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में TMC अपनी सत्ता कायम नहीं रख पाई। अब TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी सीधे-सीधे चुनाव में धांधली का आरोप लगा रही हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया है। कहा है कि चुनाव आयोग ने BJP के साथ मिलीभगत करके चुनाव में उन्हें हरा दिया। अपनी दलील को स्थापित करने के लिए पश्चिम बंगाल की लॉन्ग टर्म सर्विंग CM ने SIRE (Special Intensive Revision Exercise) का भी उदाहरण दिया।
ममता ने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIRE के जरिए चुनाव आयोग ने गलत तरीके से वोटर जोड़े-घटाए। इस तरह उन्होंने West Bengal Assembly Election 2026 में अपनी हार का असल कारण BJP और Election Commission of India के कथित फॉल प्ले को बताया।
Indian Express की रिपोर्ट: टॉप 20 सीटों में क्या हुआ?
ऐसे में सवाल आता है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव आयोग ने SIRE के जरिए सबसे ज्यादा वोटर्स डिलीट किए हैं, वहां पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की परफॉर्मेंस कैसी रही? कितनी सीटें TMC जीत पाई और कितनी सीटें इस चुनाव की विजेता भारतीय जनता पार्टी के खाते में गईं?
वोटर डिलीट किए जाने का आंकड़ा जीत की मार्जिन से कहीं ज्यादा तो नहीं? अगर ऐसा है तो कितना और कहां? इन सारे सवालों के जवाब मिलते हैं Indian Express की एक रिपोर्ट में।
Indian Express में पब्लिश हुई दामिनी नाथ और संदीप सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक SIRE के बाद जिन 20 सीटों पर सबसे ज्यादा वोटर्स डिलीट हुए, उनमें से 13 सीटें तृणमूल कांग्रेस यानी TMC ने जीतीं। जबकि सिर्फ छह ही सीटें BJP के खाते में गईं। वहीं एक सीट कांग्रेस को भी मिली है।
गौर करने वाली बात यह है कि इन 20 की 20 सीटों पर इस चुनाव से पहले TMC के ही विधायक थे। जिनमें से सात सीटें अब TMC ने खो दी हैं।
शमशेरगंज में 74,775 वोटर डिलीट, TMC जीती 7,500 से
इसे इस टेबल के जरिए समझिए। यह उन टॉप 20 सीटों का टेबल है जहां सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम डिलीट किए गए हैं:
शमशेरगंज सीट में TMC ने जीत हासिल की है। यहां पर 74,775 वोटर डिलीट किए गए थे और जीत का मार्जिन सिर्फ 7,500 के करीब है। यानी लगभग 10 गुना ज्यादा वोटर डिलीट किए गए जीत के मार्जिन से।
इसके बाद लालगोला की सीट देखिए। यहां पर भी TMC जीती है। यहां पर 55,420 वोटर्स के नाम डिलीट हुए थे और जीत का मार्जिन 18,960 है।
आगे चलें तो भगवानगोला सीट को भी TMC ने जीता है। यहां पर 47,000 से ज्यादा वोटर्स डिलीट हुए थे और यहां जीत का मार्जिन 56,407 है। यानी यहां पर अंतर जो वोटर्स को डिलीट करने का था, वह मार्जिन से कम है। यह एक ऐसी सीट है।
केतुराम में सबसे बड़ा विरोधाभास
इसके आगे रघुनाथगंज में भी TMC जीती है। यहां पर 46,000 वोटर्स के नाम डिलीट किए गए थे और जीत का मार्जिन 4,555 है। यानी वोटर्स डिलीट ज्यादा हुए हैं, जीत का मार्जिन कम है।
इस टेबल पर गौर करें तो केतुराम सीट पर इलेक्शन एनालिस्ट का खास ध्यान गया। जीत का मार्जिन सिर्फ 830 वोटों का है, जबकि डिलीट किए गए वोटर्स 26,780 हैं। यानी मार्जिन से 25,000 से भी ज्यादा वोटर्स के नाम डिलीट किए गए थे। इस सीट पर BJP को जीत मिली है।
और इसी टेबल पर और गौर करें तो BJP इन 20 में से जो छह सीटें जीती है, उन सभी सीटों पर मार्जिन से ज्यादा वोटर SIRE में डिलीट किए गए हैं।
187 सीटों में 5,000+ डिलीशन: BJP ने 119 जीतीं
इसके विपरीत सात सीटें ऐसी हैं जहां जीतने वाले – जितने भी वोटर डिलीट किए गए थे उससे ज्यादा का मार्जिन है। यानी विक्ट्री मार्जिन डिलीट किए गए वोटर्स की संख्या से ज्यादा है और ये सारी सातों सीटें TMC ने जीती हैं।
Indian Express की रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल की 187 सीटें ऐसी थीं जहां 5,000 से ज्यादा वोटर्स के नाम काटे गए। इन 187 सीटों में से मेजॉरिटी ऑफ सीट्स BJP ने ही जीतीं हैं।
BJP 119 सीटों पर जीत गई या बढ़त में रही। TMC 65 सीटों पर आगे रही। दो सीट कांग्रेस और एक सीट AJSU (आम जनता उन्नयन पार्टी) – हुमायूं गबीर की पार्टी को मिली।
सबसे अहम डाटा यह है कि इन 187 सीटों में से 47 सीटें ऐसी थीं जहां डिलीट किए गए वोटर्स की संख्या जीत के मार्जिन से भी ज्यादा थी।
BJP की 119 में से 28 सीटों पर डिलीशन > विक्ट्री मार्जिन
यानी किसी सीट पर अगर कोई उम्मीदवार 5,000 वोटों से जीता है, मसलन, वहां अगर 10,000 वोटर्स डिलीट किए गए हैं, तो यह एक बड़ा फैक्टर बन जाता है।
और डिटेल में जाएं तो BJP की इन 119 सीटों में से 28 सीटें ऐसी थीं जहां वोटर्स का नाम डिलीशन जो था, वो जीत के मार्जिन से ज्यादा था। इन 28 में से 26 सीटें पहले TMC के पास थीं। यानी 2021 में ये 26 सीटें TMC ने जीती थीं, जिन्हें 2026 में अब BJP ने जीत ली है।
जबकि इनमें TMC ने जो 65 सीटें जीती हैं, उनमें से सिर्फ 18 सीटों पर काटे गए वोटर्स की संख्या जीत के मार्जिन से ज्यादा थी।
डाटा बहुत कुछ बताता है, लेकिन सब कुछ नहीं
जाहिर है डाटा बहुत कुछ बताता है लेकिन सब कुछ नहीं। यहां एक तरफ वो आंकड़े हैं जहां लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटे। दूसरी तरफ वो नतीजे हैं जहां कई सीटों पर जीत का अंतर उन हटाए गए, उन डिलीट किए गए वोटर्स के नाम से कम है।
इस डाटा को पॉलिटिकल और इलेक्शन एनालिस्ट और गहराई से एनालाइज करेंगे, फिर समझ आएगा कि इसकी बड़ी तस्वीर क्या होती है। हालांकि अभी जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वो हमने आपके सामने रख दी।
कहने का मतलब साफ है कि ममता बनर्जी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन डाटा यह भी दिखाता है कि TMC ने जहां मजबूत वोट बैंक था, वहां SIRE के बावजूद जीत हासिल की।
मुख्य बातें (Key Points)
• टॉप 20 सीटों में सबसे ज्यादा वोटर डिलीशन – शमशेरगंज में 74,775, लालगोला में 55,420
• इन 20 में से TMC ने 13 सीटें जीतीं, BJP को 6 और कांग्रेस को 1 सीट मिली
• केतुराम में BJP की जीत 830 वोटों से, लेकिन 26,780 वोटर्स डिलीट किए गए
• 187 सीटों में 5,000+ डिलीशन हुआ – BJP ने 119, TMC ने 65 जीतीं
• BJP की 28 सीटों पर वोटर डिलीशन > विक्ट्री मार्जिन, इनमें से 26 पहले TMC के पास थीं











