Tripushkar Yog 3 May 2026: ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे विशेष योग होते हैं जो जीवन की दशा और दिशा दोनों बदलने की क्षमता रखते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली योग है त्रिपुष्कर योग, जो 3 मई 2026 रविवार को बनने जा रहा है। देखा जाए तो इस योग में किया गया कोई भी शुभ कार्य तीन गुना फल देता है, लेकिन साथ ही अशुभ कार्य का परिणाम भी तीन बार झेलना पड़ता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य मोहित कमल श्रीमाली ने अपने चैनल पर इस दुर्लभ योग की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह योग वार, तिथि और नक्षत्र के अद्भुत संयोग से बनता है। अगर गौर करें तो यह कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक विशेष संयोजन है।
क्या है त्रिपुष्कर योग? समझें पूरा विज्ञान
सरल शब्दों में कहें तो त्रिपुष्कर योग एक ऐसी आध्यात्मिक और खगोलीय स्थिति है जिसे “सफलता का बूस्टर” भी कहा जाता है। इस योग में किए गए कार्य के परिणाम जीवन में तीन बार प्राप्त होते हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जब रविवार, मंगलवार या शनिवार का दिन हो, द्वितीय, सप्तमी या द्वादशी तिथि हो, और पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वा भाद्रपद, उत्तराषाढ़ा, विशाखा या धनिष्ठा नक्षत्र हो – तब यह योग सक्रिय होता है।
दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों घटकों का एक साथ मिलना ब्रह्मांड में एक ऐसी ऊर्जा पैदा करता है जो पूर्णावृत्ति को बढ़ावा देती है। यही कारण है कि इस समय को ब्रह्मांडीय निवेश का सबसे उत्तम समय माना जाता है।
3 मई 2026 को कब बनेगा यह योग? जानें सटीक समय
ज्योतिषाचार्य श्रीमाली के अनुसार 3 मई 2026 रविवार के दिन त्रिपुष्कर योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। रविवार का दिन, द्वितीय तिथि और विशाखा नक्षत्र – तीनों का संयोग इसे निवेश और शुभ कार्यों के लिए बेहद खास बनाता है।
समझने वाली बात यह है कि यह योग रात 12:50 बजे से शुरू होकर सुबह 7:10 बजे तक प्रभावी रहेगा। यानी आपको कुल 6 घंटे 20 मिनट का विशेष समय मिलेगा। यह ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होता है जब कैलेंडर में 3 मई की तारीख लगती है, मध्य रात्रि से लेकर सुबह के सुनहरे पलों तक।
3 मई का पंचांग: जानें पूरा विवरण
संवत 2082 के ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि रहेगी। विशाखा नक्षत्र सुबह 7:10 तक रहेंगे, जिसके पश्चात अनुराधा नक्षत्र आरंभ होगा। वृश्चिक राशि में चंद्रमा विराजमान रहेंगे और राहु काल का समय दोपहर के 4:30 बजे से लेकर 6 बजे तक रहेगा।
शुभ चौघड़िया मुहूर्त आपको दो बार प्राप्त होगा – सबसे पहले सुबह 9:03 से 12:03 तक और वापस से दोपहर में 1:33 से 3:03 तक। पूर्व और उत्तर दिशा आज के दिन शुभ रहेगी, जबकि पश्चिम, नैऋत्य और ईशान दिशा में यात्रा से परहेज करना चाहिए।
सूर्योदय कालीन कुंडली में विशेष राजयोग
यहां ध्यान देने वाली बात है कि सूर्योदय कालीन कुंडली में संख्यापाश योग, शंख योग, नीच भंग राज योग, सरल योग, पूर्ण आयु योग, एक पुत्र योग, कर्मजीवी योग और भाग्य योग का साथ मिलने वाला है। इतने सारे शुभ योगों का एक साथ मिलना अत्यंत दुर्लभ है।
त्रिपुष्कर योग में करें ये काम, मिलेगा तीन गुना लाभ
इस शुभ घड़ी में भूमि खरीदना, भवन का निर्माण शुरू करना या स्वर्ण (सोना) खरीदना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भविष्य में आपके पास वैसी ही संपत्ति बनाने के दो और अवसर आते हैं।
और बस यहीं से शुरू होती है असली कहानी। यह समय नए व्यापारिक अनुबंध के लिए, बैंक में फिक्स डिपॉजिट शुरू करने के लिए या बड़े प्रोजेक्ट की नींव रखने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यदि आप दान-पुण्य करते हैं तो उसका फल भी अक्षय प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इस दिन मंत्र साधना या गुरु दीक्षा लेना साधक को उच्च कोटि की सिद्धियां दिला सकता है। क्योंकि यह पूरी समय अवधि रात के समय या अर्ली मॉर्निंग में है, तो भारत में रहने वालों के लिए विशेष तौर पर कोई भी सिद्धि प्राप्त करना, मेडिटेट करना या मंत्र उच्चारण करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।
दोधारी तलवार: इन कामों से रहें दूर
हैरान करने वाली बात यह है कि यह योग दोधारी तलवार की तरह काम करता है। कोई भी अप्रिय घटना – जैसे शारीरिक चोट लगना, धन की हानि होना या विवाद होना – उसका भी भविष्य में तीन बार दोहराना होता है। इसलिए जानकार लोग इस दिन विशेष संयम बरतने की सलाह देते हैं।
त्रिपुष्कर योग के दौरान कर्ज लेना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस समय अगर आप ऋण लेते हैं तो तीन बार उसको चुकाना पड़ता है – यह ऋण तीन गुना बढ़ जाता है। इसी तरह कीमती वस्तुओं का बेचना या गिरवी रखना भी इस समय अशुभ माना जाता है।
भूल हो जाए तो क्या करें? जानें उपाय
यदि अनजाने में इस योग के दौरान आपसे कोई भूल हो जाती है या कोई नुकसान हो जाता है, तो ज्योतिष शास्त्र में इसके प्रभाव को संतुलित करने के लिए उपाय बताए जाते हैं।
सबसे पहला उपाय भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव की आराधना करना सबसे प्रभावी माना जाता है। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना इस योग की सकारात्मकता को कई गुना बढ़ाता है। यदि स्वास्थ्य संबंधित कोई समस्या इस दौरान चल रही हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।
इसके अलावा, क्योंकि यह योग पूर्णावृत्ति का है, इसलिए इस दिन सकारात्मक सोचना और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। घर में माता-पिता, दादा-दादी, ताऊजी-ताई जी, चाचा-चाची हैं तो उनका इस समय में आशीर्वाद लेना चाहिए।
विशेष कवचों का महत्व: समस्या अनुसार समाधान
ज्योतिषाचार्य श्रीमाली ने त्रिपुष्कर योग के शुभ अवसर पर विशेष कवच निर्माण की भी जानकारी दी। देखा जाए तो समस्याओं और कामना पूर्ति के लिए अलग-अलग कवच का निर्माण किया जाता है।
धंधा यक्षिणी कवच उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी है जो शेयर मार्केट, कमोडिटी मार्केट या सट्टा-वादा बाजार में पैसा कमाना चाहते हैं। यह कवच उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जिनका पैसा कहीं फंस गया है और सामने वाला बकाया पैसा देना नहीं चाहता या बार-बार बहाने बनाता है।
अष्ट लक्ष्मी कवच जब लक्ष्मी को संपूर्णता से अपने जीवन में समाहित करने की बात आती है तो यह कवच धारण करना चाहिए। अष्ट लक्ष्मी यानी धन लक्ष्मी, यश लक्ष्मी, आयु लक्ष्मी, वाहन लक्ष्मी, स्थिर लक्ष्मी, गृह लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी और भवन लक्ष्मी। यदि आप लक्ष्मी प्राप्ति का प्रयास तो बहुत करते हैं, मेहनत करते हैं, खून-पसीना बहाते हैं लेकिन कमी बनी रहती है, तो यह कवच जीवन को संपूर्ण ऐश्वर्यमय बनाने की क्षमता रखता है।
महामृत्युंजय कवच जब भी शनि की साढ़ेसाती हो, ढैया हो, मारकेश की दशा हो, तो महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान करवाया जाता है। गंभीर रोग होने पर भी महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। चोट, दुर्घटना, एक्सीडेंट, अकाल मृत्यु – इन सभी से रक्षा के लिए महामृत्युंजय कवच अवश्य धारण किया जाता है।
राशि अनुसार आज का दिन कैसा रहेगा?
मेष राशि वालों के लिए 67% सपोर्ट की स्थिति है। खर्च और बचत में संतुलन बनाना जरूरी है। परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए बजट का ध्यान रखें। शुभ रंग येलो, शुभ अंक 3।
वृषभ राशि के लिए 70-72% पॉजिटिव स्थिति। लाइफ पार्टनर के नाम से निवेश करना लाभकारी। गृहस्थ सुख और दांपत्य सुख की प्राप्ति। शुभ रंग रेड, शुभ अंक 2।
मिथुन राशि के लिए 75% पॉजिटिविटी। जॉब इंटरव्यू के अवसर मिल सकते हैं। कर्ज से राहत और शत्रुओं से समझौते की संभावना। शुभ रंग पर्पल, शुभ अंक 1।
कर्क राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत, केवल 22% सपोर्ट। संतान से चर्चा टालें। व्यापार में साजिश से सावधान। शुभ रंग रेड, शुभ अंक 3।
सिंह राशि के लिए 70% सपोर्ट। हिमालय की तरह मजबूत रहें लेकिन माताजी से विवाद की संभावना। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शुभ रंग रेड, शुभ अंक 2।
कन्या राशि के लिए 75% पॉजिटिव। परिवार के साथ समय बिताने का दिन। निवेश के लिए उत्तम समय। व्यापार में अच्छी कमाई। शुभ रंग ब्राइट येलो, शुभ अंक 1।
तुला राशि वालों के लिए केवल 20% सपोर्ट। आंखों से संबंधित सावधानी। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी। शुभ रंग प्योर व्हाइट, शुभ अंक 5।
वृश्चिक राशि के लिए 100% पॉजिटिव स्थिति। लाइफ पार्टनर के साथ खूबसूरत समय। प्रेम का रंग चढ़ेगा। व्यापार में तेजी। शुभ रंग क्रीम, शुभ अंक 8।
धनु राशि के लिए सावधानी – 23% सपोर्ट। यात्रा में सतर्कता बरतें। अज्ञात भय और बेचैनी हो सकती है। शुभ रंग ग्रीन, शुभ अंक 7।
मकर राशि के लिए 100% पॉजिटिव। दुश्मनों पर विजय। वसूली में सफलता। स्वास्थ्य में सुधार। शुभ रंग ब्राउन, शुभ अंक 6।
कुंभ राशि के लिए 100% पॉजिटिव। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सफलता। सामाजिक संबंधों में सुधार। शुभ रंग मैंगो येलो, शुभ अंक 5।
मीन राशि के लिए 25-27% सपोर्ट। आध्यात्मिकता और व्यावहारिकता में संतुलन। लालच से बचें। शुभ रंग येलो, शुभ अंक 4।
मुख्य बातें (Key Points)
- 3 मई 2026 रविवार को रात 12:50 से सुबह 7:10 तक त्रिपुष्कर योग बनेगा
- रविवार, द्वितीय तिथि और विशाखा नक्षत्र के संयोग से बन रहा यह दुर्लभ योग
- इस योग में किया गया शुभ कार्य तीन गुना फल देता है
- भूमि, भवन, स्वर्ण खरीदना और निवेश करना अत्यंत शुभ
- कर्ज लेना और कीमती वस्तुएं बेचना सख्त वर्जित
- विष्णु सहस्त्रनाम पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप लाभकारी
- शुभ मुहूर्त: सुबह 9:03 से 12:03 और दोपहर 1:33 से 3:03 तक
- पूर्व और उत्तर दिशा शुभ, पश्चिम-नैऋत्य-ईशान अशुभ













