Labour Day 2026 के मौके पर पंजाब में बड़ा राजनीतिक घमासान देखने को मिला। चंडीगढ़ स्थित विधानसभा के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मजदूरों की भारी भीड़ जुटी। मांग एक थी – न्यूनतम दैनिक मजदूरी 750 रुपये की जाए। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में यह धरना उस वक्त तक चला, जब तक आम आदमी पार्टी सरकार ने अंदर मजदूर दिवस पर विशेष सत्र आयोजित किया।
देखा जाए तो यह महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी था।
आप सरकार पर नाटक करने का आरोप
वड़िंग का तेवर शुरू से ही तल्ख था। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र बुलाना सिर्फ ड्रामा है। “पिछले चार साल में जब मौका था, तब मजदूरों के लिए कोई कानून नहीं बनाया गया। अब कार्यकाल के आखिरी दिनों में यह सब दिखावा है,” वड़िंग ने कहा। उनका आरोप था कि असली मजदूर धरने पर संघर्ष कर रहे हैं, जबकि सरकार अंदर नाटक कर रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी की सरकार अब अपने कार्यकाल के आखिरी महीनों में है। ऐसे में कोई भी घोषणा राजनीतिक संदेश से अधिक कुछ नहीं मानी जा रही।
750 रुपये दैनिक और वेतन बढ़ोतरी की मांग
कांग्रेस की मांग एकदम स्पष्ट थी। वड़िंग ने कहा कि न्यूनतम दैनिक मजदूरी 750 रुपये होनी चाहिए। इसके अलावा, अकुशल मजदूरों का मासिक वेतन 15,000 से बढ़ाकर 17,000 रुपये किया जाए। अर्ध-कुशल मजदूरों के लिए 19,000 से 20,000 रुपये और कुशल मजदूरों के लिए 20,000 से 22,000 रुपये मासिक वेतन तय हो।
अगर गौर करें, तो ये आंकड़े महंगाई के इस दौर में किसी भी मजदूर परिवार के लिए बेहद जरूरी हैं। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या यह चुनावी वादा है या वास्तविक योजना?
कांग्रेस सरकार बनी तो पूरा होगा वादा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने वादा किया कि अगली बार सरकार बनी तो मजदूरों के लिए 750 रुपये की न्यूनतम दैनिक मजदूरी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने मनरेगा का उदाहरण भी दिया। वड़िंग ने कहा, “कांग्रेस ने हमेशा मजदूरों के लिए काम किया है। मनरेगा दुनिया में अपनी तरह का पहला कानून था, जिसने 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी।”
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस अपनी पुरानी उपलब्धियों को वर्तमान राजनीति का हथियार बना रही है। लेकिन वोटर अब अतीत नहीं, वर्तमान देखते हैं।
मई दिवस पर राजनीतिक संदेश
1 मई यानी Labour Day का यह दिन हर साल मजदूरों की लड़ाई और अधिकारों की याद दिलाता है। लेकिन पंजाब में इस साल यह दिन पूरी तरह से राजनीतिक रंग में रंग गया। एक तरफ सत्ताधारी दल विशेष सत्र बुलाकर अपनी उपलब्धियां गिना रहा था, वहीं विपक्ष धरने पर बैठकर सरकार को घेर रहा था।
समझने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में मजदूर ही केंद्र में हैं – चाहे वह राजनीतिक मुद्दा बनाने के लिए हो या वास्तविक सहानुभूति के लिए।
विधानसभा के बाहर भारी जमावड़ा
चंडीगढ़ में विधानसभा के बाहर सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता और मजदूर जुटे थे। नारेबाजी और प्लेकार्ड लिए यह भीड़ सरकार के खिलाफ नाराजगी जता रही थी। कई मजदूर संगठनों ने भी इस धरने में हिस्सा लिया। उनकी मांग थी कि महंगाई के इस दौर में मजदूरी बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है।
और इसी बात ने इस पूरे आयोजन को एक जनांदोलन का रूप दे दिया।
क्या होगा आगे?
अब देखना यह है कि आने वाले महीनों में पंजाब सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है। कांग्रेस की तरफ से दबाव लगातार बनाया जा रहा है। लेकिन चुनाव नजदीक हैं और हर घोषणा राजनीतिक चश्मे से देखी जा रही है।
यह तय है कि Labour Day 2026 पंजाब की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points):
- Labour Day 2026 पर कांग्रेस ने विधानसभा के बाहर धरना दिया
- अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 750 रुपये दैनिक मजदूरी की मांग की
- अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल मजदूरों की वेतन बढ़ोतरी की भी मांग
- आप सरकार पर नाटक करने का आरोप लगाया गया
- कांग्रेस ने सरकार बनने पर मजदूरी बढ़ाने का वादा किया













