Bihar Floor Test: बिहार की राजनीति में आज ऐतिहासिक दिन रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया है। ध्वनि मत के आधार पर एनडीए सरकार ने अपना बहुमत साबित कर दिया।
बिहार की सियासी जमीन पर आज नया इतिहास लिखा गया। सम्राट चौधरी की सरकार ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट को पार कर दिखाया कि एनडीए का गठबंधन मजबूत है। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के महज 9 दिन बाद ही उन्हें यह बड़ी जीत मिली है।
देखा जाए तो यह केवल एक औपचारिकता नहीं थी। यह एनडीए की एकता और विपक्ष की कमजोरी का खुला प्रदर्शन था। विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, जिसमें से एनडीए के पास 201 विधायक हैं। बहुमत के लिए 122 की जरूरत थी, जो इस गठबंधन के पास आराम से मौजूद है।
ध्वनि मत से पारित हुआ विश्वास प्रस्ताव
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अनुमति से सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। विश्वास प्रस्ताव पर मतदान की संभावना पहले से ही कम थी क्योंकि संख्या बल एनडीए के पक्ष में था। और ऐसा ही हुआ भी।
ध्वनि मत के जरिए सरकार ने विश्वास हासिल किया। सत्ता पक्ष के विधायकों ने जोरदार समर्थन किया जबकि विपक्ष संख्या के मामले में पीछे रह गया।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार नीतीश कुमार विधानसभा में उपस्थित नहीं थे। राज्यसभा के सदस्य बन जाने के कारण वे बिहार विधानमंडल में शामिल नहीं हो सके, जिसको लेकर काफी चर्चा भी रही।
विधानसभा में सम्राट चौधरी का जोरदार स्वागत
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार जब सम्राट चौधरी विधानसभा पहुंचे तो एनडीए के तमाम विधायकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। गुलदस्ता देकर उन्हें सम्मानित किया गया। उनके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने नीतीश कुमार, नितिन नवीन और अमित शाह समेत एनडीए के सभी नेताओं और विधायकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “सभी के विश्वास के कारण ही मुझे यह जिम्मेदारी मिली है। यह पद किसी की बपौती नहीं है बल्कि 14 करोड़ बिहारियों के आशीर्वाद का परिणाम है।”
यह कहना एक तरह से विपक्ष पर तंज था। समझने वाली बात यह है कि सम्राट चौधरी ने साफ संदेश दिया कि सत्ता किसी परिवार या व्यक्ति की जागीर नहीं है।
तेजस्वी यादव ने भी साधा तंज, कही यह बात
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी चुप रहना मुनासिब नहीं समझा। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में शामिल नेता अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आए हैं।
उनका कहना था, “सम्राट चौधरी लालू प्रसाद यादव की पाठशाला से निकले हैं। विजय चौधरी कांग्रेस से आए हैं और विजेंद्र यादव जनता दल से। यानी कोई भी बीजेपी की पाठशाला से नहीं निकला है।”
यह बयान राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बना। हालांकि तेजस्वी ने तंज के साथ ही सही, सम्राट सरकार का समर्थन किया।
सम्राट चौधरी का तेजस्वी पर पलटवार
अगर गौर करें तो सम्राट चौधरी ने भी तेजस्वी यादव को चुप बैठने नहीं दिया। उन्होंने जोरदार पलटवार करते हुए लालू प्रसाद के शासनकाल की चर्चा की।
उन्होंने कहा, “यदि मुझ पर अत्याचार नहीं हुआ होता तो मैं आज यहां तक नहीं पहुंचता।” यह बयान उनके राजनीतिक सफर की कहानी बयान करता है।
इसके साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव पर एक और तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “जो अपने घर में बहन का सम्मान नहीं कर सकता, वह दूसरी महिलाओं का सम्मान क्या करेगा?”
यह बात सीधे तौर पर आरजेड परिवार की आंतरिक राजनीति पर निशाना था। सदन में इस बयान के बाद हंगामा भी हुआ।
नीतीश कुमार की इच्छा से बने मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी ने अपने भाषण में यह भी साफ किया कि नीतीश कुमार ही चाहते थे कि वे मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार के सिद्धांतों के अनुसार हम विकसित बिहार बनाने के लिए काम करते रहेंगे।”
उन्होंने एनडीए सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि इस सरकार ने महिलाओं और किसानों की चिंता की है, सुशासन स्थापित किया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि उन्होंने तीन सी (करप्शन, क्राइम, कम्युनलिज्म) का जिक्र किया और कहा, “जिस तरह पहले इनसे समझौता नहीं किया गया, यह सरकार भी नहीं करेगी।”
एनडीए की एकजुटता, विपक्ष की कमजोरी
विश्वास मत के दौरान एनडीए के सभी प्रमुख सहयोगी दलों ने एकजुटता दिखाई। सत्ता पक्ष के विधायकों ने सरकार के समर्थन में मतदान किया और बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया।
हालांकि विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन संख्या बल के अभाव में वे सफल नहीं हो सके। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बधाई दी।
यह जीत केवल सम्राट चौधरी की नहीं बल्कि पूरे एनडीए गठबंधन की है। इससे साफ होता है कि बिहार में एनडीए की पकड़ मजबूत है।
बिहार के विकास पर फोकस
सदन में सम्राट चौधरी ने सरकार की प्राथमिकताओं और विकास एजेंडे को दोहराते हुए कहा कि उनकी सरकार बिहार को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उनके नेतृत्व को एनडीए के भीतर नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या वे बिहार को विकास के नए मुकाम तक पहुंचा पाएंगे?
15 अप्रैल को शपथ लेने के 9 दिन बाद विश्वास मत जीतना उनके लिए शुभ संकेत है। लेकिन असली परीक्षा तो अब शुरू होगी जब उन्हें जमीन पर काम दिखाना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• सम्राट चौधरी ने ध्वनि मत से विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया
• एनडीए के पास 201 विधायक, बहुमत के लिए 122 की जरूरत थी
• तेजस्वी यादव ने तंज कसा तो सम्राट चौधरी ने दिया करारा जवाब
• नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य होने के कारण विधानसभा में उपस्थित नहीं थे
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न













