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The News Air - Breaking News - UAE Loan के दबाव में Pakistan, कटोरा लेकर भटक रहे Shehbaz-Asim Munir

UAE Loan के दबाव में Pakistan, कटोरा लेकर भटक रहे Shehbaz-Asim Munir

यूएई ने मांगा 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस, पाकिस्तान ने सऊदी अरब से मांगी मदद, चीन और आईएमएफ के सामने भी हाथ फैलाए

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 16 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, बिज़नेस
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UAE Loan
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UAE Loan to Pakistan: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की हालत इन दिनों किसी कम सैलरी वाले उस कर्मचारी जैसी हो गई है जो क्रेडिट कार्ड के जाल में बुरी तरह फंस चुका है। कमाई कम है लेकिन शौक बड़े-बड़े हैं। खुद को चलाने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन दूसरे देशों के झगड़े सुलझाने में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। दरअसल यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने हाल ही में पाकिस्तान को दिया हुआ अपना तीन अरब डॉलर का कर्ज वापस मांग लिया है और जल्द चुकाने की सख्त चेतावनी भी दे दी है। देखा जाए तो यह रकम पाकिस्तान के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं है। फिर क्या था, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कटोरा लेकर निकल पड़े हैं दर-दर। पहले यूएई से बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचा तो वे सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दरवाजे खटखटाने लगे।


यूएई ने क्यों मांगा अपना पैसा वापस?

यूनाइटेड अरब अमीरात ने पाकिस्तान को कुछ साल पहले तीन अरब डॉलर का कर्ज दिया था। यह पैसा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए दिया गया था। लेकिन अब यूएई ने साफ कर दिया है कि उसे यह रकम जल्द से जल्द वापस चाहिए।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने पहले तो यूएई से इस कर्ज में छूट की मांग की थी। यानी या तो समय बढ़ा दिया जाए या फिर कुछ रियायत दे दी जाए। लेकिन यूएई ने साफ तौर पर इनकार कर दिया और कहा – “पैसा तय समय पर चुकाना होगा, कोई बहाना नहीं चलेगा।”

समझने वाली बात यह है कि यूएई भी अब सख्त होता जा रहा है। उसने देख लिया है कि पाकिस्तान बार-बार कर्ज लेता है लेकिन चुकाता नहीं है। इसलिए इस बार यूएई ने चेतावनी दे दी है।


शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर दर-दर भटकने लगे

जैसे ही यूएई ने पैसा वापस मांगा, पाकिस्तान में खलबली मच गई। देश के पास इतना पैसा है ही नहीं कि यूएई को चुका सके। विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 16 अरब डॉलर है, और उसमें से भी तीन अरब डॉलर निकाल देना मतलब देश की अर्थव्यवस्था को और भी खतरे में डालना।

अगर गौर करें तो पाकिस्तान के पास दो ही रास्ते बचे थे – या तो किसी तरह यूएई को मना लें, या फिर किसी और देश से कर्ज लेकर यूएई को चुका दें। जब पहला रास्ता नहीं चला तो शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर दूसरे देशों के सामने हाथ फैलाने लगे।

जनरल आसिम मुनीर ईरान के दौरे पर निकल पड़े। उनका मकसद था कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराएं और अगर जंग खत्म हो जाए तो इसके बदले चीन, आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से कर्ज मिल सके।

वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दौरे पर निकल पड़े और सीधे-सीधे कर्ज की मांग करने लगे।

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सऊदी अरब ने दिया सहारा, तीन अरब डॉलर देने को तैयार

राहत की बात यह है कि आखिरकार सऊदी अरब ने पाकिस्तान की मदद करने का फैसला किया है। सऊदी अरब पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने के लिए तैयार हो गया है।

कुछ रिपोर्ट्स में तो यह भी चर्चा है कि शहबाज शरीफ ने सऊदी नेताओं को अपने देश की गरीबी और मजबूरी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह समझाया कि अगर यूएई का कर्ज नहीं चुका पाए तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी। तब जाकर सऊदी अरब माना।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सऊदी अरब पहले तैयार नहीं था। लेकिन जब पाकिस्तान ने अपनी हालत की सच्चाई बताई तो सऊदी ने मदद का हाथ बढ़ाया।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने बताया कि यह तीन अरब डॉलर अगले हफ्ते ही ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। इसके अलावा पाकिस्तान में जमा अतिरिक्त पांच अरब डॉलर के रोल ओवर को भी लंबी अवधि के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया है।


विदेशी मुद्रा भंडार और आईएमएफ की शर्तें

अब सवाल उठता है कि पाकिस्तान के पास 16 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है तो फिर वह यूएई को तीन अरब डॉलर क्यों नहीं चुका सकता? इसकी बड़ी वजह है आईएमएफ की सख्त शर्तें।

देखा जाए तो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को कर्ज देने की शर्त रखी है कि विदेशी मुद्रा भंडार को वित्त वर्ष के अंत तक 18 अरब डॉलर तक पहुंचाना होगा। अगर पाकिस्तान अभी तीन अरब डॉलर यूएई को चुका देता है तो उसका भंडार 13 अरब डॉलर पर आ जाएगा।

और यहीं है समस्या। पाकिस्तान को देश चलाने के लिए भी विदेशी मुद्रा भंडार की जरूरत है। तेल, गैस जैसी जरूरी चीजें खरीदने के लिए डॉलर चाहिए। अगर भंडार 13 अरब डॉलर पर आ जाए तो देश चलाना मुश्किल हो जाएगा और आईएमएफ से आगे कर्ज भी नहीं मिलेगा।

इसी वजह से पाकिस्तान ने यूएई का कर्ज चुकाने के लिए सऊदी से कर्ज मांगा।


पाकिस्तान की आर्थिक हालत कितनी खराब है?

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि वह खुद को चलाने में भी असमर्थ हो गया है। एक तरफ तो देश में महंगाई आसमान छू रही है, दूसरी तरफ विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

चिंता का विषय यह है कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ सालों में चीन, सऊदी अरब, यूएई, आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एशियाई विकास बैंक से भारी मात्रा में कर्ज लिया है। और अब जब कोई देश अपना पैसा वापस मांग रहा है तो पाकिस्तान के पास देने को कुछ नहीं है।

हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान अपनी इस हालत के बावजूद दूसरे देशों के मामलों में दखल देने और मध्यस्थता करने में करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। जनरल आसिम मुनीर का ईरान दौरा, अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता – ये सभी काम बहुत महंगे हैं। लेकिन पाकिस्तान इन्हें कर रहा है इस उम्मीद में कि शायद कहीं से कुछ फायदा मिल जाए।


चीन और आईएमएफ से भी मांगा कर्ज

सऊदी अरब के अलावा पाकिस्तान ने चीन और आईएमएफ से भी मदद मांगी है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा दोस्त माना जाता है और अब तक उसे अरबों डॉलर का कर्ज दे चुका है।

लेकिन अब चीन भी थोड़ा सावधान हो गया है। उसने देख लिया है कि पाकिस्तान कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं है। इसलिए चीन अब हर बार नई शर्तें रख रहा है।

आईएमएफ ने भी पाकिस्तान को कई बार बेल आउट पैकेज दिया है। लेकिन हर बार आईएमएफ सख्त शर्तें रखता है – जैसे सब्सिडी कम करो, टैक्स बढ़ाओ, खर्चे घटाओ। और जब पाकिस्तान ये शर्तें पूरी नहीं कर पाता तो फिर परेशानी बढ़ जाती है।


ईरान-अमेरिका में मध्यस्थता क्यों?

अब सवाल यह है कि जनरल आसिम मुनीर ईरान क्यों गए और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता क्यों करना चाहते हैं? इसके पीछे भी पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरी है।

देखा जाए तो अगर पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति करवाने में कामयाब हो जाता है, तो उसे कुछ फायदे मिल सकते हैं। अमेरिका खुश हो सकता है और आर्थिक मदद दे सकता है। ईरान से व्यापार बढ़ सकता है। और इसके बदले आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं से कर्ज मिलने में आसानी हो सकती है।

लेकिन यह सब इतना आसान नहीं है। अमेरिका-ईरान का टकराव दशकों पुराना है और पाकिस्तान जैसे कमजोर देश के लिए इसमें मध्यस्थता करना बहुत मुश्किल काम है।


पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का भविष्य क्या है?

अगर गौर करें तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का भविष्य बहुत अनिश्चित है। एक तरफ तो विदेशी कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, दूसरी तरफ देश में राजनीतिक अस्थिरता भी है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब तक पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं करता, अपने निर्यात को नहीं बढ़ाता और अपने खर्चों को कम नहीं करता, तब तक यह कर्ज के जाल में फंसा रहेगा।

सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान कभी इस जाल से बाहर निकल पाएगा? फिलहाल तो ऐसा लगता नहीं है। क्योंकि पाकिस्तान की सरकार ना तो सुधार कर रही है और ना ही अपनी आदतें बदल रही है।


सऊदी अरब का सहारा कब तक?

राहत की बात यह है कि सऊदी अरब ने इस बार पाकिस्तान का साथ दिया है। लेकिन सवाल यह है कि सऊदी अरब कब तक पाकिस्तान को बचाता रहेगा?

समझने वाली बात यह है कि सऊदी अरब भी अब पाकिस्तान से नाराज होने लगा है। कई बार ऐसे मौके आए हैं जब पाकिस्तान ने सऊदी की बात नहीं मानी। जैसे मलेशिया में इस्लामिक सम्मेलन के मुद्दे पर पाकिस्तान ने सऊदी की बात नहीं मानी थी।

इसलिए अब सऊदी अरब भी शर्तें रख रहा है। यह तीन अरब डॉलर मुफ्त नहीं है, इसके बदले में पाकिस्तान को सऊदी की नीतियों का समर्थन करना होगा।


क्या है आगे का रास्ता?

पाकिस्तान के सामने अब दो ही रास्ते हैं – या तो अपनी अर्थव्यवस्था में गंभीर सुधार करे और आत्मनिर्भर बने, या फिर ऐसे ही कर्ज के जाल में फंसा रहे।

देखा जाए तो पाकिस्तान को अपने निर्यात को बढ़ाना होगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करना होगा, और सबसे जरूरी – अपने रक्षा खर्च को कम करना होगा। पाकिस्तान अपने बजट का बहुत बड़ा हिस्सा सेना पर खर्च करता है, जो एक गरीब देश के लिए बहुत ज्यादा है।

लेकिन क्या पाकिस्तान की सेना और सरकार यह करने को तैयार होगी? यह देखना बाकी है।


मुख्य बातें (Key Points):

✅ यूएई ने मांगा 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस, सख्त चेतावनी दी
✅ शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर सऊदी, कतर, तुर्किये के दौरे पर निकले
✅ सऊदी अरब ने दी मदद, 3 अरब डॉलर देने को तैयार हुआ
✅ विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 16 अरब डॉलर, आईएमएफ ने शर्त रखी 18 अरब तक पहुंचाने की
✅ जनरल आसिम मुनीर ईरान-अमेरिका में मध्यस्थता के लिए ईरान गए
✅ पाकिस्तान की हालत कर्ज के जाल में फंसे कर्मचारी जैसी


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यूएई ने पाकिस्तान से कितना पैसा वापस मांगा है?

यूएई ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर का कर्ज तुरंत वापस मांगा है। यूएई ने छूट देने से साफ इनकार कर दिया और चेतावनी दी कि पैसा जल्द चुकाना होगा।

प्रश्न 2: सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कितनी मदद दी?

सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने का फैसला किया है। इसके अलावा 5 अरब डॉलर के रोल ओवर को भी लंबी अवधि के लिए बढ़ाया गया है।

प्रश्न 3: पाकिस्तान अपना विदेशी मुद्रा भंडार क्यों नहीं इस्तेमाल कर सकता?

पाकिस्तान के पास 16 अरब डॉलर का भंडार है लेकिन आईएमएफ की शर्त है कि इसे 18 अरब तक पहुंचाना होगा। अगर 3 अरब निकाल लिए तो देश चलाना मुश्किल हो जाएगा और आईएमएफ से आगे कर्ज नहीं मिलेगा।

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