National Highway 44: भारत में आज वर्ल्ड क्लास रोड इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से लेकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक फैला National Highway 44 (NH-44) देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। करीब 3886 किलोमीटर लंबा यह हाईवे 11 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश से होकर गुजरता है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें प्राचीन ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) के हिस्सों को भी शामिल किया गया है, जिसे प्राचीन काल में उत्तरापथ के नाम से जाना जाता था। अगर गौर करें तो यह राजमार्ग न सिर्फ परिवहन का साधन है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, रणनीतिक महत्व और आधुनिक इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण भी है।
देखा जाए तो इस हाईवे का निर्माण अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के गोल्डन क्वाड्रीलेटरल प्रोजेक्ट के तहत शुरू हुआ था। यह परियोजना 1999 में शुरू की गई और 2001 में इस पर काम तेज किया गया। आज NH-44 भारत के नॉर्थ और साउथ को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण धमनी बन चुका है।
प्राचीन उत्तरापथ से आधुनिक NH-44 तक का सफर
हैरान करने वाली बात यह है कि जिस मार्ग पर आज NH-44 बना है, उसका इतिहास हजारों साल पुराना है। प्राचीन भारत में इसे उत्तरापथ कहा जाता था। यह मार्ग गंगा के किनारे बसे अनेक प्राचीन शहरों को पंजाब से जोड़ते हुए खैबर दर्रा पार करके अफगानिस्तान तक जाता था।
मौर्य काल में इसी उत्तरापथ के जरिए बौद्ध धर्म गांधार तक पहुंचा था। बाद में इसे ग्रैंड ट्रंक रोड या GT Road के नाम से जाना गया। मुगल काल में शेर शाह सूरी ने इस मार्ग को और विकसित किया। ब्रिटिश काल में भी यह सड़क व्यापार और संचार की मुख्य धमनी बनी रही।
समझने वाली बात यह है कि स्वतंत्र भारत में इसी ऐतिहासिक मार्ग को आधुनिक रूप देते हुए NH-44 का निर्माण किया गया। इसमें सात पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों—NH-1A, NH-1, NH-2, NH-3, NH-75, NH-26 और NH-7—को मिलाकर एक बनाया गया।
3886 किमी का विशाल नेटवर्क, 11 राज्यों को जोड़ता है
NH-44 की शुरुआत जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से होती है। वहां से यह अनंतनगर होते हुए पंजाब में पठानकोट, लुधियाना और जालंधर को जोड़ता है। इसके बाद यह हरियाणा से होकर दिल्ली, फिर उत्तर प्रदेश में आगरा और मथुरा तक पहुंचता है।
मध्य प्रदेश से होते हुए यह महाराष्ट्र के नागपुर तक पहुंचता है। फिर साउथ में तेलंगाना के हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के कुर्नूल, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और अंत में तमिलनाडु के मदुरई से होते हुए कन्याकुमारी में समाप्त होता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह हाईवे करीब 21 प्रमुख शहरों को जोड़ता है। इनमें श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, जालंधर, लुधियाना, अंबाला, करनाल, दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, झांसी, नागपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु, धर्मपुरी, सलेम, करूर, मदुरई, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी शामिल हैं।
अगर राज्यवार वितरण देखें तो सबसे बड़ा हिस्सा तमिलनाडु में है—627 किमी। इसके बाद मध्य प्रदेश और तेलंगाना में 540-540 किमी, जम्मू-कश्मीर में 340 किमी, पंजाब में 254 किमी, आंध्र प्रदेश में 250 किमी, महाराष्ट्र में 232 किमी, उत्तर प्रदेश में 189 किमी, हरियाणा में 184 किमी और कर्नाटक में 125 किमी है। सबसे छोटा हिस्सा हिमाचल प्रदेश में केवल 11 किमी का है।
पाकिस्तान बॉर्डर के पास, रणनीतिक दृष्टि से अहम
NH-44 सिर्फ परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर तक जाने वाला यह हाईवे पाकिस्तान बॉर्डर के बेहद करीब है। कुछ क्षेत्रों में तो यह सीमा से सिर्फ 6 किमी की दूरी पर है।
यह पठानकोट एयरबेस के काफी पास है और उधमपुर, अनंतनग, श्रीनगर और उरी तक जाता है। राहत की बात यह है कि भारतीय सेना इस हाईवे पर 24 घंटे चौकस निगरानी रखती है। पाकिस्तान से घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए यह मार्ग बेहद अहम है।
इसका मतलब है कि युद्ध या संकट की स्थिति में सेना की तेज आवाजाही के लिए यह जीवन रेखा का काम करता है। इसलिए इस हाईवे का रखरखाव और सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
दुनिया का सबसे बड़ा एनिमल अंडरपास, 750 मीटर लंबा
NH-44 की सबसे अनूठी विशेषता है इसका पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन। यह मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क से गुजरता है। जंगली जानवरों के आवागमन में बाधा न हो, इसके लिए हाईवे के नीचे विशेष अंडरपास बनाए गए हैं।
सबसे बड़े अंडरपास की लंबाई 750 मीटर (करीब 2460 फुट) है, जो दुनिया का सबसे बड़ा एनिमल अंडरपास है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ने 225 करोड़ रुपये की लागत से नौ अंडरपास बनाए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जब NH-44 को दो लेन से चार लेन में अपग्रेड करने की योजना बनी, तब यह शर्त रखी गई कि घने जंगलों में जानवरों के गुजरने के लिए एनिमल क्रॉसिंग स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे। इस पर ₹255 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए गए।
इन अंडरपासों की ऊंचाई 5 मीटर तक रखी गई है ताकि बड़े जानवर भी आसानी से निकल सकें। 16 किमी के दायरे में चार छोटे ब्रिज और पांच बड़े अंडरपास बनाए गए हैं। इनमें 78 कैमरे लगाए गए हैं जो जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन अंडरपासों के बनने के 10 महीने में 18 तरह के 5450 वन्यजीवों का आवागमन रिकॉर्ड किया गया। इसमें 89 बार बाघों के गुजरने की घटना दर्ज की गई। इससे साफ होता है कि कितने एक्सीडेंट्स से बचाव हुआ।
गोल्डन क्वाड्रीलेटरल प्रोजेक्ट का हिस्सा
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 1999 में गोल्डन क्वाड्रीलेटरल प्रोजेक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया था। इसका उद्देश्य देश के चारों मेट्रोपॉलिटन शहरों—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई—को आपस में जोड़ना था।
2001 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। इसके तहत 5846 किमी हाईवे का निर्माण किया गया। पुराने दो लेन और चार लेन हाईवे को चार, छह और आठ लेन में अपग्रेड किया गया।
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का भी निर्माण शुरू किया गया था। NH-44 नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का मुख्य हिस्सा है।
1950 में सिर्फ 19,811 किमी, आज 1.44 लाख किमी से ज्यादा
स्वतंत्रता के समय भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई बेहद कम थी। 1950-51 में यह सिर्फ 19,811 किमी थी। आज यह बढ़कर 1,44,495 किमी से भी अधिक हो गई है।
सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक भारत में 2 लाख किमी नेशनल हाईवे का नेटवर्क तैयार हो जाए। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) वर्ल्ड क्लास स्तर के हाईवे का निर्माण कर रही है।
कुछ हिस्सों में जीरो फेटैलिटी कॉरिडोर (दुर्घटनामुक्त गलियारा) भी बनाया जा रहा है। वर्तमान में भारत में 200 से ज्यादा नेशनल हाईवे हैं। साथ ही बड़ी संख्या में एक्सप्रेसवे भी विकसित किए जा रहे हैं।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से तीन गुना लंबा
भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे दिल्ली और मुंबई के बीच बन रहा है। इसकी कुल लंबाई 1350 किमी है। इसे दुनिया का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे माना जा रहा है।
लेकिन NH-44 इससे लगभग तीन गुना लंबा है—3886 किमी। यह न सिर्फ भारत का सबसे लंबा नेशनल हाईवे है, बल्कि दुनिया के सबसे लंबे हाईवे में भी शुमार है।
परिवहन से लेकर पर्यटन तक, हर क्षेत्र में फायदा
NH-44 ने भारत की अर्थव्यवस्था और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके जरिए माल और कच्चे माल की ढुलाई बेहद आसान हो गई है। नॉर्थ और साउथ के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज हुई हैं।
पर्यटन के लिहाज से भी यह हाईवे बेहद खास है। अगर आप भारत की समृद्ध संस्कृति की झलक देखना चाहते हैं, तो NH-44 पर यात्रा करें। जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके पहाड़ों से लेकर तमिलनाडु के समुद्र तटों तक—हर तरह का दृश्य यहां मिलेगा।
इस यात्रा के दौरान आपको हरे-भरे खेत, झीलें, नदियां, जंगल और विविध संस्कृतियां देखने को मिलेंगी। यह भारत की विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण है।
सड़कों की हालत में सुधार की जरूरत
हालांकि NH-44 पर कई जगह सड़कें टूटी हुई हैं। साथ ही इससे जुड़े सर्विस लेन की भी हालत काफी खस्ता है। कई इलाकों में जाम की प्रॉब्लम रहती है।
इस दिशा में काम जारी है। कई क्षेत्रों में NH-44 को सिक्स लेन में अपग्रेड किया जा रहा है। एक्सीडेंट्स रोकने के लिए कई तरह के सुरक्षा उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि भारत की सड़कों को अमेरिका के स्तर का बनाना है। उम्मीद है कि आने वाले समय में NH-44 देश का सबसे अच्छा हाईवे भी बन जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- NH-44 देश का सबसे लंबा राजमार्ग है—3886 किमी लंबा
- श्रीनगर से कन्याकुमारी तक फैला है, 11 राज्यों को जोड़ता है
- प्राचीन ग्रैंड ट्रंक रोड (उत्तरापथ) के हिस्से शामिल हैं
- दुनिया का सबसे बड़ा एनिमल अंडरपास (750 मीटर) यहीं है
- पाकिस्तान बॉर्डर के पास, रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण
- गोल्डन क्वाड्रीलेटरल प्रोजेक्ट का हिस्सा, 21 शहरों को जोड़ता है













