Bus Accident in Fatehgarh Sahib : रात का अंधेरा, खुशी से घर लौटते श्रद्धालु और अचानक एक दर्दनाक हादसा। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में श्री आनंदपुर साहिब से बैसाखी मेले में हिस्सा लेकर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी बस बिजली के खंभे से टकराकर पलट गई। जिससे बस में करंट भी आ गया। इस भीषण हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में सगे भाई भी शामिल हैं। वहीं बच्चों-महिलाओं समेत 21 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे का पता चलते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बस में फंसे घायलों को बाहर निकाला। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। देखा जाए तो जिस वक्त हादसा हुआ, बस में 40 लोग सवार थे और करीब डेढ़ किमी बाद ही सबको बस से उतरकर अपने घर जाना था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
फतेहगढ़ साहिब के SSP डॉ. शुभम अग्रवाल ने कहा कि पुलिस हादसे की वजहों की जांच कर रही है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया। PM ने कहा- “हादसे के बारे में सुनकर मुझे अत्यंत दुख हुआ है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
बैसाखी मेले में गए थे श्रद्धालु
पुलिस के मुताबिक श्री आनंदपुर साहिब में 14 अप्रैल को बैसाखी का मेला लगा था। इसी में हिस्सा लेने के लिए फतेहगढ़ साहिब से श्रद्धालुओं की बस श्री आनंदपुर साहिब गई थी। दिन भर मेले में हिस्सा लेने के बाद रात को वे सभी बस में सवार होकर घर लौट रहे थे। मन में खुशी थी, घर पहुंचने का इंतजार था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि कुछ ही मिनटों में सब कुछ बदल जाएगा।
समझने वाली बात यह है कि बैसाखी सिखों का एक प्रमुख त्योहार है और हर साल लाखों श्रद्धालु आनंदपुर साहिब में इकट्ठा होते हैं। यह दिन खुशी और आस्था का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार यह दिन कई परिवारों के लिए दुख और पीड़ा लेकर आया।
बस में टेक्निकल प्रॉब्लम आई, खंभे से टकराकर पलटी
रात करीब 9-10 बजे जब उनकी बस गांव हिम्मतपुरा के पास पहुंची तो बस में अचानक कोई टेक्निकल प्रॉब्लम आ गई। जिसके बाद बस ड्राइवर के कंट्रोल से बाहर हो गई। फिर तेज रफ्तार बस बेकाबू होकर रोड किनारे लगे बिजली के खंभे से टकरा गई। जिसके बाद बस में हल्का करंट भी आ गया। हालांकि बस एक झटके से पलट गई, जिस वजह से करंट से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।
अगर गौर करें तो अगर बस पलटी नहीं होती और खंभे से चिपकी रहती, तो करंट से और भी ज्यादा नुकसान हो सकता था। यह एक राहत की बात थी कि बस तुरंत अलग हो गई।
एक-दूसरे के ऊपर गिरी सवारियां, कांच टूटकर शरीर में घुसे
बस के पलटते ही सवारियां एक-दूसरे के ऊपर गिर गईं। जिससे कई लोगों के हाथ-पैर पर भी गंभीर चोटें लगीं। इसके अलावा कई लोगों को सिर में चोट लगी, खिड़की के कांच टूटकर शरीर में घुस गए। इस वजह से 8 लोगों की मौत हो गई।
जिनमें गांव मैण माजरी के रहने वाले जगविंदर सिंह, गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी इकबाल सिंह, लखबीर सिंह, हरवीर सिंह, परदीप कौर और रणजीत कौर की मौत हो गई। इसके साथ कज्जल माजरा गांव के कुलविंदर सिंह की भी जान चली गई। दिलचस्प बात यह है कि लखबीर सिंह और हरवीर सिंह सगे भाई थे। एक ही परिवार पर दो-दो मौतों की मार पड़ी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ज्यादातर घायलों के शरीर में कांच के टुकड़े घुस गए थे। कुछ की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
बस में फंसे श्रद्धालु चिल्लाने लगे, स्थानीय लोगों ने बाहर निकाला
हादसे के बाद बस में फंसे श्रद्धालुओं ने जोर-जोर से चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। इसी दौरान इलाके के कुछ लोग रात को रोटी खाने के बाद घूमने के लिए निकले तो उन्हें हादसे के बारे में पता चला। उन्होंने तुरंत फोन कर दूसरे लोगों को भी बुला लिया। जिसके बाद एंबुलेंस और पुलिस का इंतजार किए बिना लोगों ने खुद बस के शीशे तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को निकाला। इसके बाद एंबुलेंस पहुंची तो उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया।
12 घायलों को मोरिंडा और 9 को फतेहगढ़ साहिब ले गए। समझने वाली बात यह है कि अगर स्थानीय लोग तुरंत नहीं पहुंचते तो और भी ज्यादा जानें जा सकती थीं। उनकी सूझबूझ और फुर्ती ने कई जानें बचाईं।
SSP बोले- डेढ़ किमी बाद उतरना था, जांच जारी
इस बारे में SSP डॉ. शुभम अग्रवाल ने बताया कि जिस गांव हिम्मतपुरा में हादसा हुआ, उसके डेढ़ किमी दूर गांव मैण माजरा में सभी श्रद्धालुओं को उतरना था, लेकिन उससे पहले ही यह दुर्घटना हो गई। इसके बाद तुरंत पुलिस टीमें मौके पर भेजी गईं। घायलों को अस्पताल और गंभीर घायलों को PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया है। बस को भी टो कर साइड कर दिया गया।
हादसा क्यों और कैसे हुआ, इसके बारे में जांच की जा रही है। पुलिस बस ड्राइवर से पूछताछ कर रही है और टेक्निकल एक्सपर्ट्स से बस की जांच करवाई जा रही है।
बठिंडा की सांसद ने जताया दुख
बठिंडा से शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लिखा- “दुखद समाचार। श्री आनंदपुर साहिब से आ रहे तीर्थयात्रियों की बस पलटने से कई श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार सुनकर गहरा दुख हुआ है। गुरु साहिब दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें।”
राजनीतिक नेताओं के अलावा पंजाब के कई संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने भी शोक जताया है। गुरुद्वारा साहिब ने घायलों के इलाज के लिए मदद की घोषणा की है।
पंजाब में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या
यह सवाल उठता है कि पंजाब में सड़क हादसे लगातार क्यों बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में पंजाब में सड़क हादसों में हजारों लोगों की जानें गई हैं। ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार, खराब सड़कें, टेक्निकल खराबी और लापरवाही की वजह से होते हैं।
इस मामले में भी बस में टेक्निकल प्रॉब्लम आई थी। सवाल यह है कि क्या बस की नियमित जांच हो रही थी? क्या ड्राइवर पूरी तरह फिट था? क्या बस ओवरलोडेड थी? ये सब सवाल अब जांच के दायरे में आएंगे।
परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़
इस हादसे में जिन 8 लोगों की मौत हुई है, उनके परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। खासकर लखबीर सिंह और हरवीर सिंह के परिवार को दोहरी मार पड़ी है। दोनों सगे भाई थे और एक साथ बैसाखी मेले में गए थे। दोनों की एक साथ मौत से परिवार सदमे में है।
गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी इकबाल सिंह की मौत से स्थानीय समुदाय में शोक की लहर है। वे एक सम्मानित व्यक्ति थे और समाज सेवा में सक्रिय रहते थे।
घायलों का इलाज जारी
21 घायलों में से कुछ की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उनमें से कुछ को PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले 24-48 घंटे बेहद अहम हैं।
कुछ घायलों के शरीर में कांच के बड़े टुकड़े घुसे हुए थे, जिन्हें सर्जरी के जरिए निकाला गया। कुछ को सिर में गंभीर चोटें आई हैं और उनका ऑपरेशन किया जा रहा है।
सरकार ने मदद का ऐलान किया
पंजाब सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की है। हालांकि, राशि की अभी घोषणा नहीं की गई है। CM भगवंत मान ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए।
बैसाखी 2026- खुशी का त्योहार बना दुख का दिन
बैसाखी का त्योहार हर साल 13-14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह सिखों का एक प्रमुख त्योहार है और इस दिन खालसा पंथ की स्थापना का जश्न मनाया जाता है। हजारों श्रद्धालु आनंदपुर साहिब में इकट्ठा होते हैं और गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकते हैं।
लेकिन इस बार यह त्योहार कई परिवारों के लिए दुख का दिन बन गया। जो लोग खुशी-खुशी घर लौट रहे थे, उनमें से 8 कभी घर नहीं पहुंचे। 21 घायल हैं और कई परिवार अस्पतालों में अपनों की जिंदगी के लिए दुआ कर रहे हैं।
सड़क सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को उठाया है। पंजाब में सड़क हादसे लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
बसों की नियमित जांच, ड्राइवरों की ट्रेनिंग, सड़कों की बेहतर हालत, और यात्रियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करना- ये सब कदम उठाने होंगे। वरना ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में बैसाखी मेले से लौट रहे श्रद्धालुओं की बस पलटी, 8 की मौत, 21 घायल।
- बस में टेक्निकल प्रॉब्लम आने से ड्राइवर का कंट्रोल खो गया और बस बिजली के खंभे से टकरा गई।
- मरने वालों में सगे भाई लखबीर सिंह और हरवीर सिंह भी शामिल हैं।
- घायलों के शरीर में कांच के टुकड़े घुसे, कुछ को PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।
- स्थानीय लोगों ने बस के शीशे तोड़कर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया।













