America-Iran तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जंग की आहट के बीच एक बार फिर अमेरिका बैकफुट पर नजर आ रहा है। खबर यह आ रही है कि अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। लेकिन जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप खुद अपने ही देश में विरोध का सामना कर रहे हैं, वहीं ईरान की जनता पूरी तरह अपनी सरकार के साथ खड़ी है।
देखा जाए तो, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मूस स्ट्रेट की नाकाबंदी के आदेश दिए थे। ईरान ने भी आक्रामक तेवर दिखाए। माना जा रहा था कि बस कुछ ही घंटों में इस क्षेत्र में दोबारा हमले शुरू हो जाएंगे। ईरान ने साफ कहा था कि वे हर स्थिति के लिए तैयार हैं। लेकिन अब बातचीत की संभावना बन रही है।
16 अप्रैल को हो सकती है बातचीत
पश्चिमी मीडिया की रिपोर्ट्स में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच 16 अप्रैल को बातचीत का नया दौर आयोजित किए जाने की संभावना है।
दोनों पक्षों के बीच नई वार्ता की तैयारी चल रही है। अमेरिका चाहता है कि बातचीत के जरिए उन मुद्दों पर सहमति बने जो दोनों देशों के बीच टकराव का कारण रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों तक सब इसी तरह के संकेत दे रहे हैं कि जल्दी ही ईरान और अमेरिका वार्ता का अगला दौर शुरू होने वाला है।
ट्रंप का दावा: ईरान ने की बातचीत की मांग
हालांकि, ट्रंप ने हमेशा की तरह इस बार भी कहा है कि बातचीत की मांग ईरान की तरफ से आई है। उन्होंने दावा किया, “इस्लामाबाद में बातचीत टूटने के बाद ईरान ने वाशिंगटन से संपर्क किया है।”
ट्रंप ने कहा, “आज सुबह ईरान की तरफ से ही हमें फोन किया गया है। वो किसी भी कीमत पर डील करना चाहता है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद हमने हॉर्मूस की नाकाबंदी कर दी है। इससे ईरानी परेशान हैं और फोन करके डील करने के लिए कह रहे हैं।”
समझने वाली बात यह है कि ट्रंप ने यह भी साफ किया कि जब तक ईरान परमाणु हथियारों से तौबा नहीं करता, तब तक कोई समझौता मुमकिन नहीं हो सकता है।
ईरान के तेवर: झुकने से इनकार
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ईरान के तेवरों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि वो बातचीत के लिए बेताब है। ईरानी सेना ने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी के खिलाफ झुकने से इंकार कर दिया है।
उसने इसे समुद्री डकैती बताया है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि हॉर्मूस के पास आने वाले किसी भी युद्धपोत को संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा। यानी अमेरिकी कार्रवाही से जंग दोबारा शुरू हो जाएगी।
तेहरान की जनता भी अमेरिका के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। हजारों लोगों ने ईरानी सरकार के समर्थन में और अमेरिका के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूस को ब्लॉक करने के फैसले के खिलाफ रैली की।
खाड़ी देशों पर ईरान का आरोप
इस बीच खाड़ी देश भी ईरान के निशाने पर आ गए हैं। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में मिडिल ईस्ट के पांच बड़े देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ईरान ने कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन को इस युद्ध में ईरान को हुए नुकसान के लिए मुआवजा देना होगा। यह देश अमेरिका और इजराइल के साथ सीधे तौर पर या पर्दे के पीछे से मिलकर ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल थे।
ईरान का कहना है कि इन पांचों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। इन देशों की वजह से ईरान को जान-माल और संपत्ति का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जिसकी भरपाई अब इन देशों को ही करनी होगी।
ट्रंप को अपने देश में विरोध का सामना
अगर गौर करें तो ईरान जहां मजबूती से दोबारा खड़ा हो रहा है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। उन्हें अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
डेमोक्रेट सेनेटर चक शूमर ने इस जंग के अब तक के नतीजों को लेकर ट्रंप पर तंज कसा है। उन्होंने ट्रंप के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को ऑपरेशन एपिक फेल करार देते हुए कहा:
“हॉर्मूस जलडमरूमध्य पूरी तरह से अफरातफरी में। ईरानी शासन अब भी कायम। गैस की कीमतें कई सालों में सबसे ज्यादा। ईरान की परमाणु आकांक्षाएं बिल्कुल वैसी ही। अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय साख और भी खराब। हमें इस युद्ध को तुरंत खत्म कर देना चाहिए, इससे पहले कि डोनाल्ड ट्रंप हालात को और भी बदतर बना दें।”
यही नहीं, अमेरिका का विपक्षी दल डेमोक्रेट्स एक बार फिर ट्रंप की ईरान युद्ध शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर मतदान कराने के लिए दबाव डालने की तैयारी में है।
हॉर्मूस स्ट्रेट पर चीन और रूस का मोर्चा
हॉर्मूस स्ट्रेट जंग के केंद्र में आ गया है। अब अगर यह जंग दोबारा छिड़ेगी, तो हॉर्मूस को लेकर ही छिड़ेगी। और इस बार अमेरिका के खिलाफ केवल ईरान नहीं, बल्कि चीन और रूस भी खड़े होंगे।
अमेरिका ने हॉर्मूस से होकर गुजरने वाले हर जहाज की जांच के आदेश दिए हैं। इस वक्त अगर किसी देश का जहाज आसानी से हॉर्मूस पार कर रहा है, तो वो एकमात्र देश चीन है।
चीन की खुली धमकी
चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने ईरान को लेकर चीन के रिश्तों पर ट्रंप प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा:
“हमारा देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में है। लेकिन हम ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापार समझौतों का सम्मान करेंगे। इसमें किसी तीसरे देश को दखल देने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोई भी देश हॉर्मूस के हमारे मामलों में दखल ना दें।”
चीन ने साफ कहा कि हॉर्मूस ट्रेड पर ईरान का कंट्रोल है और यह चीन के लिए खुला है। बीजिंग का इरादा तेहरान के साथ हुए समझौतों के तहत हॉर्मूस ट्रेड से अपना आवागमन जारी रखने का है।
चीन का जहाज नाकाबंदी पार कर गया
खबर यह भी आ रही है कि चीन का एक जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद हॉर्मूस पार कर गया है। और यह कोई मामूली जहाज नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की तरफ से बैन किया गया तेल जहाज है।
इससे अमेरिका की काफी किरकिरी हो रही है। जिस तरह चीन अमेरिका को चैलेंज कर रहा है, उससे क्षेत्र में तनाव बढ़ता नजर आ रहा है।
रूस का समर्थन: लावरोव चीन पहुंचे
अपने इस अभियान में चीन ने रूस को भी शामिल कर लिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव चीन पहुंचे हैं। उनके इस दो दिवसीय दौरे पर दोनों देश मिलकर हॉर्मूस संकट से निपटने की योजना बनाएंगे।
यानी अमेरिका के खिलाफ चीन और रूस एकजुट रूप से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। यह ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। पहले ही ईरान की ताकत के आगे अमेरिकी सेना बेहाल हो गई है।
ट्रंप की यीशु फोटो विवाद
इसी बीच ट्रंप एक और विवाद में फंस गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर की थी, जिसमें उन्होंने खुद को यीशु मसीह के जैसा दिखाया था।
जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, वैसे ही वो लोगों के निशाने पर आ गए। इस फोटो से विवाद भड़क गया। उनके खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुए।
तनाव बढ़ता देख ट्रंप को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने अपने पोस्ट को डिलीट भी कर दिया। एक पत्रकार ने जब पूछा कि क्या उन्होंने वह तस्वीर शेयर की थी, तो ट्रंप ने कहा:
“वो कोई तस्वीर नहीं थी। वो मैं ही था। मुझे लगा कि यह मैं एक डॉक्टर के रूप में हूं और रेड क्रॉस के कार्यकर्ता के रूप में वहां काम कर रहा हूं। यह मुझे लोगों को ठीक करते हुए दिखा रहा है और मैं वास्तव में लोगों को ठीक करता हूं।”
पोप पर टिप्पणी से विवाद
ट्रंप ने पोप लियो 14 पर भी विवादित टिप्पणी की थी। दावा किया था कि पोप आज उनकी बदौलत उस कुर्सी पर बैठे हैं। ट्रंप ने कहा कि वह बहुत ही लिबरल व्यक्ति हैं और अच्छा काम नहीं कर रहे।
इसके बाद ट्रंप को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। अमेरिकी ईसाइयों ने पोप लियो पर ट्रंप के हमले की निंदा की। अमेरिकी ईसाई समुदाय के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि ट्रंप को माफी मांगनी चाहिए।
इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह बर्दाश्त के बाहर हैं।
उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट
एक बार फिर उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में टकराव के हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। उत्तर कोरिया एक के बाद एक मिसाइलों को टेस्ट कर रहा है।
बीते कुछ वक्त में उत्तर कोरिया ने अपने हथियारों का प्रोडक्शन बढ़ाया है। क्रूज और एंटीशिप मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया ने तीन दिनों तक लगातार अपने खतरनाक हथियारों का परीक्षण किया है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइल पर क्लस्टर बम वॉरहेड का टेस्ट शामिल है।
किम जोंग उन ने नौसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने का संकल्प लिया। जिसमें परमाणु सक्षम हथियारों का उनका बढ़ता जखीरा भी शामिल है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिका-ईरान के बीच 16 अप्रैल को बातचीत की संभावना
- ट्रंप का दावा: ईरान ने की बातचीत की मांग, लेकिन ईरान के तेवर अलग
- हॉर्मूस स्ट्रेट पर चीन और रूस ने अमेरिका के खिलाफ खोला मोर्चा
- चीन का तेल जहाज अमेरिकी नाकाबंदी पार कर गया
- ट्रंप की यीशु फोटो और पोप टिप्पणी से विवाद
- उत्तर कोरिया ने किए मिसाइल टेस्ट, किम जोंग उन बढ़ा रहे हथियार













