Gut Health की बात हो या फिर बुजुर्गों में सीने के इंफेक्शन का खतरा, सेहत से जुड़े कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब जानना हर किसी के लिए जरूरी है। और जब आशा भोसले जैसी महान गायिका का अचानक निधन हो जाए, तो समझना और भी जरूरी हो जाता है कि कैसे एक साधारण सा दिखने वाला इंफेक्शन जानलेवा बन सकता है।
आज की यह खबर तीन अहम सेहत मुद्दों पर केंद्रित है। पहला, कैसे अपनी गट हेल्थ को दुरुस्त रखें। दूसरा, क्यों और कैसे हुआ लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले का निधन। और तीसरा, वो तीन सबसे जरूरी विटामिन जो आपकी डाइट में होने ही चाहिए।
क्यों जरूरी है गट हेल्थ का ख्याल रखना
देखा जाए तो पेट की सेहत पूरे शरीर की सेहत से जुड़ी है। बदहजमी हो, गैस बने, या फिर एसिडिटी की समस्या। जब भी पेट में कोई दिक्कत होती है, तो हमारा पूरा दिन खराब हो जाता है। काम पर ध्यान नहीं लग पाता।
डॉ. रॉय पटानकर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन, जेन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, चेंबूर बताते हैं कि आंत में कम से कम एक मिलियन बैक्टीरिया और फंगस रहता है। ये बैक्टीरिया जन्म से लेकर एडल्टहुड तक बढ़ते जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये गट के बैक्टीरिया अच्छे और बुरे दोनों होते हैं। बहुत जरूरी है कि अच्छे बैक्टीरिया का नंबर बढ़ता रहे। अगर बुरे बैक्टीरिया बढ़ जाएं, तो इस कंडीशन को डिसबायोसिस कहते हैं।
डिसबायोसिस के लक्षण क्या हैं
जब पेट के बैक्टीरिया ठीक नहीं होते, तो कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। सबसे आम है बदहजमी। पेट में गैस बनना। ज्यादा गैस नीचे से छूटना। एसिडिटी होना।
लेकिन समझने वाली बात यह है कि डिसबायोसिस सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता। कभी मोटापा होना, डायबिटीज कंट्रोल नहीं होना, इर्रेगुलर पीरियड्स होना – ये सारे भी गट बैक्टीरिया से लिंक हैं।
डॉ. पटानकर कहते हैं कि इम्यूनिटी यानी शरीर की प्रतिरोधक शक्ति भी गट बैक्टीरिया से रिलेटेड है। अभी हम जानते हैं कि काफी कुछ ऐसे ऑटोइम्यून इलनेसेस भी हैं जो गट बैक्टीरिया से लिंक हैं।
गट हेल्थ सुधारने के लिए क्या खाएं
अगर गौर करें तो गट हेल्थ सुधारना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस कुछ चीजें अपनी डाइट में शामिल करनी होंगी।
सुबह का पहला पेय: सुबह गुनगुना पानी में थोड़ा नींबू, थोड़ा अदरक और थोड़ा गुड़ डालकर पिएं। यह पेट को साफ रखता है।
सलाद जरूर खाएं: खाने में सलाद बढ़ाना बहुत जरूरी है। गट बैक्टीरिया को फाइबर चाहिए। गाजर, काकड़ी, केला, पपीता, अदरक, हल्दी – ये सब गट बैक्टीरिया को सस्टेन करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।
प्रोबायोटिक्स का सेवन: जब भी कोई एंटीबायोटिक लेते हैं या कोई कीमोथेरेपी ड्रग लेते हैं, तो याद रखें कि अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाएंगे। उस वक्त प्रोबायोटिक लेना बहुत जरूरी है।
दही और छाछ लेते रहें। इसमें लैक्टोबैसिलस जैसा बैक्टीरियम है जो गट हेल्थ को बढ़ाता है। साथ ही, रेगुलर ईटिंग, रेगुलर स्लीपिंग, रात को अच्छी तरह सात-आठ घंटे नींद और खाने के बाद थोड़ा वॉक करना भी जरूरी है।
लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले का निधन
रविवार 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल में लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले ने आखिरी सांस ली। वो 92 साल की थीं। अपने आठ दशक से भी लंबे करियर में उन्होंने कई मशहूर गाने गाए।
निधन से एक दिन पहले यानी 11 अप्रैल को उन्हें सीने में इंफेक्शन और बहुत ज्यादा थकान जैसे लक्षणों के साथ आईसीयू में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उनकी मौत का कारण कार्डियाक अरेस्ट के बाद हुआ मल्टीपल ऑर्गन फेलियर था।
सीने का इंफेक्शन कैसे बन गया जानलेवा
यहां ध्यान देने वाली बात है कि सीने का इंफेक्शन कार्डियक अरेस्ट तक कैसे पहुंच गया। डॉ. नितिन राठी, एसोसिएट डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, धर्मशिला नारायण सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली बताते हैं कि जब सीने में इंफेक्शन होता है, तब फेफड़े ठीक से काम नहीं कर पाते।
इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। जिसकी वजह से शरीर के अंदर परेशानी शुरू हो जाती है। अगर इंफेक्शन ज्यादा बढ़ जाए, तो यह खून में फैल सकता है। इसे सेप्सिस कहते हैं।
इस हालत में ब्लड प्रेशर गिरता है और दिल पर दबाव बढ़ता है। जिससे कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है। जब दिल अचानक काम करना बंद कर देता है, तब शरीर के बाकी अंगों को खून नहीं मिल पाता।
धीरे-धीरे किडनी, लिवर और दिमाग जैसे अंग फेल होने लगते हैं। इसे मल्टीपल ऑर्गन फेलियर कहते हैं। यानी सिंपल सा दिखने वाला चेस्ट इंफेक्शन भी बहुत गंभीर हो सकता है।
बुजुर्गों को ज्यादा खतरा क्यों
बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। इस वजह से उन्हें सीने में इंफेक्शन होने का रिस्क ज्यादा होता है। मौसम बदलने, प्रदूषण, स्मोकिंग, डायबिटीज, दिल की बीमारी या फेफड़ों की किसी पुरानी बीमारी से भी सीने में इंफेक्शन हो सकता है।
इसके अलावा लंबे समय तक बिस्तर पर रहने या निगलने में दिक्कत होने से भी इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।
किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सीने में इंफेक्शन के लक्षण हैं: लगातार खांसी, बलगम, सांस लेने में दिक्कत, बुखार, सीने में दर्द और बहुत ज्यादा कमजोरी।
कई बार बुजुर्गों को बुखार नहीं आता, बल्कि अचानक सुस्ती और कंफ्यूजन जैसे लक्षण दिखते हैं। इन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कैसे करें बचाव
बुजुर्गों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। उन्हें फ्लू और निमोनिया की वैक्सीन लगवाएं। सिगरेट के धुएं और प्रदूषण से दूर रखें। आसपास साफ-सफाई रखें। उनकी पुरानी बीमारियों को भी कंट्रोल में रखें।
साथ ही, जैसे ही उनमें चेस्ट इंफेक्शन के लक्षण दिखें, तुरंत अस्पताल ले जाएं। वहां जरूरत के हिसाब से एंटीबायोटिक्स, ऑक्सीजन सपोर्ट और गंभीर मामलों में आईसीयू देखभाल दी जाती है।
समय पर इलाज शुरू होने से सेप्सिस, कार्डियक अरेस्ट और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर से बचा जा सकता है।
ये हैं 3 सबसे जरूरी विटामिन
खाने में विटामिन होना बहुत जरूरी है। लेकिन अगर सबसे जरूरी तीन विटामिन चुनने हों तो वो कौन से होंगे? दीप्ति खटूजा, मैनेजर, डाइटेटिक्स एंड न्यूट्रिशन, फोर्टिस, गुरुग्राम कहती हैं कि तीन सबसे जरूरी विटामिन हैं: विटामिन डी, विटामिन बी12 और विटामिन सी।
विटामिन डी: हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। शरीर में कैल्शियम की अब्सॉर्प्शन में मदद करता है। इम्यूनिटी भी बढ़ाता है।
विटामिन डी की कमी से हड्डियों में दर्द और कमजोरी रहने लगती है। बार-बार थकान होती है। बच्चों में रिकेट्स और बड़ों में ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है।
विटामिन डी के स्रोत: रोज सुबह थोड़ी देर धूप में बैठें। दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स लें। अंडे की जर्दी और सालमन, ट्यूना जैसी मछली खाएं।
विटामिन बी12: रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। नर्वस सिस्टम को हेल्दी रखता है। शरीर में एनर्जी भी बनाए रखता है।
विटामिन बी12 की कमी से कमजोरी और चक्कर आ सकता है। याददाश्त कमजोर हो सकती है। एनीमिया यानी खून की कमी और हाथ-पैरों में जनजनाहट भी हो सकती है।
विटामिन बी12 के स्रोत: दूध, दही, पनीर, अंडा, मांस, मछली और फोर्टिफाइड अनाज।
विटामिन सी: इम्यूनिटी मजबूत करता है। स्किन में निखार लाता है। घाव भरने में मदद करता है। विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी काम करता है।
एंटीऑक्सीडेंट हमारे सेल्स को नुकसान से बचाते हैं। जब सेल्स हेल्दी और मजबूत होते हैं, तो बीमारियों का रिस्क घटता है।
विटामिन सी की कमी से बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। मसूड़ों से खून आता है। स्किन रूखी हो जाती है और घाव भरने में देरी होती है।
विटामिन सी के स्रोत: आंवला, संतरा, नींबू, मौसंबी, अमरूद, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी पत्तेदार सब्जियां।
मुख्य बातें (Key Points)
- गट हेल्थ पूरे शरीर की सेहत से जुड़ी है; फाइबर और प्रोबायोटिक्स जरूर लें
- आशा भोसले का निधन कार्डियाक अरेस्ट के बाद मल्टीपल ऑर्गन फेलियर से हुआ
- सीने का इंफेक्शन बुजुर्गों के लिए जानलेवा हो सकता है
- विटामिन डी, बी12 और सी सबसे जरूरी विटामिन हैं
- समय पर डॉक्टर से सलाह लें और बचाव के उपाय अपनाएं













