Akshaya Tritiya 2026: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व बेहद पावन और मंगलकारी माना जाता है। इस दिन को ‘आखा तीज’ के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ होता है ऐसा फल जो कभी खत्म न हो। इसी मान्यता के चलते इस दिन किए गए दान, निवेश और शुभ कार्य को विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा इस दिन प्राप्त होती है। लोग इस अवसर पर नए कार्य शुरू करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और खासतौर पर सोना-चांदी खरीदते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरे भारत में बड़े उत्साह से निभाई जाती है।
कब से कब तक रहेगी तृतीया तिथि?
तृतीया तिथि की शुरुआत 18 अप्रैल 2026 की शाम 5:31 बजे से होगी। इसका समापन 19 अप्रैल 2026 को दोपहर 2:12 बजे होगा। उदय तिथि के अनुसार मुख्य पर्व 19 अप्रैल, रविवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगेगी।
भारतीय ज्योतिष और पंचांग के अनुसार यह तिथि बिना किसी मुहूर्त के भी शुभ मानी जाती है। यानी पूरे दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।
सोना खरीदने का सबसे शुभ मुहूर्त
Akshaya Tritiya 2026 पर सोना खरीदने की परंपरा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इस दिन सोना खरीदना समृद्धि और स्थाई धन का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में सोना खरीदने का सबसे शुभ समय 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा।
हालांकि अगर कोई इस विशेष मुहूर्त में खरीदारी नहीं कर पाता तो पूरी तृतीया तिथि के दौरान सोना खरीदना शुभ माना जाता है। दरअसल ‘अक्षय’ शब्द ही इस दिन की खासियत बताता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना या किसी जगह पर किया गया निवेश कभी खत्म नहीं होता और घर में सुख-समृद्धि लेकर आता है।
यही कारण है कि कई लोग इस दिन को साल की पहली बड़ी खरीदारी के तौर पर देखते हैं। ज्वेलर्स भी इस दिन विशेष ऑफर और छूट देते हैं।
पूजा-पाठ का विधान
Akshaya Tritiya के दिन पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
पूजा में फूल, फल, मिठाई और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा मंदिर जाना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और जरूरतमंदों को दान देना भी इस दिन बेहद शुभ माना जाता है। विशेष रूप से अन्न, जल, वस्त्र और दक्षिणा का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
कई लोग इस दिन गंगा स्नान भी करते हैं और तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज जैसे पवित्र स्थानों पर इस दिन विशेष भीड़ उमड़ती है।
धार्मिक और पौराणिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। साथ ही इसी तिथि से त्रेता युग की शुरुआत भी मानी जाती है। महाभारत में वर्णित अक्षय पात्र की कथा भी इसी दिन से जुड़ी मानी जाती है, जो कभी खाली नहीं होता था।
यह पात्र पांडवों को भगवान सूर्य ने दिया था जिसमें से असीमित भोजन निकलता था। इस कथा के कारण भी इस दिन दान और भोजन कराने का विशेष महत्व है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार इसी दिन गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसलिए गंगा स्नान को विशेष फलदायी माना जाता है।
आम लोगों के लिए क्या है खास?
आम लोगों के लिए यह दिन एक नई शुरुआत का प्रतीक है। चाहे नया व्यवसाय हो, नया घर हो, या कोई नई योजना – सभी को इस दिन शुरू करना शुभ माना जाता है। सोने में निवेश करने वालों के लिए तो यह दिन सबसे बड़ा अवसर होता है।
मध्यम वर्ग के परिवार भी इस दिन थोड़ा-बहुत सोना जरूर खरीदते हैं। कई बार लोग सिर्फ एक सिक्का या छोटी अंगूठी ही खरीद लेते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इससे घर में धन की कमी नहीं होती।
बाजार में भी इस दिन विशेष रौनक देखने को मिलती है। सर्राफा बाजार में सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
क्या करें और क्या न करें?
Akshaya Tritiya पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए, किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए और नकारात्मक विचार नहीं रखने चाहिए। सात्विक भोजन करना चाहिए और मांसाहार से बचना चाहिए।
दान करते समय शुद्ध मन से करना चाहिए और दिखावे के लिए नहीं। सोना खरीदते समय हॉलमार्क की जांच जरूर करें और बिल जरूर लें।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर दिन की शुरुआत करनी चाहिए। सूर्योदय से पहले स्नान करना और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
मुख्य बातें (Key Points):
• Akshaya Tritiya 2026 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी
• तृतीया तिथि 18 अप्रैल शाम 5:31 से 19 अप्रैल दोपहर 2:12 तक
• सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 से 12:20 बजे तक
• इस दिन दान, पूजा और नए कार्य शुरू करना अत्यंत शुभ













