Punjab Govt Employees Arrears को लेकर पंजाब की राजनीति में उबाल आ गया है। चंडीगढ़ में 8 अप्रैल को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। दरअसल, पंजाब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों का एरियर भुगतान करने का सख्त आदेश दिया है, जिसके बाद मजीठिया ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट के फैसले से सरकार को लगा झटका
बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि जिस सरकार को कर्मचारियों ने अपना समर्थन देकर सत्ता की कुर्सी पर बैठाया, वही आज उनके जायज हकों को देने से कतरा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार कर्मचारियों को एरियर देने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए एक ‘सब-कमेटी’ बना रही थी। मजीठिया के अनुसार, हाईकोर्ट का यह फैसला सरकार के चेहरे पर एक करारा तमाचा है।
वादे और हकीकत का अंतर
मजीठिया ने याद दिलाया कि साल 2024 में सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें अप्रैल महीने तक एरियर देने का वादा किया गया था। लेकिन वह वादा केवल कागजों तक सीमित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने करोड़ों रुपये के विज्ञापन चलाकर अपनी झूठी छवि चमकाने में तो कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब बात कर्मचारियों के हक की आई, तो खजाना खाली होने का रोना रोने लगी।
कर्मचारी विरोधी चेहरा हुआ बेनकाब
अकाली दल नेता ने कहा कि आम आदमी पार्टी का कर्मचारी-विरोधी चेहरा अब पूरी तरह सामने आ गया है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार इस हाईकोर्ट के फैसले को मानने के बजाय इसे ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकती है ताकि कर्मचारियों को और अधिक परेशान किया जा सके और भुगतान में देरी हो।
पेंशनरों और कर्मचारियों की बड़ी जीत
मजीठिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक बड़ी जीत है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 1 जुलाई 2025 तक का 58% डीए (DA), 30 जून 2026 तक सभी पात्र कर्मचारियों और पेंशनरों को अनिवार्य रूप से दिया जाए। मजीठिया ने कहा कि यह पैसा सरकार को पहले ही देना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर इसे रोका गया।
विज्ञापनों पर खर्च और लाठीचार्ज का आरोप
मजीठिया ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कर्मचारियों के हक का पैसा विज्ञापनों की चकाचौंध में बर्बाद कर दिया गया। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि जब कर्मचारी अपने हक के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन पर लाठीचार्ज किया गया और महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि 2027 के विधानसभा चुनावों में कर्मचारी इस व्यवहार का हिसाब चुकता करेंगे।
अकाली दल का वादा और प्राथमिकता
अपने संबोधन के अंत में मजीठिया ने प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि अकाली दल की सरकार के दौरान कर्मचारियों को अधिकतम डीए और वेतन दिया जाता था। उन्होंने वादा किया कि यदि भविष्य में अकाली दल की सरकार आती है, तो कर्मचारियों के सभी लंबित मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
राजनीतिक समीकरण और प्रभाव
इस पूरे विवाद ने पंजाब में सरकार और कर्मचारियों के बीच के तनाव को बढ़ा दिया है। जब एक सरकार अपने प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ यानी कर्मचारियों को खुश नहीं रख पाती, तो इसका असर शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता पर पड़ता है। मजीठिया द्वारा इस मुद्दे को उठाना यह दर्शाता है कि विपक्ष अब सरकारी कर्मचारियों के असंतोष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है।
जानें पूरा मामला
यह पूरा विवाद कर्मचारियों के बकाया एरियर और डीए के भुगतान को लेकर है। सरकार ने 2024 में वादा किया था कि भुगतान अप्रैल तक हो जाएगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी पैसा नहीं मिला। कर्मचारी इस मामले को लेकर अदालत पहुंचे, जहाँ पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार को समय सीमा तय करते हुए भुगतान करने का आदेश दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों का एरियर देने का आदेश दिया है।
- मजीठिया ने आरोप लगाया कि सरकार ने एरियर देने के बजाय ‘डमी कमेटी’ बना ली थी।
- 1 जुलाई 2025 तक का 58% डीए, 30 जून 2026 तक भुगतान करने का निर्देश है।
- मजीठिया ने सरकार पर विज्ञापनों में पैसा खर्च करने और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया।













