Gold Price Crash ने आज सर्राफा बाजार में तहलका मचा दिया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। वायदा कारोबार (Futures Trade) में सोने की कीमतों में 3.91% की गिरावट आई, जिससे प्रति 10 ग्राम सोने के दाम ₹6,608 तक टूट गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून डिलीवरी वाला सोना पिछले चार दिनों की तेजी को छोड़ते हुए ₹1,47,000 प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर आ गया।
यह Gold Price Crash उन निवेशकों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने हाल की तेजी के दौरान सोने में पैसा लगाया था, जबकि खरीदारों के लिए यह सोना सस्ते में खरीदने का मौका बन सकता है।
‘MCX पर सोना ₹1,48,480 पर, पिछले क्लोज से ₹5,000 से ज्यादा नीचे’
Gold Price Crash का सबसे बड़ा असर MCX पर दिखा। खबर लिखे जाने तक MCX पर सोना ₹1,48,480 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह ₹1,53,708 पर बंद हुआ था। यानी एक ही दिन में सोने ने ₹5,000 से ज्यादा की गिरावट दर्ज की और दिन के दौरान तो ₹1,47,000 के निचले स्तर तक पहुंच गया। चार दिनों की लगातार तेजी के बाद यह अचानक गिरावट बाजार में बड़ी हलचल का कारण बनी।
यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold Price Crash का गहरा असर दिखा। कॉमेक्स (COMEX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 4.05% गिरकर $4,627.40 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी दबाव देखा गया।
‘ट्रंप के एक बयान ने पलटी सोने की चाल: डॉलर बना सेफ हेवन’
बाजार के जानकारों के अनुसार इस Gold Price Crash की सबसे बड़ी वजह राष्ट्रपति ट्रंप का ताजा बयान है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस से कहा कि ईरान में अमेरिका के रणनीतिक लक्ष्य करीब-करीब पूरे हो चुके हैं, लेकिन अगले दो से तीन हफ्ते तक अमेरिका वहां बेहद कड़ा प्रहार जारी रखेगा।
इस बयान के बाद सुरक्षित निवेश के तौर पर निवेशकों का भरोसा सोने से हटकर डॉलर की तरफ शिफ्ट हो गया। सीनियर एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के मुताबिक, ट्रंप की चेतावनी के बाद डॉलर एक “सेफ हेवन एसेट” बनकर उभरा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने जैसी धातुओं पर दबाव पड़ता है, क्योंकि सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। ट्रंप के कड़े रुख से डॉलर इंडेक्स में उछाल आया, जिसने Gold Price Crash को और तेज कर दिया।
‘कच्चे तेल की महंगाई ने खत्म की Fed Rate Cut की उम्मीद’
Gold Price Crash के पीछे एक और बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और युद्ध खत्म होने की कोई स्पष्ट समय सीमा न होने से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता और बढ़ा दी है।
इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि साल 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो डॉलर और बॉन्ड में निवेश आकर्षक बनता है, जिससे सोने की मांग घटती है और कीमतें गिरती हैं। आम निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि सोने में निवेश पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।
‘ऑल टाइम हाई से कहां पहुंचा सोना-चांदी’
यह याद रखना जरूरी है कि Gold Price Crash से पहले सोने और चांदी ने ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड भी बनाया था। एक समय ऐसा था जब चांदी ₹4 लाख को भी पार कर गई थी और सोने की कीमतें ₹2 लाख को छूने ही वाली थीं। लेकिन जब से ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू हुआ है, तब से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर देखा जा रहा है।
कभी कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं तो कभी भरभराकर गिरती हैं। और अब एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान ने पूरे मार्केट को हिलाकर रख दिया है। फिलहाल बाजार की नजरें मिडिल ईस्ट के हालात पर टिकी हुई हैं। अगर तनाव और बढ़ता है तो सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
‘निवेशकों को अभी क्या करना चाहिए?’
Gold Price Crash ने यह साबित कर दिया है कि सोने का बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर हो गया है। ट्रंप का एक बयान, ईरान में युद्ध की स्थिति, हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना या बंद होना और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति: ये सब मिलकर सोने की दिशा तय कर रहे हैं। जब तक ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध विराम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम नहीं होती, तब तक सोने और चांदी में ऐसी तेज गिरावट और उछाल का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे अस्थिर माहौल में आम निवेशकों को सतर्कता से कदम उठाने की जरूरत है।
मुख्य बातें (Key Points)
- MCX पर सोना 3.91% गिरकर ₹1,48,480 प्रति 10 ग्राम पर, दिन का निचला स्तर ₹1,47,000 रहा।
- COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स 4.05% गिरकर $4,627.40 प्रति औंस के करीब पहुंचा।
- ट्रंप के ईरान पर कड़े बयान से डॉलर मजबूत हुआ, सोने से निवेशकों का भरोसा हटा।
- फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 में ब्याज दर कटौती की उम्मीदें लगभग खत्म, चांदी पर भी दबाव बना।













