Raja Warring Lok Sabha में गुरुवार को उस वक्त बड़ा हंगामा हो गया जब पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामले में न्याय की मांग उठाई। वड़िंग लोकसभा में बेअदबी मामले में 11 साल से न्याय न मिलने पर चिंता जता रहे थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने शिरोमणी अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का नाम लिया, उनका माइक बंद कर दिया गया। इसके बाद वड़िंग ने संसद के बाहर आकर पत्रकारों से नाराजगी जताई और कहा कि वे सिर्फ तथ्य रख रहे थे, किसी पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे थे।
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11 साल से लटका है बेअदबी का मामला, न्याय अब तक नहीं मिला: वड़िंग
Raja Warring Lok Sabha में बोलते हुए भावनात्मक लहजे में कहा कि 2015 में जब पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की दर्दनाक घटना हुई, उसे 11 साल बीत चुके हैं। लेकिन आज तक इस मामले में पूरा न्याय नहीं मिल पाया है। वड़िंग ने कहा कि सिख समुदाय पिछले 11 सालों से अपने पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामले में न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन लगातार सरकारों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
वड़िंग ने उस दुखद घटना को याद करते हुए कहा कि बेअदबी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे दो लोगों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी। यह घटना पंजाब के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय है और आज भी सिख समुदाय इसके जख्मों से उबर नहीं पाया है।
सुखबीर बादल उस वक्त उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री थे: वड़िंग
Raja Warring Lok Sabha में तथ्य रखते हुए कहा कि 2015 में जब बेअदबी की घटना हुई, उस समय सुखबीर सिंह बादल पंजाब के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री थे। वड़िंग ने आरोप लगाया कि सुखबीर बादल ने अपनी गलती स्वीकार करने के बावजूद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री होने के नाते पंजाब की कानून-व्यवस्था उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन बेअदबी की घटनाएं उनकी निगरानी में हुईं।
यह बेहद अहम बात है कि वड़िंग ने संसद के भीतर सुखबीर बादल पर ये आरोप लगाए, जो दर्शाता है कि बेअदबी का मुद्दा आज भी पंजाब की राजनीति में कितना गरम और संवेदनशील है।
माइक बंद होने पर वड़िंग ने जताई नाराजगी: “सिर्फ तथ्य रख रहा था”
Raja Warring Lok Sabha में सुखबीर बादल का नाम लेते ही माइक बंद कर दिया गया। इसके बाद वड़िंग संसद के बाहर आकर पत्रकारों से मिले और अपनी दुख और निराशा जताई। वड़िंग ने कहा कि उन्हें गहरा दुख हुआ कि उनका माइक उस समय बंद कर दिया गया जब वे केवल तथ्य रख रहे थे और किसी के खिलाफ कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर रहे थे।
वड़िंग ने कहा कि जो कुछ उन्होंने संसद में कहा, वह सब रिकॉर्ड में मौजूद है। फिर भी उनका माइक बंद कर दिया गया, जो एक लोकतांत्रिक मंच पर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बेअदबी जैसे संवेदनशील मामले पर संसद में बोलने का अधिकार हर सांसद को है और तथ्य रखने से किसी को नहीं रोका जाना चाहिए।
बेअदबी का मुद्दा पंजाब की राजनीति में क्यों है सबसे संवेदनशील?
Punjab Sacrilege Cases का मुद्दा पंजाब की राजनीति का सबसे गहरा और दर्दनाक जख्म है। 2015 में बरगाड़ी और अन्य जगहों पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं ने पूरे पंजाब को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन में दो लोगों की पुलिस फायरिंग में मौत ने आग में घी का काम किया। यही मुद्दा 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल की हार की सबसे बड़ी वजह बना था।
आज 11 साल बाद भी यह मामला सुलझा नहीं है। कांग्रेस, AAP और अकाली दल तीनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं। कांग्रेस कहती है कि अकाली दल के राज में बेअदबी हुई, अकाली दल कहता है कि AAP-कांग्रेस ने साजिश रची, और AAP कहती है कि पिछली सरकारों ने न्याय नहीं दिया। इस बीच सिख समुदाय आज भी न्याय के इंतजार में है और यही बात वड़िंग ने संसद में उठाई।
मुख्य बातें (Key Points)
- राजा वड़िंग ने लोकसभा में बेअदबी मामले में 11 साल से न्याय न मिलने पर चिंता जताई, सुखबीर बादल का नाम लेते ही माइक बंद कर दिया गया।
- वड़िंग ने कहा कि 2015 में बेअदबी के वक्त सुखबीर बादल उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री थे, गलती मानने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
- बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन में दो लोगों की पुलिस फायरिंग में मौत की बात भी संसद में उठाई।
- संसद के बाहर वड़िंग ने कहा: सिर्फ तथ्य रख रहा था, माइक बंद करना निराशाजनक; सब कुछ रिकॉर्ड में मौजूद है।













