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The News Air - Breaking News - Ali Khamenei Assassination: इजराइल ने कैसे Iran Supreme Leader को मार गिराया, बड़ा खुलासा

Ali Khamenei Assassination: इजराइल ने कैसे Iran Supreme Leader को मार गिराया, बड़ा खुलासा

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खमेनी की मौत हो गई, Mossad ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरे हैक कर सालों तक की थी ट्रैकिंग

The News Air Team by The News Air Team
रविवार, 29 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, सियासत
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Ali Khamenei Assassination
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Ali Khamenei Assassination: 28 फरवरी 2026 को ईरान के सुप्रीम लीडर अली खमेनी की तेहरान में इजराइल के एयरस्ट्राइक में हत्या कर दी गई।1 यह हमला अमेरिका और इजराइल के एक व्यापक संयुक्त सैन्य अभियान का हिस्सा था, जिसमें अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA की लोकेशन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कई ईरानी नेताओं के ठिकानों का पता लगाने के लिए किया गया।1 ये हवाई हमले शनिवार सुबह करीब 9:40 बजे (तेहरान समय) हुए, जिनमें खमेनी और उनके शीर्ष रक्षा अधिकारियों को निशाना बनाया गया।

तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट बनी ऑपरेशन का केंद्र

तेहरान के दिल में स्थित पाश्चर स्ट्रीट पर एक सरकारी कॉम्प्लेक्स है, जहां ईरान के राष्ट्रपति और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के दफ्तर हैं। खमेनी की हत्या सेंट्रल तेहरान की उसी लोकेशन पर हुई जहां सुप्रीम लीडर का ऑफिस, आवास और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का मुख्यालय है।

सामान्य दिनों में इस सड़क पर ईरान के कई महत्वपूर्ण नेता और अधिकारी आते-जाते दिखते थे। लेकिन जून 2025 में इजराइल और ईरान के बीच ’12 दिवसीय युद्ध’ शुरू होने के बाद से सुरक्षा का माहौल पूरी तरह बदल गया था। इसके बाद खमेनी बेहद सतर्क हो गए थे और अपना ज्यादातर वक्त एक अंडरग्राउंड बंकर में बिताने लगे थे, जो इतना गहरा था कि उसकी लिफ्ट से नीचे पहुंचने में पांच मिनट से ज्यादा लगते थे।

Mossad ने कैसे हैक किए तेहरान के ट्रैफिक कैमरे

यह हमला कोई रातोंरात की योजना नहीं थी। इजराइल ने तेहरान के विशाल ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को हैक कर लिया था ताकि खमेनी और अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारियों के बॉडीगार्ड्स की हर हरकत पर नजर रखी जा सके।3 इजराइल की विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान सरकार के अपने निगरानी तंत्र को उसी के खिलाफ इस्तेमाल कर दिया।

मोसाद को इन कैमरों तक पहुंच कई साल पहले मिल गई थी और एक खास कैमरा ऐसा था जिसके एंगल से खमेनी की सुरक्षा टीम के सदस्यों की गाड़ियों की पार्किंग तक दिखती थी। इन कैमरों के जरिए इजरायली इंटेलिजेंस ने गार्ड्स के घर के पते, ड्यूटी शिफ्ट और रोजमर्रा के रूट की फाइलें तैयार कर ली थीं।

ये इमेजेस एन्क्रिप्ट करके इजराइल के सर्वर्स तक भेजी जाती थीं, जहां इंटेलिजेंस अधिकारी हर तस्वीर की बारीकी से जांच करते थे।

CIA और Mossad का गठजोड़: ‘Pattern of Life’ बना हथियार

इस पूरे ऑपरेशन में इजराइल अकेला नहीं था। CIA कई महीनों से खमेनी की लोकेशन और उनके पैटर्न को ट्रैक कर रही थी और उसे पता चल गया था कि 28 फरवरी को सीनियर अधिकारियों की एक बैठक होने वाली है जिसमें खमेनी भी शामिल होंगे।

इजराइल ने IDF की Unit 8200 द्वारा विकसित AI टूल्स और एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर ईरानी नेतृत्व पर इकट्ठा किए गए डेटा के पहाड़ को प्रोसेस किया। इससे खमेनी की ‘Pattern of Life’ तैयार की गई, जिसमें उनकी यात्रा की आदतें, सुरक्षा रूटीन और बैठकों का सटीक समय शामिल था।

इंटेलिजेंस अधिकारी इसे “Pattern of Life” कहते हैं, जिसका मतलब है किसी व्यक्ति के व्यवहार को इतनी गहराई से समझ लेना कि आप पहले से बता सकें कि वो कब, कहां और किसके साथ होगा। एक इजरायली इंटेलिजेंस अधिकारी ने कहा: “हम तेहरान को ऐसे जानते थे जैसे जेरूसलम को जानते हैं।”

तीन स्तरीय इंटेलिजेंस सिस्टम ने कैसे काम किया

इस ऑपरेशन के लिए इजराइल के इंटेलिजेंस सिस्टम के तीन हिस्सों ने मिलकर काम किया:

पहला: Unit 8200, जो इजराइल डिफेंस फोर्सेस की सबसे बड़ी सिग्नल्स इंटेलिजेंस यूनिट है। इस यूनिट ने इलेक्ट्रॉनिक डेटा इकट्ठा किया।5 टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़े फोंस की निगरानी, कम्युनिकेशन ट्रैफिक के पैटर्न को समझना और इनके आधार पर अहम लोगों की दिनचर्या का पता लगाना, यह सब इसी यूनिट का काम था।

दूसरा: मोसाद ने जमीनी स्तर पर अपने सोर्स तैनात किए।5 मोसाद ने कई बार ऐसे लोकल विरोधी गुटों का इस्तेमाल किया जो ईरानी सरकार से नफरत करते थे। इसके अलावा ड्यूल सिटीजनशिप वाले लोगों को भी प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया।

तीसरा: मिलिट्री इंटेलिजेंस ने सारी जानकारी का विश्लेषण कर रोजाना ब्रीफिंग तैयार कीं।5 इजराइल ने ‘सोशल नेटवर्क एनालिसिस’ नामक गणितीय तकनीक का इस्तेमाल कर अरबों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण किया।

Blue Sparrow Missile: जिसे रोकना लगभग नामुमकिन था

इजराइल ने इस हमले में Blue Sparrow मिसाइल का इस्तेमाल किया, जो अपनी खासियत की वजह से बेहद घातक है। आम मिसाइलें साइडवेज ट्रैवल करती हैं, लेकिन Blue Sparrow पहले पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर जाती है और फिर एक तीर की तरह सीधी नीचे गिरती है।

जब कोई मिसाइल लगभग वर्टिकली सीधी नीचे आती है तो रडार और कमांड सिस्टम को उसे डिटेक्ट करने और रिएक्ट करने के लिए बहुत कम समय मिलता है। एक इंटेलिजेंस अधिकारी के मुताबिक, “इस मिसाइल से हमने मानो उनकी आंखें ही छीन लीं।” खमेनी के कंपाउंड पर हमला दिन के उजाले में किया गया, जिसमें इजरायली जेट्स ने 30 बम और Blue Sparrow ALBM दागे।

सुबह का हमला क्यों चुना: एक मास्टरस्ट्रोक

ज्यादातर विशेषज्ञों को रात के हमले की उम्मीद थी, लेकिन अमेरिका और इजराइल ने शनिवार की सुबह दिन के उजाले में हमला किया। इससे ईरान का एयर डिफेंस पूरी तरह चकमा खा गया क्योंकि वे रात के हमले की तैयारी में लगे थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल का मूल प्लान शुक्रवार रात हमला करने का था, लेकिन जब इंटेलिजेंस से पता चला कि खमेनी शनिवार सुबह एक मीटिंग में होंगे, तो हमले का समय आगे बढ़ा दिया गया।

इजराइल ने एक और चालाक चाल चली। IDF ने जानबूझकर ऐसी फोटो जारी कीं जिनमें उनके सीनियर स्टाफ और कमांडर्स वीकेंड के लिए हेडक्वार्टर छोड़कर घर जाते दिख रहे थे। यह एक डिसेप्शन टैक्टिक थी ताकि ईरान को लगे कि कुछ बड़ा होने वाला नहीं है। लेकिन हकीकत यह थी कि कई अधिकारी जिनकी तस्वीरें रिलीज की गई थीं, वे कुछ ही देर बाद वापस लौट आए।

मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया गया: आखिरी दांव

हमले के दिन, इजराइल और अमेरिका ने तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट की सेलुलर सर्विस में भी छेड़छाड़ कर दी, ताकि अगर कोई बॉडीगार्ड्स या सीनियर अधिकारियों को कॉल करे तो फोन बिजी आए।3 इस टैक्टिकल ब्लैकआउट का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अगर अंतिम क्षणों में भी जानकारी लीक हो तो कोई चेतावनी खमेनी तक न पहुंच सके।

और सुबह 9:40 पर इजराइल की मिसाइलें इस बिल्डिंग पर गिर गईं। किसी की इवैक्यूएशन होने से पहले ही कई स्ट्राइक्स लगीं।

कौन-कौन मारा गया: विनाशकारी नुकसान

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, खमेनी के साथ उनकी बेटी, पोती, दामाद और बहू भी मारे गए।1 इजरायली सेना ने बताया कि मारे गए वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों में देश के रक्षा मंत्री, रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांडर और ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव शामिल थे।

ईरानी राज्य मीडिया ने इस बात की पुष्टि की कि अमेरिका और इजराइल के इस बड़े संयुक्त सैन्य अभियान में खमेनी मारे गए।10 ईरानी सरकार ने 86 वर्षीय अयातुल्ला की मौत के बाद 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की।

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने क्या कहा

डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट कर खमेनी की मौत का जश्न मनाया और उन्हें “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक” बताया।10 ट्रंप ने ईरानियों से कहा कि उनकी आजादी का समय आने वाला है और उन्होंने लोगों को घर में रहने की सलाह दी।

नेतन्याहू ने कहा कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य ईरान के अयातुल्ला शासन को सत्ता से हटाना है। उन्होंने कहा कि “हमारा यह संयुक्त अभियान बहादुर ईरानी लोगों को अपनी किस्मत अपने हाथों में लेने की स्थिति पैदा करेगा।”

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ईरान ने कहा कि उसने इजराइल और कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, सऊदी अरब, इराक और ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए।12 ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स ने बदले की कसम खाते हुए कहा कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों वाले 27 ठिकानों पर हमले किए हैं।

इस लड़ाई में सबसे अहम किरदार स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगा दी, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई।13 चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया का करीब तीन-चौथाई तेल इसी जलमार्ग से आता है।

मोजतबा खमेनी बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर

28 फरवरी को अली खमेनी की हत्या के बाद ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने 3 से 8 मार्च के बीच चुनाव किया और 9 मार्च को मोजतबा खमेनी को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया।

मोजतबा खमेनी ने कभी कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला था, लेकिन वे दशकों से पिछले सुप्रीम लीडर के भीतरी दायरे में एक बेहद प्रभावशाली शख्सियत रहे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (IRGC) से उनके गहरे संबंध रहे।

इजरायली अधिकारियों ने बताया कि मोजतबा खमेनी भी उसी कंपाउंड में थे जिस पर युद्ध के पहले दिन हमला हुआ था। जबकि उनके पिता, मां, पत्नी और बेटी मारे गए, वे घायल होकर बच गए।

लेकिन अब CIA, मोसाद और अन्य खुफिया एजेंसियां इस बात के सबूत तलाश रही हैं कि मोजतबा खमेनी वाकई जिंदा हैं और इस्लामिक रिपब्लिक चला रहे हैं। माना जा रहा है कि वे हत्या के खतरे को देखते हुए सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे या अपनी चोट दिखाने से बच रहे हैं।

हसन नसरल्ला की हत्या से मिला था अनुभव

यह ऑपरेशन अचानक नहीं हुआ। इजराइल के पास इस तरह की कार्रवाई का पुराना अनुभव था। सितंबर 2024 में इजराइल ने हिज़बुल्ला के लीडर हसन नसरल्ला की लेबनान में हत्या कर दी थी। उस समय भी इसी ‘Pattern of Life’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।

हिज़बुल्ला एक लेबनान बेस्ड मिलिटेंट ग्रुप है जो ईरान का सबसे करीबी सहयोगी रहा। कई सालों से हिज़बुल्ला ईरान का मुख्य हथियार बन गया था इजराइल के खिलाफ लड़ने के लिए। 2006 से इजराइल ने नसरल्ला पर कई बार असफल हमले किए। उसके बाद इजराइल ने अपनी रणनीति बदली और सैन्य बल की जगह इंटेलिजेंस पर निर्भर होने लगा।

एक लड़कियों के स्कूल पर भी गिरे बम

इस युद्ध का सबसे भयानक पहलू तब सामने आया जब दक्षिणी मिनाब शहर के एक स्कूल पर हमले में कम से कम 165 स्कूली छात्राएं और स्टाफ मारे गए।2 यह स्कूल ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स की बिल्डिंग्स के पास था। जांच में पता चला कि अमेरिकी सेना ने पुरानी और गलत इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया था, जिससे गलती से स्कूल को निशाना बना दिया गया। इस घटना ने पूरी दुनिया में भारी आक्रोश पैदा किया।

यह जंग कब खत्म होगी: अनिश्चितता का माहौल

जब ट्रंप से पूछा गया कि जंग कब खत्म होगी, तो उनका जवाब था: “जब मैं कहूंगा।” ट्रंप का कहना है कि ईरान में बमबारी के लिए अब उनके पास कुछ बचा ही नहीं है। दूसरी तरफ, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज का कहना है कि यह जंग तब तक चलेगी जब तक इजराइल अपने सभी लक्ष्य हासिल नहीं कर लेता।

ईरान का दावा है कि अमेरिकी और इजरायली बलों ने देश में करीब 10,000 नागरिक ठिकानों पर बमबारी की है और 1,300 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। आने वाले दिनों में इस युद्ध का भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।

‘क्या है पृष्ठभूमि’

ईरान और इजराइल का टकराव दशकों पुराना है। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद ईरान ने इजराइल से संबंध तोड़ लिए और खुली दुश्मनी की नीति अपना ली।19 जून 2025 में इजराइल और ईरान के बीच 12 दिवसीय युद्ध हुआ जिसमें इजराइल ने ईरान की सैन्य और परमाणु सुविधाओं पर हमले किए।18 जनवरी 2026 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन हुए जिनमें सुरक्षा बलों ने हजारों प्रदर्शनकारियों को मार डाला। ट्रंप ने इन हत्याओं के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी।20 फरवरी 2026 में परमाणु वार्ता की विफलता के बाद 28 फरवरी को यह विनाशकारी हमला हुआ।

मुख्य बातें (Key Points)
  • 28 फरवरी 2026 को इजरायली एयरस्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खमेनी की तेहरान में हत्या कर दी गई।
  • मोसाद ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को हैक कर खमेनी के बॉडीगार्ड्स की हर हरकत पर सालों तक नजर रखी।
  • मोजतबा खमेनी को 9 मार्च 2026 को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया, लेकिन वे अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए।
  • ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर दिया, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गईं और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: अली खमेनी की हत्या कैसे हुई?

28 फरवरी 2026 को इजरायली एयरस्ट्राइक में तेहरान के पाश्चर स्ट्रीट स्थित सरकारी कंपाउंड पर हमला किया गया। अमेरिका की CIA ने लोकेशन इंटेलिजेंस दी और इजराइल ने हमला अंजाम दिया। मोसाद ने सालों तक ट्रैफिक कैमरे हैक कर खमेनी की हर हरकत ट्रैक की थी।

Q2: ईरान का नया सुप्रीम लीडर कौन है?

मोजतबा खमेनी, अली खमेनी के बेटे, को 9 मार्च 2026 को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। हालांकि, CIA और मोसाद अभी भी इस बात की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे जिंदा हैं और सत्ता संभाल रहे हैं, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए

Q3: इस युद्ध का तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगा दी, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।मोजतबा खमेनी की नियुक्ति और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।

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