Chaitra Navratri 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो चुकी है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा कर रहे हैं। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि का सबसे खास महत्व होता है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी दुर्गा अष्टमी की सही तारीख को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई भक्त 25 मार्च और 26 मार्च के बीच उलझन में हैं कि आखिर Kanya Pujan और अष्टमी पूजा किस दिन करनी चाहिए।
क्यों होता है हर साल तिथि को लेकर कंफ्यूजन
दरअसल, हिंदू पंचांग के अनुसार तिथियां सूर्योदय से नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर बदलती हैं। यही वजह है कि कई बार व्रत और त्योहारों की तारीख को लेकर कंफ्यूजन हो जाता है। Chaitra Navratri 2026 में भी यही स्थिति बनी है। ऐसे में जरूरी है कि सही तिथि और उदयातिथि के आधार पर ही पर्व मनाया जाए, ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके।
आम भक्तों के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल होता है कि जब अष्टमी तिथि दो दिनों में फैली हो तो पूजा किस दिन करें। यही सवाल इस बार भी लाखों लोगों के मन में है।
पंचांग के अनुसार 26 मार्च को मनाएं दुर्गा अष्टमी
वैदिक पंचांग के मुताबिक Chaitra Navratri 2026 में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 मार्च यानी बुधवार को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 26 मार्च गुरुवार को सुबह 11:58 बजे तक रहेगी।
चूंकि हिंदू धर्म में उदय तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए दुर्गा अष्टमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। उदय तिथि का मतलब है कि जिस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि लागू हो, उसी दिन पर्व मनाना शास्त्रसम्मत माना जाता है। 26 मार्च को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि चल रही होगी, इसलिए यही दिन महाष्टमी के लिए सही है।
अष्टमी के दिन मां महागौरी की होती है पूजा
Chaitra Navratri 2026 के अष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और विधिविधान से पूजा करते हैं।
मान्यता है कि मां महागौरी को सफेद रंग बेहद प्रिय है। इसलिए पूजा में सफेद फूल, नारियल और मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन की पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। जो भक्त पूरी श्रद्धा और नियम के साथ मां महागौरी की आराधना करते हैं, उन्हें देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Kanya Pujan: नवरात्रि की सबसे पवित्र परंपरा
Chaitra Navratri 2026 में अष्टमी के दिन कई भक्त Kanya Pujan भी करते हैं और इसी दिन अपने व्रत का समापन करते हैं। यह नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक मानी जाती है।
Kanya Pujan में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। कन्याओं के पैर धोकर उन्हें टीका लगाया जाता है और श्रद्धा भाव से भोजन कराया जाता है। भोजन के बाद कन्याओं को उपहार देकर सम्मान के साथ विदा किया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे नवरात्र व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
संधि पूजा का विशेष महत्व: अष्टमी और नवमी का संधि काल
अष्टमी के दिन एक और बेहद खास पूजा होती है जिसे संधि पूजा कहा जाता है। यह पूजा अष्टमी और नवमी तिथि के संधि काल में की जाती है। इसका समय बहुत सीमित होता है, क्योंकि यह अष्टमी के आखिरी 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट यानी कुल मिलाकर 48 मिनट के बीच ही संपन्न करनी होती है।
धार्मिक मान्यता है कि इसी संधि काल में मां दुर्गा ने चंड और मुंड नाम के भयंकर राक्षसों का वध किया था। इसलिए इस समय की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है। Chaitra Navratri 2026 में जो भक्त संधि पूजा का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें पंचांग के अनुसार सही समय पर यह पूजा अवश्य करनी चाहिए।
भक्तों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात
नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में हर भक्त मां दुर्गा की कृपा पाने की कामना करता है। ऐसे में सही तिथि और विधि के अनुसार पूजा करना बेहद जरूरी हो जाता है। इस बार यदि आप दुर्गा अष्टमी को लेकर उलझन में थे, तो अब यह बिल्कुल साफ है कि 26 मार्च को ही महाष्टमी मनाना शुभ रहेगा।
श्रद्धा, नियम और सही समय के साथ की गई पूजा से मां दुर्गा का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए इस अष्टमी पर पूरे विश्वास और भक्ति के साथ मां महागौरी की आराधना करें, Kanya Pujan की परंपरा निभाएं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भरें।
मुख्य बातें (Key Points)
- Chaitra Navratri 2026 में दुर्गा अष्टमी तिथि 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च सुबह 11:58 बजे तक रहेगी, उदय तिथि के अनुसार 26 मार्च को महाष्टमी मनाना शुभ है।
- अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा होती है, उन्हें सफेद फूल, नारियल और मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है।
- Kanya Pujan नवरात्रि की सबसे पवित्र रस्मों में से एक है, छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर पूजा की जाती है।
- संधि पूजा अष्टमी के आखिरी 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट में की जाती है, इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।








