Gagandeep Singh Randhawa Case में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने रविवार 23 मार्च को चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस करके वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम PGIMER या AIIMS के डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने पूर्व परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर के पिता और उनके PA की तुरंत गिरफ्तारी और मामले की CBI जांच की मांग रखी है।
डॉ. रंधावा को निर्वस्त्र कर पीटा, आत्महत्या के लिए किया मजबूर
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case की गंभीरता को उजागर करते हुए सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की मौत का नहीं है। डॉ. रंधावा को निर्वस्त्र करके पीटा गया और आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, इसमें लालजीत भुल्लर और आम आदमी पार्टी (AAP) के पदाधिकारियों द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का भी बेहद गंभीर मामला छिपा है।
मजीठिया ने जोर देकर कहा कि डॉ. रंधावा ने बार-बार SOS अपील की थी, मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। एक अधिकारी जो चारों तरफ से घिरा हुआ था, जिसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, वह मदद के लिए चिल्लाता रहा और व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। यही सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू है इस पूरे मामले का।
तीन बड़े अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case में बिक्रम सिंह मजीठिया ने तीन बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। पहला नाम है अमृतसर के डिप्टी कमिशनर दलविंदरजीत सिंह, दूसरा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक गौतम जैन और तीसरा प्रमुख सचिव केएपी सिन्हा का है।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि इन तीनों अधिकारियों ने डॉ. रंधावा की बार-बार की गई आपातकालीन अपीलों पर कोई ध्यान नहीं दिया। जब एक अधिकारी जान बचाने के लिए गुहार लगा रहा था, तब ये अधिकारी चुप बैठे रहे। मजीठिया ने कहा कि यही वजह है कि इस मामले में CBI जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है।
भगवंत मान पर बरसे मजीठिया, बोले: घटिया और बेशर्म टिप्पणी
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case में मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका पर भी बिक्रम सिंह मजीठिया ने जमकर निशाना साधा। लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी पर भगवंत मान ने जो प्रतिक्रिया दी कि उनकी सरकार “नकदी या फरमाइश” में विश्वास नहीं करती, उसे मजीठिया ने घटिया और बेशर्म भरी टिप्पणी करार दिया।
मजीठिया ने कहा कि सरकार 21 मार्च से लालजीत भुल्लर का बचाव कर रही है। पहले 24 घंटे तक FIR ही दर्ज नहीं की गई। इसके बाद भी न तो मंत्री को गिरफ्तार किया गया और न ही उनका इस्तीफा राज्यपाल को भेजने की दिशा में कोई कदम उठाया गया। जब सरकार सभी मोर्चों पर घिर गई, विपक्ष से लेकर यूनियनों और केंद्र सरकार तक का दबाव बढ़ा, तब जाकर आज मंत्री को गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया।
विपक्ष, यूनियन और रंधावा परिवार के दबाव से हुई गिरफ्तारी
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case में लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी को लेकर मजीठिया ने साफ कहा कि यह AAP सरकार की इच्छा से नहीं, बल्कि चारों तरफ से बने दबाव की वजह से हुई है। उन्होंने सभी विपक्षी नेताओं, किसान संगठनों और वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन यूनियन को संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इसी एकजुटता की वजह से आज भुल्लर की गिरफ्तारी संभव हो पाई है।
मजीठिया ने रंधावा परिवार की दृढ़ इच्छाशक्ति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि AAP सरकार के बहुत ज्यादा दबाव के बावजूद रंधावा परिवार टूटा नहीं और न्याय की लड़ाई लड़ता रहा। केंद्रीय गृहमंत्री के इस बयान ने कि केंद्र मामले की CBI जांच का आदेश देने के लिए तैयार है, AAP सरकार को भुल्लर के खिलाफ कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
AAP सांसदों को छोड़कर सभी पंजाब सांसद लिख रहे गृहमंत्री को पत्र
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case में CBI जांच की मांग को लेकर बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि AAP के सांसदों को छोड़कर पंजाब के सभी सांसद CBI जांच की मांग को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिख रहे हैं।
मजीठिया ने तंज कसते हुए कहा कि AAP सांसदों का यह मांग न करना साफ दिखाता है कि वे इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का विरोध करने में AAP सरकार के साथ खड़े हैं। अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान वाकई पूरे राज्य और पीड़ित परिवार को अपने बड़े परिवार का हिस्सा मानते हैं, तो उन्हें CBI जांच के लिए सहमत होने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
PGIMER या AIIMS में पोस्टमार्टम क्यों जरूरी?
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case में मजीठिया ने PGIMER या AIIMS के डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने की मांग इसलिए की है ताकि मौत के असली कारणों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पता लगाया जा सके। जब किसी मामले में सत्ता पक्ष के लोग सीधे आरोपी हों, तो स्थानीय स्तर पर की गई जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है। PGIMER चंडीगढ़ और AIIMS दिल्ली देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान हैं और इनके विशेषज्ञों द्वारा की गई जांच पर किसी को आपत्ति नहीं होगी।
यह मांग इसलिए भी अहम है क्योंकि डॉ. रंधावा के परिवार को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके परिजन के साथ आखिर हुआ क्या था। अगर उन्हें निर्वस्त्र करके पीटा गया, तो शरीर पर चोट के निशान होंगे और विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल ही इसकी सही तस्वीर सामने ला सकता है।
भुल्लर के पिता और PA की गिरफ्तारी क्यों जरूरी?
Dr Gagandeep Singh Randhawa Case में मजीठिया ने सिर्फ लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी को नाकाफी बताया है। उनकी मांग है कि भुल्लर के पिता और उनके पर्सनल असिस्टेंट (PA) को भी तुरंत गिरफ्तार किया जाए। मजीठिया के मुताबिक यह पूरा मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि इसमें कई लोग शामिल हैं जिन्होंने मिलकर डॉ. रंधावा को प्रताड़ित किया और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया।
जब तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी पूरे मामले की जांच नहीं करती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। रंधावा परिवार और पूरे पंजाब की नजर अब इस बात पर है कि सरकार अगला कदम क्या उठाती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बिक्रम सिंह मजीठिया ने डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम PGIMER या AIIMS के डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग की। साथ ही लालजीत भुल्लर के पिता और PA की गिरफ्तारी और CBI जांच की मांग रखी।
- मजीठिया ने अमृतसर DC दलविंदरजीत सिंह, वेयरहाउसिंग MD गौतम जैन और प्रमुख सचिव केएपी सिन्हा की भूमिका की जांच की मांग की, जिन्होंने डॉ. रंधावा की बार-बार की SOS अपीलों को अनसुना किया।
- मजीठिया ने आरोप लगाया कि AAP सरकार 21 मार्च से भुल्लर का बचाव कर रही थी, 24 घंटे FIR नहीं हुई, चारों तरफ से दबाव बढ़ने पर ही गिरफ्तारी हुई।
- AAP सांसदों को छोड़कर पंजाब के सभी सांसद CBI जांच की मांग को लेकर गृहमंत्री को पत्र लिख रहे हैं
, जो दिखाता है कि AAP स्वतंत्र जांच से बचना चाहती है।








