Nangal Surplus Land को लेकर भगवंत मान सरकार ने रविवार को एक ऐतिहासिक फैसले का ऐलान किया है। पंजाब के शिक्षा मंत्री और श्री आनंदपुर साहिब के विधायक हरजोत सिंह बैंस ने चंडीगढ़ में घोषणा की कि पंजाब सरकार जल्द ही नांगल, तलवाड़ा और आसपास की टाउनशिप में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की 800 एकड़ से अधिक अतिरिक्त जमीन पर रह रहे दुकानदारों, निवासियों और अन्य लोगों को मालिकाना हक देगी। जल संसाधन विभाग ने BBMB को इस संबंध में औपचारिक नोटिस भी जारी कर दिया है।
50 साल पुरानी नाइंसाफी का होगा अंत
Nangal Surplus Land पर यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो दशकों से अनिश्चितता में जी रहे थे। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भावुक होते हुए कहा कि जब भारत आजाद हुआ तो नांगल के लोगों ने अपनी जमीनें दीं, अपने हाथों से काम किया ताकि नए भारत को पानी और बिजली मिल सके। उन्हीं लोगों ने इस शहर को भी बसाया।
लेकिन विडंबना देखिए कि 50 साल से ज्यादा समय से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, जिसका काम सिर्फ परियोजना का संचालन करना था, वह जमींदार की तरह व्यवहार करने लगा। जिन लोगों ने इस पूरे प्रोजेक्ट को खड़ा किया, उन्हीं को परेशान किया जाने लगा। यह स्थिति दशकों से चली आ रही थी और अब भगवंत मान सरकार ने इसे खत्म करने का बीड़ा उठाया है।
चार महीने पहले दिया था वादा, अब किया पूरा
Nangal Surplus Land को लेकर हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि चार महीने पहले उन्होंने नांगल में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी और उन्हें स्थायी समाधान का वादा किया था। आज वह वादा पूरा हो रहा है। जल संसाधन विभाग ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड को औपचारिक नोटिस भेजकर साफ कर दिया है कि 800 एकड़ से अधिक अतिरिक्त जमीन पंजाब राज्य की संपत्ति है, BBMB की नहीं।
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि BBMB लंबे समय से इस जमीन पर अपना दावा जता रहा था और लोगों से लीज के नाम पर पैसे वसूल रहा था। अब सरकार ने कानूनी रूप से यह स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड को ऐसी संपत्तियों के लिए कोई लीज पॉलिसी बनाने का अधिकार ही नहीं है।
कानूनी स्थिति क्या है: BBMB का कोई हक नहीं
Nangal Surplus Land की कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह जमीन मूल रूप से लोगों से बांध परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी। अब जबकि परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, तो अतिरिक्त जमीन को राज्य को वापस मिलना चाहिए और अंततः उन लोगों को जो पीढ़ियों से इस पर रह रहे हैं।
बैंस ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह जमीन पंजाब के लोगों की है, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की नहीं। बोर्ड का काम सिर्फ बांध परियोजना का संचालन करना है, जमींदारी करना नहीं। यह बयान उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो सालों से कानूनी अनिश्चितता में फंसे हुए थे और जिन्हें किसी भी समय बेदखली का डर सता रहा था।
मालिकाना हक की नीति: कैसे मिलेगा कब्जाधारियों को हक?
Nangal Surplus Land पर मालिकाना हक देने के लिए भगवंत मान सरकार एक व्यापक नीति तैयार कर रही है। यह नीति जल संसाधन विभाग की देखरेख में बनाई जा रही है। हरजोत सिंह बैंस ने इसकी रूपरेखा बताते हुए कहा कि सभी पात्र दुकानदारों, परिवारों और निवासियों को उनका वैध मालिकाना हक दिया जाएगा।
सबसे अहम बात यह है कि लोगों को सिर्फ स्टांप ड्यूटी के अनुसार वैध शुल्क जमा करना होगा। इसका मतलब है कि जो लोग दशकों से इन जमीनों पर रह रहे हैं, दुकानें चला रहे हैं, उन्हें बाजार भाव पर जमीन खरीदने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने यह भी भरोसा दिया है कि किसी को भी अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जाएगा।
नांगल में बनेगा नया न्यायिक परिसर
Nangal Surplus Land के फैसले के साथ ही हरजोत सिंह बैंस ने एक और बड़ी घोषणा की है। नांगल में एक नया न्यायिक परिसर (Judicial Complex) भी बनाया जाएगा। इसके लिए जगह की पहचान कर ली गई है और जल्द ही इसका विकास शुरू होगा।
यह न्यायिक परिसर नांगल और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए बड़ी सुविधा होगी। अभी तक लोगों को न्यायिक कामकाज के लिए दूर-दूर जाना पड़ता था, लेकिन नए परिसर के बनने से उन्हें अपने ही शहर में न्याय की सुविधा मिल सकेगी।
नांगल के लोगों का बलिदान और ऐतिहासिक अन्याय
Nangal Surplus Land का यह पूरा मामला आजादी के बाद के उस दौर से जुड़ा है जब भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी बांध परियोजनाएं शुरू कीं। भाखड़ा नांगल बांध इन्हीं में से एक था, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने “आधुनिक भारत का मंदिर” कहा था।
इस बांध के निर्माण के लिए नांगल और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने अपनी जमीनें दीं। उन्होंने अपने हाथों से काम करके इस शहर को बसाया। लेकिन जब बांध बन गया और शहर खड़ा हो गया, तो BBMB ने उसी जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया। जो लोग पीढ़ियों से वहां रह रहे थे, उन्हें किराएदार बना दिया गया। उनसे लीज के पैसे वसूले जाने लगे और उन्हें हमेशा बेदखली का डर सताता रहा।
यह एक ऐतिहासिक अन्याय था जिसे पिछली सरकारों ने दशकों तक नजरअंदाज किया। अब आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने इस अन्याय को सुधारने का कदम उठाया है। जैसा कि हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “यह सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं है, यह एक ऐतिहासिक गलती का सुधार है।”
आम लोगों पर क्या होगा असर?
Nangal Surplus Land के इस फैसले का सीधा असर नांगल, तलवाड़ा और आसपास की टाउनशिप में रहने वाले हजारों परिवारों पर पड़ेगा। जो दुकानदार दशकों से BBMB को किराया देते आ रहे थे और जिन्हें हमेशा यह डर था कि कभी भी उनकी दुकान छीन ली जाएगी, उन्हें अब अपनी दुकान का पक्का मालिकाना हक मिलेगा। जो परिवार पीढ़ियों से इन मकानों में रह रहे थे लेकिन कागजों पर मालिक नहीं थे, वे अब कानूनी रूप से मालिक बनेंगे।
मालिकाना हक मिलने से लोगों को बैंक से लोन लेने, संपत्ति बेचने या हस्तांतरित करने में आसानी होगी। उनकी संपत्ति का बाजार मूल्य भी बढ़ेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि दशकों की मानसिक परेशानी और कानूनी अनिश्चितता खत्म होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- भगवंत मान सरकार ने नांगल, तलवाड़ा और आसपास की टाउनशिप में BBMB की 800 एकड़ से अधिक अतिरिक्त जमीन पर रहने वालों को मालिकाना हक देने का ऐलान किया। जल संसाधन विभाग ने BBMB को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है।
- मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने साफ कहा कि यह जमीन पंजाब के लोगों की है, BBMB की नहीं। बोर्ड को लीज पॉलिसी बनाने का कोई अधिकार नहीं है। लोगों को सिर्फ स्टांप ड्यूटी अनुसार शुल्क देना होगा।
- यह फैसला 50 साल से ज्यादा पुराने ऐतिहासिक अन्याय का सुधार है। जिन लोगों ने बांध परियोजना के लिए जमीनें दीं, उन्हीं को BBMB ने किराएदार बनाकर दशकों तक परेशान किया।
- नांगल में एक नया न्यायिक परिसर भी बनाया जाएगा, जिसके लिए जगह की पहचान हो चुकी है और जल्द विकास कार्य शुरू होगा।








