DM Suicide Case Punjab एक बार फिर संसद में गूंजा, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद के चल रहे सत्र में बड़ा ऐलान किया कि पंजाब राज्य भंडारण निगम (PSWC) के अधिकारी गगनदीप सिंह भुल्लर की आत्महत्या के मामले की जांच CBI को सौंपी जा सकती है, लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी: पंजाब के सभी सांसदों को लिखित में सहमति देनी होगी। इस एक शर्त ने पूरे मामले को एक नई राजनीतिक उलझन में डाल दिया है।
संसद में कांग्रेस सांसद Gurjit Singh Aujla ने उठाया मुद्दा
अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने संसद के चल रहे सत्र के दौरान DM Suicide Case Punjab का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे इस मामले को गंभीरता से सुनें।
अमित शाह ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि वे इस केस को CBI को ट्रांसफर करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पंजाब के सभी लोकसभा सांसदों को एक लिखित अनुरोध देना होगा। शाह के इस जवाब ने सीधे तौर पर गेंद पंजाब के सांसदों के पाले में डाल दी।
13 सांसदों की सहमति क्यों है मुश्किल?
पंजाब में कुल 13 लोकसभा सांसद हैं। इनमें 7 कांग्रेस से, 3 आम आदमी पार्टी (AAP) से, 1 शिरोमणि अकाली दल से और 2 निर्दलीय सांसद हैं।
कांग्रेस और अकाली दल के सांसद लिखित सहमति देने को तैयार हो सकते हैं, लेकिन AAP के तीनों सांसदों से सहमति मिलना लगभग नामुमकिन दिख रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस मामले में आरोपी लालजीत सिंह भुल्लर खुद AAP के विधायक हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक वे पंजाब सरकार में परिवहन एवं जेल मंत्री के पद पर बने हुए हैं, क्योंकि उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।
निर्दलीय सांसदों की स्थिति भी अनिश्चित
दो निर्दलीय सांसदों में से एक अमृतपाल सिंह फिलहाल जेल में हैं, जिससे उनकी लिखित सहमति मिलना व्यावहारिक रूप से कठिन है। दूसरे निर्दलीय सांसद की सहमति मिलेगी या नहीं, यह भी अभी अनिश्चित बना हुआ है।
इस तरह देखें तो अमित शाह ने जो शर्त रखी है, वह सर्वसम्मति हासिल करने की शर्त है, और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह सर्वसम्मति बनना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है।
Food Procurement Officers ने बंद किए दफ्तर
DM Suicide Case Punjab के बढ़ते दबाव के बीच पंजाब में खाद्य खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने अपने दफ्तर बंद कर दिए हैं और काम स्थगित करने की घोषणा कर दी है। यह कदम गगनदीप सिंह भुल्लर की आत्महत्या के बाद अधिकारियों में फैले गुस्से और भय को दर्शाता है।
अधिकारियों का यह विरोध पंजाब में खाद्य खरीद प्रक्रिया पर सीधा असर डाल सकता है, जो रबी सीजन में गेहूं की खरीद के लिहाज से बेहद संवेदनशील समय है। अगर यह स्थिति लंबी चली तो किसानों को भी गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अमित शाह की रणनीति: मास्टरस्ट्रोक या राजनीतिक चाल?
अमित शाह का यह कदम राजनीतिक रूप से बेहद चतुराई भरा माना जा रहा है। एक तरफ उन्होंने CBI जांच के लिए तैयारी दिखाकर विपक्ष के आरोपों को काटने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ सर्वसम्मति की शर्त रखकर गेंद पंजाब के सांसदों के पाले में डाल दी।
अब अगर CBI जांच नहीं होती तो इसकी जिम्मेदारी सीधे उन सांसदों पर आएगी जो लिखित सहमति नहीं देंगे, यानी AAP के सांसदों पर। इस तरह बीजेपी ने बिना कुछ किए AAP को रक्षात्मक स्थिति में डाल दिया है।
कांग्रेस के लिए यह मौका है कि वह इस मुद्दे पर AAP सरकार को घेरे और यह सवाल उठाए कि अगर AAP को अपने मंत्री पर भरोसा है तो CBI जांच से क्यों डर रही है।
क्या है DM Suicide Case की पृष्ठभूमि?
पंजाब राज्य भंडारण निगम (PSWC) के अधिकारी गगनदीप सिंह भुल्लर ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में AAP विधायक और पंजाब सरकार में परिवहन एवं जेल मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर गंभीर आरोप लगे हैं। भुल्लर की मौत के बाद से पंजाब की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। खाद्य खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने विरोध में दफ्तर बंद कर दिए और काम स्थगित कर दिया। अब संसद में इस मुद्दे के उठने और अमित शाह की CBI जांच की सशर्त पेशकश ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर की खबर बना दिया है।
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मुख्य बातें (Key Points)
- अमित शाह ने संसद में कहा कि DM Suicide Case Punjab की जांच CBI को सौंपी जा सकती है, बशर्ते पंजाब के सभी 13 सांसद लिखित सहमति दें।
- AAP के 3 सांसदों की सहमति मिलना लगभग नामुमकिन है क्योंकि आरोपी लालजीत सिंह भुल्लर AAP विधायक और पंजाब सरकार में मंत्री हैं।
- खाद्य खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने विरोध में दफ्तर बंद किए और काम स्थगित किया, जो रबी सीजन में गेहूं खरीद को प्रभावित कर सकता है।
- निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह जेल में होने के कारण उनकी सहमति मिलना व्यावहारिक रूप से कठिन है, जिससे CBI जांच की संभावनाएं बेहद कम दिख रही हैं।








