World News 22 March 2026: मिडिल ईस्ट की जंग ने आज एक ऐसा खतरनाक मोड़ ले लिया है जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। ईरान ने जंग के 23वें दिन इजराइल के परमाणु शहर डिमोना पर मिसाइल हमला करके “आंख के बदले आंख, परमाणु ठिकाने के बदले परमाणु ठिकाने” की रणनीति अपना ली है। यह हमला इजराइल द्वारा ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर किए गए हमले का बदला है। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होरमुज 48 घंटे में खोलने का अल्टीमेटम दिया है, चीन ने ताइवान की घेराबंदी और तेज कर दी है, और पाकिस्तान के एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक ने भारत पर परमाणु हमले की खुली धमकी दे दी है।
ईरान ने डिमोना पर बरसाईं मिसाइलें: इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम हुआ फेल
World News की सबसे बड़ी खबर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” की 73वीं लहर के तहत इजराइल के डिमोना शहर पर विनाशकारी मिसाइल हमला किया है। डिमोना दक्षिणी इजराइल का वो शहर है जहां देश की मुख्य परमाणु सुविधा स्थित है। माना जाता है कि यह सुविधा इजराइल के अघोषित परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए प्लूटोनियम का उत्पादन करती है, जिसमें लगभग 80 से 400 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। इस सुविधा का निर्माण 1960 के दशक में फ्रांस की मदद से किया गया था।
डिमोना की सुरक्षा के लिए इजराइल ने दुनिया के सबसे महंगे और आधुनिक हवाई रक्षा तंत्र तैनात किए हुए हैं, जिनमें आयरन डोम और एरो सिस्टम शामिल हैं। लेकिन इस बार ये सारे सिस्टम फेल हो गए। IRGC का दावा है कि मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचीं और इस हमले में दर्जनों लोग मारे गए। वहां से आ रही तस्वीरें ईरानी दावों की पुष्टि करती दिख रही हैं: कई इमारतें धराशाई हो गई हैं और जगह-जगह मलबा बिखरा हुआ है। इजराइल ने भी माना है कि 100 से ज्यादा लोग इस हमले में घायल हुए हैं, हालांकि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका है।
एक साथ पांच इजराइली शहरों पर बरसीं ईरानी मिसाइलें
ईरान ने सिर्फ डिमोना को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि एक साथ इजराइल के पांच शहरों पर हमला किया है। डिमोना के अलावा बेरशेवा, जो इजराइल का एक बड़ा शहर है और जहां कई सैन्य ठिकाने हैं, इलात, जो लाल सागर के किनारे बसा इजराइल का दक्षिणी बंदरगाह शहर है, इसके अलावा अराद और किरियात गत, जो दोनों ही सैन्य दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं, इन सभी पर ईरानी मिसाइलें गिरी हैं।
IRGC ने बताया कि इस हमले में तीन तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ है। पहली फताह, जो ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइल है और इतनी तेज रफ्तार से चलती है कि इसे रोकना लगभग नामुमकिन है। दूसरी कद्र और तीसरी ईमान, जो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं और बेहद सटीक निशाना लगाती हैं। इन मिसाइलों के साथ हमलावर ड्रोन भी दागे गए। ईरान ने इजराइल के उत्तरी और दक्षिणी दोनों हिस्सों पर एक साथ हमला करके यह संदेश दिया है कि उसकी मारक क्षमता पूरे इजराइल को अपनी जद में ले सकती है।
इसके अलावा ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया। कुवैत में अली अल सलेम एयरबेस, यूएई में अल मिनहाद और अल धफरा एयरबेस पर हमले किए गए।
इजराइली जनता का गुस्सा अपनी ही सरकार पर फूटा
World News में सबसे अहम बात यह है कि ईरानी हमलों के बाद इजराइल की जनता का गुस्सा अपनी ही सरकार पर फूट पड़ा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार ने बार-बार दावा किया था कि ईरान तबाह हो चुका है और उसके पास हथियार लगभग खत्म हो गए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिख रही है।
इजराइली मानवाधिकार कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि सरकार को इन झूठे दावों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इजराइल के मंत्री इतमार बेन गविर ने मिसाइल हमले से प्रभावित अराद का दौरा किया और कहा कि “हम युद्ध में हैं और दुश्मन को लगातार कुचलना होगा।” लेकिन जब ईरान की मिसाइलें इजराइल के सबसे संवेदनशील परमाणु शहर तक पहुंच रही हैं, तो ये दावे खोखले लग रहे हैं।
ईरानी राजनयिक इस्माइल बगाई ने स्काई न्यूज से बात करते हुए साफ कहा कि “ईरान से संयम की उम्मीद करना बेकार है। जब तक हमारे दुश्मन सरेंडर नहीं कर देते, ईरान रुकने वाला नहीं।” रात भर चले हमलों के बाद सुबह भी ईरान ने मध्य इजराइल पर क्लस्टर बम से हमला किया। IRGC ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने एक इजराइली F-16 लड़ाकू विमान को भी निशाना बनाया, हालांकि इजराइली सेना (IDF) का कहना है कि विमान सुरक्षित लैंड करने में सफल रहा।
ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम: होरमुज नहीं खुला तो बिजली ग्रिड ध्वस्त करेंगे
World News की दूसरी बड़ी खबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होरमुज खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने अपनी Truth Social पोस्ट में कहा कि अगर इस दौरान होरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह और बिना किसी खतरे के नहीं खोला गया तो अमेरिकी सेना ईरान के पावर ग्रिड को ध्वस्त कर देगी और इसकी शुरुआत सबसे बड़े बिजली केंद्र से की जाएगी।
होरमुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दबदबा इस जंग में पूरी दुनिया के सामने उजागर हो चुका है। जिस क्षेत्र से दुनिया का 25 प्रतिशत से ज्यादा तेल व्यापार होता था, वो पिछले 22 दिनों से पूरी तरह ठप है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यहां से अमेरिका और इजराइल का कोई जहाज नहीं गुजरने दिया जाएगा। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि होरमुज जलडमरूमध्य केवल उसके शत्रुओं के लिए बंद है और ईरानी सरकार के समन्वय से विदेशी जहाज अभी भी वहां से गुजर सकते हैं।
ईरान की दो टूक: बिजली ठिकानों पर हमला हुआ तो पूरा मिडिल ईस्ट डूबेगा अंधेरे में
ट्रंप की धमकी पर ईरान ने करारा जवाब दिया है। ईरानी सेना ने कहा कि अगर उसके बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया गया तो वो मध्य पूर्व में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करेगा। ईरान के हालिया रुख को देखते हुए इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यानी अमेरिका के एक गलत कदम से पूरा मिडिल ईस्ट अंधेरे में डूब सकता है।
वहीं ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि “ईरान पूरी तरह तबाह हो चुका है, उसका नेतृत्व खत्म हो चुका है, उसकी नौसेना और वायुसेना खत्म हो चुकी है और वे समझौता करना चाहते हैं।” लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने साफ कहा कि “राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध पर अपना नियंत्रण खो चुके हैं और घबराहट की स्थिति में हैं।”
जापान ने भी ट्रंप को दिया झटका: युद्धविराम के बिना कोई मदद नहीं
जापान ने भी होरमुज को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। जापान के विदेश मंत्री तोशी मित्सू मोतेगी ने कहा कि अगर युद्धविराम होता है तो टोक्यो होरमुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए अपनी सेना तैनात कर सकता है, लेकिन जब तक युद्ध जारी है तब तक जापान की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
यह बयान ट्रंप के लिए बड़ा झटका है क्योंकि व्हाइट हाउस में जापान की प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने उनसे अपने युद्धपोत होरमुज क्षेत्र में भेजने की अपील दोहराई थी। NATO के बाद अब जापान ने भी ट्रंप की अपील ठुकरा दी है, जिससे अमेरिका की सभी कूटनीतिक कोशिशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
चीन ने ताइवान की घेराबंदी तेज की: 8 युद्धपोत और 2 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात
World News में दूसरा सबसे बड़ा संकट ताइवान से जुड़ा है। अमेरिका मिडिल ईस्ट की जंग में इतना बुरी तरह फंस गया है कि उसने चीन की घेराबंदी के लिए पूर्वी और दक्षिण चीन सागर तथा जापान सागर में तैनात किए गए सभी हथियार और युद्धपोत वापस बुलाकर मिडिल ईस्ट में झोंक दिए हैं। इस खालीपन का फायदा उठाते हुए चीन ने ताइवान पर कब्जे की तैयारी तेज कर दी है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ताइवान के आसपास चीन के 8 युद्धपोत और 2 एयरक्राफ्ट कैरियर देखे गए हैं। इसके अलावा 26 चीनी सैन्य विमानों का भी पता लगाया गया, जिनमें से 16 विमान ताइवान के मध्य और दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा क्षेत्र में घुस गए। ताइवान के अनुसार, हाल के समय में यह सबसे बड़ी सैन्य घुसपैठ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के पहले सप्ताह तक चीन की नौसेना ने ताइवान के खिलाफ कोई आक्रामक रुख नहीं दिखाया था। लेकिन जैसे ही ईरान इस जंग में भारी पड़ना शुरू हुआ और अमेरिका और गहरे फंसता गया, चीन ने भी आक्रामकता बढ़ा दी।
चीन ने अपने सबसे ताकतवर युद्धपोत से किया मिसाइल परीक्षण
चीन सिर्फ ताइवान की घेराबंदी ही नहीं कर रहा, बल्कि अपने हथियारों का परीक्षण भी कर रहा है ताकि जंग के वक्त कोई अचानक परेशानी न आए। चीन ने अपने सबसे ताकतवर युद्धपोत टाइप 055 डिस्ट्रॉयर ‘नानचांग’ से मिसाइल परीक्षण किया है। इस युद्धपोत से एक के बाद एक पांच मिसाइलें दागी गईं और सभी ने अपने लक्ष्य को सटीक रूप से भेदा। इस युद्धपोत पर HHQ-9 मिसाइल तैनात है जो कई सौ किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है और दुश्मन के विमान, मिसाइल और अन्य खतरों को रोकने में सक्षम है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका की जंग दो सप्ताह और चली तो अमेरिका चीन सागर से पूरी तरह बाहर हो जाएगा और चीन इसका फायदा उठाकर ताइवान पर हमला कर सकता है। यह स्थिति दुनिया को एक साथ दो बड़े युद्ध क्षेत्रों में धकेल सकती है।
पाकिस्तानी राजनयिक की गीदड़ भपकी: अमेरिका ने हमला किया तो भारत पर गिराएंगे बम
World News में एक और खतरनाक खबर पाकिस्तान से आई है। पाकिस्तान के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक अब्दुल बासित ने भारत पर परमाणु हमले की खुली धमकी दी है। अब्दुल बासित ने कहा कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला किया या उसके परमाणु कार्यक्रम को तबाह करने की कोशिश की, तो पाकिस्तान के पास भारत पर हमला करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होगा, भले ही भारत इस युद्ध की पार्टी न हो।
अब्दुल बासित ने कहा, “अगर हमारी रेंज अमेरिकी अड्डों तक नहीं है और हम इजराइल पर भी हमला नहीं कर सकते, तो हमारे लिए रास्ता क्या होगा? भारत। मुंबई पर कर देना है, नई दिल्ली पर कर देना है। देखी जाएगी जो बाद में होता है।” उन्होंने आगे कहा कि “अगर किसी ने पाकिस्तान पर बुरी नजर डाली तो अल्लाह जानता है कि पाकिस्तान क्या करेगा।”
यह बयान हाल ही में सामने आई एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें खुलासा हुआ था कि पाकिस्तान लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है जो दक्षिण एशिया से बाहर यानी अमेरिका तक भी हमला करने में सक्षम हो सकती है। हालांकि, भारत के रक्षा विशेषज्ञ इस तरह की धमकियों को गीदड़ भपकी से ज्यादा कुछ नहीं मानते, लेकिन एक पूर्व वरिष्ठ राजनयिक के मुंह से ऐसे बयान पाकिस्तान की सोच और मंशा जरूर उजागर करते हैं।
ब्रिटेन ने अरब सागर में उतारी परमाणु पनडुब्बी: मिडिल ईस्ट जंग में नई एंट्री
World News में ब्रिटेन ने भी आखिरकार मिडिल ईस्ट की जंग में सीधी एंट्री कर ली है। ब्रिटेन ने अरब सागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी तैनात कर दी है और अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाजत भी दे दी है। ब्रिटेन की यह भागीदारी युद्ध के दायरे को और बड़ा कर सकती है।
इजराइल में आम चुनावों की तैयारी तेज
इजराइल में आम चुनावों की तैयारी भी तेज हो गई है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान और लेबनान के साथ युद्ध में इजराइल को निर्णायक जीत मिली तो प्रधानमंत्री नेतन्याहू को चुनाव में बढ़त मिल सकती है। लेकिन अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट आ सकती है, खासकर जब जनता पहले से ही सरकार के झूठे दावों पर गुस्से में है।
ब्राजील ने दी विदेशी हस्तक्षेप की चेतावनी
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने भी एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें ब्राजील में मौजूद महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर कब्जा करना चाहती हैं और देश को इस हस्तक्षेप से सावधान रहना होगा।
कतर में हेलीकॉप्टर हादसा: 6 की मौत, एक लापता
कतर में एक हेलीकॉप्टर हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है और एक व्यक्ति अभी भी लापता है। बचाव अभियान जारी है। कतर के आंतरिक मंत्रालय ने इस हादसे की पुष्टि की है।
मंगल पर पैदा होने वाले इंसान होंगे बिल्कुल अलग: वैज्ञानिकों की चौंकाने वाली चेतावनी
World News के अंत में एक विज्ञान की चौंकाने वाली खबर। एलन मस्क से लेकर नासा तक सब मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने का सपना देख रहे हैं, लेकिन राइस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्कॉट सोलमन ने अपनी नई किताब ‘Becoming Martian’ में कुछ ऐसे तथ्य बताए हैं जो सोचने पर मजबूर करते हैं।
मंगल पर पृथ्वी के मुकाबले सिर्फ 38 प्रतिशत गुरुत्वाकर्षण है, जिसका मतलब है कि वहां पैदा होने वाले बच्चों की हड्डियां बेहद कमजोर होंगी। प्रोफेसर सोलमन का मानना है कि खाना और पानी बचाने के लिए प्रकृति भविष्य में मंगलवासियों का कद छोटा कर सकती है। कमजोर हड्डियों के कारण सामान्य प्रसव बेहद खतरनाक होगा और सिजेरियन ऑपरेशन ही इकलौता रास्ता बचेगा। जब प्राकृतिक जन्म की जरूरत नहीं रहेगी तो इंसानी सिर के आकार को रोकने वाली कोई प्राकृतिक सीमा नहीं बचेगी, जिससे भविष्य के मंगलवासियों के सिर आज की तुलना में बहुत बड़े हो सकते हैं।
मंगल के खतरनाक रेडिएशन से बचने के लिए त्वचा अपना मेलेनिन बदलकर बिल्कुल अलग रंग ले सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मंगल पर पैदा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) इतनी कमजोर होगी कि पृथ्वी के आम बैक्टीरिया भी उनके लिए जानलेवा बन जाएंगे। इसका मतलब है कि जो मंगल का हुआ, वो शायद कभी वापस अपनी धरती पर सुरक्षित नहीं लौट पाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस की 73वीं लहर में इजराइल के परमाणु शहर डिमोना समेत 5 शहरों पर एक साथ मिसाइल हमला किया, इजराइल का आयरन डोम और एरो सिस्टम फेल हो गया और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए।
- ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे में होरमुज जलडमरूमध्य खोलने का अल्टीमेटम दिया, ईरान ने जवाब में कहा कि बिजली ठिकानों पर हमला हुआ तो पूरे मिडिल ईस्ट का ऊर्जा ढांचा तबाह कर दिया जाएगा।
- चीन ने ताइवान की घेराबंदी तेज की, 8 युद्धपोत, 2 एयरक्राफ्ट कैरियर और 26 सैन्य विमान तैनात किए, टाइप 055 डिस्ट्रॉयर से 5 मिसाइलों का सफल परीक्षण भी किया।
- पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने भारत पर परमाणु हमले की खुली धमकी दी, कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला किया तो मुंबई और दिल्ली पर हमला करेंगे।








