Iran Israel War ने अब दुनिया को सबसे बड़े ऊर्जा संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। 20 मार्च 2026 को जहां एक तरफ ईरान ने अमेरिका के सबसे अत्याधुनिक F-35 Lightning II लड़ाकू विमान को मार गिराने का ऐतिहासिक दावा किया, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र की तेल रिफाइनरियां ईरानी मिसाइलों का निशाना बन रही हैं। कुवैत की मीना अल अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, कतर की 17% LNG क्षमता तबाह हो गई और Crude Oil के दाम आसमान छू रहे हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहे हैं, जो साफ दिखाता है कि ईरान के जवाबी हमलों ने अमेरिका को भी बैकफुट पर ला दिया है।
यह Iran Israel War जो शुरू हुई थी ईरान के बढ़ते परमाणु खतरे को रोकने की जिद से, वो अब पूरी तरह तेल की लड़ाई बन चुकी है। इजराइल ने ईरान की साउथ पार्स रिफाइनरी पर हमला कर जो चिंगारी लगाई, उसने पूरे खाड़ी क्षेत्र को आग में झोंक दिया है।
Iran ने तबाह की Qatar की 17% गैस सप्लाई: सालाना 20 बिलियन डॉलर का नुकसान
Iran Israel War का सबसे विनाशकारी असर कतर पर दिखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर ईरानी मिसाइल हमलों से देश की 17% LNG क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे सालाना 20 बिलियन डॉलर के राजस्व का भारी नुकसान होगा। मरम्मत के चलते 12.8 मिलियन टन प्रतिवर्ष की LNG सप्लाई 3 से 5 साल तक के लिए रुक जाएगी।
कतर को अब कई देशों को होने वाली आपूर्ति पर “फोर्स मेजोर” घोषित करना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में गहरा संकट पैदा हो सकता है। इस हमले का असर सिर्फ खाना पकाने वाली गैस (LNG) तक सीमित नहीं है। कंडेंसेट, जो रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल बनाने के काम आता है, उसके निर्यात में 24% की गिरावट आने की आशंका है। LPG यानी घरेलू गैस की सप्लाई में भी 13% की कमी हो सकती है। इन यूनिट्स को बनाने में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो अब क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
कुवैत ने भी बताया कि मीना अल अहमदी रिफाइनरी पर रात में ड्रोन हमला हुआ, जिससे कुछ यूनिट्स में आग लग गई और सुरक्षा के मद्देनजर कुछ यूनिट्स बंद करनी पड़ीं। ईरान ने पूरी दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि उस पर हो रहे हमलों का जवाब देने से वह पीछे नहीं हटेगा।
Iran ने US F-35 Lightning II मार गिराने का किया दावा: अमेरिका को बड़ा झटका
Iran Israel War में ईरान ने सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा यह किया कि उसने अमेरिका के सबसे उन्नत F-35 Lightning II लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है। ईरान ने कहा कि वो अमेरिकी F-35 को निशाना बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। इसके अलावा ईरान ने अमेरिका और इजराइल के 125 से ज्यादा ड्रोन भी मार गिराने का दावा किया।
पश्चिमी मीडिया CNN की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने F-35 की आपातकालीन लैंडिंग की पुष्टि भी की है। बता दें कि F-35 अमेरिका का सबसे उन्नत और दुनिया के सबसे महंगे विमानों में से एक है, जिसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं, जिनमें 10 MQ-9 रिपर ड्रोन भी शामिल हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने भी माना है कि ईरानी हवाई क्षेत्र पर उनका नियंत्रण अभी सीमित है। जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि अमेरिका के पास फिलहाल केवल कुछ ही जगहों पर हवाई बढ़त हासिल है, पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण नहीं है।
Pentagon ने मांगे 200 अरब डॉलर: Trump ईरानी तेल प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहे
Iran Israel War का बोझ अमेरिकी खजाने पर भी भारी पड़ रहा है। पेंटागन ने ईरान युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त खर्च की मांग की है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेथ ने कहा कि “बुरे लोगों को मारने के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है।” हालांकि उन्होंने दावा भी किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान में अब तक 7000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने खुद कहा है कि ट्रंप ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया जब बढ़ते ऊर्जा संकट ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। पिछले 20 दिनों से जारी इस युद्ध में ईरान ने खून के आखिरी कतरे तक मैदान छोड़ने से मना कर दिया है और लगातार दुश्मनों पर हमले कर रहा है।
Netanyahu ने पेश की सफाई: कहा “मैं जिंदा हूं और इजराइल जीत रहा है”
Iran Israel War के बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने सबसे पहले मीडिया से कहा कि “मैं अभी जिंदा हूं और आप सभी लोग इस बात के प्रमाण हैं।” नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल ने इस युद्ध में ट्रंप को नहीं धकेला, ट्रंप अपना फैसला खुद लेते हैं। उनके मुताबिक ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन कर सकता है और न ही बैलिस्टिक मिसाइलें बना सकता है।
लेकिन नेतन्याहू के ये दावे भी सवालों से घिर गए हैं। बीते साल भी ईरान के साथ हुई जंग के बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का दावा किया था। अगर उनका वह दावा सच था, तो फिर दोबारा यह जंग शुरू ही क्यों हुई? यह सवाल इजराइल और अमेरिका दोनों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका, इजराइल और ईरान तीनों से युद्ध रोकने की अपील की है, लेकिन मौजूदा हालात में यह मुमकिन होता नजर नहीं आ रहा।
Sri Lanka ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका: लड़ाकू विमानों को लैंडिंग से इंकार
Iran Israel War के बीच श्रीलंका ने अमेरिका को करारा झटका दिया है। श्रीलंका ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपनी जमीन पर लैंडिंग की इजाजत देने से साफ इंकार कर दिया। श्रीलंका ने कहा कि वह अपनी तटस्थ नीति पर कायम रहेगा और इस युद्ध में किसी भी पक्ष का साथ नहीं देगा। भारत का पड़ोसी होने के कारण श्रीलंका का यह फैसला दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
Taliban ने Pakistan को दी खुली धमकी: “NATO से नहीं डरे तो तोप से क्या डरेंगे”
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बावजूद जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही। तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने पाकिस्तान को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि तालिबान किसी भी सैन्य धमकी या हमले से डरने वाला नहीं है। अखुंदजादा ने जोर देकर कहा कि एयर स्ट्राइक, गोलीबारी या दबाव की रणनीति से उनका रुख नहीं बदलेगा। अगर तालिबान डरने वाला होता तो NATO और पश्चिमी देशों के खिलाफ लंबे युद्ध में टिक ही नहीं पाता।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के रिहैब अस्पताल पर किए गए हवाई हमले में 400 लोगों की जान चली गई थी। जिसके बाद पाकिस्तान इस्लामी दुनिया के भी निशाने पर आ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम विद्वान संघ ने पाकिस्तानी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे इस्लामी सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों का उल्लंघन बताया। मुस्लिम धर्म गुरुओं ने पाकिस्तान से इस तरह की कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की अपील की और रिहैब अस्पताल हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की।
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सीजफायर उल्लंघन के तालिबानी आरोपों को बेबुनियाद बताया। लेकिन इसी बीच पाकिस्तान ने एक अजीबोगरीब दावा भी किया: पाकिस्तानी सेना के डीजी ISPR लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि तालिबान की तरफ से हमलों में भारतीय ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हालांकि इसका कोई सबूत नहीं दिया गया।
India ने जताई चिंता: कहा Pakistan का परमाणु कार्यक्रम चोरी-छिपे चलाने का पुराना इतिहास
अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो खुलासे हुए, उन पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो चिंताएं जताई गई हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं है। पाकिस्तान का चोरी-छिपे परमाणु कार्यक्रम चलाने और आतंकवाद को पालने का पुराना इतिहास रहा है।
अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (DNI) तुलसी गबार्ड ने हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के सामने 2026 की वार्षिक खतरा आकलन रिपोर्ट पेश करते हुए चेताया था कि पाकिस्तान ऐसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें डेवलप कर रहा है जिनमें ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) शामिल हो सकती हैं। ये मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक हथियारों के साथ सीधे अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम हैं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी रणनीतिक क्षमताएं पूरी तरह रक्षात्मक हैं और भारत का 12,000 किलोमीटर मारक क्षमता वाली मिसाइल विकसित करना दक्षिण एशिया और उससे परे के क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है। भारत-पाकिस्तान के बीच इस जुबानी जंग से यह साफ है कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के रिश्तों में तनाव अभी भी बना हुआ है।
Greenland पर Trump को क्यों खींचने पड़े पैर पीछे: यूरोप ने की थी जंग की तैयारी
Iran Israel War के बीच NATO में जो दरार पड़ी, उसकी जड़ें ग्रीनलैंड विवाद तक जाती हैं। ट्रंप ने डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी थी, जिसके बाद यूरोप और अमेरिका आमने-सामने हो गए थे।
डेनमार्क के पब्लिक ब्रॉडकास्टर DR ने बड़ा खुलासा किया है। डेनिश सरकार और सेना के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि अमेरिकी हमले को रोकने के लिए डेनमार्क ने खतरनाक प्लान बनाया था। कोपेनहेगन ने पेरिस और बर्लिन के साथ-साथ नॉर्डिक देशों से समर्थन मांगा था। मजबूत यूरोपीय एकजुटता दिखाने और ग्रीनलैंड में ज्यादा संयुक्त सैन्य गतिविधियां करने का प्रस्ताव रखा गया। लड़ाई की स्थिति में घायल सैनिकों के इलाज के लिए खून की सप्लाई भी मंगवा ली गई थी।
डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे और स्वीडन के सैनिकों की एक टुकड़ी को ग्रीनलैंड की राजधानी नुक और कांगेरलुसुआक भेजा गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा था कि शुरुआती टुकड़ी को जमीन, हवा और समुद्र के संसाधनों से और मजबूत किया जाएगा। यानी ट्रंप के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करना इतना आसान नहीं था क्योंकि पूरा यूरोप एकजुट खड़ा था और अमेरिका का सामना करने की तैयारी कर चुका था। यही वजह रही कि ट्रंप को अपना प्लान रोकना पड़ा।
Nepal में नई सरकार: बालेन शाह 27 मार्च को लेंगे PM पद की शपथ
नेपाल में नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। बालेन शाह 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे, जबकि सांसद 26 मार्च को शपथ लेंगे। चुनाव में RSP (राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी) को 182 सीटें मिली थीं। नेपाल में यह राजनीतिक बदलाव भारत के लिए भी अहम है क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते नई सरकार की नीतियों पर निर्भर करेंगे।
Japan PM Takaichi की Trump से मीटिंग: Pearl Harbor के जिक्र पर असहज हुईं जापानी PM
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की। लेकिन इस बैठक में जब 1941 के पर्ल हार्बर पर हमले का जिक्र हुआ तो जापानी PM असहज नजर आईं। इससे पहले जापान ने होर्मुज में जहाज भेजने से भी इंकार किया था, जो दिखाता है कि जापान भी इस Iran Israel War में अमेरिका का खुला साथ देने से बच रहा है।
Epstein के 20 साल के वकील का चौंकाने वाला बयान
जेफरी एपस्टीन के 20 साल तक वकील रहे इनडाइक ने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि “मुझे इस अपराध की जानकारी नहीं थी। अगर पता होता तो इस घिनौने खेल का हिस्सा नहीं बनता।” एपस्टीन मामला अमेरिका में सबसे संवेदनशील मामलों में से एक रहा है और इस बयान ने एक बार फिर इस पर चर्चा तेज कर दी है।
अंतरिक्ष में मिला “नर्क का घर”: 1900°C तापमान, पिघले कांच की बारिश
वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ग्रह खोज निकाला है जिसे “House of Hell” यानी नर्क का घर कहा जा रहा है। इसका वैज्ञानिक नाम HD 189733b है। यह पृथ्वी से लगभग 63 से 65 प्रकाश वर्ष की दूरी पर वल्पेक्युला नाम के तारामंडल में स्थित है। यह ग्रह न तो पृथ्वी जैसा ठोस है और न ही बृहस्पति जैसा पूरी तरह गैस का गोला, बल्कि यह एक पिघला हुआ ग्रह है।
यहां का तापमान 1900 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, इतना गर्म कि पत्थर भी मोम की तरह पिघल जाएं। यहां पानी नहीं बल्कि पिघले हुए कांच की बारिश होती है और हवाएं 5000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने इस ग्रह के वायुमंडल में हाइड्रोजन सल्फाइड का पता लगाया, यानी वही गैस जो सड़े हुए अंडों से आती है। वैज्ञानिकों के लिए यह ग्रह एक टाइम मन जैसा है क्योंकि इसे देखकर समझ आता है कि अरबों साल पहले हमारी पृथ्वी भी शायद इसी तरह उबलती हुई अवस्था में रही होगी।
Iran Israel War का आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा
इस Iran Israel War का सबसे बड़ा असर ऊर्जा कीमतों पर पड़ रहा है। कतर की 17% LNG सप्लाई तबाह होने, कुवैत की रिफाइनरी पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा टोल वसूली शुरू करने से Crude Oil के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, उसके लिए यह संकट सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, रसोई गैस और महंगाई से जुड़ा है। LPG सप्लाई में 13% की कमी और कंडेंसेट निर्यात में 24% की गिरावट का मतलब है कि आने वाले महीनों में आम परिवारों की जेब पर और ज्यादा बोझ पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम की अपील कर रहा है, लेकिन जब तक दोनों पक्ष तैयार नहीं होते, दुनिया इस ऊर्जा संकट की कीमत चुकाती रहेगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- Iran Israel War में ईरान ने अमेरिकी F-35 Lightning II मार गिराने का दावा किया, CNN ने भी आपातकालीन लैंडिंग की पुष्टि की: ब्लूमबर्ग के मुताबिक 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं
- कतर की 17% LNG क्षमता ईरानी हमलों से तबाह, सालाना 20 बिलियन डॉलर का नुकसान: 3 से 5 साल तक सप्लाई रुक सकती है, Trump ईरानी तेल प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहे
- तालिबान सुप्रीम लीडर ने पाकिस्तान को दी खुली धमकी, मुस्लिम विद्वान संघ ने रिहैब अस्पताल हमले की कड़ी निंदा की: भारत ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर जताई चिंता
- ग्रीनलैंड पर कब्जे के ट्रंप के प्लान को यूरोप ने नाकाम किया, डेनमार्क-फ्रांस-जर्मनी ने सैनिक भेजकर जंग की तैयारी कर ली थी








