Shri Ram Yantra Sthapana के साथ अयोध्या के धार्मिक इतिहास में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन और हिंदू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) के पावन अवसर पर अयोध्या राम मंदिर के तृतीय तल पर स्थित गर्भगृह में दिव्य, भव्य और अद्भुत श्री राम यंत्र की स्थापना कर दी गई। इस ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:55 बजे) में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह अनुष्ठान संपन्न हुआ।
यह पल हिंदुओं के जीवन में ऐतिहासिक साबित हुआ। अब श्रद्धालु राम मंदिर में भगवान श्री राम की भव्य मूर्ति के साथ-साथ इस अलौकिक श्री राम यंत्र के भी दर्शन कर सकेंगे।
क्या है श्री राम यंत्र और यह कैसा दिखता है
Shri Ram Yantra एक पवित्र तांत्रिक-वैदिक यंत्र है जो दिव्य ऊर्जा और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। यह धातु की एक आयताकार प्लेट है जिसकी चौड़ाई लगभग 3 फीट और लंबाई करीब 4 फीट है। इस यंत्र पर विशेष ज्योतिमय आकृतियां, बीज मंत्र और पवित्र रेखाएं अंकित हैं।
भगवान श्री राम समेत अलग-अलग देवी-देवताओं से जुड़े मंत्र इस पर उकेरे गए हैं और प्रत्येक देवता का एक-एक बीज मंत्र भी यंत्र पर लिखा है। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र किसी देवता की शक्ति को उस स्थान पर स्थिर करने के लिए स्थापित किया जाता है। श्री राम यंत्र पर लिखे गए मंत्र राम नाम की शक्ति को स्थायी रूप से उस स्थान पर बनाए रखते हैं।
सनातन परंपरा में यंत्रों का महत्व
सनातन परंपरा में प्रत्येक देवी-देवता का एक यंत्र बताया गया है। जैसे श्री यंत्र धन और समृद्धि के लिए, कुबेर यंत्र वैभव के लिए और नवग्रह यंत्र ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचाव के लिए स्थापित किए जाते हैं। ठीक इसी तरह Shri Ram Yantra भगवान राम की शक्ति का प्रतीक है।
यह यंत्र धर्म, मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन हिंदू शास्त्रों और तंत्र ग्रंथों में यंत्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है। तंत्र परंपरा के अनुसार यंत्र आंतरिक सार्वभौमिक आत्मा के दर्पण हैं और इन्हें मंत्रों, पवित्र श्वास पद्धतियों (कुंडलिनी प्राणायाम) और मुद्राओं के साथ मिलाकर दिव्य उपस्थिति को जागृत किया जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कितना खास है यह यंत्र
Shri Ram Yantra को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास बताया जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार यह यंत्र मानसिक अशांति और पितृ दोष जैसी समस्याओं से बचाव करता है। शनि की साढ़ेसाती, ढैया या राहु-केतु के दुष्प्रभाव को भी इस यंत्र के माध्यम से बेअसर किया जा सकता है।
जहां भी यह यंत्र स्थापित होता है, वहां नकारात्मक शक्तियों का बस नहीं चलता। वास्तु दोष को खत्म करने की शक्ति भी इस यंत्र में बताई जाती है। यह सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है, घर और स्थान की खुशहाली और सुख-समृद्धि को बनाए रखता है। भय और चिंता को दूर करने, आत्मविश्वास जगाने और जीवन में संतुलन लाने में भी यह कारगर माना जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा
इस ऐतिहासिक स्थापना समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति ने इस अवसर की गरिमा को और बढ़ा दिया। देश भर से कई साधु-संत और वैदिक विद्वान इस अनुष्ठान में शामिल हुए। स्थापना से पहले नौ दिवसीय विशेष वैदिक अनुष्ठान किया गया था, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान पंडितों ने भाग लिया।
बताया जाता है कि यह श्री राम यंत्र जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा भेजा गया था। करीब दो साल पहले यह यंत्र अयोध्या के मंदिर परिसर में लाया गया था और तब से इसकी प्रतिदिन नियमित पूजा की जा रही थी। आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी (अम्मा) ने भी मंदिर का दौरा किया और कहा कि यंत्र की प्राचीन प्रतीकात्मकता मानव हृदय में दिव्य शक्ति जगाने में मदद करेगी। उन्होंने इसे आपदाओं और बाधाओं के खिलाफ एक “शॉक एब्जॉर्बर” की संज्ञा दी।
जहां स्थापित होता है श्री राम यंत्र, वहां बदल जाता है वातावरण
श्री राम यंत्र के बारे में ऐसी मान्यता है कि जिस भी स्थान पर यह स्थापित होता है, वहां का वातावरण शुद्ध हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। अब जबकि यह यंत्र अयोध्या के श्री राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित हो चुका है, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी गहरा माना जाएगा।
आम श्रद्धालुओं के लिए यह पल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब वे राम लला के दर्शन के साथ-साथ इस दिव्य यंत्र के भी दर्शन कर सकेंगे। चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को राम नवमी तक चलेगी और इस दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
अयोध्या राम मंदिर का बढ़ता आध्यात्मिक वैभव
राम मंदिर में पहले से ही भगवान श्री राम की भव्य मूर्ति विराजमान है और अब श्री राम यंत्र की स्थापना के बाद इस मंदिर का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। नागर शैली में बना यह तीन मंजिला भव्य मंदिर अपने आप में वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।
यह दिन न केवल अयोध्या के लिए, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए ऐतिहासिक है। जब राम लला की मूर्ति के साथ उनकी शक्ति का प्रतीक Shri Ram Yantra भी स्थापित हो गया, तो यह मंदिर अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के जीवंत ऊर्जा केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है।
जानें पूरा मामला
अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण सदियों पुरानी आस्था का परिणाम है। जनवरी 2024 में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण लगातार जारी है। श्री राम यंत्र को जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने भेजा था और यह करीब दो साल से मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया था, जहां इसकी रोज पूजा होती थी। 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, हिंदू नववर्ष के शुभ अवसर पर, अभिजीत मुहूर्त में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में इसे तृतीय तल के गर्भगृह में स्थापित किया गया। नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से चल रहा था और देश भर के विद्वान पंडित इसमें शामिल हुए। यह तांत्रिक-वैदिक यंत्र 3 फीट चौड़ी और 4 फीट लंबी धातु की प्लेट है, जिस पर देवी-देवताओं के बीज मंत्र और पवित्र रेखाएं अंकित हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन (19 मार्च 2026) अयोध्या राम मंदिर के तृतीय तल गर्भगृह में Shri Ram Yantra की ऐतिहासिक स्थापना हुई।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि रहीं, अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान संपन्न हुआ।
- यह 3×4 फीट की धातु प्लेट है जिस पर देवी-देवताओं के बीज मंत्र अंकित हैं, यह पितृ दोष, शनि साढ़ेसाती, राहु-केतु और वास्तु दोष से बचाव करता है।
- जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा भेजा गया यह यंत्र दो साल से मंदिर परिसर में नियमित पूजा के बाद स्थापित किया गया।








