LPG Crisis ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते कच्चे तेल और एलपीजी गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 से 25 प्रतिशत कच्चा तेल और एलपीजी की आपूर्ति होती है और यही क्षेत्र इस समय युद्ध की सबसे बड़ी मार झेल रहा है। इसका असर भारत से लेकर जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन और यूरोपीय संघ तक हर जगह दिख रहा है।
इस भयावह संकट से निपटने के लिए अब दुनिया के 10 देशों ने एक महाऑपरेशन शुरू किया है। हर देश अपने-अपने तरीके से इस LPG Crisis से लड़ रहा है ताकि आम लोगों की रसोई ठंडी न पड़े और महंगाई पर काबू पाया जा सके।
भारत ने कैसे संभाली LPG Crisis की स्थिति: चार बड़े फैसले
भारत में LPG Crisis का असर सबसे गहरा दिखा। देश में 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं और जब संकट शुरू हुआ तो लोग सड़कों पर उतर आए। गैस सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। ऐसे में भारत सरकार ने कई बड़े कदम उठाए।
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पहला फैसला: जिन उपभोक्ताओं के पास पीएनजी यानी पाइपलाइन नेचुरल गैस की सुविधा है, उन्हें एलपीजी सिलिंडर देने पर पाबंदी लगा दी गई। बड़े शहरों में कई घरों में पाइपलाइन के जरिए सीधे किचन तक गैस पहुंचती है। सरकार ने कहा कि अगर आपके पास पीएनजी है तो आपको 14.2 किलो वाला एलपीजी सिलिंडर नहीं दिया जाएगा। इसका मकसद यह था कि जो लोग जमाखोरी करते हैं और बड़े पैमाने पर स्टॉक करके रखते हैं, उन पर लगाम लगे।
दूसरा फैसला: देश की सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया। सरकार ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जितनी भी रिफाइनरियां हैं वे लगातार एलपीजी का प्रोडक्शन बढ़ाएं ताकि बाजार में सप्लाई बनी रहे और आम लोगों को संकट का सामना न करना पड़े।
तीसरा फैसला: इंडस्ट्री को मिलने वाली गैस की मात्रा में कटौती कर दी गई। कई इंडस्ट्रीज को एलपीजी दी जाती है, लेकिन सरकार ने प्राथमिकता बदलते हुए कहा कि पहले 33 करोड़ घरेलू कनेक्शनधारकों की जरूरत पूरी होगी।
चौथा फैसला: एलपीजी की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी की गई। कमर्शियल सिलिंडरों पर कई जगह प्रतिबंध लगाए गए। शहरों में दो सिलिंडर बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर रखा गया जबकि ग्रामीण इलाकों में यह गैप 45 दिनों का कर दिया गया। जमाखोरी करने वालों पर भी सरकार लगातार शिकंजा कस रही है।
इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के कई जहाज बंदरगाहों तक पहुंच रहे हैं, जो एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
इटली: उत्पाद शुल्क में कटौती और मुनाफाखोर कंपनियों पर शिकंजा
इटली भी इस LPG Crisis से बुरी तरह प्रभावित है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उत्पाद शुल्क में कटौती करने पर विचार शुरू किया है। उनका मानना है कि अगर ऐसा किया गया तो एलपीजी के उत्पादन और वितरण को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
इसके साथ ही इटली सरकार उन कंपनियों पर टैक्स बढ़ाने का भी विचार कर रही है जो इस ऊर्जा संकट का गलत फायदा उठाकर मुनाफा कमा रही हैं। जो कंपनियां इस मुश्किल दौर में गलत तरीके से प्रॉफिट कमा रही हैं, उनसे ज्यादा टैक्स वसूलने की तैयारी हो रही है।
चीन: रिफाइंड ईंधन का निर्यात रोका, जमाखोरों पर सख्ती
चीन में भी LPG Crisis का असर दिख रहा है, हालांकि वहां की खबरें दुनिया के सामने बहुत कम आती हैं क्योंकि वहां मीडिया पर सख्त नियंत्रण है। चीन ने रिफाइन किए गए ईंधन का निर्यात पूरी तरह रोक दिया है। चीन जो कच्चा तेल आयात करके रिफाइन करता है और फिर दुनिया के कई देशों को निर्यात करके पैसा कमाता है, वह सारा निर्यात अब बंद कर दिया गया है।
ईंधन की जमाखोरी करने वालों के खिलाफ भी चीन सरकार सख्त एक्शन लेने की तैयारी में है। इसके अलावा बसंत की बुवाई का सीजन आ रहा है, इसलिए चीन ने अपने नेशनल कमर्शियल रिजर्व से उर्वरक भी जारी कर दिया है ताकि बाहर से खाद न मंगानी पड़े और कृषि का प्रवाह बना रहे।
दक्षिण कोरिया: परमाणु ऊर्जा का सहारा और कमजोर परिवारों को एनर्जी वाउचर
दक्षिण कोरिया ने LPG Crisis से निपटने के लिए एक अलग रास्ता अपनाया है। कोयले से बनने वाली बिजली की अधिकतम सीमा कम कर दी गई है क्योंकि कोयला आधारित बिजली उत्पादन में भी गैस और पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल होता है।
इसकी जगह दक्षिण कोरिया ने परमाणु संयंत्रों की क्षमता का उपयोग 80 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्देश दिया है। न्यूक्लियर पावर प्लांट से बिजली उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा की कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अतिरिक्त एनर्जी वाउचर देने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि गरीब तबके पर इस संकट का सीधा बोझ न पड़े।
ऑस्ट्रेलिया: घरेलू भंडार से तेल जारी और ग्रामीण सप्लाई चेन पर फोकस
ऑस्ट्रेलिया भी इस LPG Crisis से अछूता नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापार मार्ग पर ऑस्ट्रेलिया की भी बड़ी निर्भरता है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया ने अपने घरेलू रिजर्व यानी आपातकालीन भंडार से पेट्रोल और डीजल जारी कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 400 मिलियन बैरल तेल रिजर्व से निकालने का फैसला लिया था, जिसमें अमेरिका ने अकेले लगभग 174 मिलियन बैरल तेल निकालने की बात कही। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने भंडार से तेल निकालने की कोशिश शुरू कर दी है। साथ ही ग्रामीण इलाकों में सप्लाई चेन ठीक करने की लगातार कोशिश की जा रही है ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी एलपीजी की किल्लत न हो।
जापान: ऑस्ट्रेलिया से एलएनजी उत्पादन बढ़ाने की मांग
जापान ने LPG Crisis से निपटने के लिए अपने सबसे बड़े एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) सप्लायर ऑस्ट्रेलिया से उत्पादन बढ़ाने की मांग की है। ऑस्ट्रेलिया जापान का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है और दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी भी कम है, जिसकी वजह से दोनों का आपसी कारोबार बहुत बड़ा है।
दिलचस्प बात यह है कि जब पहले डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज फोर्स गठन करने की पहल की थी, तब जापान और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया था। लेकिन अब संकट इतना गहरा हो गया है कि दोनों देशों को मिलकर काम करना पड़ रहा है।
यूरोपीय संघ: गैस आयात नियमों में ढील की मांग
यूरोपीय संघ (EU) ने भी LPG Crisis से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ईयू ने अपनी सदस्य सरकारों से कहा है कि गैस आयात पर लागू नियमों में ढील दी जाए। समस्या यह है कि जब नियमों का बहुत सख्ती से पालन कराया जाता है तो एलएनजी की आपूर्ति में देरी हो जाती है।
ऐसे समय में जब पूरा यूरोप ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, नियमों में लचीलापन लाना जरूरी हो गया है। यूरोपीय संघ की कोशिश है कि एलएनजी की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे और आम लोगों पर इसका बोझ कम से कम पड़े।
मलेशिया, ब्राजील, मिस्र, इथोपिया, थाईलैंड और फिलीपींस: हर देश अपने तरीके से लड़ रहा
LPG Crisis का असर सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई छोटे और विकासशील देश भी इससे जूझ रहे हैं।
मलेशिया: पेट्रोल सब्सिडी पर खर्च बढ़ाकर 51 करोड़ डॉलर करने का फैसला किया है ताकि पेट्रोल की कीमतें न बढ़ें और आम जरूरत की चीजें महंगी न हों।
ब्राजील: राष्ट्रपति लूला डिसिल्वा ने डीजल पर संघीय करों को पूरी तरह समाप्त करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह एक बहुत बड़ा कदम है जिससे डीजल की कीमतों में सीधी राहत मिलेगी।
मिस्र: निजी बेकरियों में बिकने वाली बिना सब्सिडी वाली ब्रेड की अधिकतम कीमत तय कर दी गई है ताकि कोई भी इससे ज्यादा वसूली न कर सके।
इथोपिया: ईंधन की सब्सिडी में बढ़ोतरी कर दी गई है ताकि आम नागरिकों पर बोझ कम पड़े।
थाईलैंड: रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिनों की छूट दी है, जिसके तहत जो जहाज होर्मुज के आसपास समुद्र में फंसे थे, उनसे दुनिया के देश सस्ता रूसी तेल खरीद सकते हैं। इसके अलावा थाईलैंड सरकार रोजमर्रा की कुछ जरूरी वस्तुओं की कीमतें फ्रीज करने और किसानों की मदद के लिए अतिरिक्त योजनाएं बनाने पर भी काम कर रही है।
फिलीपींस: कोयले से बिजली उत्पादन बढ़ाने और बिजली बिलों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम
इस पूरे LPG Crisis की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग है और यहां से दुनिया का 20 से 25 प्रतिशत कच्चा तेल और एलपीजी की आपूर्ति होती है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने इस मार्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। जब इतना बड़ा हिस्सा बाधित होता है तो उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है और यही कारण है कि भारत जैसे देश, जो अपनी अधिकतर एलपीजी मध्य पूर्व से आयात करते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
आम लोगों के लिए इसका मतलब यह है कि जब तक युद्ध की स्थिति सामान्य नहीं होती और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक एलपीजी की किल्लत और बढ़ी हुई कीमतें बनी रह सकती हैं। हालांकि दुनिया के 10 देशों का यह महाऑपरेशन इस बात का संकेत है कि सरकारें इस संकट को गंभीरता से ले रही हैं और हर संभव कदम उठा रही हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की 20-25% तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक LPG Crisis पैदा हुआ।
- भारत ने पीएनजी उपभोक्ताओं पर एलपीजी पाबंदी, रिफाइनरी उत्पादन बढ़ोतरी, इंडस्ट्री गैस कटौती और बुकिंग नियम बदलने जैसे बड़े कदम उठाए।
- चीन ने रिफाइंड ईंधन का निर्यात रोका, दक्षिण कोरिया ने परमाणु ऊर्जा क्षमता 80% तक बढ़ाई, ब्राजील ने डीजल पर टैक्स पूरी तरह खत्म किया।
- IEA ने 400 मिलियन बैरल तेल रिजर्व से निकालने का फैसला लिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने अपने भंडार से तेल जारी किया।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: LPG Crisis क्यों पैदा हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य इसमें कितना अहम है?
उत्तर: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है। यहां से दुनिया का 20 से 25 प्रतिशत कच्चा तेल और एलपीजी की आपूर्ति होती है। इस मार्ग के बाधित होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है।
प्रश्न 2: भारत में LPG Crisis से निपटने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: भारत सरकार ने पीएनजी उपभोक्ताओं को एलपीजी देने पर पाबंदी लगाई, रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया, इंडस्ट्री को मिलने वाली गैस में कटौती की और शहरों में 25 दिन व ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का बुकिंग गैप तय किया। जमाखोरों पर भी सख्ती बढ़ाई गई है।
प्रश्न 3: क्या रूस से सस्ता तेल खरीदकर इस संकट से राहत मिल सकती है?
उत्तर: अमेरिका ने रूसी तेल पर 30 दिनों की छूट दी है। थाईलैंड जैसे देश रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि यह एक अस्थायी उपाय है और लंबे समय तक इससे संकट पूरी तरह हल होना मुश्किल है।








