Sonam Wangchuk Released होने की खबर ने एक बार फिर देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। करीब 6 महीने की हिरासत के बाद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को गृह मंत्रालय के आदेश पर 13 मार्च को रिहा कर दिया गया। उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द किया गया। लेकिन जेल से बाहर आते ही वांगचुक ने जो कुछ कहा उससे मोदी सरकार की टेंशन और बढ़ गई है। उन्होंने न सिर्फ जेल में हुए अन्याय का खुलासा किया बल्कि साफ कर दिया कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की उनकी मुहिम किसी भी हाल में नहीं रुकेगी।
जेल में कैसा था सलूक: वांगचुक ने सुनाई पूरी कहानी
Sonam Wangchuk Released होने के बाद अपनी गिरफ्तारी के अनुभव पर खुलकर बोले। एक तरफ उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इस दौरान उन्हें आत्मचिंतन का समय मिला, लिखने-पढ़ने का मौका मिला। लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने न्याय के नजरिए से हुई गंभीर गलतियों पर भी उंगली उठाई।
वांगचुक ने कहा कि कई अन्याय हुए और ऐसी गलतियां किसी के भी साथ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि माननीय अदालत में यह सब स्पष्ट हुआ और इसीलिए सरकार ने मामला वापस लिया। वांगचुक ने स्वीकार किया कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें ठेस जरूर लगी, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी की ठेस पर प्रतिक्रिया देना उनका स्वभाव नहीं है।
फिल्मी सीन जैसा था गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम
Sonam Wangchuk Released होने के बाद अपनी गिरफ्तारी की पूरी दास्तान सुनाई जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उन्होंने बताया कि उन्हें अचानक घर से उठाकर जेल में डाल दिया गया। कई दिनों तक परिवार और वकीलों से बात करने का मौका तक नहीं दिया गया। उनकी पत्नी को पत्रकारों से मिलने से भी रोका गया और कैंपस के बाहर भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई।
वांगचुक ने बताया कि उनकी पत्नी चुपचाप दिल्ली पहुंचीं और अदालत का दरवाजा खटखटाया। कई हफ्तों तक दिल्ली की सड़कों पर कैट एंड माउस चेस जैसा माहौल बना रहा। उनकी गाड़ियों का पीछा किया जाता था और वकीलों तक कोई संदेश भेजना भी बेहद मुश्किल बना दिया गया था। वांगचुक ने यहां तक कहा कि वह 12 महीने जेल में रहने के लिए पूरी तरह तैयार थे और बाहर आकर पूरी “हॉरर स्टोरी” बताने वाले थे।
रिहाई के बाद लद्दाख में फिर शुरू हुआ आंदोलन
वांगचुक की रिहाई के बाद लद्दाख में आंदोलन का सिलसिला एक बार फिर तेज हो गया है। वांगचुक ने साफ कर दिया कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की उनकी मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। उनकी यह जंग शांतिपूर्ण है लेकिन दृढ़ है।
वांगचुक ने याद दिलाया कि जब 2019 में अनुच्छेद 370 हटाया गया था तब उन्होंने खुद इस फैसले का स्वागत किया था। लेकिन उसके बाद जो वादे किए गए थे वे पूरे नहीं हुए। वांगचुक का कहना है कि सरकार की तरफ से कमियां रहीं हैं तभी आज वह इस तरह से अपनी आवाज उठा रहे हैं। आम लद्दाखवासियों के लिए यह मुद्दा उनकी पहचान, अधिकारों और भविष्य से जुड़ा है और वांगचुक इस आवाज का सबसे मजबूत चेहरा बने हुए हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा: शिवसेना UBT ने कहा शर्मनाक
Sonam Wangchuk Released होने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। शिवसेना UBT की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस तरह से सोनम वांगचुक पर फर्जी केस लगाया गया और अब जाकर सरकार ने उसे वापस लिया, यह शर्मनाक है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि वांगचुक एक एक्टिविस्ट हैं जिन्होंने पर्यावरण के लिए आवाज उठाई। कुछ भी गलत न करने के बावजूद उन्हें इस तरह जेल में रखा गया। उन्होंने मांग की कि सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए और साथ ही लद्दाख व लेह को लेकर वांगचुक की मांगों पर भी सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय
इस पूरे मामले में केंद्र सरकार दोतरफा दबाव में है। एक तरफ वांगचुक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और लद्दाख में आंदोलन फिर से जोर पकड़ रहा है, दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। जिस तरह से वांगचुक की गिरफ्तारी हुई, जेल में उनके साथ जो सलूक किया गया और फिर अचानक रिहा किया गया, इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
वांगचुक जैसा शख्स जिसने कभी 370 हटाने का स्वागत किया था, आज उसी सरकार के खिलाफ खड़ा है। यह बताता है कि लद्दाख में लोगों की नाराजगी कितनी गहरी है। सरकार अगर इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेती तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है और राजनीतिक रूप से सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
क्या था वांगचुक की गिरफ्तारी का पूरा मामला
करीब 6 महीने पहले लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया गया था। वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी पर विपक्ष ने कड़ी निंदा की थी। 13 मार्च को गृह मंत्रालय के आदेश पर उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया और वांगचुक जेल से बाहर आ गए। रिहाई के बाद उन्होंने अपनी मांगों को और मजबूती से उठाया है और साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सोनम वांगचुक करीब 6 महीने बाद गृह मंत्रालय के आदेश पर 13 मार्च को जेल से रिहा हुए और रिहाई के तुरंत बाद लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग फिर से उठाई।
- वांगचुक ने जेल में हुए अन्याय का खुलासा किया, बताया कि कई दिनों तक परिवार और वकीलों से बात नहीं करने दी गई, पत्नी को पत्रकारों से मिलने से रोका गया और पूरा घटनाक्रम फिल्मी सीन जैसा था।
- शिवसेना UBT सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने वांगचुक पर फर्जी केस लगाकर जेल में रखने को शर्मनाक बताया और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख दोनों को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की।
- विपक्ष की घेराबंदी और वांगचुक के अड़े रहने से केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।








