Middle East War अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। ईरान ने इजराइल पर अपना सबसे घातक हथियार “डांसिंग” सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, जबकि अमेरिका ने अपना सबसे विनाशकारी B-1B लांसर बॉम्बर मिडिल ईस्ट के आसमान में उतार दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने स्पष्ट कह दिया है कि जब तक अमेरिका यह न मान ले कि यह गैरकानूनी युद्ध है, तब तक कोई युद्धविराम नहीं होगा। इसी बीच NATO में बड़ी टूट हो गई है: जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप इस जंग में पूरी तरह अकेले पड़ गए हैं।
ईरान ने पहली बार इस्तेमाल की सेजिल मिसाइल: 7 मिनट में तेल अवीव पहुंचने की ताकत
Middle East War में ईरान ने इजराइल पर “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस फोर” के तहत हमलों की 54वीं लहर शुरू कर दी है। इस बार ईरानी सेना ने इजराइल के उन प्रशासनिक और निर्णय लेने वाले केंद्रों को निशाना बनाया जो हवाई अभियानों को नियंत्रित करते हैं। इजरायली सैन्य बुनियादी ढांचे और सुरक्षा बलों के जमावड़े वाले प्रमुख ठिकानों पर भी बमबारी की गई।
सबसे खतरनाक बात यह है कि इस हमले में ईरान ने पहली बार सॉलिड फ्यूल से चलने वाली सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। इस मिसाइल को “अशुरा” और “डांसिंग मिसाइल” भी कहा जाता है। यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी रेंज करीब 2,000 किलोमीटर है और यह लगभग 700 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है।
सेजिल मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि ठोस ईंधन से चलने के कारण इसे कुछ ही मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है, जिससे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना और रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह मिसाइल ईरान से सिर्फ 7 मिनट में इजराइल के तेल अवीव तक पहुंच सकती है। इस हमले से इजराइल को कितना नुकसान हुआ, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह तय है कि ईरान ने इजराइल को बड़ी चोट दी है।
अमेरिका ने उतारा “बोन” B-1B लांसर: 75,000 पाउंड बम ले जाने की क्षमता
Middle East War में अमेरिका ने भी अपना सबसे खतरनाक हथियार मैदान में उतार दिया है। B-1B लांसर बॉम्बर को दुनियाभर में “बोन” उपनाम से जाना जाता है। यह अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ है, जिसकी पेलोड क्षमता 75,000 पाउंड तक के घातक बम और मिसाइलें ले जाने की इजाजत देती है।
इस विमान का मिडिल ईस्ट के आसमान में उड़ना ईरान के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच अमेरिका और इजराइल की तरफ से ईरान पर हमले भी जारी हैं। ईरान के खोमीन शहर में तड़के एक स्कूल पर हमला हुआ। वॉइस ऑफ अमेरिका की फारसी सेवा के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के पास सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया है।
ईरानी विदेश मंत्री अराक्ची का कड़ा बयान: अमेरिका हार माने तब बात
Middle East War को लेकर ईरान का रुख बेहद आक्रामक है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान समझौता चाहता है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने ट्रंप के इस दावे को “झूठा” बताते हुए करारा जवाब दिया।
अराक्ची ने कहा, “हमने युद्धविराम की मांग नहीं की, बल्कि हमने तो बातचीत की भी कभी मांग नहीं की। ईरान तब तक अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा जब तक राष्ट्रपति ट्रंप यह नहीं मान लेते कि यह एक गैरकानूनी युद्ध है जिसमें उन्हें कोई जीत नहीं मिल सकती।” ईरान के इस कड़े रुख से साफ है कि इस जंग के जल्दी खत्म होने के कोई आसार नहीं हैं।
दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक, फ्रांस के मैक्रों ने ईरान से की अपील
Middle East War का असर अब खाड़ी देशों पर भी दिखने लगा है। दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन से ईंधन टैंक में आग लग गई, जिससे एयरपोर्ट को करीब 4 घंटे के लिए बंद कर दिया गया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनकी हवाई सुरक्षा प्रणाली ईरान से आ रहे मिसाइल और ड्रोन के खतरों का जवाब दे रही है।
खाड़ी देशों में बढ़ती तबाही को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की। मैक्रों ने कहा, “ईरान अपने प्रॉक्सी संगठनों जैसे हिज़बुल्लाह, हूती और अन्य मिलिशिया के हमले तत्काल रोके। जो बेकाबू तनाव बढ़ रहा है, वह पूरे क्षेत्र को अराजकता में धकेल रहा है।” मैक्रों ने चेतावनी दी कि इसके गंभीर नतीजे आने वाले सालों तक दिखेंगे।
नेतन्याहू जिंदा या नहीं: वीडियो पर AI का विवाद
Middle East War के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जिंदा हैं या नहीं, इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। मौत के दावों को नकारते हुए नेतन्याहू ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X (ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कहते सुनाई दिए, “मुझे कॉफी पसंद है, मुझे अपना देश पसंद है।”
लेकिन विवाद यह है कि कई लोग दावा कर रहे हैं कि यह वीडियो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाया गया है। सच क्या है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। यह स्थिति बताती है कि इस जंग में सूचना युद्ध भी उतना ही तीव्र है जितना सैन्य टकराव।
NATO में बड़ी टूट: ट्रंप की धमकी के बावजूद कोई देश नहीं आया साथ
Middle East War के बीच दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन NATO में बड़ी दरार पड़ गई है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, खासतौर पर इजरायली और अमेरिकी जहाजों के लिए। दुनियाभर का 20% तेल इसी रूट से गुजरता है, जिससे पूरी दुनिया की तेल सप्लाई ठप हो गई है।
ट्रंप ने NATO देशों से अपील की कि वे होर्मुज को सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजें। उन्होंने धमकी दी कि “अगर सहयोगी देश मदद नहीं करते तो NATO का भविष्य बहुत खराब हो सकता है।” ट्रंप ने प्रमुख रूप से चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से मदद मांगी, लेकिन किसी भी देश की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
जापान ने कहा: नौसेना भेजने का कोई इरादा नहीं
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची ने संसद में स्पष्ट कहा कि “टोक्यो की होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए नौसैनिक जहाज भेजने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।” यह बेहद अहम है क्योंकि जापान अपनी क्रूड ऑयल का लगभग 90% और LNG का 11% हिस्सा इसी रूट से ले जाता है।
जापान ने होर्मुज बंद होने की स्थिति से निपटने के लिए अपने तेल भंडारों से तेल छोड़ना शुरू कर दिया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने भी साफ कहा, “हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेजेंगे। हमें ऐसा करने के लिए नहीं कहा गया है और न ही हम ऐसा करने में योगदान दे रहे हैं।” यानी ट्रंप इस युद्ध में पूरी तरह अकेले पड़ गए हैं।
ट्रंप ने चीन को भी दी धमकी, शिखर सम्मेलन टालने की चेतावनी
Middle East War में अकेले पड़ चुके ट्रंप ने चीन को भी धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि अगर चीन इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करता तो वे इस महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाले शिखर सम्मेलन को स्थगित कर सकते हैं।
लेकिन हकीकत यह है कि चीन इस जंग में ईरान की मदद कर रहा है। अमेरिका और चीन दो विपरीत ध्रुवों की तरह हैं, ऐसे में चीन का अमेरिका के साथ हाथ मिलाने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि पेरिस में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता शुरू हुई है, जिसमें व्यापारिक विवाद, नई जांच और ईरान संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
वेस्ट बैंक में इजरायली गोलीबारी, फलस्तीनी परिवार के 4 सदस्यों की मौत
Middle East War का असर वेस्ट बैंक पर भी दिख रहा है। इजरायली सेना ने वेस्ट बैंक में एक कार पर गोलीबारी की, जिसमें एक फलस्तीनी परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। उधर राफा सीमा बंद होने से गाजा के मरीज इलाज के बिना फंसे हुए हैं। गाजा में मानवीय संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर भड़की जंग: डूरंड लाइन पर ताबड़तोड़ हमले
Middle East War के अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी स्थिति विस्फोटक हो गई है। 15 मार्च को पाकिस्तानी सेना ने दक्षिणी अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में तालिबान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।
इसके बाद तालिबान उग्र हो गया और जवाबी कार्रवाई में अफगान वायुसेना ने दक्षिण वजीरिस्तान के वाना इलाके में मौजूद एक पाकिस्तानी सैन्य कैंप पर हमला बोल दिया। इस हमले में पाकिस्तानी सेना को भारी जानमाल का नुकसान उठाना पड़ा और कई सैन्य सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।
दोनों देश डूरंड लाइन के जरिए करीब 2,640 किलोमीटर लंबा बॉर्डर शेयर करते हैं। तालिबान प्रवक्ता ज़बीहउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी हमलों में सिर्फ एक नशामुक्ति केंद्र और खाली कंटेनरों को नुकसान पहुंचा। लेकिन दोनों तरफ से जारी हमले बता रहे हैं कि यह जंग अभी और तेज हो सकती है और इस पूरे क्षेत्र में बड़ी अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है।
म्यांमार में 5 साल बाद बुलाई गई संसद, सेना का 90% सीटों पर कब्जा
म्यांमार में फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के 5 साल बाद 16 मार्च को पहली बार संसद का सत्र बुलाया गया। सेना ने तख्तापलट करके आंग सान सू ची की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका था। दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में चुनाव कराए गए, जिनमें सेना समर्थित USDP (यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी) ने भारी बहुमत हासिल किया।
कुल 586 सीटों वाली संसद में सेना के लिए पहले से ही 25% सीटें आरक्षित हैं और बाकी में USDP ने 339 सीटें जीती हैं। यानी सेना का दोनों सदनों में लगभग 90% सीटों पर कब्जा है। पूर्व सत्तारूढ़ NLD (नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी) और अन्य विपक्षी दलों को या तो चुनाव लड़ने से रोक दिया गया या उन्होंने अनुचित शर्तों के तहत चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। ऊपरी सदन की बैठक 18 मार्च और क्षेत्रीय संसदों की बैठक 20 मार्च को होनी है।
मेडागास्कर में सरकारी उलटफेर, साइप्रस में EU बैठकें अप्रैल से
मेडागास्कर में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है। राष्ट्रपति ने मंत्रिमंडल भंग होने के कुछ ही दिनों बाद भ्रष्टाचार विरोधी प्रमुख मामितियाना को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया है।
वहीं ईरान संकट के बीच साइप्रस में यूरोपीय संघ (EU) की बैठकें अप्रैल से शुरू होंगी। साइप्रस के ऊर्जा मंत्री डेमियनोस ने बताया कि एक ब्रिटिश हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद पहले ये बैठकें स्थगित हो गई थीं, लेकिन अब इन्हें फिर से शुरू किया जा रहा है।
हवा में तैरती झील: विज्ञान का कमाल, ग्रेविटी नहीं हुई फेल
दुनियाभर में चर्चा बटोर रही है फरो आइलैंड्स की सोर्वाग्सवाटन झील, जो तस्वीरों में समुद्र के ऊपर हवा में तैरती दिखती है। पहली नजर में लगता है कि ग्रेविटी फेल हो गई, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है।
यह झील नॉर्थ अटलांटिक महासागर के बीच स्थित है और 142 मीटर ऊंचाई की ट्रैली नीपा चट्टान से एक खास एंगल पर फोटो क्लिक करने पर कैमरा झील और समुद्र के बीच की दूरी सिकोड़ देता है, जिससे ऐसा लगता है कि झील हवा में लटकी है। इसे “फोर्स्ड पर्सपेक्टिव” का मास्टर क्लास माना जा रहा है।
असल में यह झील जमीन पर एक गहरे गड्ढे में बनी है जो समुद्र तल से महज 30 मीटर (लगभग 100 फीट) की ऊंचाई पर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी शुरुआत लगभग 1.1 करोड़ साल पहले ज्वालामुखी विस्फोट से हुई। बाद में ग्लेशियरों ने जमीन को कुरेदकर गहरा बेसिन बनाया और धीरे-धीरे मीठा पानी जमा हो गया। समुद्री लहरों ने किनारों को काटकर खड़ी चट्टानें बना दीं, जिससे यह अद्भुत नजारा पैदा हुआ।
मुख्य बातें (Key Points)
- Middle East War में ईरान ने पहली बार सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल दागी, अमेरिका ने B-1B लांसर बॉम्बर उतारा, ईरानी विदेश मंत्री ने युद्धविराम से साफ इनकार किया।
- NATO में बड़ी टूट: जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने होर्मुज में युद्धपोत भेजने से इनकार किया, ट्रंप इस जंग में पूरी तरह अकेले पड़े।
- पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर डूरंड लाइन के दोनों तरफ ताबड़तोड़ हमले, कंधार में पाक एयर स्ट्राइक, तालिबान ने वाना में पाक सैन्य कैंप पर जवाबी हमला किया।
- म्यांमार में 5 साल बाद संसद बुलाई गई, सेना समर्थित USDP का 90% सीटों पर कब्जा, दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक से 4 घंटे बंद रहा एयरपोर्ट।








