Iran US War के बीच मिडिल ईस्ट में हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप पर हमले के बाद अब चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इस जंग में मदद की अपील की है। दूसरी तरफ ईरान ने यूएई के तीन प्रमुख बंदरगाहों: दुबई का जबेल अली पोर्ट, अबू धाबी का खलीफा पोर्ट और फुजैरा पोर्ट पर हमले की खुली चेतावनी दे दी है और लोगों को इन इलाकों से तुरंत दूर चले जाने को कहा है।
ट्रंप ने किया सीजफायर से इनकार, ईरान के आगे रखी बड़ी शर्त
Iran US War में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो कुछ समय पहले तक युद्ध विराम के संकेत दे रहे थे, अब उन्होंने साफ कह दिया है कि फिलहाल ईरान के साथ किसी भी तरह का सीजफायर नहीं होगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान की शर्तें अमेरिका के लिए किसी भी हाल में मंजूर नहीं हैं और किसी भी युद्ध विराम के लिए ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह छोड़ना ही होगा।
एक तरफ ट्रंप सीजफायर से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने दुनिया के ताकतवर देशों से मदद भी मांगी है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरान ने अमेरिका और इजराइल के जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को बेरहमी से निशाना बनाया जा रहा है।
ट्रंप ने खासतौर पर चीन, जापान, साउथ कोरिया और ब्रिटेन का नाम लेकर कहा कि इन देशों को हॉर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने में सक्रिय रूप से भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि जापान ने साफ कह दिया है कि वहां युद्धपोत भेजने की शर्तें बहुत मुश्किल हैं। ट्रंप की यह अपील दिखाती है कि ईरान ने इस जंग में अमेरिका को कितने बैकफुट पर धकेल दिया है।
खार्ग द्वीप पर विनाशकारी हमले के बाद ईरान ने तेज किए जवाबी वार
Iran US War में स्थिति तब और भयावह हो गई जब अमेरिका ने ईरान के खार्ग और अबू मूसा द्वीपों पर जबरदस्त हमला किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने खार्ग द्वीप के बड़े हिस्से को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उनका बयान और भी भड़काऊ था जब उन्होंने कहा कि “मनोरंजन के लिए भी हम इसे कुछ और बार निशाना बना सकते हैं।”
ट्रंप की इस उकसाने वाली धमकी के बाद ईरान ने जवाबी हमले कई गुना बढ़ा दिए। ईरान ने यूएई, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन की बारिश कर दी। सऊदी अरब ने बताया कि उसने रियाद के आसपास और देश के पूर्वी क्षेत्रों में 10 ड्रोन को रोका है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गंभीर आरोप लगाया कि अमेरिका ने यूएई की जमीन का इस्तेमाल करके ईरान के द्वीपों पर हमला किया। यही कारण है कि ईरान ने खाड़ी देशों के खिलाफ अपना रुख और आक्रामक कर दिया है।
अमेरिकी नागरिकों को ओमान और इराक छोड़ने का मिला आदेश
Iran US War के बीच अमेरिका ने अपने सरकारी कर्मचारियों को ओमान तुरंत छोड़ने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी नागरिकों से इराक छोड़ने की भी अपील की गई है। दरअसल ईरान ने पहले ही खाड़ी देशों को कड़ी चेतावनी दी थी कि वे अपनी जमीन से अमेरिकी सैन्य अड्डों को फौरन हटाएं, वरना ये ठिकाने लगातार ईरान का निशाना बनते रहेंगे।
अमेरिका का यह कदम साफ बयान कर रहा है कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और खाड़ी क्षेत्र से अपने नागरिकों को निकालने पर मजबूर हो रहा है।
202 बच्चों और 223 महिलाओं की मौत: दुनिया में उठा गुस्सा
Iran US War का सबसे दर्दनाक और क्रूर पहलू आम नागरिकों पर पड़ रही मार है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने चौंकाने वाले आंकड़े जारी करते हुए बताया कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक कम से कम 202 बच्चे और 223 महिलाएं मारी जा चुकी हैं, जिनमें तीन गर्भवती माताएं भी शामिल हैं।
ये आंकड़े बता रहे हैं कि अमेरिका और इजराइल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और बड़ी बेरहमी के साथ आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। इन नागरिक मौतों ने पूरी दुनिया में गुस्से की लहर पैदा कर दी है।
IRGC ने दी नेतन्याहू को मारने की खुली धमकी
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को निशाना बनाने का खुलेआम ऐलान कर दिया है। IRGC ने कहा कि नेतन्याहू को मारकर आयतुल्लाह अली खामिनई का बदला लिया जाएगा।
जंग के दौरान नेतन्याहू कई दिनों से सार्वजनिक रूप से गायब थे, जिससे उनकी मौत की अफवाहें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन सभी खबरों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि नेतन्याहू पूरी तरह स्वस्थ हैं।
इसके जवाब में IRGC ने और तीखी चेतावनी दी: “अगर यह बच्चों का जान लेने वाला अपराधी जीवित है तो हम उसका पीछा करना जारी रखेंगे और पूरी ताकत से उसे मार गिराएंगे। जब तक वह जिंदा है, तब तक उसका पीछा किया जाएगा।” इसी बीच ईरान ने एक बार फिर इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर मिसाइलों की भारी बौछार कर दी। शहर में जगह-जगह धुएं के गुबार उठते नजर आए।
हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब ब्लॉक करने की दी धमकी: वैश्विक व्यापार खतरे में
Iran US War का असर अब समुद्री व्यापार पर भी गंभीर रूप से दिखने लगा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पहले से बंद होने के कारण पूरी दुनिया में बवाल मचा हुआ है और अब यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को भी ब्लॉक करने की खतरनाक धमकी दे दी है।
बाब अल-मंदेब, जिसका शाब्दिक अर्थ “आंसुओं का द्वार” है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह यमन को जिबूती और इरिट्रिया यानी अफ्रीका के हॉर्न से अलग करता है और लाल सागर को अदन की खाड़ी तथा हिंद महासागर से जोड़ता है। स्वेज नहर के जरिए एशिया और यूरोप के बीच होने वाले व्यापार का हर जहाज इसी महज 29 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है।
अगर यह रास्ता भी बंद हो जाता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल की आपूर्ति पर भयंकर संकट आ जाएगा। भारत सहित कई एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते से तेल आयात करते हैं, ऐसे में इस जंग का सीधा असर हर देश के आम नागरिक की जेब पर पड़ेगा।
ईरान बोला: 6 महीने तक लड़ेंगे, अमेरिका के आगे कभी नहीं झुकेंगे
ईरान ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि वो अमेरिका के आगे किसी भी कीमत पर नहीं झुकेगा। जरूरत पड़ी तो 6 महीने तक भी यह जंग लड़ी जाएगी। ईरान की तरफ से सीजफायर की कोई भी बात नहीं होगी।
Iran US War ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। जिस तरह हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, उसे देखते हुए अगर बड़े देश आगे आकर शांति के प्रयास नहीं करते तो यह जंग विनाशकारी रूप ले सकती है। अमेरिका और इजराइल ने यह जंग शुरू कर न सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्थिरता को दांव पर लगा दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर हमला किया, ट्रंप ने “मनोरंजन के लिए और हमले” की धमकी दी, ईरान ने UAE के तीन पोर्ट पर जवाबी हमले की चेतावनी दी
- ट्रंप ने सीजफायर से साफ इनकार किया, कहा ईरान पहले अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह छोड़े, चीन-जापान-ब्रिटेन से मांगी मदद
- IRGC ने नेतन्याहू को मारने का ऐलान किया, खामिनई का बदला लेने की कसम खाई, तेल अवीव पर फिर बरसाई मिसाइलें
- हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट ब्लॉक करने की धमकी दी, वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडराया








