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The News Air - Breaking News - Acute Tonsillitis और Weight Loss Walking: सेहत के 3 बड़े खुलासे एक साथ

Acute Tonsillitis और Weight Loss Walking: सेहत के 3 बड़े खुलासे एक साथ

गले की खराश हो सकती है Acute Tonsillitis, वजन घटाने के लिए कितना चलें और Everest Masala लैब टेस्ट में फेल: डॉक्टरों ने बताया सब कुछ

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
मंगलवार, 10 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, हेल्थ
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Acute Tonsillitis Symptoms Treatment Hindi
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Acute Tonsillitis Symptoms Treatment Hindi: मौसम बदल रहा है और बार-बार गला खराब होना, निगलने में दर्द और टॉन्सिल्स का सूजना आम बात लग सकती है। लेकिन अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे सिर्फ मौसम का तकाजा समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह Acute Tonsillitis हो सकता है, जो एक गंभीर इंफेक्शन है। सर गंगाराम हॉस्पिटल के ENT डिपार्टमेंट के एमेरिटस कंसल्टेंट एंड एडवाइजर डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि कब टॉन्सिल्स निकलवाना जरूरी है और कब दवाइयों से काम चल सकता है। इसके अलावा वजन घटाने के लिए रोज कितना चलना चाहिए और एवरेस्ट मसालों की लैब रिपोर्ट में क्या चौंकाने वाला मिला, यह सब जानिए इस रिपोर्ट में।


1: Acute Tonsillitis

क्या है Acute Tonsillitis: सिर्फ गला खराब होना नहीं है

Acute Tonsillitis Symptoms Treatment Hindi के बारे में डॉ. अजय स्वरूप ने विस्तार से बताया कि टॉन्सिल्स हमारे गले के अंदर दो लिम्फॉइड टिश्यू होते हैं। जब इन टॉन्सिल्स में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है, तो उस स्थिति को Acute Tonsillitis कहा जाता है। यह कोई मामूली गला खराब होना नहीं है, बल्कि एक गंभीर इंफेक्शन है जिसका सही समय पर इलाज जरूरी है।

Acute Tonsillitis होने के कई कारण हो सकते हैं। प्रदूषण (पॉल्यूशन) की वजह से, कुछ गलत खाने-पीने की वजह से या बहुत ज्यादा ठंडी चीजें लेने की वजह से इंफेक्शन होता है और Acute Tonsillitis की कंडीशन बन जाती है। यह समस्या मौसम बदलने पर और भी बढ़ जाती है, जब वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है।

Acute Tonsillitis के लक्षण: इन संकेतों को बिल्कुल इग्नोर न करें

Acute Tonsillitis Symptoms Treatment Hindi के तहत डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण काफी स्पष्ट होते हैं। सबसे पहला और प्रमुख लक्षण है गले में तेज दर्द। इसके साथ खाना चबाने में प्रॉब्लम होती है, निगलने में (सटकने में) परेशानी होती है। जैसे-जैसे इंफेक्शन बढ़ता है, तेज बुखार आता है, शरीर में कंपन होती है और खांसी शुरू हो जाती है।

अगर आपको बार-बार ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इसे सिर्फ मौसम की वजह से होने वाली सामान्य गले की खराश न समझें। यह Acute Tonsillitis हो सकता है और इसके लिए तुरंत ENT डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। देरी करने पर इंफेक्शन गहरा हो सकता है और स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इलाज कैसे होता है: कब दवाई और कब सर्जरी

Acute Tonsillitis Symptoms Treatment Hindi में सबसे अहम सवाल यही है कि इलाज कैसे होता है और क्या टॉन्सिल्स निकलवाने की जरूरत है? डॉ. अजय स्वरूप ने साफ किया कि Acute Tonsillitis को मैनेज करने के लिए सबसे पहले एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाता है। एंटीबायोटिक्स का कोर्स पांच से सात दिन का होता है। अगर खांसी है तो उसे कंट्रोल करने की दवाई दी जाती है और अगर एलर्जी के लक्षण हैं तो एलर्जी को भी कंट्रोल किया जाता है।

डॉ. स्वरूप ने एक बेहद जरूरी बात बताई कि Acute Tonsillitis के वक्त कोई सर्जरी एडवाइज नहीं की जाती। लेकिन अगर मरीज को बार-बार Acute Tonsillitis के एपिसोड हो रहे हैं, टॉन्सिल्स में बार-बार गहरा इंफेक्शन पड़ रहा है और ENT डॉक्टर यह समझता है कि अब टॉन्सिल्स की कंडीशन ऐसी हो गई है कि बार-बार गहरा इंफेक्शन होगा, तब जाकर टॉन्सिलेक्टमी (Tonsillectomy) यानी टॉन्सिल्स निकालने की सर्जरी एडवाइज की जाती है।

बचाव के उपाय: टॉन्सिल्स बचाए रखने के लिए क्या करें

Acute Tonsillitis Symptoms Treatment Hindi में बचाव भी उतना ही जरूरी है जितना इलाज। डॉ. अजय स्वरूप ने बताया कि Acute Tonsillitis से ठीक होने के बाद मरीज को हमेशा यह हिदायत दी जाती है कि खाने-पीने का पूरा ध्यान रखें। ज्यादा ठंडी, खट्टी और मसालेदार चीजें अवॉइड करें। रेगुलरली गरारे करें जिससे इंफेक्शन न हो और टॉन्सिल्स बचाए जा सकें।

डॉक्टर की सबसे अहम सलाह यह है कि अगर आपको आए दिन गले में दर्द रहता है, निगलने में तकलीफ होती है, तो इसे सिर्फ मौसम का तकाजा समझकर इग्नोर बिल्कुल न करें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि जितनी जल्दी Acute Tonsillitis का पता चलेगा, उतनी आसानी से इलाज हो सकता है और टॉन्सिल्स निकालने की नौबत नहीं आएगी।

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2: Weight Loss Walking

वजन घटाने के लिए कितना चलें: WHO की सलाह जान लीजिए

Weight Loss Walking Tips Hindi के बारे में सीके बिरला हॉस्पिटल गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. तुषार तायल ने बताया कि रोज 10,000 कदम चलो, पार्क में चक्कर लगाओ, ये सब सुनते तो सब हैं, लेकिन असल सवाल यह है कि वजन कम करने के लिए आखिर कितना चलना चाहिए?

डॉ. तुषार कहते हैं कि वेट लॉस के लिए एक एडल्ट को हर हफ्ते 150 से 300 मिनट मॉडरेट इंटेंसिटी वाली फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भी यही सलाह है। इसमें सबसे असरदार है ब्रिस्क वॉकिंग यानी तेज कदमों से चलना, जो नॉर्मल चलने की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभावी है।

ब्रिस्क वॉकिंग से कितनी कैलोरीज बर्न होती हैं

Weight Loss Walking Tips Hindi में डॉ. तुषार ने बताया कि फैट लॉस के लिए हफ्ते में पांच दिन रोज 45 से 60 मिनट तक तेज कदमों से चलना चाहिए। जब आप तेज चलते हैं तो शरीर एनर्जी खर्च करता है। रोज आधा घंटा तेज कदमों से चलने पर 120 से 200 कैलोरीज तक खर्च होती हैं। कुल कितनी कैलोरीज खर्च होंगी यह व्यक्ति के वजन और चलने की स्पीड पर निर्भर करता है।

जब आप हेल्दी खाना खाते हैं तो शरीर में कैलोरी डेफिसिट होता है, यानी जितनी कैलोरीज ले रहे हैं उससे ज्यादा खर्च होती हैं और इससे वजन घटने लगता है। तेज चलने से इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है, जिसका मतलब है कि शरीर ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है। चलने से विसरल फैट (अंगों के आसपास जमा होने वाला खतरनाक फैट) भी कम होता है। रोज तेज चलने से हॉर्मोंस बैलेंस में रहते हैं, स्ट्रेस कम होता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है।

सुबह चलें या शाम को: कब मिलता है ज्यादा फायदा

Weight Loss Walking Tips Hindi में डॉ. तुषार ने बताया कि ब्रिस्क वॉकिंग सुबह या शाम कभी भी कर सकते हैं, बस ऐसा समय चुनें जिसे लंबे वक्त तक जारी रख सकें। कुछ स्टडीज में देखा गया है कि सुबह तेज कदमों से चलने पर भूख कंट्रोल में आती है। वहीं शाम को ब्रिस्क वॉकिंग करने से स्ट्रेस कम होता है। खाना खाने के बाद तेज चाल से चलने से ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

अगर रोज ब्रिस्क वॉकिंग करते हैं तो दो से तीन हफ्तों में हल्के बदलाव दिखने लगते हैं और चार से छह हफ्तों में अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि तेज चलने के साथ हेल्दी डाइट लेना भी जरूरी है। खाने में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर होना चाहिए और बहुत ज्यादा तला-भुना खाने से परहेज करना चाहिए। ब्रिस्क वॉकिंग हमेशा जूते पहनकर करें। जिन्हें डायबिटीज, दिल की बीमारी या जोड़ों में दिक्कत है, वे पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।


3: Everest Masala Lab Report

Everest के चार मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल: लैब में क्या मिला

Everest Masala Lab Report Trustified के अनुसार एवरेस्ट मसाला के चार प्रोडक्ट्स क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं। YouTube चैनल Trustified ने 1 मार्च 2026 को एक वीडियो अपलोड करके बताया कि उसने एवरेस्ट के चार मसाले डीमार्ट से खरीदकर लैब टेस्टिंग के लिए भेजे थे। सभी के तीन-तीन बॉक्स खरीदे गए और एक-एक बॉक्स जांच के लिए भेजा गया। चारों मसाले FSSAI के मानकों पर खरे नहीं उतरे।

एवरेस्ट गरम मसाले में दो पेस्टिसाइड (एसिटामिप्रिड और एजोक्सीस्ट्रोबिन) FSSAI की सेफ लिमिट से ज्यादा मिले और एंटेरोबैक्टीरियासी बैक्टीरिया भी सेफ लिमिट से अधिक पाया गया। एवरेस्ट किचन किंग मसाले में तीन पेस्टिसाइड (थियामेथॉक्सम, कारबेंडाजिम और बेनोमिल) सेफ लिमिट से ज्यादा मिले और बैक्टीरिया भी अधिक था। एवरेस्ट कश्मीरी लाल में पेस्टिसाइड सेफ लिमिट में थे, लेकिन बैक्टीरिया ज्यादा मिला। सबसे खराब हालत एवरेस्ट मीट मसाले की रही, जिसमें चार पेस्टिसाइड (एथियन, टेबुकोनाजोल, एजोक्सीस्ट्रोबिन और फ्लूपाइरम) और बैक्टीरिया दोनों सेफ लिमिट से ज्यादा पाए गए।

डॉक्टर बोले: बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड से क्या नुकसान हो सकता है

Everest Masala Lab Report Trustified पर धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल दिल्ली के डॉ. नीरज गोयल ने बताया कि एंटेरोबैक्टीरियासी एक बड़ी बैक्टीरिया फैमिली है, जिसमें ई.कोलाई, सालमोनेला और क्लेबसिएला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया आते हैं। मसाले में इसका ज्यादा मिलना यह बताता है कि मसाले ठीक से सुखाए, साफ और हैंडल नहीं किए गए।

लंबे वक्त तक ज्यादा मात्रा में खाने से दस्त, पेट दर्द, उल्टी, फूड पॉइजनिंग और पेट का इंफेक्शन हो सकता है। खासकर बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग ज्यादा खतरे में हैं। पेस्टिसाइड्स ज्यादा होने का मतलब है कि खेती या प्रोसेसिंग में केमिकल्स कंट्रोल नहीं किए गए। लंबे समय तक ये पेस्टिसाइड्स शरीर में जाने से लिवर, आंतों और नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि मसाले कम मात्रा में खाए जाते हैं, इसलिए तुरंत बड़ा नुकसान होने का रिस्क कम है। डॉक्टर की सलाह है कि साबुत मसाला खरीदकर घर पर पीसें, ड्राई रोस्ट करके इस्तेमाल करें, सूखी ठंडी जगह रखें और खाना अच्छी तरह पकाएं।


तीनों खबरों का सार: आपकी सेहत आपके हाथ में

आज की तीनों सेहत खबरें एक ही बात कहती हैं कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। बार-बार गला खराब होने को नजरअंदाज करना Acute Tonsillitis जैसी गंभीर समस्या को बढ़ावा दे सकता है। वजन घटाने के लिए सिर्फ चलना काफी नहीं, बल्कि तेज कदमों से नियमित ब्रिस्क वॉकिंग और हेल्दी डाइट दोनों जरूरी हैं। और जिन मसालों पर हम आंख मूंदकर भरोसा करते हैं, उनकी क्वालिटी पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसलिए अपनी सेहत के प्रति सचेत रहें, डॉक्टर की सलाह लें और खाने-पीने में सावधानी बरतें।

मुख्य बातें (Key Points)
  • Acute Tonsillitis सिर्फ गला खराब होना नहीं है, बार-बार गले में दर्द, बुखार, निगलने में तकलीफ हो तो तुरंत ENT डॉक्टर को दिखाएं।
  • टॉन्सिल्स तभी निकालने की जरूरत है जब बार-बार गहरा इंफेक्शन हो, Acute Tonsillitis में दवाइयों से इलाज होता है, सर्जरी नहीं।
  • Weight Loss के लिए हफ्ते में 5 दिन रोज 45-60 मिनट ब्रिस्क वॉकिंग करें, 2-3 हफ्तों में बदलाव और 4-6 हफ्तों में अच्छे रिजल्ट मिलेंगे।
  • Everest के चारों मसाले (गरम मसाला, किचन किंग, कश्मीरी लाल, मीट मसाला) FSSAI मानकों पर फेल, बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड सेफ लिमिट से ज्यादा।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Acute Tonsillitis होने पर क्या टॉन्सिल्स निकलवाने चाहिए?

नहीं, Acute Tonsillitis के वक्त सर्जरी एडवाइज नहीं की जाती। 5-7 दिन एंटीबायोटिक्स का कोर्स दिया जाता है। लेकिन अगर बार-बार गहरा इंफेक्शन हो रहा है और ENT डॉक्टर समझता है कि टॉन्सिल्स की कंडीशन खराब हो चुकी है, तभी टॉन्सिलेक्टमी (सर्जरी) एडवाइज होती है।

Q2: वजन घटाने के लिए रोज कितने कदम चलना चाहिए?

कदमों की गिनती से ज्यादा जरूरी है कि आप हफ्ते में 5 दिन रोज 45-60 मिनट ब्रिस्क वॉकिंग (तेज कदमों से चलना) करें। WHO के अनुसार हफ्ते में 150-300 मिनट मॉडरेट फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।

Q3: Everest मसालों में क्या खतरनाक मिला है?

Trustified की लैब रिपोर्ट में चारों मसालों में एंटेरोबैक्टीरियासी बैक्टीरिया FSSAI सेफ लिमिट से ज्यादा मिला। मीट मसाले में सबसे ज्यादा 4 पेस्टिसाइड सेफ लिमिट से अधिक पाए गए। लंबे समय तक ऐसे मसाले खाने से लिवर, आंतों और नर्वस सिस्टम को नुकसान हो सकता है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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