India Oil Import Data: भारत के तेल आयात को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहले रूस से तेल खरीद और फिर वेनेजुएला से तेल की बात, और अब यह सवाल कि क्या अमेरिका भारत के तेल आयात के फैसले तय कर रहा है? विपक्ष ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ, स्कॉट बेसेंट के बयान और होमूज स्ट्रेट संकट की पूरी कहानी आंकड़ों के जरिए समझते हैं।
‘2022 से 2024 तक: 1.8% से 44.6% तक पहुंची रूसी तेल की हिस्सेदारी’
India Oil Import Data की पूरी कहानी समझने के लिए यूक्रेन युद्ध से शुरुआत करनी होगी। जनवरी 2022 में भारत अपनी जरूरत का सिर्फ 1.8% तेल रूस से खरीदता था। लेकिन जैसे ही रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ और पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, रूसी तेल भारी छूट पर उपलब्ध होने लगा।
इसका नतीजा यह रहा कि जुलाई 2024 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 44.6% हो गई। यह एक ऐतिहासिक उछाल था। यूक्रेन युद्ध के बाद से जनवरी 2026 तक भारत ने लगभग 144 बिलियन यूरो का कच्चा तेल रूस से आयात किया।
‘August 2025 में Trump का टैरिफ बम: 25% फिर 50%’
India Oil Import Data में अगला बड़ा मोड़ अगस्त 2025 में आया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया और फिर इसे बढ़ाकर 50% कर दिया। ट्रंप का तर्क था कि भारत रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से रूस की फंडिंग कर रहा है और इससे यूक्रेन के खिलाफ रूस को ताकत मिल रही है।
यूरोप ने भी यही आरोप लगाया। लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी ऊर्जा आपूर्ति किसी विदेशी दबाव में नहीं बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से तय करेगा। हालांकि जनवरी 2026 में ट्रंप ने एक फैसला लिया और 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया।
‘आंकड़ों की गिरावट: November 2025 से January 2026 तक’
India Oil Import Data में दिसंबर 2025 के बाद से स्पष्ट गिरावट दिखती है। नवंबर 2025 में रूसी तेल की हिस्सेदारी 35.1% थी और उस महीने भारत ने 7.7 मिलियन टन तेल आयात किया। दिसंबर 2025 में यह हिस्सेदारी 24.9% पर आ गई।
जनवरी 2026 में 11.6 से 12.15 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा गया और हिस्सेदारी 20.6% तक आ गई। यानी जुलाई 2024 के 44.6% के शिखर से यह आधे से भी कम हो गई। Kepler AIS Projection Data के अनुसार मार्च 2026 में अब तक 10 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल भारत में उतर चुका है और 23 मिलियन बैरल अगले कुछ दिनों में पोर्ट पर उतरने की उम्मीद है।
‘Scott Bessent का विवादास्पद बयान: “भारतीयों ने बहुत अच्छा काम किया”‘
India Oil Import Data विवाद में 6 मार्च को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि “भारतीयों ने बहुत अच्छा काम किया है। हमने उनसे वेनेजुएला का रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए कहा था और उन्होंने ऐसा किया। इसकी जगह वे अमेरिकी तेल लेने वाले थे।”
यह बयान भारत में राजनीतिक तूफान लाया। विपक्ष ने पूछा कि यह अमेरिका का वित्त मंत्री है या भारत की ऊर्जा नीति का प्रमुख? सवाल उठा कि भारत किससे, कितना तेल खरीदेगा, यह अमेरिका कैसे तय करने लगा?
‘Hormuz Strait संकट: इसीलिए मिली 30 दिन की छूट’
India Oil Import Data के इस खेल में होमूज स्ट्रेट एक बड़ी वजह बनकर उभरा। दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी जलसंधि से गुजरता है। भारत के कुल तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत इसी मार्ग से आता है।
ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच ईरान ने होमूज स्ट्रेट बंद करने की धमकी दी और इससे तेल आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने भारतीय तेल कंपनियों को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी। जो अमेरिका रूसी तेल खरीद बंद करवाने का दबाव बना रहा था, उसी ने ऊर्जा संकट के चलते अस्थायी छूट दे दी।
‘Saudi और UAE को फायदा: रूस की जगह खाड़ी देश’
India Oil Import Data में रूस की घटती हिस्सेदारी के साथ-साथ खाड़ी देशों की बढ़ती भूमिका भी साफ दिखती है। जनवरी 2025 में UAE से भारत अपनी जरूरत का 7.3% तेल खरीदता था। जनवरी 2026 में यह बढ़कर 9.3% हो गया। सऊदी अरब से भी खरीद बढ़ी। भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल के ऑर्डर कम किए और उसकी जगह खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ाई।
‘Jaishankar का संसद में बयान: “ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि”‘
India Oil Import Data विवाद के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष बढ़ने की वजह से तेल और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती रहें और आम लोगों पर ज्यादा असर न पड़े।
जयशंकर ने साफ कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और राष्ट्रीय हित सबसे महत्वपूर्ण हैं।
‘बैलेंसिंग फॉरेन पॉलिसी: रूस, अमेरिका, ईरान और इजराइल सबको साधना’
India Oil Import Data की पूरी कहानी असल में भारत की बैलेंसिंग फॉरेन पॉलिसी की कहानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत एक साथ कई मोर्चों को संभाल रहा है। इजराइल के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। ईरान के साथ ऐतिहासिक सहयोग है। रूस पुराना रणनीतिक साझेदार है और अमेरिका के साथ एक बड़ी ट्रेड डील की बातचीत जारी है।
इन सब हितों को एक साथ साधते हुए भारत ने रूसी तेल आयात धीरे-धीरे कम किया, न एकदम बंद किया और न ही पूरी तरह जारी रखा। भारत सरकार की तरफ से हमेशा यही कहा गया है कि भारत हमेशा अपने हितों को ध्यान में रखकर ही फैसले लेगा।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- India Oil Import Data: रूसी तेल की हिस्सेदारी January 2022 के 1.8% से July 2024 में 44.6% तक पहुंची और January 2026 में 20.6% पर आ गई; Ukraine युद्ध से January 2026 तक लगभग 144 billion euro का रूसी तेल आयात।
- August 2025 में Trump ने 25% फिर 50% टैरिफ लगाया; January 2026 में 18% किया; US Treasury Secretary Scott Bessent का बयान: “भारतीयों ने बहुत अच्छा काम किया।”
- Hormuz Strait से दुनिया का 20% और भारत का 50% तेल आता है; ईरान संकट से बाधित आपूर्ति के चलते Trump ने 30 दिन की रूसी तेल खरीद छूट दी।
- UAE की हिस्सेदारी 7.3% से 9.3% बढ़ी; Jaishankar ने संसद में कहा: ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि; भारत बैलेंसिंग फॉरेन पॉलिसी पर चल रहा है।








