PM Awas Yojana Geo Tagging : प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवेदन करते समय अगर खाली प्लॉट की जियो टैगिंग या लोकेशन गलत दर्ज हो गई है, तो आपको इस योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है। और अगर किसी ने फर्जीवाड़ा करके किसी दूसरे के प्लॉट की जियो टैगिंग अपने आवेदन में अपलोड की है, तो ऐसे लोगों को सूची से सीधे बाहर कर दिया जा रहा है। सत्यापन अभियान के दौरान अब तक 92 से अधिक अपात्र लोग सूची से बाहर हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में हुए सर्वे में जिले भर में करीब 3200 लोगों ने आवास निर्माण के लिए आवेदन किए थे। लेकिन जब विकास खंड स्तर पर गठित सत्यापन टीमें गांव-गांव पहुंचीं और कड़ाई से जांच की, तो तस्वीर बिल्कुल अलग निकली। फर्जी जियो टैगिंग से लेकर पात्रता शर्तें पूरी न करने तक, कई चौंकाने वाले मामले सामने आए।
‘गांव-गांव पहुंची सत्यापन टीम, खुली पोल’
सरकार ने इस बार पीएम आवास योजना ग्रामीण के सत्यापन को पूरी तरह जमीनी स्तर पर उतारा। विकास खंड स्तर पर विशेष टीमें गठित की गईं, जो घर-घर और गांव-गांव जाकर आवेदकों की पात्रता की जांच करती रहीं। जो लोग योजना की पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते थे, उनके नाम बिना किसी रियायत के सूची से हटा दिए गए। सत्यापन का यह कड़ा अभियान यह साबित करता है कि अब सरकारी योजनाओं में हेराफेरी की गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है।
‘सरसपुर में फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला’
सत्यापन के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला सरसपुर से सामने आया। यहां एक आवेदक ने पीएम आवास योजना का लाभ लेने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के खाली प्लॉट की जियो टैगिंग करके पोर्टल पर दर्ज कर दी। खुद को पात्र दिखाने के लिए उसने पोर्टल पर सभी जरूरी जानकारियां भी भर दीं। लेकिन जब सत्यापन टीम के सदस्य मौके पर पहुंचे, तो पोर्टल पर दर्ज जमीन किसी और के नाम पर निकली। गहराई से जांच होने पर वह आवेदक पात्रता की श्रेणी से ही बाहर हो गया और उसका नाम सूची से हटा दिया गया।
‘3200 में से 92 से ज्यादा निकले अपात्र’
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के सर्वे में जिले में करीब 3200 लोगों ने आवेदन किए थे। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें से 92 से अधिक आवेदक अपात्र पाए गए और उनके नाम सूची से बाहर कर दिए गए। विभाग का कहना है कि वास्तविक आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि जांच की प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यह आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि योजना में फर्जीवाड़ा कितने बड़े पैमाने पर हो रहा था।
‘Geo Tagging में गलती पड़ेगी भारी, जानें क्यों’
पीएम आवास योजना के तहत आवेदन करते समय जियो टैगिंग सबसे अहम चरण है। आवेदक को अपने खाली प्लॉट की सही लोकेशन पोर्टल पर दर्ज करनी होती है। अगर यह लोकेशन गलत दर्ज हो गई, चाहे गलती से हो या जानबूझकर, तो आवेदक को योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है। सत्यापन टीम मौके पर जाकर पोर्टल की जियो टैगिंग और वास्तविक जमीन का मिलान करती है और जरा भी अंतर मिलने पर आवेदन रद्द हो जाता है।
‘किस्त जारी होने से पहले होगी पूरी जांच’
अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पीएम आवास योजना की किस्त तभी जारी की जाएगी, जब पूरी जांच और सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। योजना को पूरी तरह पारदर्शी और फर्जीवाड़ामुक्त बनाने के लिए सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है। इसका मतलब यह है कि जो लोग वास्तव में पात्र हैं और उनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें ही किस्त का लाभ मिलेगा।
‘आम लाभार्थी पर क्या पड़ेगा असर?’
जो लोग वास्तव में गरीब हैं और जिन्हें सच में पक्के घर की जरूरत है, उनके लिए यह सत्यापन अभियान एक राहत की खबर है। क्योंकि फर्जी आवेदकों के बाहर होने से असली जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। लेकिन जिन पात्र लाभार्थियों की जियो टैगिंग में तकनीकी कारणों से कोई गड़बड़ी हो गई है, उन्हें जल्द से जल्द संबंधित विभाग से संपर्क करके सुधार कराना चाहिए।
‘क्या है पीएम आवास योजना ग्रामीण?’
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण केंद्र सरकार की एक प्रमुख आवासीय योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बेघर और कच्चे घरों में रहने वाले लोगों को पक्के मकान उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए सरकारी सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में किस्तों में दी जाती है। योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जियो टैगिंग, आधार लिंकिंग और डिजिटल सत्यापन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- PM Awas Yojana में जियो टैगिंग गलत होने पर या दूसरे के प्लॉट की जियो टैगिंग करने पर आवेदन सूची से बाहर कर दिया जाएगा।
- वित्त वर्ष 2025-26 में 3200 आवेदनों की जांच में 92 से अधिक आवेदक अपात्र पाए गए, यह संख्या और बढ़ सकती है।
- सरसपुर में एक आवेदक ने दूसरे के प्लॉट की जियो टैगिंग कर फर्जी आवेदन किया, सत्यापन में पकड़ा गया।
- सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरी जांच के बाद ही किस्त जारी होगी, असली जरूरतमंदों को ही लाभ मिलेगा।








