Mojtaba Khamenei Iran New Supreme Leader : तेहरान के आसमान पर अभी भी गुबार छाया हुआ है। अयातुल्लाह अली खामनेई की अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में मौत के बाद ईरान की सत्ता का पूरा समीकरण बदल चुका है। राजधानी तेहरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित है, कैबिनेट ने पूरे देश में झंडे झुका दिए हैं। लेकिन शोक की इस आड़ में ईरान की राजनीति का सबसे बड़ा दाँव खेला जा रहा है — और इस दाँव के केंद्र में हैं 56 साल के मोजतबा खामनेई।
‘ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का ऐतिहासिक फ़ैसला’
लंदन से प्रसारित चैनल ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि ईरान की 28 सदस्यीय संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खामनेई के नाम पर मुहर लगा दी है। यह फैसला दो वर्चुअल बैठकों में किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का जबरदस्त दबाव था।
यह सवाल अभी भी हवा में है कि क्या यह सत्ता का सहज और शांत हस्तांतरण था — या फिर ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था ने संकट की आड़ में अपनी पसंद का चेहरा गद्दी पर बैठा दिया?
‘कौन हैं मोजतबा खामनेई: साधारण मौलवी या असाधारण पावर ब्रोकर?’
56 साल के मोजतबा, ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने कभी कोई बड़ा धार्मिक पद हासिल नहीं किया, न ही सरकार में कोई आधिकारिक ओहदा संभाला। बाहर से देखने पर वह एक सामान्य मौलवी लगते हैं। लेकिन जानकार कहते हैं कि पर्दे के पीछे उनकी पकड़ बेहद मजबूत और गहरी है।
ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने सशस्त्र बलों में सेवा दी थी। पिछले कई वर्षों में उन्होंने IRGC के शीर्ष अधिकारियों से करीबी रिश्ते बनाए। यही वजह है कि उन्हें ईरान में धार्मिक और सैन्य शक्तियों के बीच एक ‘पावर ब्रिज’ माना जाता है — एक ऐसा चेहरा जो दोनों खेमों को एक साथ साध सकता है।
‘लंदन से दुबई तक: अरबों का साम्राज्य’
अब उस पहलू पर आते हैं जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। Bloomberg की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक मोजतबा खामनेई, यूरोप और मिडिल ईस्ट में फैले एक विशाल रियल एस्टेट नेटवर्क से जुड़े हैं।
दावा है कि लंदन के पौश इलाके बिशप्स एवेन्यू में उनकी 138 मिलियन डॉलर से अधिक की प्रॉपर्टी है। इसके अलावा दुबई में आलीशान विला, फ्रैंकफर्ट और मेजरका में होटल और स्विस बैंक अकाउंट की भी चर्चा जोरों पर है। इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि एक मध्यम स्तर का धर्मगुरु, जिसने कभी कोई सरकारी पद तक नहीं संभाला, इतनी बड़ी संपत्ति का मालिक कैसे बन सकता है?
यही विरोधाभास मोजतबा खामनेई को एक रहस्यमयी लेकिन बेहद शक्तिशाली शख्सियत बनाता है।
‘परिवार, विवाह और अमेरिकी प्रतिबंध’
मोजतबा की शादी ज़हरा हद्दाद अदेल से हुई है, जो ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष गुलाम अली हद्दाद अदेल की बेटी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के उस हमले में उनकी पत्नी और परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मारे गए — जिसमें स्वयं अली खामनेई की जान गई।
साल 2019 में अमेरिका ने मोजतबा खामनेई पर आधिकारिक प्रतिबंध लगाए थे। उन्हें सत्ता के गलियारों में एक प्रभावशाली लेकिन रहस्यमयी चेहरे के रूप में जाना जाता रहा है।
‘वंशवाद का विरोध करने वाला ईरान अब परिवारवाद की राह पर?’
यह ईरान की इस्लामी क्रांति का वह आदर्श था जो हमेशा वंशवाद के खिलाफ रहा। 1989 में जब अली खामनेई को सुप्रीम लीडर चुना गया था, तब भी वह एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला था। लेकिन अब अगर बेटे को गद्दी मिल रही है, तो यह ईरान के राजनीतिक इतिहास में एक नया, बेहद संवेदनशील मोड़ है।
क्या यह कदम क्रांति के उन बुनियादी सिद्धांतों को तोड़ता है, जिन पर 1979 में इस्लामी गणराज्य की नींव रखी गई थी? यह सवाल ईरान के भीतर भी गूंज रहा है।
‘चार मोर्चों पर घिरा ईरान: नए लीडर की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा’
इस वक्त ईरान एक साथ चार बड़े संकटों से जूझ रहा है। पहला: बाहरी सैन्य हमले का खतरा। दूसरा: अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध जो देश की अर्थव्यवस्था को निचोड़ रहे हैं। तीसरा: देश के अंदर बढ़ता जन-असंतोष। और चौथा: सत्ता का यह अनिश्चित और दबाव में हुआ संक्रमण।
ऐसे में अगर मोजतबा खामनेई सुप्रीम लीडर बनते हैं, तो उनकी सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या वह अपने पिता जैसी वैधता और जनसमर्थन जुटा पाएंगे? या फिर IRGC की कठपुतली बन कर रह जाएंगे और ईरान की सत्ता में दरारें और गहरी हो जाएंगी?
‘तेहरान की गद्दी, मिडिल ईस्ट की दिशा’
ईरान में जो भी फैसला होगा, उसका असर सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रहेगा। मिडिल ईस्ट की पूरी भू-राजनीति, इजराइल से रिश्ते, अमेरिका के साथ तनाव और परमाणु कार्यक्रम — सब कुछ इस नई सत्ता के रुख पर निर्भर करेगा।
तेहरान की गद्दी पर बैठने वाला शख्स अब केवल ईरान का नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की सियासत का नया आर्किटेक्ट होगा। सवाल यह है कि मोजतबा खामनेई वह ताकत और वैधता कहाँ से लाएंगे?
‘जानें पूरा मामला’
अयातुल्लाह अली खामनेई, जो 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे, की मौत के बाद ईरान में सत्ता का संकट पैदा हो गया। ईरान के संविधान के अनुसार, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स को नए सुप्रीम लीडर को जल्द से जल्द चुनने का संवैधानिक अधिकार है। मोजतबा का नाम इस दौड़ में सबसे आगे है और IRGC का समर्थन उनके पक्ष में एक बड़ा कारक माना जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत के बाद ईरान में सत्ता-संक्रमण शुरू: 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित।
- लंदन से प्रसारित ईरान इंटरनेशनल के अनुसार असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स ने IRGC दबाव में मोजतबा खामनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना।
- Bloomberg रिपोर्ट के अनुसार मोजतबा की लंदन, दुबई, फ्रैंकफर्ट और मेजरका में $138 मिलियन से अधिक की संपत्ति होने के दावे।
- 2019 में अमेरिका ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगाए थे; ईरान की क्रांति के वंशवाद-विरोधी आदर्शों पर अब बड़ा सवालिया निशान।







