Alireza Arafi Death: ईरान और इज़राइल के बीच जारी खूनी जंग के बीच एक और चौंकाने वाली खबर आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्लिन ने दावा किया है कि ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर अलीरेजा अराफी को मार गिराया गया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद महज कुछ ही दिन पहले उन्हें ईरान की लीडरशिप काउंसिल में नियुक्त किया गया था।
ईरान अभी तक खामेनेई की मौत के सदमे से उबरा भी नहीं था कि एक नई खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया। माइक फ्लिन का यह दावा अगर सच साबित होता है, तो इसका मतलब यह होगा कि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था एक के बाद एक बड़े झटके झेल रही है: और दुश्मन उसे लगातार कमजोर करने की कोशिश में लगा है।
हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि इस दावे की कोई स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
‘कौन थे अलीरेजा अराफी’
1959 में जन्मे अलीरेजा अराफी ईरान के यज़्द शहर के मशहूर धर्मगुरु थे। उन्हें अयातुल्लाह की सर्वोच्च उपाधि से नवाज़ा गया था, जो शिया इस्लाम में धार्मिक विद्वता की सबसे ऊंची पहचान मानी जाती है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी वे बेहद सम्मानित नाम थे। अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति के रूप में उन्होंने इस्लामी शिक्षा को दुनिया भर में फैलाने में अहम भूमिका निभाई। मेबोद शहर में जुमे की नमाज के इमाम रहे और 2013 से क़ुम शहर में नमाज़ पढ़ा रहे थे।
‘राजनीतिक सफर जो ऊंचाइयों तक पहुंचा’
अराफी ने 2015 में तेहरान से असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का चुनाव लड़ा। 2019 में गार्डियन काउंसिल के सदस्य बने और 2021 में दोबारा असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य चुने गए। धर्म और राजनीति दोनों मोर्चों पर वे ईरानी व्यवस्था के एक मजबूत स्तंभ थे।
खामेनेई की मौत के बाद जब किसी अनुभवी और विश्वसनीय धर्मगुरु की जरूरत थी, तो अराफी का नाम सबसे आगे आया और उन्हें लीडरशिप काउंसिल में नियुक्त किया गया।
‘ईरान की नेतृत्व संरचना पर सीधा प्रहार’
अगर माइक फ्लिन का दावा सही है, तो यह ईरान की शासन व्यवस्था के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा। पहले खामेनेई की मौत, और अब उनके उत्तराधिकारी की हत्या का दावा: यह संदेश साफ है कि दुश्मन ईरान की नेतृत्व श्रृंखला को एक-एक कर तोड़ने की कोशिश कर रहा है।
इस एक खबर ने ईरान के भविष्य को लेकर दुनिया भर में सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘लारीजानी का दो टूक: अमेरिका से कोई बात नहीं’
इसी बीच ईरान के सुरक्षा प्रमुख और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव अली लारीजानी ने अमेरिका के किसी भी कूटनीतिक प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया है। उनका बयान था: “हम अमेरिका से बातचीत नहीं करेंगे।”
लारीजानी, जो खुद खामेनेई के करीबी सलाहकार रह चुके हैं, का यह बयान बताता है कि ईरान इस वक्त शांति की मेज पर आने के मूड में बिल्कुल नहीं है। बदले की आग और प्रतिरोध का जज्बा अभी भी ईरानी नेतृत्व पर हावी है।
‘अस्पतालों पर हमले: मानवता को शर्मसार करने वाले दृश्य’
अमेरिका और इजराइल के हमलों के दूसरे दिन ईरानी मीडिया ने खुलासा किया कि तेहरान के गांधी अस्पताल, क़दम अल-अनबिया अस्पताल और ईरानी रेड क्रिसेंट पीस बिल्डिंग को निशाना बनाया गया।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इनके अलावा मोताहारी अस्पताल (तेहरान), अबुज़र अस्पताल (एवाज़) और सरब, शाहबाहार तथा हमदान में तीन आपातकालीन केंद्र भी इन हमलों में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जहां मरीजों को राहत मिलनी चाहिए थी, वहां बम गिरे: यह तस्वीर किसी को भी झकझोर देने वाली है।
‘हिजबुल्लाह मैदान में: इजराइल पर मिसाइलें और ड्रोन’
खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम के साथ हिजबुल्लाह ने लेबनान से इजराइल की तरफ ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। हिजबुल्लाह एक शिया मुस्लिम राजनैतिक और सैन्य संगठन है जिसे ईरान का पूरा समर्थन और संरक्षण मिला हुआ है।
इससे पहले इजराइली हमले में हिजबुल्लाह नेता मोहम्मद रात की मौत की खबर भी सामने आई थी। अब हिजबुल्लाह का सीधे मैदान में उतरना इस जंग को और ज्यादा विस्फोटक बना देता है।
‘लेबनान में तबाही: 50 शहरों को खाली करने का फरमान’
इजराइल ने लेबनान के 50 से अधिक शहरों और गांवों के निवासियों को तत्काल अपने घर खाली करने की चेतावनी दी है। लेबनान पर हो रहे इजराइली हमलों में अब तक 31 लोगों की जान जा चुकी है और 149 लोग घायल हैं।
लाखों आम नागरिक अपनी जड़ों से उखड़ने पर मजबूर हैं। जो घर उन्होंने जिंदगी भर बनाए, वहां से पलों में भागना पड़ रहा है।
‘मध्य-पूर्व से परे: अमेरिकी दूतावासों पर ईरानी मिसाइलें’
यह जंग अब सिर्फ ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रही। बहरीन की राजधानी मनामा और जॉर्डन में अमेरिकी दूतावासों पर ईरानी मिसाइल हमले की खबरें आई हैं। इसके अलावा कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास और अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर पर भी कई मिसाइलें दागी गई हैं।
लेबनानी न्याय मंत्री ने भी इजराइल पर रॉकेट दागने वालों की गिरफ्तारी का आदेश जारी किया है।
‘जब सुप्रीम लीडर की कुर्सी पर खून के दाग’
ईरान की यह जंग अब सिर्फ जमीन और आसमान की नहीं रही: यह नेतृत्व का संकट बन चुकी है। पहले खामेनेई, फिर उनके उत्तराधिकारी: अगर यह दावे सच हैं तो इसका मतलब है कि ईरान की सबसे शक्तिशाली कुर्सी अब निशाने पर है। दुनिया देख रही है कि एक देश की पूरी राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था युद्ध की आग में किस तरह झुलस रही है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
ईरान और इजराइल के बीच यह संघर्ष अचानक नहीं भड़का। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में अयातुल्लाह अली खामेनेई शनिवार को मारे गए थे। इसके बाद अलीरेजा अराफी को ईरान की लीडरशिप काउंसिल में अंतरिम सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया गया। लेकिन अब उनकी भी मौत का दावा सामने आने से यह जंग एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गई है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- अमेरिका के पूर्व NSA माइक फ्लिन ने दावा किया कि ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर अलीरेजा अराफी को मार गिराया गया है।
- अराफी को खामेनेई की मौत के बाद ईरान की लीडरशिप काउंसिल में नियुक्त किया गया था।
- ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने साफ कहा: अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी।
- लेबनान में 31 मौतें, 149 घायल; हिजबुल्लाह ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन दागे।
- बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों पर ईरानी मिसाइल हमले।








