Asaduddin Owaisi on Ali Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी को हुई मौत पर AIMIM चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने खामेनेई की हत्या को “immoral और unlawful” करार देते हुए अमेरिका और इजराइल पर जमकर निशाना साधा है। इसके साथ ही कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस “targeted assassination” की कड़ी निंदा की है और कहा है कि दुनिया को शांति चाहिए, युद्ध नहीं।
ओवैसी का सोशल मीडिया पोस्ट: शायरी के साथ श्रद्धांजलि
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर एक विस्तृत पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में उन्होंने न केवल अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा की बल्कि एक शायरी के माध्यम से खामेनेई को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। ओवैसी ने लिखा कि ईरान पर ट्रंप और इजराइल के हमले पूरी तरह से निंदनीय हैं। यह तब हुआ जब जिनेवा में ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी। पूरे ईरान में 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें 108 लड़कियां तब मारी गईं जब एक स्कूल पर हमला हुआ।
ओवैसी ने अपने पोस्ट में एक उर्दू शायरी भी लिखी। “मौत की लेकिन दिल-दाना को कुछ परवाह नहीं, शव की खामोशी में जुंबिश-ए-हंगामा-ए-फर्दा नहीं। मौत को समझे हैं गाफिल इख्तियार-ए-जिंदगी, ये शाम-ए-जिंदगी, सुबह-ए-दवा में जिंदगी।” इस शायरी के माध्यम से ओवैसी ने खामेनेई के संघर्ष और उनकी विरासत को याद किया।
ओवैसी का बयान: अनैतिक और गैरकानूनी हत्या
ओवैसी ने अपने विस्तृत बयान में कहा कि अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या एक गलत और गैरकानूनी काम है। उन्होंने कहा कि यह हमला रमजान के पवित्र महीने में हुआ, जब लोग रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं। ऐसे मुबारक महीने में इस तरह का हमला इंसानियत को नहीं मानने वालों का काम है। ओवैसी ने कहा कि जब जिनेवा में बातचीत के जरिए एक breakthrough हुआ था और हो सकता था कि अगर वह बातचीत को मान लेते तो ईरान के पास जितने न्यूक्लियर स्टॉकपाइल्स थे, वो शायद इस्तेमाल नहीं होते।
ओवैसी ने बताया कि इस हमले में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और एक लड़कियों के स्कूल में 108 बच्चियों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि मैं इसको immoral और unlawful act मानता हूं और मेरी तरफ से, हमारी पार्टी की तरफ से न सिर्फ शिया वर्ल्ड को बल्कि पूरे लोगों को जो उनको अपना रहबर मानते थे, गहरी संवेदनाएं हैं।
भारत सरकार से मांग: युद्ध रोकने में भूमिका निभाए
ओवैसी ने भारत सरकार से मांग की कि वह इस युद्ध को रोकने में अपनी भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि मौजूदा BJP की सरकार अयातुल्लाह खामेनेई की मौत को condemn करेगी और इस जंग को रुकवाने की पूरी कोशिश करेगी। ओवैसी ने याद दिलाया कि 10 मिलियन के करीब भारत के नागरिक Gulf countries में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि अभी सूचना आई है कि ओमान के पोर्ट पर हमारे एक भारतीय वर्कर घायल भी हुए हैं।
ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर यह जंग नहीं रुकेगी तो यह बहुत आगे बढ़ेगी। पूरे इलाके में turmoil होगा। उन्होंने कहा कि कई भारतीय लोग जो उमरा करने के लिए गए हैं, वे ट्रैवल एजेंट के जरिए जाते हैं और पैसे देकर दो-तीन दिन मक्के या मदीने में रुकते हैं। अब उनके पास पैसे नहीं हैं और वहां फ्लाइट ही नहीं उड़ रही है। यह स्थिति बहुत गंभीर है।
इजराइल और पाकिस्तान पर निशाना
दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी ने अपने पोस्ट में इजराइल के साथ-साथ पाकिस्तान को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि ईरान पर इजराइल का हमला और अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हमला हमें दिखाता है कि इजराइल और पाकिस्तान अपने-अपने पड़ोस में हमला करने वाली और शरारत करने वाली ताकतें हैं। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओवैसी ने इजराइल की आलोचना करते हुए पाकिस्तान को भी उसी श्रेणी में रखा।
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया: घिनौनी हत्या
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी खामेनेई की मौत पर गंभीर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक दुनिया के तथाकथित नेताओं द्वारा एक sovereign देश के leadership की targeted हत्या और बहुत सारे बेगुनाह लोगों की हत्या घिनौनी है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए, चाहे इसका कारण कुछ भी बताया गया हो।
प्रियंका गांधी ने कहा कि यह दुख की बात है कि अब कई देश लड़ाई में घसीटे जा रहे हैं। दुनिया को शांति चाहिए, फालतू की लड़ाइयों की नहीं। उन्होंने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा कि जो लोग इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।”
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इजराइल के प्रधानमंत्री और प्रेसिडेंट ट्रंप के सामने झुकने के बाद हमारे प्रधानमंत्री प्रभावित देशों में सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित घर वापस लाने की पूरी कोशिश करेंगे।
अन्य भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया
प्रियंका गांधी के अलावा कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी और कुंवर दानिश अली (जो पहले BSP में थे, अब कांग्रेस में हैं) ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा। दानिश अली ने लिखा, “अलविदा अयातुल्लाह, आपने दुनिया को बता दिया कि अपने हक की लड़ाई सियासत नहीं, इबादत है। आप एक मिसाल हैं जिसने दिखाया कि जिल्लत के महलों से बेहतर स्वाभिमान की जिंदगी है। आपकी शहादत में भारत ने अपना सच्चा दोस्त खो दिया है।”
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और PDP की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने भी अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर शोक जाहिर किया है।
भारत में शिया समुदाय की प्रतिक्रिया
खामेनेई की मौत की खबर के बाद भारत के कई शहरों में शिया समुदाय ने प्रदर्शन किए। श्रीनगर से लेकर लखनऊ तक प्रदर्शन का दौर जारी रहा। शिया मुसलमान सड़कों पर उतर आए और खामेनेई को अपना रहबर (spiritual leader) मानने वाले लोगों ने शोक जताया। कई जगहों पर काले झंडे लगाए गए और शोक सभाएं आयोजित की गईं।
खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा चिंता
ओवैसी ने जो मुद्दा उठाया, वह बेहद महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों में लगभग 10 मिलियन (1 करोड़) भारतीय काम करते हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध बढ़ने से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले भारतीयों पर पड़ेगा। कई भारतीय उमरा और हज के लिए भी इस क्षेत्र में जाते हैं। वर्तमान स्थिति में उनकी सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय है।
राजनीतिक विश्लेषण: विपक्ष का रुख
यह दिलचस्प है कि AIMIM और कांग्रेस दोनों ने खामेनेई की मौत पर समान रुख अपनाया है। दोनों ने इसे “unlawful” और “immoral” करार दिया है और अमेरिका-इजराइल की आलोचना की है। यह रुख भारत सरकार की foreign policy से अलग है, क्योंकि भारत ने अमेरिका और इजराइल के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक खामेनेई की मौत पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
खामेनेई की मौत पर दुनिया भर से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। पश्चिमी देशों ने इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद समर्थन को रोकने के लिए जरूरी बताया है, जबकि रूस और चीन ने इस हमले की निंदा की है। मुस्लिम देशों में भी विभाजित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। शिया बहुल देशों ने इसकी निंदा की है, जबकि सुन्नी बहुल देशों ने मौन साधा है या सीमित प्रतिक्रिया दी है।
भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती
खामेनेई की मौत और उस पर भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती पेश करती है। एक तरफ भारत के अमेरिका और इजराइल के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ भी ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना और ऊर्जा सुरक्षा के मामले में ईरान भारत के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, खाड़ी देशों में काम करने वाले करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है। भारत सरकार को इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होगा।








