Jammu Kashmir Ranji Trophy: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 28 फरवरी 2026 की तारीख हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई। जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने अपने 70 साल के इंतजार को खत्म करते हुए पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) अपने नाम कर ली। शनिवार को हुब्बल्ली में खेले गए फाइनल मुकाबले में कर्नाटक को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर टीम ने इतिहास रच दिया। दोपहर 2.11 बजे जब दोनों कप्तानों ने हाथ मिलाया, यह आधिकारिक हो गया कि जम्मू-कश्मीर 91वीं रणजी ट्रॉफी के चैंपियन हैं।
यह केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक ऐसी जीत है जो विश्वास, संघर्ष और उम्मीद की नई इबारत लिखती है। एक ऐसे राज्य के लिए जो दशकों से भारतीय परिदृश्य में भारी चुनौतियों से जूझ रहा है, यह खिताब गौरव का पल है।
कर्नाटक ने कैसे हार मानी?
मैच के पांचवें और आखिरी दिन की शुरुआत तक यह साफ हो गया था कि जम्मू-कश्मीर की जीत लगभग तय है। पहली पारी में 291 रन की विशाल बढ़त हासिल करने के बाद जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी भी बिना विकेट गिराए शुरू की थी। शनिवार सुबह से ही कुमार इकबाल और साहिल लोत्रा ने कर्नाटक के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। धीमी पिच पर जहां तेज गेंदबाजों को कोई मदद नहीं मिल रही थी, वहीं स्पिनर्स भी बेअसर साबित हो रहे थे।
कर्नाटक के कप्तान मयंक अग्रवाल ने आखिरी दिन लड़ने का वादा किया था, लेकिन टीम ने काफी पहले ही हार मान ली। एक समय ऐसा आया कि कर्नाटक ने केएल राहुल से भी गेंदबाजी करवाई, जिन्होंने आखिरी बार एक दशक से भी पहले प्रथम श्रेणी क्रिकेट में गेंदबाजी की थी। यह उनकी मजबूरी को दर्शाता था। लोत्रा को मयंक ने स्लिप में 62 के निजी स्कोर पर ड्रॉप किया, लेकिन उस वक्त तक मैच का परिणाम लगभग तय हो चुका था।
शतकों का मेला और नए कीर्तिमान
जम्मू-कश्मीर की दूसरी पारी में कुमार इकबाल ने नाबाद 160 और साहिल लोत्रा ने नाबाद 101 रन बनाए। दोनों ने शतक जड़कर अपनी टीम की जीत को और भी यादगार बना दिया। इस पारी की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने 4 विकेट पर 342 रन बना लिए थे, जब मैच ड्रॉ घोषित किया गया।
इस सीजन में औकिब नबी सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बल्लेबाजों के सामने अपनी काबिलियत साबित की। फाइनल की पहली पारी में उन्होंने 54 रन देकर 5 विकेट लेकर कर्नाटक की कमर तोड़ दी थी।
जम्मू-कश्मीर का शानदार सफर
यह खिताब एक रात में नहीं मिला। पूरे सीजन में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। पारस डोगरा की कप्तानी में टीम ने घरेलू मैदान श्रीनगर में मुंबई को रोमांचक अंदाज में हराया, दिल्ली में दिल्ली को पटखनी दी। नॉकआउट में इंदौर में मध्य प्रदेश और कोलकाता में बंगाल को मात देने के बाद हुब्बल्ली में कर्नाटक को उनके ही घर में हराकर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।
पारस डोगरा के लिए यह खिताब बेहद खास है। 24 साल के करियर में तीन टीमें बदलने वाले डोगरा ने 10,000 से अधिक रन बनाने के बाद पहली बार रणजी ट्रॉफी अपने नाम की।
‘जानें पूरा मामला’
रणजी ट्रॉफी भारत की प्रमुख घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता है। 1934 में शुरू हुई इस ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर ने पहली बार भाग लिया था और 91 सीजन के बाद पहली बार खिताब जीता है। इससे पहले टीम कभी फाइनल में भी नहीं पहुंची थी। कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 584 रन बनाए, जवाब में कर्नाटक की पहली पारी 293 रन पर सिमट गई। यह 291 रन की बढ़त ही फाइनल जीतने के लिए काफी थी।
‘इस जीत का मतलब’
यह जीत जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए एक मिसाल है। यह साबित करता है कि अगर हौसला बुलंद हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं। यह ट्रॉफी न केवल टीम के ड्रेसिंग रूम में रखी जाएगी, बल्कि यह उन लाखों लोगों के दिलों में भी बसेगी जो क्रिकेट को धर्म की तरह मानते हैं। जम्मू-कश्मीर के लिए यह सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक है।
मुख्य बातें (Key Points)
जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक को फाइनल में हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी जीती।
पहली पारी में 584 रन बनाने के बाद कर्नाटक की पारी 293 रन पर सिमट गई, जिससे J&K ने 291 रन की बढ़त हासिल की।
दूसरी पारी में कुमार इकबाल (160) और साहिल लोत्रा (101) ने शतक जड़े।
औकिब नबी ने फाइनल की पहली पारी में 54 रन देकर 5 विकेट लिए और पूरे सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे।
पारस डोगरा की कप्तानी में टीम ने मुंबई, दिल्ली, मध्य प्रदेश और बंगाल जैसे दिग्गजों को हराकर यह खिताब जीता।








