Sukhbir Badal defamation case: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल आज (शुक्रवार, 27 फरवरी) को 8 साल पुराने मानहानि मामले में चंडीगढ़ जिला कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनके वकील ने अदालत में एक अर्जी दाखिल कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देने का अनुरोध किया। अर्जी में कहा गया कि सुखबीर बादल शिरोमणि अकाली दल के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ एक जरूरी बैठक के सिलसिले में दिल्ली गए हुए हैं, जो सुबह 11:30 बजे निर्धारित थी, इसलिए वे अदालत में उपस्थित नहीं हो सके।
सुखबीर बादल के वकील राजेश राय ने यह अर्जी दाखिल करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि उनकी अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं है और अगली तारीख पर वे स्वयं अदालत में पेश होंगे। यह मामला वर्ष 2017 से लंबित है और इसे लेकर पिछले कुछ महीनों में कानूनी प्रक्रिया तेज हुई है।
क्या है 8 साल पुराना मानहानि मामला?
यह मानहानि का मामला 4 जनवरी 2017 को दिए गए एक बयान से जुड़ा है। दरअसल, उस समय दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मोहाली निवासी राजिंदर पाल सिंह के आवास पर गए थे। इसके बाद सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया में एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने ‘अखंड कीर्तनी जत्था’ को प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का राजनीतिक फ्रंट बताया था।
इस बयान से नाराज होकर अखंड कीर्तनी जत्था के प्रवक्ता और मोहाली निवासी राजिंदर पाल सिंह ने चंडीगढ़ जिला कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) के तहत दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि सुखबीर बादल के इस बयान से उनके संगठन की छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
पहले भी पेशी से बचने के लिए दे चुके हैं अर्जी
सुखबीर बादल के लिए यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने पार्टी बैठक का हवाला देकर अदालत में पेशी से छूट मांगी हो। इससे पहले 2 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान भी उनके वकील ने व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए अर्जी दाखिल की थी। उस समय अमृतसर में आयोजित पार्टी की एक अहम बैठक का हवाला दिया गया था।
उस अर्जी में कहा गया था कि 2 फरवरी को शिरोमणि अकाली दल की बैठक अमृतसर में बुलाई गई है, जिसमें कई गांवों, शहरों और राज्यों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचने वाले हैं। बैठक में सुखबीर बादल की मौजूदगी जरूरी बताई गई थी। अर्जी में यह भी कहा गया था कि अगर वह बैठक में शामिल नहीं होते, तो दूर-दराज से आए लोगों को बिना किसी नतीजे के लौटना पड़ेगा।
पेश न होने पर जारी हुए थे गैर-जमानती वारंट
इस मामले में सुखबीर बादल को पहले भी अदालत की सख्ती का सामना करना पड़ा है। 17 दिसंबर 2025 को वह अदालत के आदेश के बावजूद पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल गर्ग की अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कर दिए थे। हालांकि, सख्त कार्रवाई की आशंका के चलते वह बाद में अदालत में पेश हुए, जहां उन्हें जमानत मिल गई थी।
सुखबीर बादल ने इस मामले को रद्द कराने के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद यह मामला चंडीगढ़ जिला कोर्ट में ही लंबित है।
‘जानें पूरा मामला’
यह मामला 2017 में उस समय सुर्खियों में आया जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अखंड कीर्तनी जत्था के प्रवक्ता राजिंदर पाल सिंह के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। यह वह दौर था जब केजरीवाल पंजाब विधानसभा चुनावों में सक्रिय थे। सुखबीर बादल ने इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए अखंड कीर्तनी जत्था पर गंभीर आरोप लगा दिए थे। संगठन ने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश करार देते हुए मानहानि का केस दर्ज कराया। तब से यह मामला अदालत में लंबित है और समय-समय पर सुनवाई होती रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल 8 साल पुराने मानहानि मामले में आज चंडीगढ़ कोर्ट में पेश नहीं हुए।
उनके वकील ने दिल्ली में पार्टी की अहम बैठक का हवाला देते हुए पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की।
यह मामला 2017 में अखंड कीर्तनी जत्था को बब्बर खालसा का राजनीतिक फ्रंट बताने वाले बयान से जुड़ा है।
17 दिसंबर 2025 को पेश न होने पर सुखबीर बादल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुए थे, बाद में जमानत मिली।
इससे पहले 2 फरवरी को भी उन्होंने अमृतसर में पार्टी बैठक का हवाला देकर पेशी से छूट मांगी थी।








