Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) 3 मार्च को लगने जा रहा है और यह इसलिए खास है क्योंकि यह फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली के दिन पड़ रहा है। फरवरी में लगा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया था, जिससे उससे जुड़े धार्मिक नियम लागू नहीं हुए थे। लेकिन अब आने वाला यह Chandra Grahan 2026 भारत में साफ देखा जा सकेगा, जिसके चलते सूतक काल (Sutak Kaal) के नियम भी मान्य होंगे। रंगों के त्योहार होली के ठीक पहले यह खगोलीय घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
पंचांग के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि करीब 3 घंटे 27 मिनट की होगी। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा, यानी पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस तरह आ जाएगी कि पृथ्वी की छाया चंद्रमा को पूरी तरह ढक लेगी। इस दौरान चंद्रमा का प्रकाश मंद पड़ जाता है और उसका रंग तांबे या लाल जैसा दिखाई देता है, जिसे अक्सर ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) भी कहा जाता है।
कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?
Chandra Grahan 2026 एशिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। भारत के अलावा यह ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी देखा जा सकेगा। भारत में यह पूरी तरह से दृश्यमान होगा, जिससे देशभर के लोग इस अद्भुत खगोलीय नजारे को देख सकेंगे। खास बात यह है कि यह होली के दिन पड़ रहा है, ऐसे में एक तरफ रंगों का उत्सव होगा, तो दूसरी तरफ ग्रहण का वैज्ञानिक और धार्मिक प्रभाव भी रहेगा।
सूतक काल का समय और नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल (Sutak Kaal) शुरू हो जाता है। इस हिसाब से 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रभावी हो जाएगा, जो ग्रहण समाप्त होने तक रहेगा। सूतक काल के दौरान धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है:
इस दौरान पूजा-पाठ और मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं।
भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता और कोई नया या शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है।
भोजन बनाने और खाने की मनाही होती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। उन्हें घर के अंदर रहने, नुकीली चीजों का उपयोग न करने और शांत माहौल में रहने की बात कही जाती है।
होली पर क्या होगा असर?
होली का त्योहार 4 मार्च को मनाया जाएगा, लेकिन Chandra Grahan 2026 3 मार्च को है। ऐसे में होलिका दहन (Holika Dahan) की रात यानी 3 मार्च की शाम को ग्रहण का प्रभाव रहेगा। आमतौर पर होलिका दहन ग्रहण के बाद ही किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण समाप्त होने के बाद ही सभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इसलिए होलिका दहन का समय शाम 6:47 के बाद का हो सकता है, जब ग्रहण खत्म हो जाएगा। हालांकि, स्थानीय पंचांग और परंपराओं के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है। यह तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है और इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह खगोलीय घटना अध्ययन का एक अवसर होती है। हालांकि, आस्था के स्तर पर इससे जुड़ी परंपराओं का पालन बड़ी संख्या में लोग आज भी करते हैं।
‘क्या है पूरा मामला’
होली का त्योहार पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और इस बार पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह एक संयोग है जो अक्सर देखने को नहीं मिलता। ऐसे में धार्मिक नियमों का पालन करने वाले लोगों के लिए समय की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि वे अपनी दिनचर्या उसी हिसाब से तय कर सकें। एक तरफ रंगों का उत्सव होगा, तो दूसरी तरफ ग्रहण का प्रभाव। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना होगा कि ग्रहण के नियमों का पालन हो सके और त्योहार भी सही तरीके से मनाया जा सके।
मुख्य बातें (Key Points)
साल 2026 का पहला Chandra Grahan 2026 3 मार्च को होली (फाल्गुन पूर्णिमा) के दिन लगेगा।
यह पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिससे सूतक काल मान्य होगा।
ग्रहण दोपहर 3:20 से शाम 6:47 बजे तक रहेगा, कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट।
सूतक काल सुबह 6:20 से शुरू होगा, जिसमें पूजा-पाठ और भोजन वर्जित रहेगा।
होलिका दहन ग्रहण समाप्ति (शाम 6:47) के बाद किए जाने की संभावना है।








